Trying to warn about Hitler’s plans for the Jews, Raphael Lemkin, linguist and jurist, invented the word genocide in 1943 describing the annihilation of the Armenians in 1915,“a systematic destruction of a population segment, or race, by a ruling government.”
Wholesale massacres by Turks
were taught them by their
ancestors, Genghis Khan
and Tamerlane.
In 1895 the word
Holocaust was used by missionary
Corwin Shattuck to label the 1895
burning of Armenians in the Urfa cathedral.
These fires leveling
churches with Armenians locked
inside, spread to schools and barns.
Then to neighbors.
Assyrians named it Seifo.
The Greeks, the burning of Smyrna.
The Arabs, Nakba for catastrophe, calamity, disaster.
समंदर की हसीन लहरों के कामिल हुक्मराँ हैं हम समंदर की हसीन लहरों के कामिल हुक्मराँ हैं हम
वतन के ज़र्रे ज़र्रे से मोहब्बत हमको है ऐ दोस्त वतन के ज़र्रे ज़र्रे से मोहब्बत हमको है ऐ दोस्त
है मंज़िल जिनकी ठोकर में वो मीलें कारवाँ हैं हम है मंज़िल जिनकी ठोकर में वो मीलें कारवाँ हैं हम नज़र है जिनकी बाने अर्श पर वो पासबान हैं हम
समंदर की हसीन लहरों के कामिल हुक्मराँ हैं हम समंदर की हसीन लहरों के कामिल हुक्मराँ हैं हम
---बाय कर्नल सुल्तान सिंह मलिक
दूरदर्शन पर भारतीय नौसेना पर आधारित सीरियल बहुत दुर्लभ थे, और समंदर (१९९५–१९९६) उसके लिए सबसे प्रसिद्ध और अद्वितीय उदाहरण है। यह २५ एपिसोड वाला हिंदी सीरियल १९९५ से १९९६ तक दूरदर्शन (DD Metro) पर प्रसारित हुआ था, जो भारतीय नौसेना के अधिकारियों के जीवन, उनकी समर्पण भावना, युद्ध में संघर्ष और साथियों के साथ मिलजुलकर रहने की भावना को दर्शाता था। इसका निर्माण सेवानिवृत्त विंग कमांडर अनुप सिंह बेदी वीएसएम ने किया था, जिनकी मदद सेना के सेवानिवृत्त कर्नल (डॉ.) सुल्तान सिंह मलिक (जिन्हें संगीतकार/गायक के रूप में भी जाना जाता है) ने की थी। सीरियल में समीर सोनी, अमन वर्मा, वीनाता मलिक, और गिरिश मलिक जैसे प्रसिद्ध अभिनेताओं ने मुख्य भूमिकाएँ निभाई थीं, साथ ही असली भारतीय नौसेना के अधिकारियों ने भी विशेष अभिनय किया था। इसमें भारतीय नौसेना के बेड़े के वास्तविक मैन्युवर और तस्वीरें भी दिखाई गई थीं। सीरियल का गीत "समंदर की हसीन लेहरों के कामील हुकूमरान हैं हम" से शुरू होता था, जिसकी रचना और गायन कर्नल एसएस मलिक ने किया था, और यह गीत बहुत लोकप्रिय हुआ था। इस सीरियल ने १९९५-९६ में बहुत उच्च TRP प्राप्त किया और ९० के दशक के नॉस्टल्जिक सीरियल के रूप में आज भी प्रेम किया जाता है।
अर्थ: हे निषाद (वनवासी या शिकारी), तुम्हें कभी भी प्रतिष्ठा या सम्मान प्राप्त नहीं होगा, क्योंकि तुमने प्रेम-मोह में क्रौंच पक्षी के जोड़े में से एक को मार डाला है।
यह संस्कृत श्लोक वाल्मीकि रामायण के प्रथम सर्ग (बालकाण्ड, श्लोक 15) का है | यह श्लोक महर्षि वाल्मीकि के मुख से एक प्रकार का श्राप स्वरूप निकला था, जब उन्होंने प्रेमी पक्षियों के बीच खिलवाड़ किया गया देखा था। इस श्लोक को रामायण के प्रथम श्लोक के रूप में मान्यता मिली है।