When the Nazis came for the communists,
I remained silent;
I was not a communist.
Then they locked up the social democrats,
I remained silent;
I was not a social democrat.
Then they came for the trade unionists,
I did not speak out;
I was not a trade unionist.
Then they came for the Jews,
I did not speak out;
I was not a Jew.
When they came for me,
there was no one left to speak out for me.
"First they came…" is a poem attributed to Pastor Martin Niemöller (1892–1984) about the inactivity of German intellectuals following the Nazi rise to power and the purging of their chosen targets, group after group.
About Me
- Himanshu Rai
- दो लम्हे का जीवन है, एक क्षण उन्माद का, एक क्षण आह्लाद का, बस इतना ही जियूँगा!
Saturday, May 16, 2009
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
Popular Posts
-
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है देखना है ज़ोर कितना बाज़ू-ए-क़ातिल में है (ऐ वतन,) करता नहीं क्यूँ दूसर कुछ बातचीत, देखता हूँ मैं जि...
-
दुनिया मैं बादशाह है सो है वोह भी आदमी और मुफलिस ओ गदा है सो है वोह भी आदमी जार दर बे नवा है सो है वोह भी आदमी नेमत जो खा रहा है सो है वोह भ...
-
ज़िहाल-ए मिस्कीं मकुन तगाफ़ुल, दुराये नैना बनाये बतियां कि ताब-ए-हिजरां नदारम ऎ जान, न लेहो काहे लगाये छतियां शबां-ए-हिजरां दरज़ चूं ज़ुल्फ...
-
हर तरफ हुस्न है, जवानी है, आज की रात क्या सुहानी है रेशमी जिस्म तरथराते है, मरमरी ख्वाब गुनगुनाते है धड़कानों में सुरूर फैला है, रंग नज़द...
-
कुँवर महेंद्र सिंह बेदी 'सहर' की शायरी से: 1--- आए हैं समझाने लोग हैं कितने दीवाने लोग दैर-ओ-हरम1 में चैन जो मिलता क्यूं जात...
-
जीवन में एक सितारा था माना वह बेहद प्यारा था वह डूब गया तो डूब गया अंबर के आंगन को देखो कितने इसके तारे टूटे कितने इसके प्यारे छूटे जो...
-
बोल कि लब आजाद हैं तेरे बोल, जबां अब तक तेरी है तेरा सुतवां* जिस्म हे तेरा बोल कि जां अब तक तेरी है. देख कि आहनगर** की दुकां में तुन्द...
-
किताबें करती हैं बातें बीते जमानों की, दुनिया की, इंसानों की, आज की, कल की, एक-एक पल की, गमों की, फूलों की, बमों की, गनों की, जीत की,...
-
देखो इस सारी दुनिया को एक दृष्टि से सिंचित करो धरा, समता की भाव वृष्टि से जाति भेद की, धर्म-वेश की काले गोरे रंग-द्वेष की ज्वालाओं से जल...
-
I call on you I clasp your hands I kiss the ground under your feet And I say: I offer my life for yours I give you the light of my eyes ...

No comments:
Post a Comment