Aug 21, 2026

Urdu Shayari (Poetry) & Dialogues from Parizaad Serial

### **1. "Tum Toh Siyah Mein Bhi Jachti Ho" (University Scene)**


> **Devanagari (हिंदी):**

> जब धीमे-धीमे हँसती हो, उस बारिश जैसी लगती हो।

> थोड़ी दिल की कहती हो, ज़्यादा दिल में रखती हो।

> क्यों जाऊँ रंगरेज़ के पास, तुम तो सियाह में भी जचती हो।

> करने दो उन्हें सिंगार, तुम सादा भी सजती हो।


> **Urdu (اردو):**

> جب دھیمے دھیمے ہنستی ہو، اس بارش جیسی لگتی ہو۔

> تھوڑی دل کی کہتی ہو، زیادہ دل میں رکھتی ہو۔

> کیوں جاؤں رنگ ریز کے پاس، تم تو سیاہ میں بھی جچتی ہو۔

> کرنے دو انہیں سنگھار، تم سادہ بھی سجتی ہو۔


> **Roman Urdu:**

> *Jab dheeme dheeme hasti ho, us barish jaisi lagti ho.*

> *Thodi dil ki kehti ho, zyada dil mein rakhti ho.*

> *Kyun jaaon rangrez ke paas, tum toh siyah mein bhi jachti ho.*

> *Karne do unhein singaar, tum saada bhi sajti ho.*


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### **2. "Sitare Jo Damakte Hain"**


> **Devanagari (हिंदी):**

> सितारे जो दमकते हैं, किसी की चश्म-ए-हैरान में

> मुलाक़ातें जो होती हैं, जमाल-ए-अब्र-ओ-बारान में

> ये ना-आबाद वक़्तों में, दिल-ए-नाशाद में होगी

> मोहब्बत अब नहीं होगी, ये कुछ दिन बाद में होगी

> गुज़र जाएँगे जब ये दिन, ये उन की याद में होगी


> **Urdu (اردو):**

> ستارے جو دمکتے ہیں، کسی کی چشمِ حَیراں میں

> ملاقاتیں جو ہوتی ہیں، جمالِ ابرِ باراں میں

> یہ نا آباد وقتوں میں، دلِ ناشاد میں ہوگی

> محبت اب نہیں ہوگی، یہ کچھ دن بعد میں ہوگی

> گزر جائیں گے جب یہ دن، یہ ان کی یاد میں ہوگی


> **Roman Urdu:**

> *Sitare jo damakte hain, kisi ki chashm-e-hairaan mein*

> *Mulaqatein jo hoti hain, jamaal-e-abr-o-baaraan mein*

> *Ye na-aabaad waqton mein, dil-e-naashaad mein hogi*

> *Mohabbat ab nahi होगी, ye kuch din baad mein hogi*

> *Guzar جائیں ge jab ye din, ye un ki yaad mein hogi*


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### **3. "Qissay Meri Ulfat Ke"**


> **Devanagari (हिंदी):**

> क़िस्से मेरी उल्फ़त के जो मरक़ूम हैं सारे,

> आ देख तेरे नाम से मन्सूब हैं सारे।

> शायद ये ज़र्फ़ है जो ख़ामोश हूँ अब तक,

> वरना तो तेरे ऐब भी मालूम हैं सारे।

> सब जुर्म मेरी ज़ात से मन्सूब हुए,

> क्या मेरे सिवा इस शहर में मासूम हैं सारे?


> **Urdu (اردو):**

> قصے میری الفت کے جو مرقوم ہیں سارے

> آ دیکھ تیرے نام سے منسوب ہیں سارے

> شاید یہ ظرف ہے جو خاموش ہوں اب تک

> ورنہ تو تیرے عیب بھی معلوم ہیں سارے

> سب جرم میری ذات سے منسوب ہوئے

> کیا میرے سوا اس شہر میں معصوم ہیں سارے؟


> **Roman Urdu:**

> *Qissay meri ulfat ke jo marqoom hain saare,*

> *Aa dekh tere naam se mansoob hain saare.*

> *Shayad ye zarf hai jo khamosh hoon ab tak,*

> *Warna toh tere aib bhi maloom hain saare.*

> *Sub jurm meri zaat se mansoob hue,*

> *Kya mere siwa is shehar mein masoom hain saare?*


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### **4. "Suno! Mujhse Aur Bas Mujhse Nafrat Karna"**


> **Devanagari (हिंदी):**

> सुनो! तुम्हारी वफ़ा पे मुझको गरचे पूरा यक़ीन है,

> मगर ज़माने के वार का कुछ भरोसा नहीं है।

> सो गर कभी ऐसा हो कि तुम्हें मुझसे नफ़रत हो जाए,

> तो कभी उन बातों से नफ़रत मत करना जो हमने एक दूसरे से की थीं,

> वो बेंच जहाँ हम बैठा करते थे, वो पहली बारिश,

> वो कॉफ़ी के ख़ाली मग, वो सिनेमा का पहला टिकट और आख़िरी दो सीटें,

> सबको याद रखना... कभी उनसे नफ़रत ना करना।

> सुनो, मुझसे... और बस मुझसे नफ़रत करना,

> क्योंकि सिर्फ़ मैं और फ़क़त मैं ही तुम्हारी उस नफ़रत के क़ाबिल हूँ।


> **Roman Urdu:**

> *Suno! Tumhari wafa pe mujhko garche poora yaqeen hai,*

> *Magar zamane ke waar ka kuch bharosa nahi hai.*

> *So gar kabhi aisa ho ki tumhein mujhse nafrat ho jaaye,*

> *Toh kabhi un baaton se nafrat mat karna jo humne ek doosre se ki thi,*

> *Wo bench jahaan hum baitha karte the, wo pehli baarish,*

> *Wo coffee ke khaali mug, wo cinema ka pehla ticket aur aakhri do seatein,*

> *Sabko yaad rakhna... kabhi unse nafrat na karna.*

> *Suno, mujhse... aur bas mujhse nafrat karna,*

> *Kyunki sirf main aur faqat main hi tumhari us nafrat ke qabil hoon.*


---


### **Iconic Dialogue:**


> **Devanagari (हिंदी):**

> "शक्ल-ओ-सूरज इंसान का पहला तआरुफ़ है। इंसान का दूसरा और असल तआरुफ़ उसके अल्फ़ाज़ हैं। अपना दूसरा तआरुफ़ इतना मुकम्मल कर लो कि लोग तुम्हारा पहला तआरुफ़ भूल जाएँ।"


> **Roman Urdu:**

> *"Shakl-o-soorat insaan ka pehla taaruf hai. Insaan ka doosra aur asal taaruf uske alfaaz hain. Apna doosra taaruf itna mukammal karlo ke log tumhara pehla taaruf bhool jaayen."*

Aug 19, 2026

I Ask Percy How I Should Live My Life

Love, love, love, says Percy.
And hurry as fast as you can
along the shining beach, or the rubble, or the dust.

Then, go to sleep.
Give up your body heat, your beating heart.
Then, trust.

--- Mary Oliver

Aug 15, 2026

वतन को कुछ नहीं ख़तरा निज़ाम-ए-ज़र है ख़तरे में

वतन को कुछ नहीं ख़तरा निज़ाम-ए-ज़र है ख़तरे में
हक़ीक़त में जो रहज़न है वही रहबर है ख़तरे में

जो बैठा है सफ़-ए-मातम बिछाए मर्ग-ए-ज़ुल्मत पर
वो नौहागर है ख़तरे में वो दानिश-वर है ख़तरे में

अगर तशवीश लाहक़ है तो सुलतानों को लाहक़ है
न तेरा घर है ख़तरे में न मेरा घर है ख़तरे में

जहाँ 'इक़बाल' भी नज़्र-ए-ख़त-ए-तनसीख़ हो 'जालिब'
वहाँ तुझ को शिकायत है तिरा जौहर है ख़तरे

--- हबीब जालिब

Aug 11, 2026

समय ने जब भी अंधेरो से दोस्ती की है

समय ने जब भी अंधेरो से दोस्ती की है
जला के अपना ही घर हमने रोशनी की है

सबूत है मेरे घर में धुएं के ये धब्बे
कभी यहाँ पे उजालों ने ख़ुदकुशी की है

ना लड़खडायाँ कभी और कभी ना बहका हूँ
मुझे पिलाने में फिर तुमने क्यूँ कमी की है

कभी भी वक़्त ने उनको नहीं मुआफ़ किया
जिन्होंने दुखियों के अश्कों से दिल्लगी की है

किसी के ज़ख़्म को मरहम दिया है गर तूने
समझ ले तूने ख़ुदा की ही बंदगी की है

--- गोपालदास नीरज

Aug 7, 2026

चुंबन

मैं आज शाम को बिलकुल फ़्री हूं, आओगी मिलने?
मैंने चाची से मिन्नतें की
वो जानती थीं, तुम मेरे होने वाले शौहर हो
तो मान गयीं
मैंने पर्स उठाया, ठीक-ठाक कपड़े पहने, ऑटो बुक किया और पार्क के गेट पर पहुंच गयी
तुम गेट पर ही खड़े थे...

तुम्हारे बगल में एक मूंगफली बेचने वाला दस-बारह साल का लड़का खड़ा था
जो तुमसे बार-बार मूंगफली ख़रीदने का निवेदन कर रहा था
मेरे कहने पर तुमने 10 ₹ की मूंगफली तुलवा ली

हम पार्क मैं बैठे रहे
बैठे-बैठे मूंगफली छीलते रहे

मैं मुस्कराती रही, तुम हंसते रहे
मैं क़िस्से सुनाती रही, तुम क़िस्से सुनते रहे
फिर अचानक से तुमने मुझे चूम लिया

मैं अंगुली से मिट्टी खोदने लगी...
फिर न जाने किस उम्मीद में, मैं उठकर ओट में आ गयी
फिर हम दोनों एक-दूसरे को आलिंगन में भरकर चूमने लगे

तभी एक लड़का आया
उसके चेहरे पर घृणा का भाव था —
'ये सब यहां नहीं चलेगा'

तुम सकपका गये
मैं डर गयी...
तुमने लड़के से कहा — 'सॉरी'

पांच मिनट पहले मुझे पता चला था — 'चुंबन किसे कहते हैं'
पांच मिनट बाद मुझे पता चला — 'चुंबन लेना ज़ुर्म है'

मैं मुंडी नीचे झुकाये पार्क से बाहर आ गयी...
मेरे बदन पर कपड़े थे पर यूं लगा जैसे मैं बिलकुल नंगी हूं

मेरे कानों में तुम्हारी कोई आवाज़ नहीं आयी...
महीनों तक कैसेट की तरह कानों में बस यही बजता रहा —
ये सब यहां नहीं चलेगा...

तुम फ़ोन पर फ़ोन करते रहे
मैं फ़ोन काटती रही...

तुमने मैसेज किया —
'सॉरी ! हम जल्दी शादी कर लेंगे'
फिर हमारी शादी हो गयी

हमारे हिस्से में एक बिस्तर और एक छोटा-सा कमरा आ गया
काम से थके-ऊबे हम कमरे में आते तो मैं रोशनी बुझा देती
आहिस्ता-आहिस्ता तुम्हारे होंठ मेरे होंठो की तरफ़ बढ़ते
तभी वह लड़का मेरे कानों में जोर से चीख़ता,
“ये सब यहां नहीं चलेगा!”

उस अनजान लड़के ने सिर्फ़ एक वाक्य बोलकर
उस एहसास को कुचल दिया
जिससे मैं ज़िन्दगीभर चुम्बन लेती और देती...

-नेहा नरुका

Aug 4, 2026

Gods

In the year of ’88

All the gods

Could see

The villagers’ bodies

Spitting as they burned,

But none moved.

Only to light

The cigarettes on their lips

Did they incline their heads

To those fires.

--- Sherko Bekas

translated by Alana Marie Levinson-LaBrosse & Halo Fariq

Translator’s note: On March 16, 1988, as part of Anfal, Saddam Hussein’s military campaign against the Kurds of Iraq, Halabja withstood a chemical-weapons attack. The largest directed against a civilian population in history, it has been recognized as an act of genocide by the Iraqi High Criminal Court

Jul 30, 2026

Palestine

As Arab men fall like
grapes from a vine
under late afternoon

summer's shine women
watch their bridal beds
crumble under bombs.

Separated on earth by
different pressures they
will meet again only in
a promised paradise.

They will not be the same.
Shadows will meet shadows.
The new Jerusalem will be
of no consolation for
the one they lost.

Jul 26, 2026

वो भी क्या दिन थे

 वो भी क्या दिन थे कि जब इश्क़ लड़ा लेते थे,

प्यार की डोर को चर्ख़ी पे चढ़ा लेते थे,

नौजवानी की पतंगों को उड़ा लेते थे,

धड़क के कंकड़ियाँ संभाल लेते थे,

होंठों पे हंसी, आंखों में आस थी,

हर ग़म को हंसी में उड़ाया करते थे।

--- सागर खय्यामी

Jul 23, 2026

15 बेहतरीन शेर - 24 !!!

 1.नहीं नहीं हमें अब तेरी जुस्तुजू भी नहीं तुझे भी भूल गए हम तिरी ख़ुशी के लिए - ज़ेहरा निगाह

2.  मुस्तक़िल जूझना यादों से बहुत मुश्किल है, रफ़्ता रफ़्ता सभी घर-बार में खो जाते हैं। - .मुनव्वर राना

3. रंग ख़ुश्बू और मौसम का बहाना हो गया, अपनी ही तस्वीर में चेहरा पुराना हो गया - खालिद गनी 

4.ये दस्तूर-ए-ज़बाँ-बंदी है कैसा तेरी महफ़िल में , यहाँ तो बात करने को तरसती है ज़बाँ मेरी  - इक़बाल

5. ज़ाहिद शराब पीने दे मस्जिद में बैठ कर, या वो जगह बता दे जहाँ पर ख़ुदा न हो

6. न ख़ुदा ही मिला न विसाल-ए-सनम न इधर के हुए न उधर के हुए, रहे दिल में हमारे ये रंज-ओ-अलम न इधर के हुए न उधर के हुए

7. अगर फ़िरदौस बर-रू-ए-ज़मीं अस्त, हमीं अस्त ओ हमीं अस्त ओ हमीं अस्त

8. सलीक़े से हवाओं में जो ख़ुशबू घोल सकते हैं, अभी कुछ लोग बाक़ी हैं जो उर्दू बोल सकते हैं

9. आतिशे इश्क़ न बुझी, ज़माने ने इंतेहा लाख लिए, वो मयस्सर नहीं अभी, पर जीने को उसकी आरज़ू ही सही !

10. होश आए भी तो क्यों करें, तेरे दीवाने को, एक जाता है तो दो आते हैं समझाने को - होशियार मेरठी 

11.रफ़्ता रफ़्ता वो हमारे दिल के अरमाँ हो गए , पहले जाँ फिर जान-ए-जाँ फिर जान-ए-जानाँ हो गए  - क़मर जलालाबादी

12. तुम से सदियों की वफ़ाओ का कोई नाता था, तुम से मिलने की लकीरें थीं मेरे हाथों में - सईद राही

13.इक रात हर चराग़ की लौ काट दी गई, और वो भी चुप रहे जिन्हें प्यारी है रौशनी - नोमान शौक़

14.दूसरा मौक़ा सबको मिलता है ताबिश, पहली बाज़ी सबने हारी होती है -ज़ुबैर ताबिश

15.जो डूबना है तो इतने सुकून से डूबो, कि आस-पास की लहरों को भी पता न लगे - क़ैसर-उल जाफ़री

The Grand Quilt

I don’t believe we can stitch together
only scraps of beauty, squares of light.
I don’t believe in a quilt that doesn’t also
have patches of sorrow, blocks of ache.
Such pieces are, of course, much harder
to want to stitch in. But it matters
that we do not exclude them.
It matters right now that we don’t pretend
they do not exist.
It matters that we sew every piece
into the grand cloth.
It matters, too,
how we sew these pieces in,
perhaps using our finest silk thread,
perhaps with an elaborate stitch
our grandmother taught us,
or perhaps we must use
a stitch we make up
because no one ever taught us
how to do this most difficult task—
to meet what at first seems unwanted, wrong,
and to incorporate it into the whole
and to do this for as long as we can stitch,
that’s how long.

- Rosemerry Wahtola Trommer

Jul 19, 2026

KAMISHLI¹

Writing to you from here, my friend,
what else can I tell you about
other than pain, sadness?
I would have to paint for you
a picture of us here in this city,
have to show you the face
of who is a stranger, driven out
from his very own land,
I would have to draw a country
of frontiers – spikes and guns
between mouth and mouth
between hand and hand –
borders.

Slowly the hours meander
in the darkness of streets, lanes, markets
dragging sorrow, sadness;
hours hung on the trees and the walls,
people wounded by the stabs
of bad luck.
Here, time is a machine
and the police control it.

--- FERHAD SHAKELY

¹Kamishli is a city of Kurdistan in Syria. Because of its closeness to Iraqi Kurdistan, the politically persecuted Iraqi Kurds found refuge there.

Jul 15, 2026

उम्र जल्वों में बसर हो

 उम्र जल्वों में बसर हो ये ज़रूरी तो नहीं 

हर शब-ए-ग़म की सहर हो ये ज़रूरी तो नहीं 

चश्म-ए-साक़ी से पियो या लब-ए-साग़र से पियो 

बे-ख़ुदी आठों पहर हो ये ज़रूरी तो नहीं 

नींद तो दर्द के बिस्तर पे भी आ सकती है 

उन की आग़ोश में सर हो ये ज़रूरी तो नहीं 

शैख़ करता तो है मस्जिद में ख़ुदा को सज्दे 

उस के सज्दों में असर हो ये ज़रूरी तो नहीं 

सब की नज़रों में हो साक़ी ये ज़रूरी है मगर 

सब पे साक़ी की नज़र हो ये ज़रूरी तो नहीं 

मय-कशी के लिए ख़ामोश भरी महफ़िल में 

सिर्फ़ ख़य्याम का घर हो ये ज़रूरी तो नहीं 

- ख़ामोश ग़ाज़ीपुरी

Jul 11, 2026

"अंजानी राहों में" — मेरी जान हिन्दुस्तान एलबम से।

अंजानी राहों में तू क्या ढूँढता फिरे

दूर जिसे समझा वो तो पास है तेरे

साँस में हवा, जान में ज़मीन

दिल में खुला आसमान

प्यार है खुदा, प्यार है ख़ुशी

प्यार से है दोनों जहाँ

तेरा यह आशियाना, मेरा भी आशियाना


घूमता रहा दूर तू कहीं, उड़ते बादलों की तरह

कहीं से तुझे आई है सदा, लौट के आ अब ज़रा

तेरा यह आशियाना, मेरा भी आशियाना


वो झिलमिलाती आँखें, वो भोली सी अदा

वो धीरे-धीरे चल के लहराती हवाएँ

हमको ले जाएँ वहाँ, जहाँ हो घर अपना

मेरी यादों में पाया है

आज तो मिलने का दिन है आया, आया...

- पी. के. मिश्रा 

Jul 7, 2026

You decide

But whenever I think of myself 

you appear by my side in the form of a silence 

We swallow the light.

A rose garden, think of it, in the middle of the desert. 

You touch that place with your wound, 

The desert softens somewhat.

At that moment, right at that moment 

Like taking a copper tray, hanging it on the wall 

you think of me with fresh new eyes, love me.

 You create me anew.


Should we name this thing? You decide. 

But whenever an alarm clock goes off 

here and there in places that I cannot hear,

you become a ringing thing, 

Like a nun thinking of renewing her vows,

 you say 'Welcome' to the greatness of living.

You give form to water. 

Is this what they call surface tension? 

With a strange love you open your mouth,

might regret that some things don't work out. 

With these eyes that come from

when you first began to love me -

their depth, the burden of meaning -

With these things I say, 'Love me.


İlhan Sami Çomak
Translated by Caroline Stockford

Jul 2, 2026

क्या ज़रूरी है मोहब्बत में तमाशा होना

क्या ज़रूरी है मोहब्बत में तमाशा होना

जिससे मिलना ही नहीं उससे जुदा क्या होना

ज़िंदा होना तो नहीं हिज्र में ज़िंदा होना

हम इसे कहते हैं होने के अलावा होना

तेरा सूरज के क़बीले से त'अल्लुक़ तो नहीं

ये कहाँ से तुझे आया है सभी का होना

तू ने आने में बहुत देर लगा दी वरना

मैं नहीं चाहता था हिज्र में बूढ़ा होना

क्या तमाशा है कि सब मुझको बुरा कहते हैं

और सब चाहते हैं मेरी तरह का होना

--- अब्बास ताबिश

Jun 28, 2026

It's Also Fine

Source: Reuters

It’s also fine to die in our beds
on a clean pillow
and among our friends.
It’s fine to die, once,
our hands crossed on our chests,
empty and pale,
with no scratches, no chains, no banners,
and no petitions.
It’s fine to have a clean death,
with no holes in our shirts,
and no evidence in our ribs.
It’s fine to die
with a white pillow, not the pavement, under our cheek,
with our hands resting in those of our loved ones,
surrounded by desperate doctors and nurses,
with nothing left but a graceful farewell,
paying no attention to history,
leaving this world as it is,
hoping that, someday, someone else
will change it.

Mourid Barghouti (Translated by Radwa Ashour)
From: Midnight and Other Poems
Publisher: Arc Publications, Todmorden, Lancashire, 2009

Jun 23, 2026

Very Indian Poem in Indian English

 I am standing for peace and non-violence. 

Why world is fighting fighting 

Why all people of world 

Are not following Mahatma Gandhi, 

I am simply not understanding. 

Ancient Indian Wisdom is 100% correct. 

I should say even 200% correct. 

But modern generation is neglecting- 

Too much going for fashion and foreign thing. 

Other day I’m reading in newspaper 

(Every day I’m reading Times of India 

To improve my English language) 

How one goonda fellow 

Throw stone at Indirabehn. 

Must be student unrest fellow, I am thinking. 

Friends, Romans, countrymen, I am saying 

(to myself) 

Lend me the ears. 

Everything is coming- 

Regeneration, Remuneration, Contraception. 

Be patiently, brothers and sisters. 

You want one glass lassi? 

Very good for digestion. 

With little salt lovely drink, 

Better than wine; 

Not that I am ever tasting the wine. 

I’m the total teetotaller, completely total. 

But I say 

Wine is for the drunkards only. 

What you think of prospects of world peace? 

Pakistan behaving like this, 

China behaving like that, 

It is making me very sad, I am telling you. 

Really, most harassing me. 

All men are brothers, no? 

In India also 

Gujaraties, Maharashtrians, Hindiwallahs 

All brothers 

Though some are having funny habits. 

Still you tolerate me, 

I tolerate you, 

One day, Ram Rajya is surely coming. 

You are going? 

But you will visit again 

Any time, any day, 

I am not believing in ceremony. 

Always I am enjoying your company.

--- Nissim Ezekiel

Jun 18, 2026

15 बेहतरीन शेर - 23 !!!

1. उम्र-भर जी के भी जीने का न अन्दाज आया। जिन्दगी छोड़ दे पीछा मेरा मैं बाज आया ॥- मोहम्मद अली 'ताज'  

2.  ख़मोशी से मुसीबत और भी संगीन होती है,  तड़प ऐ दिल तड़पने से ज़रा तस्कीन होती है  - -शाद अज़ीमाबादी

3. जिसको ख़बर नहीं, उसे जोशो-ख़रोश है, जो पा गया है राज़, वो गुम है ख़मोश है  - पंडित ब्रजमोहन दत्तात्रेय 'कैफ़ी'

4.  इश्क़ नाज़ुक मिज़ाज है बेहद, अक़्ल का बोझ उठा नहीं सकता  - अकबर इलाहाबादी

5. 'हफ़ीज़' अपनी बोली मोहब्बत की बोलीन उर्दू, न हिंदी, न हिन्दोस्तानी - हफ़ीज़ जालंधरी

6. क़रार दिल को सदा जिसके नाम से आया, वो आया भी तो किसी और काम से आया - जमाल एहसानी

7 हयात ले के चलो, कायनात ले के चलो, चलो तो सारे ज़माने को साथ ले के चलो - मख़दूम मोहिउद्दीन
 
8. सब मिरे चाहने वाले हैं मिरा कोई नहीं, मैं भी इस मुल्क में उर्दू की तरह रहता हूँ  - हसन काज़मी

9. हम ऐसे ख़ुदपरस्त हैं कि खुदा को भी न मानें, और फिर भी उम्मीद रखते हैं कि लोग हमें खुदा माने। -अकबर इलाहाबादी

10. वहाँ जलेगा दिया कब तक आदमियत का, खुद आदमी हो जहाँ सर फिरि हवा की तरह - महशर बदायूनी 

11. ज़िंदगी ज़िंदा-दिली को जान ऐ रोशन, वरना कितने ही यहाँ रोज़ फ़ना होते हैं। -  ठाकुर रोशन सिंह 

12. बहाने और भी होते जो ज़िंदगी के लिए, हम एक बार तेरी आरज़ू भी खो देते  - ~ मजरूह सुल्तानपुरी

13. छत पे कमरा है मेरा कमरा भी कोने वाला, काम आसानी से हो जाता है रोने वाला - उमैर नजमी

14. लखनऊ तेरी गलियों में अभी भी महकती है वो शायरी, हर मोड़ पे बसता है एक पुराना इश्क़ का सिलसिला। - जोश मलीहाबादी 

15. ज़बाँ हमारी न समझा यहाँ कोई मजरूह, हम अजनबी की तरह अपने ही वतन में रहे - - मजरूह सुल्तानपुरी

Jun 13, 2026

Anthem for Doomed Youth

Teenage Soldiers of WW1, Source: BBC

What passing-bells for these who die as cattle?
— Only the monstrous anger of the guns.
Only the stuttering rifles' rapid rattle
Can patter out their hasty orisons.

No mockeries now for them; no prayers nor bells;
Nor any voice of mourning save the choirs,—
The shrill, demented choirs of wailing shells;
And bugles calling for them from sad shires.

What candles may be held to speed them all?
Not in the hands of boys, but in their eyes
Shall shine the holy glimmers of goodbyes.
The pallor of girls' brows shall be their pall;
Their flowers the tenderness of patient minds,
And each slow dusk a drawing-down of blinds.

--- Wilfred Owen

Jun 10, 2026

Kya Maloom (Indian Ocean Band)


तीव्र आँधी मृत्युगामी 

तीव्र आँधी मृत्युगामी

तीव्र आँधी मृत्युगामी पतालोकम चले

तीव्र आँधी मृत्युगामी पतालोकम चले

धर तिलक की छाप शिखधर तांडव को चले

बाँध घुंगरू मत मगन सुर-ताल अग्नि चढ़े

रक्त रंजित हो धरा रस रूप मंथन करे

रक्त रंजित हो धरा रस रूप मंथन करे

शम की उड़ती धूल शिव का महिमा मंडन करे

Jun 5, 2026

सुभाषितानि - 6 (Subhashitani - 6)

1. रे रे चातक! सावधानमनसा मित्र क्षणं श्रूयतां, अंभोदा बहवो हि सन्ति गगने सर्वेऽपि नैतादृशाः ।                
केचिद्वृष्टिभिरार्द्रयन्ति वसुधां गर्जन्ति केचित् वृथा, यं यं पश्यसि तस्य तस्य पुरतो मा ब्रूहि दीनं वच: ॥

हिंदी अर्थ: श्लोक में चातक पक्षी से संबोधित करते हुए कहा गया है कि वह सावधान रहे क्योंकि आसमान में कई प्रकार के बादल होते हैं। कुछ बादल जीवनदायक वर्षा करते हैं, पर कुछ केवल गर्जते हैं और कुछ भी नहीं देते। इसलिए जो भी तुम्हें मदद या सहारा देगा, उसकी खोज समझदारी से करो और किसी के सामने कमजोर वाणी से याचना न करो।

2. साहित्यसङ्गीतकलाविहीनः साक्षात्पशुः पुच्छविषाणहीनः।  
तृणं न खादन्नपि जीवमानः तद्भागधेयं परमं पशूनाम्॥

हिंदी अर्थ: जो मनुष्य साहित्य, संगीत और कला से वंचित होता है, वह बिना पूंछ और बिना सींगों वाला साक्षात् पशु के समान होता है। वह घास नहीं खाता हुआ भी जीवित रहता है, यानि यह पशुओं के लिए बड़ी सौभाग्य की बात है।
यह श्लोक भर्तृहरि के नीतिशतकम् से लिया गया है।

3. अश्वं नैव गजं नैव व्याघ्रं नैव च नैव च ।
अजापुत्रं बलिं दद्यात् देवो दुर्बलघातकः

हिंदी अर्थअश्वं (घोड़ा) नहीं, गजं (हाथी) नहीं, व्याघ्रं (बाघ) नहीं, न ही कोई और बड़ा जानवर, बलिदान (बलि) देवता केवल अजापुत्र (बकरी के बच्चे) को देते हैं। अर्थात् देव भी दुर्बलों को हानि पहुँचाते हैं। समाज में या सत्ता व्यवस्था में अकसर ताकतवरों को शक्तिशाली माना जाता है और वे सुरक्षित रहते हैं, जबकि कमजोरों को ही नुकसान और कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

4. सर्वं ज्ञेयं परं सा विद्या यया तु सुखं न विद्यते।
 यस्मिन्नपि नास्ति सुखं तस्य विद्या किं फलति॥

हिंदी अर्थ:  संपूर्ण ज्ञान वह विद्या है जिससे सुख की अनुभूति होती है। जिसके अंतःस्थ सुख की अनुभूति नहीं है, उसकी विद्या का क्या महत्त्व?

5. काक चेष्टा, बको ध्यानं, श्वान निद्रा तथैव च। अल्पहारी गृहत्यागी, विद्यार्थी पंच लक्षणम्॥

हिंदी अर्थ:  काक चेष्टा - कौवे की तरह प्रयासशील और धैर्यवान होना। 
बको ध्यानं - बगुले की तरह एकाग्र और ध्यान केंद्रित रखें।
श्वान निद्रा - कुत्ते जैसी नींद लेना अर्थात सतर्क और कम नींद लेना।
अल्पहारी - कम मात्रा में भोजन करना ताकि शरीर हल्का और सक्रिय रहे।
गृहत्यागी - घर की सुविधाओं और आराम की मोह छोड़कर, पढ़ाई पर ध्यान लगाना।

यह पांच गुण एक आदर्श विद्यार्थी के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इनमें मेहनत, एकाग्रता, सतर्कता, संयम, और त्याग शामिल हैं।

5. शनैः पन्थाः शनैः कन्था शनैः पर्वतलङ्घनम्। शनैर्विद्या शनैर्वित्तं पञ्चैतानि शनैः शनैः ॥

हिंदी अर्थ: राह धीरे धीरे कटती है, कपड़ा धीरे धीरे बुनता है, पर्वत धीरे धीरे चढा जाता है, विद्या और धन भी धीरे-धीरे प्राप्त होते हैं, ये पाँचों धीरे धीरे ही होते हैं।

6. न ही लक्ष्मी कुलक्रमज्जता, न ही भूषणों उल्लेखितोपि वा।
खड्गेन आक्रम्य भुंजीतः, वीर भोग्या वसुंधरा ।।

हिंदी अर्थ: न तो लक्ष्मी (धन-समृद्धि) जन्म से कुलीन होती है, न ही आभूषणों (भूषणों) का कोई उल्लेख ही है। खड़ग (तलवार) से आक्रमण करके ही भोगी जाती है—वीरों द्वारा ही धरती (वसुंधरा) भोग्य है।

7. गुणैरुत्तमतां याति नोच्चैरासनसंस्थितः। प्रासादशिखरस्थोऽपि काकः किं गरुडायते।।

हिंदी अर्थ: गुणों से ही उत्तमता प्राप्त होती है, ऊँचे आसन पर बैठने से नहीं। प्रासाद के शिखर पर स्थित कौआ गरुड़ थोड़े ही बन जाता है।

Jun 1, 2026

Definitions

Trying to warn about Hitler’s plans for the Jews, Raphael Lemkin, linguist and jurist, invented the word genocide in 1943 describing the annihilation of the Armenians in 1915,“a systematic destruction of a population segment, or race, by a ruling government.”

Wholesale massacres by Turks

were taught them by their

ancestors, Genghis Khan

and Tamerlane.

In 1895 the word

Holocaust was used by missionary

Corwin Shattuck to label the 1895

burning of Armenians in the Urfa cathedral.

These fires leveling

churches with Armenians locked

inside, spread to schools and barns.

Then to neighbors.

Assyrians named it Seifo.

The Greeks, the burning of Smyrna.

The Arabs, Nakba for catastrophe, calamity, disaster.

The Kurds used the words The Anfal.

Africans, apartheid, gypsies, annihilation,

the Syrians, intrafada.

The Jews named the crime by the Nazis, Shoah.

Then the Balkans called it ethnic cleansing.

But the present day Turkish label

for two and a half million lost

Armenians: unavoidable wartime casualties.

--- Diana Der-Hovanessian

May 28, 2026

Samandar Serial Title Song Lyrics (समंदर सीरियल टाइटल सॉन्ग)


समंदर की हसीन लहरों
के कामिल हुक्मराँ हैं हम
समंदर की हसीन लहरों
के कामिल हुक्मराँ हैं हम
नज़र है जिनकी बाने अर्श पर वो
पासबान हैं हम

समंदर की हसीन लहरों
के कामिल हुक्मराँ हैं हम
समंदर की हसीन लहरों
के कामिल हुक्मराँ हैं हम

वतन के ज़र्रे ज़र्रे से मोहब्बत
हमको है ऐ दोस्त
वतन के ज़र्रे ज़र्रे से मोहब्बत
हमको है ऐ दोस्त

है मंज़िल जिनकी ठोकर में
वो मीलें कारवाँ हैं हम
है मंज़िल जिनकी ठोकर में
वो मीलें कारवाँ हैं हम
नज़र है जिनकी बाने अर्श पर वो
पासबान हैं हम

समंदर की हसीन लहरों
के कामिल हुक्मराँ हैं हम
समंदर की हसीन लहरों
के कामिल हुक्मराँ हैं हम

---बाय कर्नल सुल्तान सिंह मलिक

दूरदर्शन पर भारतीय नौसेना पर आधारित सीरियल बहुत दुर्लभ थे, और समंदर (१९९५–१९९६) उसके लिए सबसे प्रसिद्ध और अद्वितीय उदाहरण है। यह २५ एपिसोड वाला हिंदी सीरियल १९९५ से १९९६ तक दूरदर्शन (DD Metro) पर प्रसारित हुआ था, जो भारतीय नौसेना के अधिकारियों के जीवन, उनकी समर्पण भावना, युद्ध में संघर्ष और साथियों के साथ मिलजुलकर रहने की भावना को दर्शाता था। इसका निर्माण सेवानिवृत्त विंग कमांडर अनुप सिंह बेदी वीएसएम ने किया था, जिनकी मदद सेना के सेवानिवृत्त कर्नल (डॉ.) सुल्तान सिंह मलिक (जिन्हें संगीतकार/गायक के रूप में भी जाना जाता है) ने की थी। सीरियल में समीर सोनी, अमन वर्मा, वीनाता मलिक, और गिरिश मलिक जैसे प्रसिद्ध अभिनेताओं ने मुख्य भूमिकाएँ निभाई थीं, साथ ही असली भारतीय नौसेना के अधिकारियों ने भी विशेष अभिनय किया था। इसमें भारतीय नौसेना के बेड़े के वास्तविक मैन्युवर और तस्वीरें भी दिखाई गई थीं। सीरियल का गीत "समंदर की हसीन लेहरों के कामील हुकूमरान हैं हम" से शुरू होता था, जिसकी रचना और गायन कर्नल एसएस मलिक ने किया था, और यह गीत बहुत लोकप्रिय हुआ था। इस सीरियल ने १९९५-९६ में बहुत उच्च TRP प्राप्त किया और ९० के दशक के नॉस्टल्जिक सीरियल के रूप में आज भी प्रेम किया जाता है।

May 24, 2026

वाल्मीकि रामायण का प्रथम श्लोक

मां निषाद प्रतिष्ठां त्वमगमः शाश्वतीः समाः।

 यत्क्रौंचमिथुनादेकम् अवधीः काममोहितम्॥

अर्थ:  हे निषाद (वनवासी या शिकारी), तुम्हें कभी भी प्रतिष्ठा या सम्मान प्राप्त नहीं होगा, क्योंकि तुमने प्रेम-मोह में क्रौंच पक्षी के जोड़े में से एक को मार डाला है।

यह संस्कृत श्लोक वाल्मीकि रामायण के प्रथम सर्ग (बालकाण्ड, श्लोक 15) का है | यह श्लोक महर्षि वाल्मीकि के मुख से एक प्रकार का श्राप स्वरूप निकला था, जब उन्होंने प्रेमी पक्षियों के बीच खिलवाड़ किया गया देखा था। इस श्लोक को रामायण के प्रथम श्लोक के रूप में मान्यता मिली है। 

May 21, 2026

मन कस्तूरी रे (Mann Kasturi Re)


पाट ना पाया मीठा पानी

पाट ना पाया मीठा पानी

ओर-छोर की दूरी रे


मन कस्तूरी रे, जग दस्तूरी रे


मन कस्तूरी रे, जग दस्तूरी रे

बात हुई ना पूरी रे


खोजे अपनी गंध ना पावे

चादर का पैबंद ना पावे


खोजे अपनी गंध ना पावे

चादर का पैबंद ना पावे

बिखरे बिखरे छंद सा टहले

दो होवें यह बांध ना पावें


नाचे होके फिरकी लट्टू ओह


नाचे होके फिरकी लट्टू

खोजे अपनी रूड़ी रे


मन कस्तूरी रे, जग दस्तूरी रे


मन कस्तूरी रे, जग दस्तूरी रे

बात हुई ना पूरी रे


उम्र की गिनती हाथ ना आई

पुरखों ने यह बात बताई


उल्टा करके देख सके तो

अंबर भी है गहरी खाई

रेखाओं के पार नज़र को

जिसने फेंका अंधे मन से

सतरंगी बेज़ार का खोला

दरवाज़ा बिन ज़ोर जतन के हे


फिर तो झूमा पागल होके

फिर तो झूमा पागल होके

सर पे डाल फितूरी रे


मन कस्तूरी रे, जग दस्तूरी रे

बात हुई ना पूरी रे


मन कस्तूरी रे, जग दस्तूरी रे

बात हुई ना, बात हुई ना

बात हुई ना पूरी रे

मन कस्तूरी रे, जग दस्तूरी रे

- वरूण ग्रोवर 

नोट:  मसान फिल्म समीक्षा 

May 19, 2026

Lyrics Raja Shivaji Anthem 'Chhatrapati'

हे, हर-हर-हर महादेव शिवशंकर

सह्यगिरी शिखरावर आले

हे, सळ-सळ-सळ रणकंटक तलवारी

वज्रमूठ सरसावून भाले

तू तेजःपुंज झुंजार, चेतवून अंगार

भेदलास अंधार सारा

तू अर्थ रामराज्याचा, हिंदवी स्वराज्याचा

एकमेव आराध्य झाला

दुष्ट दुर्जनांसी संहारले (हे)

पातशाहीला तू ललकारले (हे)

एक नव्या पर्वाची एकजूट करण्यासी

एक छत्र छाया आधार दे

एक शस्त्र, एक अस्त्र शूरवीर छत्रपती

धैर्यशील, सत्वशील, धर्मनिष्ठ छत्रपती

लाख मराठ्यांची तू आग रे (हे-हे)

माय भवानीचा तू वाघ रे

कीर्तीवंत, पुण्यवंत, नीतीवंत छत्रपती

अद्वितीय क्षत्रियकुलावतंस छत्रपती

लाख मराठ्यांची तू आग रे

माय भवानीचा तू वाघ रे

देव, देश, धर्माची, सर्वश्रेष्ठ कर्माची

आन घेतली रक्त सांडले जरी

अंधकार शतकांचा भस्मसात करण्यासी

एक तप्त ज्वाला ही पेटली उरी

भक्ती रूप संतांचा, साधू अन महंतांचा

हात जोडूनी मान राखलास तू

जर कुणी स्वराज्यावर वाकडी नजर केली

हात-पाय चौरंगी छाटलास तू

मोडून जात-पात रयतेसी देई साथ

त्यांचा सदैव कैवारी झाला

झाले बहुत राजे, जगतात नाव गाजे

लाखात एक शिवराय माझा

हात तुझा पाठीशी, वार झेलू छातीशी

ढाल तुझी होण्याचा मान दे

एक शस्त्र, एक अस्त्र शूरवीर छत्रपती

धैर्यशील, सत्वशील, धर्मनिष्ठ छत्रपती

लाख मराठ्यांची तू आग रे (हे-हे)

माय भवानीचा तू वाघ रे

कीर्तीवंत, पुण्यवंत, नीतीवंत छत्रपती

अद्वितीय क्षत्रियकुलावतंस छत्रपती

लाख मराठ्यांची तू आग रे

माय भवानीचा तू वाघ रे

मावळ-मावळ, पाठीशी बारा मावळ

देवाला शोधाया धावून आलं राऊळ

देवा रं देवा, सारं पावन झालं रं

आरती ओवाळा माझं राजं आलं रं

तोरण बांधून साजरं हे करू औक्षण कुंकुम भाळावर

शिवबांना डोळा पाहीन अन डोळ सारं पाणावलं

साष्टांग दर्शनाचा ह्या देवपूजनाचा

हा दैवयोग भाग्यात यावा

ध्वज उंच-उंच भगवा हा, वंदनीय भगवा हा

आसमंत भगवा कराया

जन्म सार्थ करण्यासी प्रार्थना ही चरणासी

प्राण अर्पण्याचा सन्मान दे

एक शस्त्र, एक अस्त्र शूरवीर छत्रपती

धैर्यशील, सत्वशील, धर्मनिष्ठ छत्रपती

लाख मराठ्यांची तू आग रे (हे-हे)

माय भवानीचा तू वाघ रे

कीर्तीवंत, पुण्यवंत, नीतीवंत छत्रपती

अद्वितीय क्षत्रियकुलावतंस छत्रपती

लाख मराठ्यांची तू आग रे

माय भवानीचा तू वाघ रे

--- अजय-अतुल 

Hindi Translation 

हे, हर-हर-हर महादेव शिवशंकर  

सह्यगिरि की शिखर-भूमि पर आए  


हे, सुस्सलाती रणकंटक तलवारें  

वज्रमूठ कसकर भाले  


तुम तेजस्वी, पराक्रमी, अंगार-सा जोश जगाने वाले  

तुमने सारा अंधकार चीर दिया  


तुम रामराज्य के अर्थ हो, हिंदवी स्वराज्य के प्रतीक हो  

और तुम ही एकमात्र आराध्य बन गए  


दुष्टों और दुराचारियों का संहार किया  

सत्ता को ललकार दिया  


एक नए युग को एकजुट करने के लिए  

एक ही छत्र की छाया और सहारा दो  


एक ही शस्त्र, एक ही अस्त्र, वीर छत्रपति  

धैर्यवान, सत्वशील, धर्मनिष्ठ छत्रपति  


लाखों मराठों की तुम ज्वाला हो  

माँ भवानी के तुम शेर हो  


कीर्तिवान, पुण्यवान, नीतिवान छत्रपति  

अद्वितीय क्षत्रिय कुल के आभूषण छत्रपति  


लाखों मराठों की तुम ज्वाला हो  

माँ भवानी के तुम शेर हो  


देव, देश और धर्म के लिए  

सर्वश्रेष्ठ कर्म के लिए  


यदि रक्त भी बहाना पड़ा, तो भी स्वीकार किया  

अंधकार के शतकों को भस्म करने के लिए  


एक तपती ज्वाला हृदय में प्रज्वलित हुई  

भक्ति-रूप संतों, साधुओं और महंतों का  


तुमने हाथ जोड़कर सम्मान रखा  

यदि किसी ने स्वराज्य पर टेढ़ी नजर डाली  


तो तुमने उसके हाथ-पाँव काट दिए  

जात-पात तोड़कर रयत का साथ दिया  


और सदा उनका रक्षक बन गया  

बहुत से राजा हुए, जिनका नाम दुनिया में गूंजा  


मेरे शिवराय तो लाखों में एक हैं  

तुम्हारा हाथ मेरी पीठ पर रहे, मैं सीना तानकर वार सह लूँ  


तुम्हारी ढाल बनने का मुझे सम्मान दो  

एक ही शस्त्र, एक ही अस्त्र, वीर छत्रपति  


धैर्यवान, सत्वशील, धर्मनिष्ठ छत्रपति  

लाखों मराठों की तुम ज्वाला हो  


माँ भवानी के तुम शेर हो  

कीर्तिवान, पुण्यवान, नीतिवान छत्रपति  


अद्वितीय क्षत्रिय कुल के आभूषण छत्रपति  

लाखों मराठों की तुम ज्वाला हो  


माँ भवानी के तुम शेर हो  


मावळ-मावळ, पीछे बारह मावळ  

देव को खोजने दौड़कर रावल आया  


हे देव, सब कुछ पावन हो गया  

मेरे राजा आए, उनकी आरती उतारो  


तोरण बाँधकर इसे उत्सव बनाएं, 

माथे पर कुंकुम से औक्षण करें  

शिवबाओं को आँखों से देखूँ तो

सब कुछ आँसुओं से भर जाए  


इस साष्टांग दर्शन और देवपूजन का  

यह सौभाग्य मेरे भाग्य में आए  


यह ऊँचा-ऊँचा भगवा ध्वज, यह वंदनीय भगवा  

आसमाँ तक भगवा कर दे  


जन्म को सार्थक करने के लिए चरणों में प्रार्थना है  

प्राण अर्पण करने का सम्मान दो  


एक ही शस्त्र, एक ही अस्त्र, वीर छत्रपति  

धैर्यवान, सत्वशील, धर्मनिष्ठ छत्रपति  


लाखों मराठों की तुम ज्वाला हो  

माँ भवानी के तुम शेर हो  


कीर्तिवान, पुण्यवान, नीतिवान छत्रपति  

अद्वितीय क्षत्रिय कुल के आभूषण छत्रपति  


लाखों मराठों की तुम ज्वाला हो  

माँ भवानी के तुम शेर हो  

L


May 17, 2026

क्यों खोये खोये चांद की (Kyon khoye khoye chand ki)


आज शब जो चांद ने है रूठने की थान ली
गर्दिशो में है सितारे बात हमने मान ली
अंधेरी शाम जिंदगी को समझ थी नहीं कहीं
कि एक आज हाथ थमलो की एक हाथ की कमी खाली
क्यों खोए खोए चांद की फिराक में तलाश में उदास है दिल
क्यों अपने आप से खफा खफा जरा ज़रा सा नाराज़ है दिल


ये मंज़िलें भी खुद ही तय करें,
ये फ़सलें भी खुद ही तय करें,
क्यूं तो रस्तों पे फिर सहम सहम
संभल संभल ले चलता है ये दिल
क्यों खोये चाँद की फिराक में तलाश में उदास है दिल


जिंदगी सवालो के जवाब ढूंढने चली
जवाब में सवालों की एक लंबी सी लड़ी मिली
सवाल ही सवाल है सूझती नहीं गली
कि आज हाथ थाम लो एक हाथ की कमी खाली


जी में आता है
मुर्दा सितारा नोच लो
इधर भी नोच लो
उधर भी नोचलो

एक दो का जिक्र क्या
में सारे नोच लो


 2 [इधर भी नोच लो
उधर भी नोच लो
सितारे नोच लो
में सारे नोच लो]2

क्यों तू आज
इतना वैसा है मिजाज में मजा है ऐ गम-ए-दिल
क्यों अपने आप से खफा खफा जरा जरा सा नाराज है दिल


ये मंजिलें भी खुद ही ताई करें,
ये फ़सलें भी खुद ही ताई करें,
क्यूं तो रस्तों पे फिर सहम सहम
संभल ले चलता है ये दिल


दिल को समझना है तो क्या आसान है
दिल तो फितरत से सुन लो ना बेईमान है
ये खुश नहीं है जो मिला
बस मांगता ही है चला


जानता है हर लगी का
दर्द ही है बस एक सिला


[जब कभी ये दिल लगा
दर्द ही हमें मिला
दिल की हर लगी का
सुनलो दर्द ही एक सिला]2


क्यों नए नए से दर्द की फिराक में तलाश उदास है दिल
क्यों अपने ऐप से खफा खफा जरा जरा सा नाराज है दिल


ये मंजिल भी खुद ही ताई करें
ये फासले भी खुद ही ताई करें
क्यों तो रस्तों पे फिर सहम सहम
संभल ले चलता है ये दिल


क्यों खोए खोए चांद की फिराक में तलाश में उदास है दिल
क्यों अपने आप से खफा खफा जरा जरा सा नाराज है दिल


ये मंजिलें भी खुद ही ताई करें, ये फासले भी खुद ही तय करें,
ये फासले भी खुद ही तय करें
क्यों तो रस्तों पे फिर सहम सहम
संभल ले चलता है ये दिल


--- स्वादानंद किरकिरे

May 13, 2026

भारत की वीर‑परंपरा: राजस्थानी, मराठी और बुंदेली लोक‑दोहों का अद्भुत संग्रह

भारत का इतिहास केवल युद्धों का वर्णन नहीं, बल्कि वीरता, शौर्य और आत्मसम्मान का अनंत स्रोत है। राजपूताना, मराठा और बुंदेलखंड की धरती पर पले‑बढ़े अनगिनत योद्धाओं ने अपनी तलवार और अपने वचन से ऐसी गाथाएँ रचीं, जो सदियों बाद भी आज उतनी ही प्रेरक हैं। इस ब्लॉग में आप लोक‑प्रचलित दोहे/उक्तियाँ उनके भावार्थ के साथ पढ़ेंगे  - जो भारतीय वीरता की ज्वाला को फिर से जगाते हैं।

1. घास की रोटी खाय ली, पर माथो न झुकाय; मेवाड़ रै राणा प्रताप, अकबर सूं न डराय।
भावार्थ: महाराणा प्रताप ने कठिन जीवन स्वीकार कर लिया, लेकिन पराधीनता नहीं—वे भूखे रह सकते थे, पर शत्रु के सामने आत्मसमर्पण नहीं।

2. हठ तो राव हमीर को, ओर रावन की टेक; सत राजा हरिचंद को, अरजन वान अनेक।
भावार्थ: कुछ लोगों का साहस और हठ ऐसा होता है कि वे मृत्यु को भी चुनौती दे देते हैं। जैसे हमीर का अटल संकल्प और रावण की जिद—एक बार ठान लेने पर वे पीछे नहीं हटते।

3. सिंह सुवन, सत्पुरुष वचन, कदली फलै इक बार; तिरिया तेल, हमीर हठ, चढ़ै न दूजी बार।
भावार्थ: कुछ अवसर और मूल्य ऐसी दुर्लभ चीजें हैं जो केवल एक बार घटित होती हैं—सज्जन का दिया वचन, सिंह का जन्म, केला का फल, राणा हमीर का अडिग संकल्प,—इन्हें दूसरी बार पाने की अपेक्षा व्यर्थ है; इसलिए समय रहते पहचानना आवश्यक है।

4. चमर हुळे नह सीह सिरै, छत्र न धारे सीह; हांथळ रा बळ सू हुवौ, ओ मृगराज अबीह।
भावार्थसच्चा सामर्थ्य बाहरी प्रतीकों से नहीं आता। शेर बिना चंवर‑छत्र के भी राजा है—उसकी शक्ति ही उसका राजचिह्न है।

5. स्थापूनी हिंदी स्वराज्य आपुले, शौर्याने लिहिली इतिहास‑गाथा;
असा हा जाणता राजा माझा, तयाच्या चरणी झुकवितो माथा.
भावार्थ: शिवाजी महाराज ने अपने साहस और नेतृत्व से हिंदवी स्वराज्य की स्थापना की और इतिहास में अमर गाथा लिखी। अनुभव, न्याय और बुद्धि से राज्य चलाने वाले इस महान “जाणत्या राजा” को माथा झुकाकर प्रणाम करने का मन करता है।

6. सह्याद्रीची साथ होती, घोड्यांच्या टापांचा नाद;  कडेकपारी फिरत होता, मर्द मराठ्यांचा वाघ.
भावार्थसह्याद्री के पर्वत शिवराय के साथ थे और उनके मावळों के घोड़ों की टापें रणभूमि में गूँजती थीं। सह्याद्री के कड़े‑कड़े पहाड़ों पर घूमने वाला यह मराठों का शेर—शिवाजी—हर घाटी में गर्जना करता था।

7. छत्ता तेरे राज में, धक‑धक धरती होय; जित‑जित घोड़ा मुख करे, उत‑उत फतह होय।
भावार्थछत्रसाल के काल में उनका पराक्रम इतना व्यापक था कि सेना जहाँ भी कदम बढ़ाती, विजय वहीं चलकर आ जाती—यह उनकी वीरता और न्यायप्रिय शासन की छवि है।

8. इत यमुना उत नर्मदा, इत चंबल उत टोंस; छत्रसाल सो लरन की, रही न काहू हौंस।
भावार्थ: छत्रसाल का राज्य इतना विस्तृत और बलशाली था कि उस पूरे क्षेत्र में किसी में इतना साहस नहीं कि उनसे युद्ध करने का विचार भी करे।

9. जो गति गजराज की, सो गति भई है आज। बाजी जात बुंदेल की, राखो बाजी लाज॥
भावार्थ: छत्रसाल अपनी स्थिति की तुलना गजेंद्र‑मोक्ष कथा के गजराज से करते हैं। जैसे गजराज ने संकट में भगवान को पुकारा, वैसी ही पुकार छत्रसाल बाजीराव से कर रहे थे।

10. चार बांस, चौबीस गज, अंगुल अष्ट प्रमान; ता ऊपर सुल्तान है, मत चूको चौहान।
भावार्थचार बांस, चौबीस गज दूरी और आठ अंगुल ऊँचाई के बराबर आगे–ऊपर ही सुल्तान (मोहम्मद गोरी) बैठा है। पृथ्वीराज चौहान, अब निशाना मत चूकना — यही सही क्षण है।

11. सिरसा सरोवर डोल्या, रण में उठी पुकार; डरे धरम के द्रोही सब, आल्हा‑ऊदल जूझे जब बार‑बार।
भावार्थजब आल्हा और ऊदल युद्धभूमि में उतरते थे, तो सिरसा झील तक कांप उठती थी। धर्मद्रोही भय से काँप जाते थे, क्योंकि आल्हा‑ऊदल का साहस, शक्ति और प्रतिशोध अजेय था।

इन दोहों और वीर‑उक्तियों में स्वाभिमान, स्वतंत्रता, त्याग और अडिग संकल्प की वह आग जलती है जिसने भारत की मिट्टी को गौरव सौंपा।

May 9, 2026

Snowdrops

Do you know what I was, how I lived? You know
what despair is; then
winter should have meaning for you.

I did not expect to survive,
earth suppressing me. I didn't expect
to waken again, to feel
in damp earth my body
able to respond again, remembering
after so long how to open again
in the cold light
of earliest spring--

afraid, yes, but among you again
crying yes risk joy
in the raw wind of the new world.

--- Louise Glück

May 5, 2026

15 बेहतरीन शेर - 22 !!!

1. ये नया शहर तो है ख़ूब बसाया तुमने, क्यूं पुराना हुआ वीरान ज़रा देख तो लो - जावेद अख़्तर

2. हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है, बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा - अल्लामा इक़बाल

3. उस पे पत्थर खाके क्या बीती ज़फ़र देखेगा कौन, फल तो सब ले जाएँगे ज़ख़्मे-शजर देखेगा कौन - ज़फ़र गोरखपुरी

4. देख ज़िंदाँ से परे रंग-ए-चमन, रक़्स करना है तो फिर पाँव की ज़ंजीर न देख। - मजरूह सुल्तानपुरी

5. कलकत्ते का जो ज़िक्र किया तू ने हम-नशीं, इक तीर मेरे सीने में मारा कि हाए हाए - मिर्ज़ा ग़ालिब

6. फूल तो दो दिन बहारे-जा-फ़िज़ा दिखला गए, हसरत उन गुंचों पे हैं जो बिन खिले मुरझा गए - ज़ौक़

7. वो ज़हर देता तो सब की निगह में आ जाता, सो ये किया कि मुझे वक़्त पे दवाएं न दीं - अख़्तर नाज़मी

8. हवा को बहुत सर-कशी का नशा है, मगर ये न भूले दिया भी दिया है । - खुमार बाराबंकवी

9. एक से एक जुनूँ का मारा इस बस्ती में रहता है,  एक हमीं हुशियार थे यारो एक हमीं बद-नाम हुए - इब्न-ए-इंशा

10. किस तरह जमा कीजिए अब अपने आप को, काग़ज़ बिखर रहे हैं पुरानी किताब के - -आदिल मंसूरी

11. वो दुश्मनी से देखते हैं, देखते तो हैं, मैं शाद हूँ की हूँ तो किसी की निगाह में - अमीर मीनाई

12. बाद मुद्दत के ये ऐ 'दाग़' समझ में आया, वही दाना है कहा जिसने न माना दिल का - दाग़ देहलवी

13. गो बहुत कुछ रंज यारान ए वतन से था हमेंआँख में आंसू मगर वक़्त ए सफ़र आ ही गया - अकबर इलाहाबादी,

14.  फ़रिश्तों से भी अच्छा मैं बुरा होने से पहले था, वो मुझ से इन्तिहाई ख़ुश ख़फ़ा होने से पहले था - अनवर शुऊर

15. मिरा ज़मीर बहुत है मुझे सज़ा के लिए,  तू दोस्त है तो नसीहत न कर ख़ुदा के लिए - शाज़ तमकनत

May 2, 2026

अथ नेता उवाच

फिर कोई मास्टर प्लान बनाया जाएगा,
देश को बाईसवीं सदी में पहुंचाया जाएगा.
अपना देश महान है, आप गर्व करेंगे सुन कर,
अभी आंकड़ों का गणित, समझाया जाएगा.

दुखदर्द, गरीबी सब हवा हो जाएंगी,
आप को आश्वासनों का जाम पिलाया जाएगा.
सुखे, बाढ़ की समस्या से चितित हैं हम,
अभी हवाई सर्वेक्षण करवाया जाएगा.

कुंआ खोदने की आप नाहक जिद न करें,
आग लगने तो दीजिए, फिर देखा जाएगा.
देशद्रोहियों को राह पर लाने की कोशिश करेंगे,
उन्हें देशभक्ति का रिकार्ड सुनवाया जाएगा.

कोई और परेशानी है तो पी. ए. को लिखवा दें,
आप के क्षेत्र में दोबारा पांच वर्ष बाद आया जाएगा.

- प्रदीप शर्मा

Apr 29, 2026

Title Song Lyrics of Daanasur (Denver the last Dinosaur)

छिपकली के नाना हैं,

छिपकली के हैं ससुर,

दानासुर दानासुर दानासुर! 

छिपकली के नाना हैं,

छिपकली के हैं ससुर,

दानासुर दानासुर दानासुर! 

तानपुरे के नीचे दो मंजीरे जैसे पाँव,

ना कुत्ते की भौं भौं, ना बिल्ली की म्याँऊ,

सुर है तराने में, धिन तन न ना,

दानासुर दानासुर दानासुर

दानासुर दानासुर दानासुर!

--- गुलज़ार 

Apr 25, 2026

Qasida - Kurdêkî Koyî - Kurdish Poem


As he said that, I was so enraged I was about to lose my faith.

I said to him you have remained ignorant; I was about to punch him in the face. 

What is wrong with Kurdish? Is it not God’s creation, the language of truth? 

See, Armenian has no eloquence, and Doomsday is not going to be in Armenian, 

Yet with their limping language and crooked writing, but with books and journals, 

They are counted among the great nations, and about to call themselves a state. 

How is Kurdish different from Farsi? Why is Persian the right language and Kurdish wrong?

In fact, if you notice you would realize who has stolen from whom, 

Because we are older than they are, according to the history books of all religions.

They had this mentality, the people of Sulaymaniyah and Koye, 

That they became the masters of Persian and Arabic, some even reached Fakhre Razi’ status

--- Haji Qadiri Koyi 

*Fakhr ad-Din al-Razi was a famous Persian theologian and philosopher in the twelfth century.

Context: In a qaside “Kurdêkî Koyî” he tells the details of his encounter with a person from Koye, his hometown, who complains that Şêx Kake Ehmed translates the Quran and the prophet’s sayings (hadith) into Kurdish. Upon hearing his complaint Hacî Qadir becomes furious and comments.

Apr 20, 2026

Qasida: “Odeba Cake” - Kurdish Poem


Tell me what is the benefit of khanqahs, Shaikhs, and Tekyes?

Except for teaching laziness and collecting properties and wealth. 

They [shaikhs/mullahs] are not tested even once, to find out whether they are poison or opium.

To be put to the touchstone like gold, to find out whether they are bandits or leaders.


Do not follow the shaikhs and the like at all, no man can ensure daily bread to any other man.

You [shaikhs] who are busy with secrets and prayers (“naz û niyaz”), it is Europe’s technology that can work miracles. 

The peak of the Eiffel Tower touches the heavens; your journey is confined to the underworld.

They searched all the planet earth, yet your dream is just heaven. 

They take your speech today, and return it to you with no error next year. 

They add one hundred and fifty words each year to science and technology. 

The Chinese are, still, fire-worshipers, dark-faced Buddhists, and faithless pagans, 

And yet the prophet says “Seek knowledge even if it is in China”. 

There is no male or female in the hadith, if the cleric forbids knowledge [for women] he has no faith. 

You come and learn a skill, why should you care if they are pagan, Buddhist, or Jew.

You need to keep turning like a millstone, every century the patterns of living change. 

The people of paradise are not shepherds and cowboys, but owners of knowledge.


--- 

Haji Qadiri Koyi

Apr 17, 2026

15 बेहतरीन शेर - 21 !!!

1. आनेवाली नस्लें तुम पर फ़ख़्र करेंगी हम-असरो, जब भी उनको ध्यान आएगा तुमने 'फ़िराक़' को देखा है - फ़िराक़ गोरखपुरी

2. हमारे बस में था ही क्या हवा पे हम सवार थे, वहाँ वहाँ गए जहाँ हवा उड़ा के ले गई -अज़्म शाकिरी

3. क्या क्या हुआ है हम से जुनूँ में न पूछिए , उलझे कभी ज़मीं से कभी आसमाँ से हम - असरार-उल-हक़ मजाज़

4. अब तुमसे रुख़सत होता हूँ आओ सम्भालो साज़े-गज़ल नये तराने छेड़ो, मेरे नग्मों को नींद आती है - रघुपति सहाय 'फ़िराक़'

5. तुझे किस बात का ग़म है वो इतना पूछ लें मुझ से वो इतना पूछ लें मुझ से तो फिर किस बात का ग़म है मुझ से - मुशताक़ हुसैन ख़ान हाशमी मुश्ताक़

6.  मुझको तो होश नहीं, तुमको ख़बर हो शायद, लोग कहते हैं कि तुमने मुझे बर्बाद किया - जोश मलीहाबादी

7. मैं तो ग़ज़ल सुना के अकेला खड़ा रहा, सब अपने अपने चाहने वालों में खो गए - कृष्ण बिहारी नूर

8. न जाने कैसा मसीहा था चाहता क्या था, तमाम शहर को बीमार देख कर ख़ुश था  - अमीर क़ज़लबाश

9. दाग़ दुनिया ने दिए ज़ख़्म ज़माने से मिले, हम को तोहफ़े ये तुम्हें दोस्त बनाने से मिले - कैफ़ भोपाली

10.  ख़ुशियाँ देते देते अक्सर खुद ग़म में मर जाते हैं,  रेशम बुनने वाले कीड़े रेशम में मर जाते हैं - ख़ुशबीर सिंह शाद

11. कुछ तो तेरे मौसम ही मुझे रास कम आये और कुछ मेरी मिट्टी में बग़ावत भी बहुत थी - परवीन शाकिर

12. रातें परदेस की डरता था कटेंगी कैसे, मगर आँगन में सितारे थे वही घर वाले - राही मासूम रजा़

13. हम को नीचे उतार लेंगे लोग, इश्क़ लटका रहेगा पंखे से - ज़िया मज़कूर

14. मैखाने के क़रीब थी मस्जिद भले को, दाग़ हर एक पूछता था कि “ हज़रत इधर कहाँ? - दाग़

15. जब तुलू आफताब होता है, ग़म के सागर उछाल देता हूँ, तज़किरा जब वफ़ा का होता है, में तुम्हारी मिसाल देता हूँ.. 

Apr 13, 2026

Ice People


Ice people
They're just made of ice
They don't treat
Their fellow man very nice
You wear your hair long
As Jesus did
They'll crucify you
You're not part of the establishment
You stand up for your rights
They'll call you a fool
If you don't go to war
You're not living by the golden rule
Ice people
They're just made of ice
They don't treat
Their fellow man very nice
The red man lives and dies on the reservation
And the black man just lives anywhere he can
And the poor white man he doesn't live any better
He can't say I'm red, I'm black, I'm yellow, I'm tanned
We're all caught up together
Like the buffalo on the plains
We're just shooting sport for ice people
We're just a game
Ice people
They're just made of ice
They don't treat
Their fellow man very nice
Ice people
They're just made of ice
No, they don't treat
Their fellow man very nice
Ice people
They're just made of ice
They don't treat
Their fellow man very nice

Producer: Steve Verroca
Producer: Ray Vernon
Associate Producer: Bob Feldman
Recording Engineer: Vernon Wray
Remixing Engineer: Chuck Irwin
Composer Lyricist: Link Wray

Apr 8, 2026

सुभाषितानि - 5 (Subhashitani -5)

1. सर्वस्य ही परीक्ष्यन्ते स्वभावो नेतरे गुणाः| अतीत्य हि गुणान् सर्वान् स्वभावो मूर्धनि वर्तते ||

अर्थ: संकट या कठिनाइयों के समय व्यक्ति का असली स्वभाव सामने आ जाता है जो उसके सभी गुणों से बढ़कर होता है।

2. विद्या विवादाय धनं मदाय, शक्तिः परेषाम् परिपीडनाय | खलस्य, साधोः विपरीतं एतत्; ज्ञानाय दानाय च रक्षणाय ||

अर्थ: विद्या (ज्ञान) दुष्ट लोगों के लिए विवाद के लिए होती है, धन (धन संपत्ति) घमंड के लिए होता है, और शक्ति दूसरों को पीड़ित करने के लिए होती है। परंतु सज्जन लोगों के लिए विद्या ज्ञान प्राप्ति के लिए, धन दान करने के लिए, और शक्ति दूसरों की रक्षा करने के लिए होती है।

3. न तेन वृद्धो भवति येनास्य पलितं शिरः | 
 यो वै युवापि अधीयानस्तं देवाः स्थविरं विदुः ||

अर्थ: यह है कि केवल उम्र बढ़ने से या बाल सफेद होने से कोई व्यक्ति बड़ा या बुद्धिमान नहीं माना जाता। असली बढ़ेपन का पैमाना ज्ञान और बुद्धिमत्ता है। जो युवा होते हुए भी सीखते हैं, ज्ञान अर्जित करते हैं, वही सच्चे वृद्ध और सम्मानित माने जाते हैं।

4.  काक: कृष्ण: पिक: अपि कृष्ण: को भेद: काकपिकयो: | वसंत काले सम्प्राप्ते काक: काक: पिक: पिक: ||

अर्थ: कौआ और कोयल दोनों काले रंग के होते हैं और देखने में समान लगते हैं, लेकिन जब वसंत ऋतु आ जाती है तो उनकी असली पहचान उनके स्वर से हो जाती है। कौआ अपनी कर्कश आवाज करता है जबकि कोयल मधुर गीत गाती है।

5. शैले शैले न माणिक्यम् मौक्तिकम् न गजे गजे।
 साधवो न हि सर्वत्र चन्दनम् न वने वने।।

अर्थ: हर पर्वत पर हीरा (माणिक्य) नहीं मिलता, हर हाथी के मस्तक में मोती (मौक्तिक) नहीं होता। सभी जगह सज्जन लोग (साधु) नहीं मिलते और हर वन में चंदन वृक्ष भी नहीं होते। ये चीजें दुर्लभ और मूल्यवान होती हैं।

6. मूर्खो अपि शोभते तावत् सभायां वस्त्रवेष्टित: ।
 तावत् शोभते मूर्खो यावत् किंचित् न भाषते ॥

अर्थ: मूर्ख व्यक्ति भी अच्छे वस्त्र पहनकर सभा में तब तक शोभित होता है (अच्छा लगता है), जब तक वह कुछ नहीं बोलता। मूर्ख उसी समय तक शोभा पाता है, जब तक वह चुप रहता है.

7. यत्तदग्रे विषमिव परिणामे अमृतोपमम्, 
तत्सुखम् सात्त्विकं प्रोक्तम् आत्मबुद्धि प्रसादजम् | 
विषयेंद्रिय संयोगात् यत्तदग्रे अमृतोपमम्, 
परिणामे विषमिव तत्सुखं राजसं स्मृतम् ||

अर्थ जिस सुख का प्रारंभ विष (जहर) जैसा कष्टदायक होता है, पर परिणाम अमृत के समान सुखद होता है, वही सात्त्विक सुख कहलाता है। यह सुख आत्मबुद्धि के प्रसाद से उत्पन्न होता है। जो सुख विषय (इंद्रिय) के संयोजन से उत्पन्न होता है, उसका प्रारंभ तो अमृत के समान सुखद होता है, लेकिन परिणाम विष (जहर) के समान कष्टदायक होता है, उसे राजसिक सुख कहा गया है।

Apr 4, 2026

अभी साज़-ए-दिल में तराने बहुत हैं

अभी साज़-ए-दिल में तराने बहुत हैं
अभी ज़िंदगी के बहाने बहुत हैं

ये दुनिया हक़ीक़त की क़ाइल नहीं है
फ़साने सुनाओ फ़साने बहुत हैं

तिरे दर के बाहर भी दुनिया पड़ी है
कहीं जा रहेंगे ठिकाने बहुत हैं

मिरा इक नशेमन जला भी तो क्या है
चमन में अभी आशियाने बहुत हैं

नए गीत पैदा हुए हैं उन्हीं से
जो पुर-सोज़ नग़्मे पुराने बहुत हैं

दर-ए-ग़ैर पर भीक माँगो न फ़न की
जब अपने ही घर में ख़ज़ाने बहुत हैं

हैं दिन बद-मज़ाक़ी के 'नौशाद' लेकिन
अभी तेरे फ़न के दिवाने बहुत हैं

Mar 31, 2026

हिंदी होने पर नाज़ जिसे कल तक था

हिंदी होने पर नाज़ जिसे कल तक था, हिज़ाज़ी बन बैठा,

अपनी महफ़िल का रिंद पुराना आज नमाज़ी बन बैठा।

महफ़िल में छुपा है कैसे—हज़्रत! दीवाना कोई सहरा में नहीं,

पैग़ाम-ए-जुनूँ जो लाता था, इक़बाल वो अब दुनिया में नहीं।

ऐ मुतरिब! तेरे तरानों में अगली-सी अब वो बात नहीं,

वो ताज़गी-ए-तख़य्युल नहीं, बेसाख़्तगी-ए-जज़्बात नहीं।

— आनंद नारायण ‘मुल्ला’ (शेर-ओ-शायरी से)

“अल्लामा इक़बाल जैसे परिपक्व और विशाल हृदय वाले व्यक्ति को अचानक साम्यवाद के दलदल में फँसते देखकर लोग दुख और चिंता से कराह उठे।”

Mar 27, 2026

बहादुर शाह ज़फ़र और हिंदुस्तान की तलवार: ऐतिहासिक शायरी की कहानी

1857 का भारतीय विद्रोह, जिसे आज़ादी की पहली क्रांति भी कहा जाता है, सिर्फ़ युद्ध की लड़ाई तक सीमित नहीं था। इस विद्रोह के दौरान आखिरी मुग़ल सम्राट बहादुर शाह ज़फ़र की शख्सियत और उनकी शायरी ने भी इतिहास में अपनी अलग छाप छोड़ी।

कहा जाता है कि विद्रोह के बाद, जब अंग्रेज़ अधिकारी ज़फ़र को पकड़ने आए, उन्होंने उन्हें तंज़ के साथ कहा:

“दमदमे में दम नहीं है ख़ैर मांगो जान की.. ऐ ज़फ़र ठंडी हुई अब तेग हिंदुस्तान की।”
(अब तुम्हारे पास कोई ताक़त नहीं, ज़फ़र। हिंदुस्तान की तलवार भी अब नुकीली नहीं रही।)

लेकिन बहादुर शाह ज़फ़र की शायरी में छिपी जज़्बात और आत्मसम्मान ने जवाब में इतिहास रच दिया। उन्होंने शेर कहा:

“ग़ाज़ियों में बू रहेगी जब तलक ईमान की, तख़्त ऐ लंदन तक चलेगी तेग हिंदुस्तान की।”
 (भारत की तलवार और उसका साहस कभी कम नहीं होगा, और ईमान की शक्ति के साथ यह London तक अपनी गूँज पहुंचाएगी।)

इस जवाब से साफ़ झलकता है कि ज़फ़र का मनोबल और उनका देशभक्ति का जज़्बा अंग्रेज़ों की धमकियों से कम नहीं हुआ। यह सिर्फ़ एक शेर नहीं, बल्कि उस युग की एक प्रेरणादायक कहानी है, जो यह बताती है कि कठिन परिस्थितियों में भी आत्मसम्मान और विश्वास कभी नहीं मरते।

Mar 23, 2026

15 बेहतरीन शेर - 20 !!!

 1. सरजमीने-हिंद में अकवामे आलम के फ़िराक़,  कारवां आते गए हिंदोस्ताँ बनता गया  - फ़िराक़ गोरखपुरी

2. कुछ मेरे बाद और भी आएंगे क़ाफ़िले, कांटे ये रास्ते से हटा लूं तो चैन लूं। -तसव्वुर किरतपुरी

3. इन्हीं ज़र्रों से होंगे कल नये कुछ कारवां पैदा,  जो ज़र्रे आज उड़ते हैं ग़ुबारे-कारवां हो कर। - शफ़क टौंकी

4. इस शहर में जीने के अंदाज़ निराले हैं, होठों पे लतीफे हैं आवाज़ में छाले हैं। - जावेद अख़्तर

5. जिनके आँगन में अमीरी का शजर लगता है, उसका हर ऐब ज़माने को हुनर लगता है - अंजुम रहबर

6. ऐ दिल वो आशिक़ी के फ़साने किधर गए, वो उम्र क्या हुई वो ज़माने किधर गए - अख़्तर शीरानी‬

7. सियाह रात नहीं लेती नाम ढलने का, यही तो वक़्त है सूरज तेरे निकलने का - शहरयार

8. नतीजा एक ही निकला, कि थी क़िस्मत में नाकामी, कभी कुछ कह के पछताये, कभी चुप रह के पछताये। - आरज़ू लखनवी

9. हमारी ज़िन्दगी के सानहे भी क्या अजब गुज़रे, उसी पर मर मिटे जिस से हमें बेज़ार होना था - मनीष शुक्ला

10. अब ज़मीं पर कोई गौतम न मोहम्मद न मसीह, आसमानों से नए लोग उतारे जाएँ - अहमद फ़राज़

11. हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो - जौन एलिया

12. दफ़'अतन घटा की आड़ से चाँदनी कशीद हो गई, ज़ुल्फ़ उस के चेहरे से हटी और मेरी 'ईद हो गई - आलम निज़ामी

13. जुर्रत से हर नतीजे की परवाह किये बगैर, दरबार छोड़ आया हूँ सजदा किये बगैर ! - मुनव्वर राना

14. ये हमसे कौन दिन भर की कमाई छीन लेता है, उतर कर अपनी मसनद से चटाई छीन लेता है - सलाहउद्दीन नैयर

15. अपने बच्चों को मैं बातों में लगा लेता हूं, जब भी आवाज़ लगाता है खिलौने वाला - राशिद राही

Mar 20, 2026

तुलसीदास के 14 कालजयी दोहे


1. विनय न मानत जलधि जड़, गए तीनि दिन बीति।
बोले राम सकोप तब, भय बिनु होइ न प्रीति॥

भावार्थ: जब तीन दिन तक विनम्रता से कहने पर भी समुद्र नहीं माना, तब राम को क्रोध आया। तुलसीदास कहते हैं कि बिना भय के प्रेम और अनुशासन नहीं बनता।

2. तुलसी साथी विपत्ति के, विद्या विनय विवेक।
साहस सुकृति सुसत्यव्रत, राम भरोसे एक॥

भावार्थ: विपत्ति के समय विद्या, नम्रता, विवेक, साहस, अच्छे कर्म, सत्य और राम पर भरोसा—यही सच्चे साथी होते हैं।

3.परहित सरिस धरम नहि भाई, पर पीड़ा सम नहि अधमाई।

भावार्थ: दूसरों का भला करने जैसा कोई धर्म नहीं, और दूसरों को कष्ट देना सबसे बड़ा पाप है।

4. धीरज धरम मित्र अरु नारी, आपद काल परखिए चारी।

भावार्थ: धैर्य, धर्म, मित्र और पत्नी—इन चारों की असली परीक्षा कठिन समय में ही होती है।

5. समरथ को नहिं दोष गोसाईं, रवि पावक सुरसरि की नाईं।

भावार्थ: जो समर्थ और महान होता है, उस पर दोष नहीं लगता—जैसे सूर्य, अग्नि और गंगा सबको शुद्ध करते हैं।

6. जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी।

भावार्थ: मनुष्य की भावना जैसी होती है, उसे भगवान भी वैसे ही दिखाई देते हैं।

7. हरि अनंत हरि कथा अनंता, कहहिं सुनहिं बहुविधि सब संता॥

भावार्थ: भगवान अनंत हैं और उनकी कथाएँ भी अनंत हैं; संत उन्हें अनेक रूपों में कहते और सुनते हैं।

8. होइहि सोइ जो राम रचि राखा, को करि तर्क बढ़ावै साखा॥

भावार्थ: जो राम ने रच दिया है, वही होकर रहता है। तर्क-वितर्क करके कोई भी सत्य को बदल नहीं सकता।

9. बिनु हरि कृपा मिलहिं नहि संता, बिनु संत कृपा मिलहिं नहि हरि॥

भावार्थ: भगवान की कृपा बिना संत नहीं मिलते, और संतों की कृपा बिना भगवान नहीं।

10. जाको प्रिय न राम वैदेही, त्यागहु ताहि कोटि बैरी सम।

भावार्थ: जिसे राम और सीता प्रिय नहीं, उसे शत्रु के समान समझकर त्याग देना चाहिए।

11. जहां सुमति तहं संपति नाना, जहां कुमति तहं विपति निदाना।

भावार्थ: जिस घर में आपसी प्रेम और सद्भाव होता है वहां सारे सुखी होते हैं और जहाँ आपस में द्वेष और वैमनष्य होता है उस घर के वासी दुखी जाते हैं.

12. आवत ही हरसै नही, नैनन नही सनेह
तुलसी तहां न जाईये कंचन बरसे मेह ।

भावार्थ : जिस स्थान पर लोग आपके आने से खुश न हों और उनकी नजरों में आपके प्रति स्नेह न हो, वहाँ कभी न जाएँ ।

13. रघुकुल रीति सदा चलि आई। प्राण जाहि बरु बचनु न जाई॥ 

भावार्थ: रघुकुल की परंपरा यही रही है कि प्राण त्याग दिए जाएँ, लेकिन दिया गया वचन कभी नहीं तोड़ा जाए

14. इहाँ कुम्हड़बतिया कोउ नाहिं। जे तरजनी देखि मरि जाहिं॥

भावार्थ: रामचरितमानस (अयोध्या कांड) में लक्ष्मण परशुराम के फरसे को देखकर कहते हैं कि मैं कोई कुम्हड़े का कोमल फल नहीं जो उंगली दिखाने से मर जाऊँ। यहां कोई कमजोर, नाजुक चीज नहीं है जो उंगली के इशारे से ही नष्ट हो जाए। 

Mar 16, 2026

IT WAS AFTERNOON¹


It was afternoon
the sky dressed as spring.
One moment more
and it would have conducted
the dance of death in the city.
It was afternoon.
In no hurry the children
went down the street.
Like gazelles
they came and went
in twos
in threes.
They part
they mix
happily.

It was afternoon.
Oppressive clouds of death
descend on the city
18 minutes
earthquake
fear, silence.
Bodies red with blood
reshape flowerbeds.

¹ This is from The Song of the Slaughtered City, which city is Halabja in Iraqi Kurdistan. On 16 and 17 March 1988 that city was bombed with chemical bombs by the Iraqi air force and later destroyed with dynamite.

Mar 14, 2026

MOUNTAINS


A prisoner condemned to life.
Chains round his ankles, handcuffs,
in a narrow jail cell.
He dreams like horsemen, the horses and the wind.
He dreams like babies, the stars and the grass.
I, too, like the prisoner,
dream every night of a strength
I bring to the mountains
and they to me.


(About F. N. Souza mentioned in photo)

Mar 11, 2026

शेर-ओ-शायरी - गीताप्रेस की किताब "एक लोटा पानी"


1. आईना! मुँह पर ही कहता है—साफ-साफ। सच यह है-जो साफ होता है, सफा कहता है।।

2.  सँभल कर बैठना, जलवा मुहब्बत देखने वाले। तमाशा खुद न बन जाना तमाशा देखने वाले॥

3. खुदाने हुस्न नादानोंको, बख्सा जर रजीलों को। अक्लमंदों को रोटी खुश्क, औ हलुवा वखीलों को ॥

4. एक बुतको चूमनेको शेखजी काबा गये। गरचे-हर बुत काबिले बोसा है इस बुतखानेमें॥

5. नजर से सर कलम कर दे, उसे शमशीर कहते हैं। निशाने में जो लग जाये, उसीको तीर कहते हैं॥

6.  न कह गया, न सुन गया और न नाम बता गया। मैं क्या कहूँ कि मेरे दिल, किसने चुरा लिया

7. है इबादत की इबादत है, मुहब्बत की मुहब्बत है। मेरे माशूक की सूरत खुदा से मिलती जुलती है॥

8. शेखजीसे मैंने पूछी, मंजिल जब यार की। बुतकदे की और चुपकेसे, इशारा कर दिया॥

9. बहुत मुश्किल निभाना है मुहब्बत अपने दिलवर से। उधर मूरत अमीराना इधर हालत फकीराना॥

10. चाँद बदली में छिपा है मुझे मालूम न था। सकल इनसान में खुदा है, मुझे मालूम न था॥

11. बुतपरस्ती मेरे हकमें हकपरस्ती हो गयी। दे दिया तेरा पता कुछ, यारकी तसबीरने॥

12. मुहब्बत करो और निभा लो तब पूछना, कि दुश्चारियाँ हैं कि आसानियाँ हैं?

13.  समझकर अपना दीवाना, वह मुझसे मुँह छिपाते हैं। हकीकत यों है, दरपरदा, मुहब्बत आजमाते हैं॥

14. शिकाइत किस जबाँसे मैं करूँ उनके न आनेकी। यही अहसान क्या कम है कि मेरे दिलमें रहते हैं॥

15. दुनियाँ इक इफसाना कहने को थे मगर सोचा। दुनियाँ है खुद इफसाना, इफसाने से क्या कहना?

16. रहमान के फिरश्ते' गो हैं बहुत मुकद्दस? शैतानही की जानिब, लेकिन मिजोरटी है॥

17..तमन्ना दर्ददिल में हो, तो कर खिदमत फकीरों की । नहीं वह “लाल” मिलता है अमीरों के खजानेमें॥

--- श्रीपारसनाथ सरस्वती 

(गीताप्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित "एक लोटा पानी" पुस्तक में एक नैतिक कहानी है, जिसका शीर्षक है "हिंदू राज्य कैसे गया?"। शेर-ओ-शायरी उसी कहानी से लिये गये हैं।)

Mar 7, 2026

Agirê Evîndarî (The Fire of Love)

Night has completely passed, yet you lie awake here,
I cannot sleep—when will I sleep without you?
The home has turned into a prison where I suffer,
Until dawn, darkness and sorrow surround me. 

Your presence—once a single heartbeat in mine—
Oh heart, does no one compare to that one?
Why constantly does my heart return to the yearning for them?
At times I felt their hands upon my head—
So many dreams and visions came with that closeness. 

And I stayed awake, oh heart—why did the night vanish?
Did I kill them, oh heart—why did the night vanish?
Get up quickly, oh heart, bring them back,
We embraced—oh heart, why did the night vanish?

--- Cigerxwîn

Mar 3, 2026

अल्लामा इक़बाल की शायरी: इस्लाम, जम्हूरियत और आत्मबल का दर्शन


अल्लामा मुहम्मद इक़बाल केवल शायर नहीं थे, वे एक विचारक, दार्शनिक और आत्मचेतना के कवि थे। उनकी शायरी व्यक्ति, समाज और सत्ता—तीनों से सवाल करती है। बाल-ए-जिब्रील में इक़बाल की आवाज़ सबसे अधिक बेबाक और वैचारिक रूप में सामने आती है।
 
शेर 1: (बाल-ए-जिब्रील से)

सोचा भी है ऐ मद-ए-मुसलमाँ कभी तूने,
क्या चीज़ है फ़ौलाद की शमशीर-ए-जिगरदार?
इस बैत का ये मिस्रअ-ए-अव्वल है कि जिसमें,
पोशीदा चले आते हैं तौहीद के असरार।

भावार्थ:  इक़बाल मुसलमान से पूछते हैं - क्या तुमने कभी सोचा है कि सच्चे ईमान और आत्मबल से बनी फ़ौलाद की तलवार वास्तव में क्या होती है?  इस शेर की पहली ही पंक्ति में एकेश्वरवाद (तौहीद) के गहरे रहस्य छिपे हुए हैं।

संदेश: असली शक्ति हथियार में नहीं, ईमान और आत्मचेतना में होती है।
 
शेर 2: (बाल-ए-जिब्रील से)

इस राज़ को इक मद-ए-फ़िरंगी ने किया फ़ाश,
हरचंद कि दाना इसे खोला नहीं करते।
जम्हूरियत इक तर्ज़-ए-हुकूमत है कि जिसमें,
बंदों को गिना करते हैं, तोला नहीं करते।

भावार्थ:  इक़बाल कहते हैं कि इस सच्चाई को एक पश्चिमी विचारक ने उजागर किया - हालाँकि बुद्धिमान लोग भी इसे खुलकर नहीं कहते। लोकतंत्र एक ऐसी शासन-प्रणाली है जिसमें इंसानों को गिना तो जाता है, पर परखा नहीं जाता।

संदेश: संख्या-बल से चलने वाली व्यवस्था हमेशा न्याय और गुण की गारंटी नहीं देती।
 
शेर 3:

वा न करना फ़रक़ाबदी के लिए अपनी ज़ुबां,
छिपके है बैठा आ हंगाम-ए-महशर यहाँ।
वफ़्ल के सामान पैदा है तेरी तहरीर से,
देखे कोई दिल न दुख जाए तेरी तक़रीर से।
महफ़ले-नव में पुरानी दास्तानों को न छेड़,
रंग पर जो अब न आएँ उन फ़सानों को न छेड़।
 
भावार्थ:  इक़बाल चेतावनी देते हैं - अपनी ज़ुबान का इस्तेमाल फ़िरक़ाबंदी के लिए मत करो। तेरी लिखावट और तक़रीर से फसाद के बीज पैदा हो सकते हैं। नई महफ़िलों में पुराने, बेमानी झगड़ों को मत उछालो।

संदेश: शब्दों की जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी है जितनी कर्म की।

 शेर 4:

वो दीने-हिजाज़ी का बेबाक बेड़ा-निशाँ,
जिसका अक्सा-ए-आलम में पहुँचा।
न था जिसको ख़तरा न उम्म में, न क़ुलज़ुम में,
झिझका किये बे-सपर जिसने सातों समंदर—
वो डूबा दहाने में गंगा के आकर।

भावार्थ:  इक़बाल उस इस्लामी सभ्यता को याद करते हैं जिसका जहाज़ पूरी दुनिया में बेख़ौफ़ चला, जिसे न समंदरों से डर लगा, न तूफ़ानों से। लेकिन वही सभ्यता गंगा के किनारे आकर डूब गई - यानी अपने मूल उद्देश्य और आत्मा से दूर होकर।

संदेश: सभ्यताएँ बाहरी शक्ति से नहीं, आंतरिक पतन से गिरती हैं।

Feb 28, 2026

Answer

After Halabja* suffocated,
I wrote a long complaint to God
Before everyone,
I read it to a tree.
The tree cried.

From one side, a bird, a postman,
Said, “All right, who will deliver it?
If you are expecting me to take it,
I won’t reach Gods throne.

Late that night,
My angelic poem, dressed for mourning,
Said, “Don’t worry.

I will take it to the heights
Of the atmosphere.
But I won’t promise

He will take the letter Himself.
You know, the Great God
Who can see Him?

I said, “Thank you. Fly.”
My angelic inspiration flew
With my complaint.

The next day, it was returned.
God’s fourth secretary down,
A man by the name of Obaid,
At the bottom

Of the very same complaint,
Wrote to me in Arabic:
“Idiot, make it Arabic.

People here don’t know Kurdish.
They won’t take it to God.”

--- Sherko Bekas

translated by Alana Marie Levinson-LaBrosse & Halo Fariq

*Translator’s note: On March 16, 1988, as part of Anfal, Saddam Hussein’s military campaign against the Kurds of Iraq, Halabja withstood a chemical-weapons attack. The largest directed against a civilian population in history, it has been recognized as an act of genocide by the Iraqi High Criminal Court.