Love, love, love, says Percy.
And hurry as fast as you can
along the shining beach, or the rubble, or the dust.
Then, go to sleep.
Give up your body heat, your beating heart.
Then, trust.
--- Mary Oliver
Lyrics of Life
Poetry is untranslatable, like the whole art.
Aug 19, 2026
Aug 15, 2026
वतन को कुछ नहीं ख़तरा निज़ाम-ए-ज़र है ख़तरे में
वतन को कुछ नहीं ख़तरा निज़ाम-ए-ज़र है ख़तरे में
हक़ीक़त में जो रहज़न है वही रहबर है ख़तरे में
जो बैठा है सफ़-ए-मातम बिछाए मर्ग-ए-ज़ुल्मत पर
वो नौहागर है ख़तरे में वो दानिश-वर है ख़तरे में
अगर तशवीश लाहक़ है तो सुलतानों को लाहक़ है
न तेरा घर है ख़तरे में न मेरा घर है ख़तरे में
जहाँ 'इक़बाल' भी नज़्र-ए-ख़त-ए-तनसीख़ हो 'जालिब'
वहाँ तुझ को शिकायत है तिरा जौहर है ख़तरे
--- हबीब जालिब
हक़ीक़त में जो रहज़न है वही रहबर है ख़तरे में
जो बैठा है सफ़-ए-मातम बिछाए मर्ग-ए-ज़ुल्मत पर
वो नौहागर है ख़तरे में वो दानिश-वर है ख़तरे में
अगर तशवीश लाहक़ है तो सुलतानों को लाहक़ है
न तेरा घर है ख़तरे में न मेरा घर है ख़तरे में
जहाँ 'इक़बाल' भी नज़्र-ए-ख़त-ए-तनसीख़ हो 'जालिब'
वहाँ तुझ को शिकायत है तिरा जौहर है ख़तरे
--- हबीब जालिब
Aug 11, 2026
समय ने जब भी अंधेरो से दोस्ती की है
समय ने जब भी अंधेरो से दोस्ती की है
जला के अपना ही घर हमने रोशनी की है
सबूत है मेरे घर में धुएं के ये धब्बे
कभी यहाँ पे उजालों ने ख़ुदकुशी की है
ना लड़खडायाँ कभी और कभी ना बहका हूँ
मुझे पिलाने में फिर तुमने क्यूँ कमी की है
कभी भी वक़्त ने उनको नहीं मुआफ़ किया
जिन्होंने दुखियों के अश्कों से दिल्लगी की है
किसी के ज़ख़्म को मरहम दिया है गर तूने
समझ ले तूने ख़ुदा की ही बंदगी की है
--- गोपालदास नीरज
जला के अपना ही घर हमने रोशनी की है
सबूत है मेरे घर में धुएं के ये धब्बे
कभी यहाँ पे उजालों ने ख़ुदकुशी की है
ना लड़खडायाँ कभी और कभी ना बहका हूँ
मुझे पिलाने में फिर तुमने क्यूँ कमी की है
कभी भी वक़्त ने उनको नहीं मुआफ़ किया
जिन्होंने दुखियों के अश्कों से दिल्लगी की है
किसी के ज़ख़्म को मरहम दिया है गर तूने
समझ ले तूने ख़ुदा की ही बंदगी की है
--- गोपालदास नीरज
Aug 7, 2026
चुंबन
मैं आज शाम को बिलकुल फ़्री हूं, आओगी मिलने?
मैंने चाची से मिन्नतें की
वो जानती थीं, तुम मेरे होने वाले शौहर हो
तो मान गयीं
मैंने पर्स उठाया, ठीक-ठाक कपड़े पहने, ऑटो बुक किया और पार्क के गेट पर पहुंच गयी
तुम गेट पर ही खड़े थे...
तुम्हारे बगल में एक मूंगफली बेचने वाला दस-बारह साल का लड़का खड़ा था
जो तुमसे बार-बार मूंगफली ख़रीदने का निवेदन कर रहा था
मेरे कहने पर तुमने 10 ₹ की मूंगफली तुलवा ली
हम पार्क मैं बैठे रहे
बैठे-बैठे मूंगफली छीलते रहे
मैं मुस्कराती रही, तुम हंसते रहे
मैं क़िस्से सुनाती रही, तुम क़िस्से सुनते रहे
फिर अचानक से तुमने मुझे चूम लिया
मैं अंगुली से मिट्टी खोदने लगी...
फिर न जाने किस उम्मीद में, मैं उठकर ओट में आ गयी
फिर हम दोनों एक-दूसरे को आलिंगन में भरकर चूमने लगे
तभी एक लड़का आया
उसके चेहरे पर घृणा का भाव था —
'ये सब यहां नहीं चलेगा'
तुम सकपका गये
मैं डर गयी...
तुमने लड़के से कहा — 'सॉरी'
पांच मिनट पहले मुझे पता चला था — 'चुंबन किसे कहते हैं'
पांच मिनट बाद मुझे पता चला — 'चुंबन लेना ज़ुर्म है'
मैं मुंडी नीचे झुकाये पार्क से बाहर आ गयी...
मेरे बदन पर कपड़े थे पर यूं लगा जैसे मैं बिलकुल नंगी हूं
मेरे कानों में तुम्हारी कोई आवाज़ नहीं आयी...
महीनों तक कैसेट की तरह कानों में बस यही बजता रहा —
ये सब यहां नहीं चलेगा...
तुम फ़ोन पर फ़ोन करते रहे
मैं फ़ोन काटती रही...
तुमने मैसेज किया —
'सॉरी ! हम जल्दी शादी कर लेंगे'
फिर हमारी शादी हो गयी
हमारे हिस्से में एक बिस्तर और एक छोटा-सा कमरा आ गया
काम से थके-ऊबे हम कमरे में आते तो मैं रोशनी बुझा देती
आहिस्ता-आहिस्ता तुम्हारे होंठ मेरे होंठो की तरफ़ बढ़ते
तभी वह लड़का मेरे कानों में जोर से चीख़ता,
“ये सब यहां नहीं चलेगा!”
उस अनजान लड़के ने सिर्फ़ एक वाक्य बोलकर
उस एहसास को कुचल दिया
जिससे मैं ज़िन्दगीभर चुम्बन लेती और देती...
-नेहा नरुका
मैंने चाची से मिन्नतें की
वो जानती थीं, तुम मेरे होने वाले शौहर हो
तो मान गयीं
मैंने पर्स उठाया, ठीक-ठाक कपड़े पहने, ऑटो बुक किया और पार्क के गेट पर पहुंच गयी
तुम गेट पर ही खड़े थे...
तुम्हारे बगल में एक मूंगफली बेचने वाला दस-बारह साल का लड़का खड़ा था
जो तुमसे बार-बार मूंगफली ख़रीदने का निवेदन कर रहा था
मेरे कहने पर तुमने 10 ₹ की मूंगफली तुलवा ली
हम पार्क मैं बैठे रहे
बैठे-बैठे मूंगफली छीलते रहे
मैं मुस्कराती रही, तुम हंसते रहे
मैं क़िस्से सुनाती रही, तुम क़िस्से सुनते रहे
फिर अचानक से तुमने मुझे चूम लिया
मैं अंगुली से मिट्टी खोदने लगी...
फिर न जाने किस उम्मीद में, मैं उठकर ओट में आ गयी
फिर हम दोनों एक-दूसरे को आलिंगन में भरकर चूमने लगे
तभी एक लड़का आया
उसके चेहरे पर घृणा का भाव था —
'ये सब यहां नहीं चलेगा'
तुम सकपका गये
मैं डर गयी...
तुमने लड़के से कहा — 'सॉरी'
पांच मिनट पहले मुझे पता चला था — 'चुंबन किसे कहते हैं'
पांच मिनट बाद मुझे पता चला — 'चुंबन लेना ज़ुर्म है'
मैं मुंडी नीचे झुकाये पार्क से बाहर आ गयी...
मेरे बदन पर कपड़े थे पर यूं लगा जैसे मैं बिलकुल नंगी हूं
मेरे कानों में तुम्हारी कोई आवाज़ नहीं आयी...
महीनों तक कैसेट की तरह कानों में बस यही बजता रहा —
ये सब यहां नहीं चलेगा...
तुम फ़ोन पर फ़ोन करते रहे
मैं फ़ोन काटती रही...
तुमने मैसेज किया —
'सॉरी ! हम जल्दी शादी कर लेंगे'
फिर हमारी शादी हो गयी
हमारे हिस्से में एक बिस्तर और एक छोटा-सा कमरा आ गया
काम से थके-ऊबे हम कमरे में आते तो मैं रोशनी बुझा देती
आहिस्ता-आहिस्ता तुम्हारे होंठ मेरे होंठो की तरफ़ बढ़ते
तभी वह लड़का मेरे कानों में जोर से चीख़ता,
“ये सब यहां नहीं चलेगा!”
उस अनजान लड़के ने सिर्फ़ एक वाक्य बोलकर
उस एहसास को कुचल दिया
जिससे मैं ज़िन्दगीभर चुम्बन लेती और देती...
-नेहा नरुका
Aug 4, 2026
Gods
In the year of ’88
All the gods
Could see
The villagers’ bodies
Spitting as they burned,
But none moved.
Only to light
The cigarettes on their lips
Did they incline their heads
To those fires.
--- Sherko Bekas
translated by Alana Marie Levinson-LaBrosse & Halo Fariq
Translator’s note: On March 16, 1988, as part of Anfal, Saddam Hussein’s military campaign against the Kurds of Iraq, Halabja withstood a chemical-weapons attack. The largest directed against a civilian population in history, it has been recognized as an act of genocide by the Iraqi High Criminal Court
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