Jul 23, 2026

15 बेहतरीन शेर - 24 !!!

 1.नहीं नहीं हमें अब तेरी जुस्तुजू भी नहीं तुझे भी भूल गए हम तिरी ख़ुशी के लिए - ज़ेहरा निगाह

2.  मुस्तक़िल जूझना यादों से बहुत मुश्किल है, रफ़्ता रफ़्ता सभी घर-बार में खो जाते हैं। - .मुनव्वर राना

3. रंग ख़ुश्बू और मौसम का बहाना हो गया, अपनी ही तस्वीर में चेहरा पुराना हो गया - खालिद गनी 

4.ये दस्तूर-ए-ज़बाँ-बंदी है कैसा तेरी महफ़िल में , यहाँ तो बात करने को तरसती है ज़बाँ मेरी  - इक़बाल

5. ज़ाहिद शराब पीने दे मस्जिद में बैठ कर, या वो जगह बता दे जहाँ पर ख़ुदा न हो

6. न ख़ुदा ही मिला न विसाल-ए-सनम न इधर के हुए न उधर के हुए, रहे दिल में हमारे ये रंज-ओ-अलम न इधर के हुए न उधर के हुए

7. अगर फ़िरदौस बर-रू-ए-ज़मीं अस्त, हमीं अस्त ओ हमीं अस्त ओ हमीं अस्त

8. सलीक़े से हवाओं में जो ख़ुशबू घोल सकते हैं, अभी कुछ लोग बाक़ी हैं जो उर्दू बोल सकते हैं

9. आतिशे इश्क़ न बुझी, ज़माने ने इंतेहा लाख लिए, वो मयस्सर नहीं अभी, पर जीने को उसकी आरज़ू ही सही !

10. होश आए भी तो क्यों करें, तेरे दीवाने को, एक जाता है तो दो आते हैं समझाने को - होशियार मेरठी 

11.रफ़्ता रफ़्ता वो हमारे दिल के अरमाँ हो गए , पहले जाँ फिर जान-ए-जाँ फिर जान-ए-जानाँ हो गए  - क़मर जलालाबादी

12. तुम से सदियों की वफ़ाओ का कोई नाता था, तुम से मिलने की लकीरें थीं मेरे हाथों में - सईद राही

13.इक रात हर चराग़ की लौ काट दी गई, और वो भी चुप रहे जिन्हें प्यारी है रौशनी - नोमान शौक़

14.दूसरा मौक़ा सबको मिलता है ताबिश, पहली बाज़ी सबने हारी होती है -ज़ुबैर ताबिश

15.जो डूबना है तो इतने सुकून से डूबो, कि आस-पास की लहरों को भी पता न लगे - क़ैसर-उल जाफ़री

The Grand Quilt

I don’t believe we can stitch together
only scraps of beauty, squares of light.
I don’t believe in a quilt that doesn’t also
have patches of sorrow, blocks of ache.
Such pieces are, of course, much harder
to want to stitch in. But it matters
that we do not exclude them.
It matters right now that we don’t pretend
they do not exist.
It matters that we sew every piece
into the grand cloth.
It matters, too,
how we sew these pieces in,
perhaps using our finest silk thread,
perhaps with an elaborate stitch
our grandmother taught us,
or perhaps we must use
a stitch we make up
because no one ever taught us
how to do this most difficult task—
to meet what at first seems unwanted, wrong,
and to incorporate it into the whole
and to do this for as long as we can stitch,
that’s how long.

- Rosemerry Wahtola Trommer

Jul 19, 2026

KAMISHLI¹

Writing to you from here, my friend,
what else can I tell you about
other than pain, sadness?
I would have to paint for you
a picture of us here in this city,
have to show you the face
of who is a stranger, driven out
from his very own land,
I would have to draw a country
of frontiers – spikes and guns
between mouth and mouth
between hand and hand –
borders.

Slowly the hours meander
in the darkness of streets, lanes, markets
dragging sorrow, sadness;
hours hung on the trees and the walls,
people wounded by the stabs
of bad luck.
Here, time is a machine
and the police control it.

--- FERHAD SHAKELY

¹Kamishli is a city of Kurdistan in Syria. Because of its closeness to Iraqi Kurdistan, the politically persecuted Iraqi Kurds found refuge there.

Jul 15, 2026

उम्र जल्वों में बसर हो

 उम्र जल्वों में बसर हो ये ज़रूरी तो नहीं 

हर शब-ए-ग़म की सहर हो ये ज़रूरी तो नहीं 

चश्म-ए-साक़ी से पियो या लब-ए-साग़र से पियो 

बे-ख़ुदी आठों पहर हो ये ज़रूरी तो नहीं 

नींद तो दर्द के बिस्तर पे भी आ सकती है 

उन की आग़ोश में सर हो ये ज़रूरी तो नहीं 

शैख़ करता तो है मस्जिद में ख़ुदा को सज्दे 

उस के सज्दों में असर हो ये ज़रूरी तो नहीं 

सब की नज़रों में हो साक़ी ये ज़रूरी है मगर 

सब पे साक़ी की नज़र हो ये ज़रूरी तो नहीं 

मय-कशी के लिए ख़ामोश भरी महफ़िल में 

सिर्फ़ ख़य्याम का घर हो ये ज़रूरी तो नहीं 

- ख़ामोश ग़ाज़ीपुरी

Jul 11, 2026

"अंजानी राहों में" — मेरी जान हिन्दुस्तान एलबम से।

अंजानी राहों में तू क्या ढूँढता फिरे

दूर जिसे समझा वो तो पास है तेरे

साँस में हवा, जान में ज़मीन

दिल में खुला आसमान

प्यार है खुदा, प्यार है ख़ुशी

प्यार से है दोनों जहाँ

तेरा यह आशियाना, मेरा भी आशियाना


घूमता रहा दूर तू कहीं, उड़ते बादलों की तरह

कहीं से तुझे आई है सदा, लौट के आ अब ज़रा

तेरा यह आशियाना, मेरा भी आशियाना


वो झिलमिलाती आँखें, वो भोली सी अदा

वो धीरे-धीरे चल के लहराती हवाएँ

हमको ले जाएँ वहाँ, जहाँ हो घर अपना

मेरी यादों में पाया है

आज तो मिलने का दिन है आया, आया...

- पी. के. मिश्रा