आकाश बहुत ऊंचा है
और दूर बहुत हैं तारे
फिरते हुए सैकड़ों सूरज
ब्रह्मांड के ये बंजारे
सदियों के भंवर बहते हैं
अनगिनत हैं समय के धारे
और नीला सा एक मोती
कहते हैं ज़मीं, हम सारे
छोटी सी बूंद सी धरती
सागर से कहीं गहरी है
आकाश की गंगा में ये बजरे की तरह बहती है
आकाश बहुत ऊंचा है
- गुलज़ार
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