Jul 26, 2026

वो भी क्या दिन थे

 वो भी क्या दिन थे कि जब इश्क़ लड़ा लेते थे,

प्यार की डोर को चर्ख़ी पे चढ़ा लेते थे,

नौजवानी की पतंगों को उड़ा लेते थे,

धड़क के कंकड़ियाँ संभाल लेते थे,

होंठों पे हंसी, आंखों में आस थी,

हर ग़म को हंसी में उड़ाया करते थे।

--- सागर खय्यामी

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