Jun 1, 2026

Definitions

Trying to warn about Hitler’s plans for the Jews, Raphael Lemkin, linguist and jurist, invented the word genocide in 1943 describing the annihilation of the Armenians in 1915,“a systematic destruction of a population segment, or race, by a ruling government.”

Wholesale massacres by Turks

were taught them by their

ancestors, Genghis Khan

and Tamerlane.

In 1895 the word

Holocaust was used by missionary

Corwin Shattuck to label the 1895

burning of Armenians in the Urfa cathedral.

These fires leveling

churches with Armenians locked

inside, spread to schools and barns.

Then to neighbors.

Assyrians named it Seifo.

The Greeks, the burning of Smyrna.

The Arabs, Nakba for catastrophe, calamity, disaster.

The Kurds used the words The Anfal.

Africans, apartheid, gypsies, annihilation,

the Syrians, intrafada.

The Jews named the crime by the Nazis, Shoah.

Then the Balkans called it ethnic cleansing.

But the present day Turkish label

for two and a half million lost

Armenians: unavoidable wartime casualties.

--- Diana Der-Hovanessian

May 28, 2026

Samandar Serial Title Song Lyrics (समंदर सीरियल टाइटल सॉन्ग)


समंदर की हसीन लहरों
के कामिल हुक्मराँ हैं हम
समंदर की हसीन लहरों
के कामिल हुक्मराँ हैं हम
नज़र है जिनकी बाने अर्श पर वो
पासबान हैं हम

समंदर की हसीन लहरों
के कामिल हुक्मराँ हैं हम
समंदर की हसीन लहरों
के कामिल हुक्मराँ हैं हम

वतन के ज़र्रे ज़र्रे से मोहब्बत
हमको है ऐ दोस्त
वतन के ज़र्रे ज़र्रे से मोहब्बत
हमको है ऐ दोस्त

है मंज़िल जिनकी ठोकर में
वो मीलें कारवाँ हैं हम
है मंज़िल जिनकी ठोकर में
वो मीलें कारवाँ हैं हम
नज़र है जिनकी बाने अर्श पर वो
पासबान हैं हम

समंदर की हसीन लहरों
के कामिल हुक्मराँ हैं हम
समंदर की हसीन लहरों
के कामिल हुक्मराँ हैं हम

---बाय कर्नल सुल्तान सिंह मलिक

दूरदर्शन पर भारतीय नौसेना पर आधारित सीरियल बहुत दुर्लभ थे, और समंदर (१९९५–१९९६) उसके लिए सबसे प्रसिद्ध और अद्वितीय उदाहरण है। यह २५ एपिसोड वाला हिंदी सीरियल १९९५ से १९९६ तक दूरदर्शन (DD Metro) पर प्रसारित हुआ था, जो भारतीय नौसेना के अधिकारियों के जीवन, उनकी समर्पण भावना, युद्ध में संघर्ष और साथियों के साथ मिलजुलकर रहने की भावना को दर्शाता था। इसका निर्माण सेवानिवृत्त विंग कमांडर अनुप सिंह बेदी वीएसएम ने किया था, जिनकी मदद सेना के सेवानिवृत्त कर्नल (डॉ.) सुल्तान सिंह मलिक (जिन्हें संगीतकार/गायक के रूप में भी जाना जाता है) ने की थी। सीरियल में समीर सोनी, अमन वर्मा, वीनाता मलिक, और गिरिश मलिक जैसे प्रसिद्ध अभिनेताओं ने मुख्य भूमिकाएँ निभाई थीं, साथ ही असली भारतीय नौसेना के अधिकारियों ने भी विशेष अभिनय किया था। इसमें भारतीय नौसेना के बेड़े के वास्तविक मैन्युवर और तस्वीरें भी दिखाई गई थीं। सीरियल का गीत "समंदर की हसीन लेहरों के कामील हुकूमरान हैं हम" से शुरू होता था, जिसकी रचना और गायन कर्नल एसएस मलिक ने किया था, और यह गीत बहुत लोकप्रिय हुआ था। इस सीरियल ने १९९५-९६ में बहुत उच्च TRP प्राप्त किया और ९० के दशक के नॉस्टल्जिक सीरियल के रूप में आज भी प्रेम किया जाता है।

May 24, 2026

वाल्मीकि रामायण का प्रथम श्लोक

मां निषाद प्रतिष्ठां त्वमगमः शाश्वतीः समाः।

 यत्क्रौंचमिथुनादेकम् अवधीः काममोहितम्॥

अर्थ:  हे निषाद (वनवासी या शिकारी), तुम्हें कभी भी प्रतिष्ठा या सम्मान प्राप्त नहीं होगा, क्योंकि तुमने प्रेम-मोह में क्रौंच पक्षी के जोड़े में से एक को मार डाला है।

यह संस्कृत श्लोक वाल्मीकि रामायण के प्रथम सर्ग (बालकाण्ड, श्लोक 15) का है | यह श्लोक महर्षि वाल्मीकि के मुख से एक प्रकार का श्राप स्वरूप निकला था, जब उन्होंने प्रेमी पक्षियों के बीच खिलवाड़ किया गया देखा था। इस श्लोक को रामायण के प्रथम श्लोक के रूप में मान्यता मिली है। 

May 21, 2026

मन कस्तूरी रे (Mann Kasturi Re)


पाट ना पाया मीठा पानी

पाट ना पाया मीठा पानी

ओर-छोर की दूरी रे


मन कस्तूरी रे, जग दस्तूरी रे


मन कस्तूरी रे, जग दस्तूरी रे

बात हुई ना पूरी रे


खोजे अपनी गंध ना पावे

चादर का पैबंद ना पावे


खोजे अपनी गंध ना पावे

चादर का पैबंद ना पावे

बिखरे बिखरे छंद सा टहले

दो होवें यह बांध ना पावें


नाचे होके फिरकी लट्टू ओह


नाचे होके फिरकी लट्टू

खोजे अपनी रूड़ी रे


मन कस्तूरी रे, जग दस्तूरी रे


मन कस्तूरी रे, जग दस्तूरी रे

बात हुई ना पूरी रे


उम्र की गिनती हाथ ना आई

पुरखों ने यह बात बताई


उल्टा करके देख सके तो

अंबर भी है गहरी खाई

रेखाओं के पार नज़र को

जिसने फेंका अंधे मन से

सतरंगी बेज़ार का खोला

दरवाज़ा बिन ज़ोर जतन के हे


फिर तो झूमा पागल होके

फिर तो झूमा पागल होके

सर पे डाल फितूरी रे


मन कस्तूरी रे, जग दस्तूरी रे

बात हुई ना पूरी रे


मन कस्तूरी रे, जग दस्तूरी रे

बात हुई ना, बात हुई ना

बात हुई ना पूरी रे

मन कस्तूरी रे, जग दस्तूरी रे

- वरूण ग्रोवर 

नोट:  मसान फिल्म समीक्षा 

May 19, 2026

Lyrics Raja Shivaji Anthem 'Chhatrapati'

हे, हर-हर-हर महादेव शिवशंकर

सह्यगिरी शिखरावर आले

हे, सळ-सळ-सळ रणकंटक तलवारी

वज्रमूठ सरसावून भाले

तू तेजःपुंज झुंजार, चेतवून अंगार

भेदलास अंधार सारा

तू अर्थ रामराज्याचा, हिंदवी स्वराज्याचा

एकमेव आराध्य झाला

दुष्ट दुर्जनांसी संहारले (हे)

पातशाहीला तू ललकारले (हे)

एक नव्या पर्वाची एकजूट करण्यासी

एक छत्र छाया आधार दे

एक शस्त्र, एक अस्त्र शूरवीर छत्रपती

धैर्यशील, सत्वशील, धर्मनिष्ठ छत्रपती

लाख मराठ्यांची तू आग रे (हे-हे)

माय भवानीचा तू वाघ रे

कीर्तीवंत, पुण्यवंत, नीतीवंत छत्रपती

अद्वितीय क्षत्रियकुलावतंस छत्रपती

लाख मराठ्यांची तू आग रे

माय भवानीचा तू वाघ रे

देव, देश, धर्माची, सर्वश्रेष्ठ कर्माची

आन घेतली रक्त सांडले जरी

अंधकार शतकांचा भस्मसात करण्यासी

एक तप्त ज्वाला ही पेटली उरी

भक्ती रूप संतांचा, साधू अन महंतांचा

हात जोडूनी मान राखलास तू

जर कुणी स्वराज्यावर वाकडी नजर केली

हात-पाय चौरंगी छाटलास तू

मोडून जात-पात रयतेसी देई साथ

त्यांचा सदैव कैवारी झाला

झाले बहुत राजे, जगतात नाव गाजे

लाखात एक शिवराय माझा

हात तुझा पाठीशी, वार झेलू छातीशी

ढाल तुझी होण्याचा मान दे

एक शस्त्र, एक अस्त्र शूरवीर छत्रपती

धैर्यशील, सत्वशील, धर्मनिष्ठ छत्रपती

लाख मराठ्यांची तू आग रे (हे-हे)

माय भवानीचा तू वाघ रे

कीर्तीवंत, पुण्यवंत, नीतीवंत छत्रपती

अद्वितीय क्षत्रियकुलावतंस छत्रपती

लाख मराठ्यांची तू आग रे

माय भवानीचा तू वाघ रे

मावळ-मावळ, पाठीशी बारा मावळ

देवाला शोधाया धावून आलं राऊळ

देवा रं देवा, सारं पावन झालं रं

आरती ओवाळा माझं राजं आलं रं

तोरण बांधून साजरं हे करू औक्षण कुंकुम भाळावर

शिवबांना डोळा पाहीन अन डोळ सारं पाणावलं

साष्टांग दर्शनाचा ह्या देवपूजनाचा

हा दैवयोग भाग्यात यावा

ध्वज उंच-उंच भगवा हा, वंदनीय भगवा हा

आसमंत भगवा कराया

जन्म सार्थ करण्यासी प्रार्थना ही चरणासी

प्राण अर्पण्याचा सन्मान दे

एक शस्त्र, एक अस्त्र शूरवीर छत्रपती

धैर्यशील, सत्वशील, धर्मनिष्ठ छत्रपती

लाख मराठ्यांची तू आग रे (हे-हे)

माय भवानीचा तू वाघ रे

कीर्तीवंत, पुण्यवंत, नीतीवंत छत्रपती

अद्वितीय क्षत्रियकुलावतंस छत्रपती

लाख मराठ्यांची तू आग रे

माय भवानीचा तू वाघ रे

--- अजय-अतुल 

Hindi Translation 

हे, हर-हर-हर महादेव शिवशंकर  

सह्यगिरि की शिखर-भूमि पर आए  


हे, सुस्सलाती रणकंटक तलवारें  

वज्रमूठ कसकर भाले  


तुम तेजस्वी, पराक्रमी, अंगार-सा जोश जगाने वाले  

तुमने सारा अंधकार चीर दिया  


तुम रामराज्य के अर्थ हो, हिंदवी स्वराज्य के प्रतीक हो  

और तुम ही एकमात्र आराध्य बन गए  


दुष्टों और दुराचारियों का संहार किया  

सत्ता को ललकार दिया  


एक नए युग को एकजुट करने के लिए  

एक ही छत्र की छाया और सहारा दो  


एक ही शस्त्र, एक ही अस्त्र, वीर छत्रपति  

धैर्यवान, सत्वशील, धर्मनिष्ठ छत्रपति  


लाखों मराठों की तुम ज्वाला हो  

माँ भवानी के तुम शेर हो  


कीर्तिवान, पुण्यवान, नीतिवान छत्रपति  

अद्वितीय क्षत्रिय कुल के आभूषण छत्रपति  


लाखों मराठों की तुम ज्वाला हो  

माँ भवानी के तुम शेर हो  


देव, देश और धर्म के लिए  

सर्वश्रेष्ठ कर्म के लिए  


यदि रक्त भी बहाना पड़ा, तो भी स्वीकार किया  

अंधकार के शतकों को भस्म करने के लिए  


एक तपती ज्वाला हृदय में प्रज्वलित हुई  

भक्ति-रूप संतों, साधुओं और महंतों का  


तुमने हाथ जोड़कर सम्मान रखा  

यदि किसी ने स्वराज्य पर टेढ़ी नजर डाली  


तो तुमने उसके हाथ-पाँव काट दिए  

जात-पात तोड़कर रयत का साथ दिया  


और सदा उनका रक्षक बन गया  

बहुत से राजा हुए, जिनका नाम दुनिया में गूंजा  


मेरे शिवराय तो लाखों में एक हैं  

तुम्हारा हाथ मेरी पीठ पर रहे, मैं सीना तानकर वार सह लूँ  


तुम्हारी ढाल बनने का मुझे सम्मान दो  

एक ही शस्त्र, एक ही अस्त्र, वीर छत्रपति  


धैर्यवान, सत्वशील, धर्मनिष्ठ छत्रपति  

लाखों मराठों की तुम ज्वाला हो  


माँ भवानी के तुम शेर हो  

कीर्तिवान, पुण्यवान, नीतिवान छत्रपति  


अद्वितीय क्षत्रिय कुल के आभूषण छत्रपति  

लाखों मराठों की तुम ज्वाला हो  


माँ भवानी के तुम शेर हो  


मावळ-मावळ, पीछे बारह मावळ  

देव को खोजने दौड़कर रावल आया  


हे देव, सब कुछ पावन हो गया  

मेरे राजा आए, उनकी आरती उतारो  


तोरण बाँधकर इसे उत्सव बनाएं, 

माथे पर कुंकुम से औक्षण करें  

शिवबाओं को आँखों से देखूँ तो

सब कुछ आँसुओं से भर जाए  


इस साष्टांग दर्शन और देवपूजन का  

यह सौभाग्य मेरे भाग्य में आए  


यह ऊँचा-ऊँचा भगवा ध्वज, यह वंदनीय भगवा  

आसमाँ तक भगवा कर दे  


जन्म को सार्थक करने के लिए चरणों में प्रार्थना है  

प्राण अर्पण करने का सम्मान दो  


एक ही शस्त्र, एक ही अस्त्र, वीर छत्रपति  

धैर्यवान, सत्वशील, धर्मनिष्ठ छत्रपति  


लाखों मराठों की तुम ज्वाला हो  

माँ भवानी के तुम शेर हो  


कीर्तिवान, पुण्यवान, नीतिवान छत्रपति  

अद्वितीय क्षत्रिय कुल के आभूषण छत्रपति  


लाखों मराठों की तुम ज्वाला हो  

माँ भवानी के तुम शेर हो  

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