मैं आज शाम को बिलकुल फ़्री हूं, आओगी मिलने?
मैंने चाची से मिन्नतें की
वो जानती थीं, तुम मेरे होने वाले शौहर हो
तो मान गयीं
मैंने पर्स उठाया, ठीक-ठाक कपड़े पहने, ऑटो बुक किया और पार्क के गेट पर पहुंच गयी
तुम गेट पर ही खड़े थे...
तुम्हारे बगल में एक मूंगफली बेचने वाला दस-बारह साल का लड़का खड़ा था
जो तुमसे बार-बार मूंगफली ख़रीदने का निवेदन कर रहा था
मेरे कहने पर तुमने 10 ₹ की मूंगफली तुलवा ली
हम पार्क मैं बैठे रहे
बैठे-बैठे मूंगफली छीलते रहे
मैं मुस्कराती रही, तुम हंसते रहे
मैं क़िस्से सुनाती रही, तुम क़िस्से सुनते रहे
फिर अचानक से तुमने मुझे चूम लिया
मैं अंगुली से मिट्टी खोदने लगी...
फिर न जाने किस उम्मीद में, मैं उठकर ओट में आ गयी
फिर हम दोनों एक-दूसरे को आलिंगन में भरकर चूमने लगे
तभी एक लड़का आया
उसके चेहरे पर घृणा का भाव था —
'ये सब यहां नहीं चलेगा'
तुम सकपका गये
मैं डर गयी...
तुमने लड़के से कहा — 'सॉरी'
पांच मिनट पहले मुझे पता चला था — 'चुंबन किसे कहते हैं'
पांच मिनट बाद मुझे पता चला — 'चुंबन लेना ज़ुर्म है'
मैं मुंडी नीचे झुकाये पार्क से बाहर आ गयी...
मेरे बदन पर कपड़े थे पर यूं लगा जैसे मैं बिलकुल नंगी हूं
मेरे कानों में तुम्हारी कोई आवाज़ नहीं आयी...
महीनों तक कैसेट की तरह कानों में बस यही बजता रहा —
ये सब यहां नहीं चलेगा...
तुम फ़ोन पर फ़ोन करते रहे
मैं फ़ोन काटती रही...
तुमने मैसेज किया —
'सॉरी ! हम जल्दी शादी कर लेंगे'
फिर हमारी शादी हो गयी
हमारे हिस्से में एक बिस्तर और एक छोटा-सा कमरा आ गया
काम से थके-ऊबे हम कमरे में आते तो मैं रोशनी बुझा देती
आहिस्ता-आहिस्ता तुम्हारे होंठ मेरे होंठो की तरफ़ बढ़ते
तभी वह लड़का मेरे कानों में जोर से चीख़ता,
“ये सब यहां नहीं चलेगा!”
उस अनजान लड़के ने सिर्फ़ एक वाक्य बोलकर
उस एहसास को कुचल दिया
जिससे मैं ज़िन्दगीभर चुम्बन लेती और देती...
-नेहा नरुका
मैंने चाची से मिन्नतें की
वो जानती थीं, तुम मेरे होने वाले शौहर हो
तो मान गयीं
मैंने पर्स उठाया, ठीक-ठाक कपड़े पहने, ऑटो बुक किया और पार्क के गेट पर पहुंच गयी
तुम गेट पर ही खड़े थे...
तुम्हारे बगल में एक मूंगफली बेचने वाला दस-बारह साल का लड़का खड़ा था
जो तुमसे बार-बार मूंगफली ख़रीदने का निवेदन कर रहा था
मेरे कहने पर तुमने 10 ₹ की मूंगफली तुलवा ली
हम पार्क मैं बैठे रहे
बैठे-बैठे मूंगफली छीलते रहे
मैं मुस्कराती रही, तुम हंसते रहे
मैं क़िस्से सुनाती रही, तुम क़िस्से सुनते रहे
फिर अचानक से तुमने मुझे चूम लिया
मैं अंगुली से मिट्टी खोदने लगी...
फिर न जाने किस उम्मीद में, मैं उठकर ओट में आ गयी
फिर हम दोनों एक-दूसरे को आलिंगन में भरकर चूमने लगे
तभी एक लड़का आया
उसके चेहरे पर घृणा का भाव था —
'ये सब यहां नहीं चलेगा'
तुम सकपका गये
मैं डर गयी...
तुमने लड़के से कहा — 'सॉरी'
पांच मिनट पहले मुझे पता चला था — 'चुंबन किसे कहते हैं'
पांच मिनट बाद मुझे पता चला — 'चुंबन लेना ज़ुर्म है'
मैं मुंडी नीचे झुकाये पार्क से बाहर आ गयी...
मेरे बदन पर कपड़े थे पर यूं लगा जैसे मैं बिलकुल नंगी हूं
मेरे कानों में तुम्हारी कोई आवाज़ नहीं आयी...
महीनों तक कैसेट की तरह कानों में बस यही बजता रहा —
ये सब यहां नहीं चलेगा...
तुम फ़ोन पर फ़ोन करते रहे
मैं फ़ोन काटती रही...
तुमने मैसेज किया —
'सॉरी ! हम जल्दी शादी कर लेंगे'
फिर हमारी शादी हो गयी
हमारे हिस्से में एक बिस्तर और एक छोटा-सा कमरा आ गया
काम से थके-ऊबे हम कमरे में आते तो मैं रोशनी बुझा देती
आहिस्ता-आहिस्ता तुम्हारे होंठ मेरे होंठो की तरफ़ बढ़ते
तभी वह लड़का मेरे कानों में जोर से चीख़ता,
“ये सब यहां नहीं चलेगा!”
उस अनजान लड़के ने सिर्फ़ एक वाक्य बोलकर
उस एहसास को कुचल दिया
जिससे मैं ज़िन्दगीभर चुम्बन लेती और देती...
-नेहा नरुका
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