2. ख़मोशी से मुसीबत और भी संगीन होती है, तड़प ऐ दिल तड़पने से ज़रा तस्कीन होती है - -शाद अज़ीमाबादी
3. जिसको ख़बर नहीं, उसे जोशो-ख़रोश है, जो पा गया है राज़, वो गुम है ख़मोश है - पंडित ब्रजमोहन दत्तात्रेय 'कैफ़ी'
4. इश्क़ नाज़ुक मिज़ाज है बेहद, अक़्ल का बोझ उठा नहीं सकता - अकबर इलाहाबादी
5. 'हफ़ीज़' अपनी बोली मोहब्बत की बोलीन उर्दू, न हिंदी, न हिन्दोस्तानी - हफ़ीज़ जालंधरी
6. क़रार दिल को सदा जिसके नाम से आया, वो आया भी तो किसी और काम से आया - जमाल एहसानी
7 हयात ले के चलो, कायनात ले के चलो, चलो तो सारे ज़माने को साथ ले के चलो - मख़दूम मोहिउद्दीन
8. सब मिरे चाहने वाले हैं मिरा कोई नहीं, मैं भी इस मुल्क में उर्दू की तरह रहता हूँ - हसन काज़मी
9. हम ऐसे ख़ुदपरस्त हैं कि खुदा को भी न मानें, और फिर भी उम्मीद रखते हैं कि लोग हमें खुदा माने। -अकबर इलाहाबादी
10. वहाँ जलेगा दिया कब तक आदमियत का, खुद आदमी हो जहाँ सर फिरि हवा की तरह - महशर बदायूनी
11. ज़िंदगी ज़िंदा-दिली को जान ऐ रोशन, वरना कितने ही यहाँ रोज़ फ़ना होते हैं। - ठाकुर रोशन सिंह
12. बहाने और भी होते जो ज़िंदगी के लिए, हम एक बार तेरी आरज़ू भी खो देते - ~ मजरूह सुल्तानपुरी
13. छत पे कमरा है मेरा कमरा भी कोने वाला, काम आसानी से हो जाता है रोने वाला - उमैर नजमी
14. लखनऊ तेरी गलियों में अभी भी महकती है वो शायरी, हर मोड़ पे बसता है एक पुराना इश्क़ का सिलसिला। - जोश मलीहाबादी
15. ज़बाँ हमारी न समझा यहाँ कोई मजरूह, हम अजनबी की तरह अपने ही वतन में रहे - - मजरूह सुल्तानपुरी
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