Thursday, January 21, 2010

ArdhSatya

चक्रव्यूह मैं घुसने से पहले,
कौन था मैं और कैसा था,
यह मुझे याद ही न रहेगा.
चक्रव्यूह मैं घुसने के बाद,
मेरे और चक्रव्यूह के बीच,
सिर्फ एक जानलेवा निकट’ता थी,
इसका मुझे पता ही न चलेगा.
चक्रव्यूह से निकलने के बाद,
मैं मुक्त हूँ जाऊं भले ही,
फिर भी चक्रव्यूह की रचना मैं
फर्क ही न पड़ेगा.
मरुँ या मारून,
मारा जाऊं या जान से मार्डून.
इसका फैसला कभी न हूँ पायेगा.
सोया हुआ आदमी जब
नींद से उठकर चलना शुरू करता है,
तब सपनों का संसार उसे,
दोबारा दिख ही न पायेगा.
उस रौशनी मैं जो निर्णय की रौशनी है
सब कुछ स’मान होगा क्या?
एक पलड़े मैं नपुंसकता,
एक पलड़े मैं पौरुष,
और ठीक तराजू के कांटे पर
अर्ध सत्य।


Ardh Satya (Half Truth) is a 1983 film directed by Govind Nihalani. The English Translation of poem can be found on wikipedia.

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