Nov 4, 2026

Ey Reqîb_O ENEMY (National Anthem of the Mahabad Republic¹)

Ey reqîb her mawe qewmî kurdziman,
Nayşikênê danerî topî zeman.
Kes nelê kurd mirduwe, kurd zînduw e,
Zînduw e qet nanewê alakeman.

Ême roley rengî sûr û şorriş în,
Seyrî ke, xwênawî ye rabirdûman.
Kes nelê kurd mirduwe, kurd zînduw e,
Zînduw e, qet nanewê alakeman.

Lawî kurd hestaye ser pê wek dilêr,
Ta be xwên nexşî bika tacî jiyan.
Kes nelê kurd mirduwe, kurd zînduw e,
Zînduw e, qet nanewê alakeman.

Ême roley Mîdya û Keyxusrew în,
Dînman, ayinmian, her nîştiman.
Kes nelê kurd mirduwe, kurd zînduw e,
Zînduw e, qet nanewê alakeman.

Lawî kurd her hazir u amade ye,
Giyanfîda ye, giyanfîda, her giyanfîda.
Kes nelê kurd mirduwe, kurd zînduw e,
Zînduw e, qet nanewê alakeman.


English Translation

O enemy, the Kurdish people still live.
The strokes of time have not broken them.

Courageous Kurdish youth rise up,
with their blood they have designed a living crown.

No one may say: the Kurds have disappeared!
They live! They live! We shall never lower the flag.

We come from the Medi people and from Kay Koshrow.²
Kurdistan is our religion, our creed.

We come from the red flags and the revolutions
look at our past, so much of our blood!

Nobody dare say: the Kurds have disappeared!
They live! And we shall never lower the flag.

There, Kurdish youth is ready,
ready to give their lives to the last sacrifice.

Kurdistan or death! Kurdistan or death!
Notes (as shown in the image)


1. The Republic of Mahabad: this name is used to mean the Republic of Kurdistan, founded on the 22nd January 1946 with Mahabad as its capital. Its territory included the northern part of Iranian Kurdistan. In its short life this democratic Republic, with an elected assembly, pursued important objectives both in socio-economic matters (for example, for the first time issues concerning women became political matters) and in territorial autonomy. Its demise was made possible by the surrender and territorial return by a weakened Tehran during World War Two and the temporary deception of the Shah. However, with the end of the war the Iranian army descended on Mahabad. The members of the government were rounded up and executed; the leading political spokesmen, beginning with the President – that great intellectual Qazi Mohammed – were hanged in Mahabad square.

2. Kay Koshrow: legendary king in the mythology of the Medi and therefore of the Kurds.

Oct 30, 2026

रसखान की भक्ति कविता: ब्रज, कृष्ण और प्रेम का अनुपम दर्शन

रसखान हिंदी भक्ति काव्य की उस परंपरा के प्रमुख कवि हैं, जहाँ ईश्वर को ज्ञान और शक्ति से नहीं, बल्कि प्रेम और आत्मीयता से पाया जाता है। उनके पदों में भक्ति, समर्पण और वैराग्य का अनूठा संगम दिखाई देता है।

1. मानुष हौं तो वही रसखान, बसौं ब्रज गोकुल गाँव।
जो पशु हौं तो कहा बसु, चरौं नित नंद की धेनु॥
जो खग हौं तो बसेरो करौं, मिलि कालिंदी कूल कदंब की डार।
जो नाग हौं तो बसेरो करौं, करौं सदा ही गिरिराज की छाँह॥

भावार्थ:  रसखान कहते हैं—यदि मैं मनुष्य बनूँ तो ब्रज-गोकुल में रहूँ, पशु बनूँ तो नंद की गायों के साथ चरूँ, पक्षी बनूँ तो यमुना किनारे कदंब वृक्ष पर वास करूँ, और नाग बनूँ तो गोवर्धन पर्वत की छाया में रहूँ—क्योंकि जहाँ कृष्ण हैं, वही मेरा लोक है।

👉 संदेश: जीवन का रूप कोई भी हो, पर कृष्ण और ब्रज से दूर होना स्वीकार्य नहीं।

2. सेस गनेस महेस दिनेस, सुरेसहु जाहि निरंतर गावैं
जाहि अनादि अनंत अखंड, अछेद अभेद सुबेद बतावैं
नारद से सुक व्यास रटें, पचिहारे तऊ पुनि पार न पावैं
ताहि अहीर की छोहरियां, छछिया भरि छाछ पै नाच नचावैं

भावार्थ:  जिस भगवान के गुणों का गान शेषनाग, गणेश, शिव, सूर्य और इंद्र निरंतर करते रहते हैं;
जिसे वेद अनादि, अनंत, अखंड, अछेद और अभेद बताते हैं;
जिसका स्मरण नारद, शुक और व्यास जैसे महाज्ञानी करते हैं, फिर भी उसका पूर्ण रहस्य नहीं जान पाते—
उसी परमेश्वर को ब्रज की ग्वालिनें एक कटोरी छाछ के बदले नचा देती हैं।

👉 भाव यह है कि कृष्ण की महिमा भक्ति में है, ज्ञान या शक्ति में नहीं।

3. बैन वही उन गुन गाइ औ कान वही उन बैन सों सानी।
हाथ वही उन गात सरे अँपाई वही जु उरि अनुजानी॥
जान वही उन आनन संग औ मान वही जु करै मनमानी।
याँ रसखान वही रसखान जु है रसखान सो रसखानी॥

भावार्थ:  वही वाणी धन्य है जो कृष्ण के गुण गाए, वही कान धन्य हैं जो उनकी बातें सुनें।
वही हाथ सफल हैं जो उनके शरीर की सेवा करें, वही छाती सार्थक है जिसमें उनका प्रेम बसे।
वही जीवन सच्चा है जो उनके चेहरे से जुड़ा हो, और वही सम्मान योग्य है जो उनके प्रेम में मनमानी करे।
रसखान कहते हैं—जो कृष्ण-रस में डूब गया, वही सच्चा रसखान है। 

👉 यहाँ कृष्ण-भक्ति को जीवन की सर्वोच्च सिद्धि बताया गया है।

4. या लकुटी अरु कामरिया पर राज तजौं पुर को तज डारूँ।
आठौं सिद्धि नवौं निधि के सुख नंद के गाइ चराइ बिसारूँ॥
रसखान कबौं इन आँखिन सों ब्रज के बन-बाग तड़ाग निहारूँ।
कोटिक है कलधौत के धाम करील के कुंजन ऊपर वारूँ॥

भावार्थ:  कृष्ण की लाठी और कंबल के लिए, मैं राज-पाट और नगरों का वैभव त्याग दूँ।
आठ सिद्धियाँ और नौ निधियों के सुख छोड़कर, नंद बाबा की गायें चराना स्वीकार कर लूँ।
रसखान कहते हैं—काश! इन आँखों से ब्रज के वन, बाग और तालाब निहार सकूँ।
मैं सोने के करोड़ों महलों को ब्रज की काँटेदार कुंजों पर न्योछावर कर दूँ।

👉 यह पद बताता है कि ब्रज और कृष्ण का प्रेम हर सांसारिक वैभव से ऊपर है।

Oct 27, 2026

15 बेहतरीन शेर - 26 !!!

1. जिस धज से कोई मक़्तल में गया वो शान सलामत रहती है,
ये जान तो आनी जानी है इस जान की तो कोई बात नहीं -- फ़ैज़

2. आईये हाथ उठायें हम भी, हम जिन्हें रस्म-ए-दुआ याद नहीं
हम जिंहें सोज़-ए-मोहब्बत के सिवा कोई बुत, कोई ख़ुदा याद नहीं --- फ़ैज़

3. .सामने वाले को हल्का जान कर भारी हैं आप आपका मेयार देखा कितने मेयारी हैं
उफ़ तलक करते नहीं ज़िल्ले इलाही के ख़िलाफ़ आपको दरबार की आदत है दरबारी हैं आप 
--- अब्बास क़मर

4. केहू कहत है खाय का दाना नाय मिलत, केहू के शिकायत है ठेकाना नाय मिलत
येहि दौर से रफ़ीक हैं, हमहूं का शिकायत है, दिल लेहे घूमित है, निशाना नाय मिलत...!!!
--- रफ़ीक शादानी

5. जमीं बेच देंगे, गगन बेच देंगे, कली बेच देंगे, चमन बेच देंगे,
कलम के सिपाही अगर सो गए तो, वतन के मसीहा वतन बेच देंगे।

6. जहाँ रहेगा वहीं रौशनी लुटाएगा किसी चराग़ का अपना मकाँ नहीं होता ~वसीम बरेलवी

7. वो तो खुशबू है, हवाओं में बिखर जाएगा मसला फूल का है, वो किधर जाएगा - परवीन शाकिर 

8. यूँही आबाद रहेगी दुनिया, हम न होंगे कोई हम सा होगा -  नासिर काज़मी

9. ये जो कुछ देखते हैं हम फ़रेब-ए-ख़्वाब-ए-हस्ती है। तख़य्युल के करिश्मे हैं बुलंदी है न पस्ती है।। - बेदम शाह वारसी

10.  लगी जो आँख तो मंज़र था आइने जैसा, खुली जो आँख तो बाहर शदीद कोहरा था ~रशीदी

11.  मुल्ला को जो है हिंद में सजदे की इजाज़त, नादान ये समझता है कि इस्लाम है आजाद -  अल्लामा इकबाल

12. जौक़-ए-निगाह के सिवा शौक़-ए-गुनाह के सिवा , मुझ को बुतों से क्या मिला मुझ को ख़ुदा ने क्या दिया -  'हफ़ीज़' जालंधरी

13. बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल है दुनिया मिरे आगे,  होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मिरे आगे - मिर्ज़ा ग़ालिब

14. चराग़-ए-शाम-ए-तन्हाई भी रौशन रख नहीं पाए, अब और आगे हवा की दोस्ती से चाहते क्या हो - ज़फ़र गोरखपुरी

15. चलते चलिए, ये हमें लेकर जिधर जाते हैं , ख़्वाब, आंखों ही में रहते हैं, तो मर जाते हैं। -  जावेद अख़्तर

Oct 24, 2026

मैं ख़याल हूँ किसी और का

मैं ख़याल हूँ किसी और का, मुझे सोचता कोई और है
सर-ए-आइना मेरा अक्स है
सर-ए-आइना मेरा अक्स है, पस-ए-आइना कोई और है
मैं ख़याल हूँ किसी और का, मुझे सोचता कोई और है

सर-ए-आइना मेरा अक्स है
सर-ए-आइना मेरा अक्स है, पस-ए-आइना कोई और है
मैं ख़याल हूँ किसी और का मैं ख़याल हूँ किसी और का

तुझे दुश्मनों की खबर न थी, मुझे दोस्तों का पता नहीं
तुझे दुश्मनों की खबर न थी, मुझे दोस्तों का पता नहीं
तेरी दास्तां कोई और थी
तेरी दास्तां कोई और थी, मेरा वाक़िआ कोई और है
मैं ख़याल हूँ किसी और का मैं ख़याल हूँ किसी और का

मैं किसी के दस्त-ए-तलब में हूँ, तो किसी के हर्फ़-ए-दुआ में हूँ
मैं किसी के दस्त-ए-तलब में हूँ, तो किसी के हर्फ़-ए-दुआ में हूँ
मैं नसीब हूँ किसी और का
मैं नसीब हूँ किसी और का, मुझे माँगता कोई और है

सर-ए-आइना मेरा अक्स है
सर-ए-आइना मेरा अक्स है, पस-ए-आइना कोई और है
मैं ख़याल हूँ किसी और का मैं ख़याल हूँ किसी और का

Oct 21, 2026

To the rain

Mother rain, manifold, measureless,

falling on fallow, on field and forest,

on house-roof, low hovel, high tower,

downwelling waters all-washing, wider

than cities, softer than sisterhood, vaster

than countrysides, calming, recalling:

return to us, teaching our troubled

souls in your ceaseless descent

to fall, to be fellow, to feel to the root,

to sink in, to heal, to sweeten the sea.

--- Ursula K. Le Guin