Saturday, February 12, 2011

कुछ न किसी से बोलेंगे

कुछ न किसी से बोलेंगे
तन्हाई में रो लेंगे

हम बेरहबरों का क्या
साथ किसी के हो लेंगे

ख़ुद तो हुए रुसवा लेकिन
तेरे भेद न खोलेंगे

जीवन ज़हर भरा साग़र
कब तक अमृत घोलेंगे

नींद तो क्या आयेगी "फ़राज़"
मौत आई तो सो लेंगे

---अहमद फ़राज़

2 comments:

नीरज बसलियाल said...

मौत आई तो सो लेंगे

वाह ,बहुत खूब

Yayaver said...

faraz sahab ki taarif kariye.. ab to bas unke mureed hain..

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