Wednesday, September 2, 2015

सितारों से आगे जहाँ और भी हैं

सितारों के आगे जहाँ और भी हैं
अभी इश्क़[1] के इम्तिहाँ[2] और भी हैं

तही ज़िन्दगी से नहीं ये फ़ज़ायें
यहाँ सैकड़ों कारवाँ और भी हैं

क़ना'अत[3]न कर आलम-ए-रंग-ओ-बू[4]पर
चमन और भी, आशियाँ[5]और भी हैं

अगर खो गया एक नशेमन तो क्या ग़म
मक़ामात-ए-आह-ओ-फ़ुग़ाँ[6]और भी हैं

तू शाहीं[7]है परवाज़[8]है काम तेरा
तेरे सामने आसमाँ और भी हैं

इसी रोज़-ओ-शब [9]में उलझ कर न रह जा
के तेरे ज़मीन-ओ-मकाँ [10]और भी हैं

गए दिन के तन्हा था मैं अंजुमन [11]में
यहाँ अब मेरे राज़दाँ [12]और भी हैं

--- अल्लामा इक़बाल

शब्दार्थ:
1 ↑ प्रेम
2 ↑ परीक्षाएँ
3 ↑ संतोष
4 ↑ इन्द्रीय संसार
5 ↑ घरौंदे
6 ↑ रोने-धोने की जगहें
7 ↑ गरुड़ , उक़ाब
8 ↑ उड़ान भरना
9 ↑ सुबह -शाम के चक्कर
10 ↑ धरती और मकान
11 ↑ महफ़िल
12 ↑ रहस्य जानने वाले

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