Jan 30, 2026

What I know of the sea

What I know of the sea is so little
yet all I want to do is swim!
Without leaning too long on reality
I'd like to view all my memories
one by one; leisurely.

I'd like to go, for example, to your dream world
where you open the window and walk 
where you rise and weave
your fingers into unkempt hair.

Rains wander your face, the gentleness of dew is in your voice.
Let each and every spring be yours!
May all mountains tire and arrive here!
Here at the place where stars have spilled you
where waters flow; the place where you say
Curl up on my lap and let birds take flight
In the place where we collected questions
such as 'what was before words?'

What I know of love is so little!
Yet I'm constantly thinking of you!

- İlhan Sami Çomak
Translated by Caroline Stockford

Jan 27, 2026

कबीरदास के दोहे: सरल हिंदी में अर्थ


1. दुर्बल को न सताइए, जाकी मोटी हाय।
मरी खाल की साँस से, लोहा भस्म हो जाय॥

भावार्थ: कमजोर पर अत्याचार करने से स्वयं का नुकसान होता है।

2. मधुर वचन है औषधि, कटुक वचन है तीर।
मधुर वचन जो बोलिए, कटुक वचन मत तीर॥

भावार्थ: मीठा बोल इंसान और समाज को लाभ पहुंचाता है, कटु शब्द हानि पहुँचाते हैं।

3. बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलया कोय।
जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय॥

भावार्थ: दूसरों की गलतियाँ देखने से बेहतर है खुद की आत्मा का निरीक्षण।

4. साधु ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय।
सार-सार को गहि रहे, थोथा देई उड़ाय॥

भावार्थ: सच्चा साधु वही है जो सार को अपनाए और व्यर्थ को छोड़ दे।

5. धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय।
माली सींचे सौ घड़ा, ऋतु आए फल होय॥

भावार्थ: सब कुछ समय और प्रयास के साथ होता है; धैर्य आवश्यक है।

6. कबिरा मन निर्मल भया , जैसे गंगा नीर।
पीछे-पीछे हरि फिरै , कहत कबीर कबीर

भावार्थ: शुद्ध मन वाला व्यक्ति सच्चे भक्ति मार्ग पर चलता है।

7. पीर मरे, पैगम्बर मरि हैं, मरि हैं ज़िन्दा जोगी,
राजा मरि हैं, परजा मरि हैं, मरि हैं बैद और रोगी।
साधो ये मुरदों का गाँव !

भावार्थ: सभी जीवन अंतहीन हैं; मौत सभी को समान रूप से लेती है।

8. बिरहा बुरहा जिनि कहौ, बिरहा है सुलतान।
जा घट बिरह न संचरै, सो घट सदा मसान॥

भावार्थ: विरह का अनुभव ही जीवन में सच्ची चेतना देता है; जो विरह न जानता वह शून्य है।

9. राम बुलावा भेजिया, दिया कबीरा रोय।
जो सुख साधू संग में, सो बैकुंठ न होय॥

भावार्थ: भक्ति और संतों के साथ सुख ही वास्तविक स्वर्ग है।

10. मन मैला तन ऊजरा, बगुला कपटी अंग
तासों तो कौआ भला, तन मन एकही रंग

भावार्थ: यदि मन और तन अस्वच्छ हैं, बाहरी रूप का कोई लाभ नहीं।

11. नहाय, धोए क्या हुआ, जो मन मैल ना जाये;
मीन सदा जल में रहे, धोए बास ना जाये।

भावार्थ: बाहरी शुद्धि से कुछ नहीं होता, जब तक मन शुद्ध न हो।

12. जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिए ज्ञान।
मोल करो तरवार का, पड़ा रहन दो म्यान॥

भावार्थ: व्यक्ति की जाति नहीं, ज्ञान और कर्म महत्वपूर्ण हैं।

13. पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय;
ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय॥

भावार्थ: वास्तविक ज्ञान और पंडित वही है जो प्रेम को समझे।

14. बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर;
पंछी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर॥

भावार्थ: ऊँचाई या पद से कुछ नहीं, यदि दूसरों के लिए उपयोगी न हो।

15. चलती चक्की देख कर, दिया कबीरा रोए;
दो पाटन के बीच में, सबूत बचा न कोए॥

भावार्थ: संसार की नश्वरता देखकर दुख होना स्वाभाविक है।

16. क़ल करे सो आज कर, आज करे सो अब;
पल में प्रलय भएगी, बहुरि करेगा कब॥

भावार्थ: समय की कीमत समझो, काम को टालना खतरे में डालता है।

17. माटी कहे कुम्हार से, तू क्या रौंदे मोहे;
एक दिन ऐसा आएगा, मैं रौंंदूँ तोहे॥

भावार्थ: जो कुछ हम दूसरों पर थोपते हैं, वही हमें भविष्य में भुगतना पड़ता है।

18. गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूं पाय;
बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय॥

भावार्थ: गुरु के बिना ईश्वर का ज्ञान नहीं; गुरु ही मार्ग दिखाते हैं।

19. कंकर‑पत्थर जोड़ि के, मस्जिद लई बनाय।
ता चढ़ि मुल्ला बांग दे, क्या बहरा हुआ खुदाय॥

भावार्थ: ईश्वर भवनों में नहीं, बल्कि मनुष्य के मन में वास करता है।

20. माला फेरत जुग भया, गया न मन का फेर।
कर का मनका डार दे, मन का मनका फेर॥

भावार्थ: केवल कर्मकांड से नहीं, मन की शुद्धि से भक्ति सिद्ध होती है।

21. साईं इतना दीजिए, जामे कुटुंब समाय;
मैं भी भूखा न रहूँ, साधु भी भूखा न जाय॥

भावार्थ: भगवान से साधारण जीवन और संतुलित संसाधन की प्रार्थना।

22. कबीर मनहिं गयन्द है, अंकुश दै दै राखु ।
विष की बेली परिहारो, अमृत का फल चाखु ।।

भावार्थ: मन मस्ताना हाथी है, इसे ज्ञान का अंकुश देकर अपने वश में रखो और विषय - विष - लता को त्यागकर स्वरूप - ज्ञानामृत का शान्ति फल चखो।

23. मन के मते न चलिये, मन के मते अनेक।
जो मन पर असवार है, सो साधु कोई एक।।

भावार्थ: मन के मत में न चलो, क्योंकि मन के अनेको मत हैं। जो मन को सदैव अपने अधीन रखता है, वह साधु कोई विरला ही होता है।

24. जो सुख में सुमिरन करें, दुख काहे को होय। 
कबीर दुखिया काहे रे, राम बिछोड़ा होय॥

भावार्थ: जो सुख में भी ईश्वर का स्मरण करते हैं, उन्हें दुख क्यों होगा? कबीर कहते हैं कि दुख इसलिए होता है क्योंकि हम राम (ईश्वर) को भूल जाते हैं। 

25. मोंको कहाँ ढूँढे बंदे, मैं तो तेरे पास में।
 ना मैं देवल ना मैं मस्जिद, ना काबे कैलास में॥

भावार्थ: हे बंदे, मुझे कहाँ ढूंढते हो? मैं तो तुम्हारे पास ही हूँ। न मैं मंदिर में हूँ, न मस्जिद में, न काबा में और न कैलाश में। 

26. कबीरा खड़ा बजार में, मांगे सबकी खैर।
ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर।।

भावार्थ:  कबीरदास बाजार (संसार) में खड़े होकर सभी का कल्याण चाहते हैं। न किसी से गहरी दोस्ती, न किसी से दुश्मनी— सभी के प्रति समान भाव रखना चाहिए।

Jan 24, 2026

Part of the sorrows and suffering of Kurdish girls (1941)

The sorrow and suffering of Kurdish girls
cannot be told in a hundred stories

From the ranks of humanity, they have been driven away
lower than animals, weak and incurable

Until the age of fifteen, just like a servant 
They are forced to toil on the plains and the outdoors

Then when it is time for the demands of marriage
Quickly she is betrothed according to the terms of Sharia

Either she is conquered in exchange for much property 
Or she is captured, exchanged, woman for woman

she is given away to a filthy or old man
without opportunity, she is forced and hastily given away

her nineteenth century is pitiful 
Though in Sharia law she is said to be free

Those who so disobey 
in heart's sorrow they become mad and filled with fury

As long as they are girls, they are flawless and blameless
When married, they become subhuman

For every girl who suffers wrongdoing 
Let the responsibility lie with father and brother

Whoever marries her, again
persecutes her until the day of judgement

Mufti Penjweni

Jan 21, 2026

वो मिट्टी के बेटे - (Mitti Ke Bete Lyrics in Hindi) - INS Vikrant


क्या मन मौजी बेफ़िक्रे थे..ए..

क्या मन मौजी बेफ़िक्रे थे

मौत पे अपने हँसते थे

दिल में वतन को रखने वाले

सर पे कफ़न भी रखते थे


हम जो तिरंगा लहराएँगे

हिचकी बनके याद आएँगे


वो मिट्टी के बेटे, जो वापस ना लौटे

जो वापस ना लौटे, वो मिट्टी के बेटे


वो माँ के अलबेले, जो वापस ना लौटे

जो वापस ना लौटे, वो मिट्टी के बेटे

इस मिट्टी के बेटे


ओ..ओ..ओ..ओ. वो मिट्टी के बेटे

ओ..ओ..ओ..ओ. वो मिट्टी के बेटे

इस मिट्टी के बेटे


जिसके लिए सरदार हमारा

झूल गया था फंदे पर

धूल नहीं लगने दी हमने

उस बेदाग तिरंगे पर

उस बेदाग तिरंगे पर..

उस बेदाग तिरंगे पर


तेरा दर्द तू जाने बाबा

तेरा दर्द तू जाने बाबा

मैं तो खुशी से पागल हूँ

जिसकी गोदी में खेला मैं

चला उसी के कंधे पर


लाडले जब सरहद जाएँगे

हिचकी बनके याद आएँगे

वो मिट्टी के बेटे, जो वापस ना लौटे

जो वापस ना लौटे, वो मिट्टी के बेटे

वो माँ के अलबेले, जो वापस ना लौटे

जो वापस ना लौटे, वो मिट्टी के बेटे

इस मिट्टी के बेटे


ओ छलिये कहाँ पता था?

तू यारों को छल जाएगा

जो चढ़ता सूरज था अपना

वो ऐसे ढल जाएगा,

वो ऐसे ढल जाएगा

वो ऐसे ढल जाएगा


तेरे बिन सरहद से हम भी

तेरे बिन सरहद से हम भी

आधे-अधूरे लौटेंगे

तेरी चिता में धीरे से

कुछ अपना भी जल जाएगा


यार गले जब लग जाएँगे

हिचकी बनके याद आएँगे

वो मिट्टी के बेटे, जो वापस ना लौटे

जो वापस ना लौटे, वो मिट्टी के बेटे

वो माँ के अलबेले, जो वापस ना लौटे

जो वापस ना लौटे, वो मिट्टी के बेटे


इस मिट्टी के बेटे

कुछ दर्द कभी सोते ही नहीं

वनवास ख़तम होते ही नहीं

चौखट पे दीये जलते ही रहे

कुछ राम कभी लौटे ही नहीं

कुछ राम कभी लौटे ही नहीं

कुछ राम कभी लौटे ही नहीं


मेरे नाम का प्याला भर के, हो..ओ..

मेरे नाम का प्याला भर के

बरसातों में पी लेना

बाबा मैं तो रहा नहीं

तू मेरी जवानी जी लेना


हम जब जन गण मन गाएँगे

हिचकी बनके याद आएँगे

वो मिट्टी के बेटे, जो वापस ना लौटे

जो वापस ना लौटे, वो मिट्टी के बेटे

वो माँ के अलबेले, जो वापस ना लौटे

जो वापस ना लौटे, वो मिट्टी के बेटे

इस मिट्टी के बेटे


ओ..ओ..ओ..ओ. वो मिट्टी के बेटे

ओ..ओ..ओ..ओ. वो मिट्टी के बेटे

इस मिट्टी के बेटे...!

--- मनोज मुन्तशिर

गीत का संदर्भ : "वो मिट्टी के बेटे" एक देशभक्ति गीत की पंक्ति है जो हाल ही में रिलीज़ हुई फिल्म बॉर्डर 2 से ली गई है। यह उन शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि है जो मातृभूमि की रक्षा में लौटकर नहीं आए।यह गीत सोनू निगम द्वारा गाया गया है, संगीत मिथून का है, और बोल मनोज मुंतशिर ने लिखे हैं। गीत सैनिकों के बलिदान, माँ के लालों की बेफिक्री और तिरंगे की रक्षा पर केंद्रित है।

Sweet memories (1974)

The happy day of Kurdish youth is still hidden by a heavy black cloud
until the face of the city´s daughter is hidden from the eyes

Your veil does not let your beautiful eyebrows be seen 
Alas for the filthy cloud, preventing a gaze at the moon

How can a people be free, when its girl is shackled
Is that not enough of slavery-girls and shackled to their

Your father has closed the door for you, but has no door himself
To close the door for you, is to close the door of hope

Scandalous, it's death, how will they tell you
"You may not go out”, where is the right to life? Woman

Remove your black veil, let your shining cheek be seen
For in this, the 20th century, this veiling is filled with shame

Other people's girls build atomic bombs, but you 
Only know the words like (barbecue tongs), (potholder) and
(breadboard).

Thanks to her education, she learnt science and art
You (knit yarn) for us, such sweet memories

She flew across the sky, travelled the world, dived under the sea
My grief, and your only chore is to sit inside

Boy is successful, learning, working, making art
But your art is knitting socks, I rejoice for you

your grandmother never saw the veil, the shawl and the shroud
Those meaningless rags are the enemy's gift

Let us have a thousand clear sea like (Ze), (Gader), (Lawen) 
Until the woman is free, for the fountain of life is muddy

Slavery is not common anymore, beloved Kurdish girl
Go to battle, wake up, now is not a time for sleeping

Smash the door, tear the veil, run to school
The cure for Kurdish pain is education, only education

It is the educated mother who sends a strong son to the fight
I said it, you must understand: (the water never reaches the sea)

Your gold earrings are of no use, hear my words
Worthy of your ears, my love, is (Hemn's) simple poem

--- Hemin Mukriani