कॉलेज के रोमांस में ऐसा होता था/
डेस्क के पीछे बैठे-बैठे/
चुपके से दो हाथ सरकते
धीरे-धीरे पास आते...
और फिर एक अचानक पूरा हाथ पकड़ लेता था,
मुट्ठी में भर लेता था।
सूरज ने यों ही पकड़ा है चाँद का हाथ फ़लक में आज।।
---गुलज़ार...
About Me
- Himanshu Rai
- दो लम्हे का जीवन है, एक क्षण उन्माद का, एक क्षण आह्लाद का, बस इतना ही जियूँगा!
Friday, March 16, 2012
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