Aug 15, 2026
वतन को कुछ नहीं ख़तरा निज़ाम-ए-ज़र है ख़तरे में
हक़ीक़त में जो रहज़न है वही रहबर है ख़तरे में
जो बैठा है सफ़-ए-मातम बिछाए मर्ग-ए-ज़ुल्मत पर
वो नौहागर है ख़तरे में वो दानिश-वर है ख़तरे में
अगर तशवीश लाहक़ है तो सुलतानों को लाहक़ है
न तेरा घर है ख़तरे में न मेरा घर है ख़तरे में
जहाँ 'इक़बाल' भी नज़्र-ए-ख़त-ए-तनसीख़ हो 'जालिब'
वहाँ तुझ को शिकायत है तिरा जौहर है ख़तरे
--- हबीब जालिब
Aug 11, 2026
समय ने जब भी अंधेरो से दोस्ती की है
जला के अपना ही घर हमने रोशनी की है
सबूत है मेरे घर में धुएं के ये धब्बे
कभी यहाँ पे उजालों ने ख़ुदकुशी की है
ना लड़खडायाँ कभी और कभी ना बहका हूँ
मुझे पिलाने में फिर तुमने क्यूँ कमी की है
कभी भी वक़्त ने उनको नहीं मुआफ़ किया
जिन्होंने दुखियों के अश्कों से दिल्लगी की है
किसी के ज़ख़्म को मरहम दिया है गर तूने
समझ ले तूने ख़ुदा की ही बंदगी की है
--- गोपालदास नीरज
Aug 7, 2026
चुंबन
मैंने चाची से मिन्नतें की
वो जानती थीं, तुम मेरे होने वाले शौहर हो
तो मान गयीं
मैंने पर्स उठाया, ठीक-ठाक कपड़े पहने, ऑटो बुक किया और पार्क के गेट पर पहुंच गयी
तुम गेट पर ही खड़े थे...
तुम्हारे बगल में एक मूंगफली बेचने वाला दस-बारह साल का लड़का खड़ा था
जो तुमसे बार-बार मूंगफली ख़रीदने का निवेदन कर रहा था
मेरे कहने पर तुमने 10 ₹ की मूंगफली तुलवा ली
हम पार्क मैं बैठे रहे
बैठे-बैठे मूंगफली छीलते रहे
मैं मुस्कराती रही, तुम हंसते रहे
मैं क़िस्से सुनाती रही, तुम क़िस्से सुनते रहे
फिर अचानक से तुमने मुझे चूम लिया
मैं अंगुली से मिट्टी खोदने लगी...
फिर न जाने किस उम्मीद में, मैं उठकर ओट में आ गयी
फिर हम दोनों एक-दूसरे को आलिंगन में भरकर चूमने लगे
तभी एक लड़का आया
उसके चेहरे पर घृणा का भाव था —
'ये सब यहां नहीं चलेगा'
तुम सकपका गये
मैं डर गयी...
तुमने लड़के से कहा — 'सॉरी'
पांच मिनट पहले मुझे पता चला था — 'चुंबन किसे कहते हैं'
पांच मिनट बाद मुझे पता चला — 'चुंबन लेना ज़ुर्म है'
मैं मुंडी नीचे झुकाये पार्क से बाहर आ गयी...
मेरे बदन पर कपड़े थे पर यूं लगा जैसे मैं बिलकुल नंगी हूं
मेरे कानों में तुम्हारी कोई आवाज़ नहीं आयी...
महीनों तक कैसेट की तरह कानों में बस यही बजता रहा —
ये सब यहां नहीं चलेगा...
तुम फ़ोन पर फ़ोन करते रहे
मैं फ़ोन काटती रही...
तुमने मैसेज किया —
'सॉरी ! हम जल्दी शादी कर लेंगे'
फिर हमारी शादी हो गयी
हमारे हिस्से में एक बिस्तर और एक छोटा-सा कमरा आ गया
काम से थके-ऊबे हम कमरे में आते तो मैं रोशनी बुझा देती
आहिस्ता-आहिस्ता तुम्हारे होंठ मेरे होंठो की तरफ़ बढ़ते
तभी वह लड़का मेरे कानों में जोर से चीख़ता,
“ये सब यहां नहीं चलेगा!”
उस अनजान लड़के ने सिर्फ़ एक वाक्य बोलकर
उस एहसास को कुचल दिया
जिससे मैं ज़िन्दगीभर चुम्बन लेती और देती...
-नेहा नरुका
Aug 4, 2026
Gods
In the year of ’88
All the gods
Could see
The villagers’ bodies
Spitting as they burned,
But none moved.
Only to light
The cigarettes on their lips
Did they incline their heads
To those fires.
--- Sherko Bekas
translated by Alana Marie Levinson-LaBrosse & Halo Fariq
Translator’s note: On March 16, 1988, as part of Anfal, Saddam Hussein’s military campaign against the Kurds of Iraq, Halabja withstood a chemical-weapons attack. The largest directed against a civilian population in history, it has been recognized as an act of genocide by the Iraqi High Criminal Court
Jul 30, 2026
Palestine
grapes from a vine
under late afternoon
watch their bridal beds
crumble under bombs.
Separated on earth by
different pressures they
will meet again only in
a promised paradise.
They will not be the same.
Shadows will meet shadows.
The new Jerusalem will be
of no consolation for
the one they lost.
Jul 26, 2026
वो भी क्या दिन थे
वो भी क्या दिन थे कि जब इश्क़ लड़ा लेते थे,
प्यार की डोर को चर्ख़ी पे चढ़ा लेते थे,
नौजवानी की पतंगों को उड़ा लेते थे,
धड़क के कंकड़ियाँ संभाल लेते थे,
होंठों पे हंसी, आंखों में आस थी,
हर ग़म को हंसी में उड़ाया करते थे।
--- सागर खय्यामी
Jul 23, 2026
15 बेहतरीन शेर - 24 !!!
1.नहीं नहीं हमें अब तेरी जुस्तुजू भी नहीं तुझे भी भूल गए हम तिरी ख़ुशी के लिए - ज़ेहरा निगाह
2. मुस्तक़िल जूझना यादों से बहुत मुश्किल है, रफ़्ता रफ़्ता सभी घर-बार में खो जाते हैं। - .मुनव्वर राना
3. रंग ख़ुश्बू और मौसम का बहाना हो गया, अपनी ही तस्वीर में चेहरा पुराना हो गया - खालिद गनी
4.ये दस्तूर-ए-ज़बाँ-बंदी है कैसा तेरी महफ़िल में , यहाँ तो बात करने को तरसती है ज़बाँ मेरी - इक़बाल
5. ज़ाहिद शराब पीने दे मस्जिद में बैठ कर, या वो जगह बता दे जहाँ पर ख़ुदा न हो
6. न ख़ुदा ही मिला न विसाल-ए-सनम न इधर के हुए न उधर के हुए, रहे दिल में हमारे ये रंज-ओ-अलम न इधर के हुए न उधर के हुए
7. अगर फ़िरदौस बर-रू-ए-ज़मीं अस्त, हमीं अस्त ओ हमीं अस्त ओ हमीं अस्त
8. सलीक़े से हवाओं में जो ख़ुशबू घोल सकते हैं, अभी कुछ लोग बाक़ी हैं जो उर्दू बोल सकते हैं
9. आतिशे इश्क़ न बुझी, ज़माने ने इंतेहा लाख लिए, वो मयस्सर नहीं अभी, पर जीने को उसकी आरज़ू ही सही !
10. होश आए भी तो क्यों करें, तेरे दीवाने को, एक जाता है तो दो आते हैं समझाने को - होशियार मेरठी
11.रफ़्ता रफ़्ता वो हमारे दिल के अरमाँ हो गए , पहले जाँ फिर जान-ए-जाँ फिर जान-ए-जानाँ हो गए - क़मर जलालाबादी
12. तुम से सदियों की वफ़ाओ का कोई नाता था, तुम से मिलने की लकीरें थीं मेरे हाथों में - सईद राही
13.इक रात हर चराग़ की लौ काट दी गई, और वो भी चुप रहे जिन्हें प्यारी है रौशनी - नोमान शौक़
14.दूसरा मौक़ा सबको मिलता है ताबिश, पहली बाज़ी सबने हारी होती है -ज़ुबैर ताबिश
15.जो डूबना है तो इतने सुकून से डूबो, कि आस-पास की लहरों को भी पता न लगे - क़ैसर-उल जाफ़री
The Grand Quilt
only scraps of beauty, squares of light.
I don’t believe in a quilt that doesn’t also
have patches of sorrow, blocks of ache.
Such pieces are, of course, much harder
to want to stitch in. But it matters
that we do not exclude them.
It matters right now that we don’t pretend
they do not exist.
It matters that we sew every piece
into the grand cloth.
It matters, too,
how we sew these pieces in,
perhaps using our finest silk thread,
perhaps with an elaborate stitch
our grandmother taught us,
or perhaps we must use
a stitch we make up
because no one ever taught us
how to do this most difficult task—
to meet what at first seems unwanted, wrong,
and to incorporate it into the whole
and to do this for as long as we can stitch,
that’s how long.
- Rosemerry Wahtola Trommer
Jul 19, 2026
KAMISHLI¹
what else can I tell you about
other than pain, sadness?
I would have to paint for you
a picture of us here in this city,
have to show you the face
of who is a stranger, driven out
from his very own land,
I would have to draw a country
of frontiers – spikes and guns
between mouth and mouth
between hand and hand –
borders.
Slowly the hours meander
in the darkness of streets, lanes, markets
dragging sorrow, sadness;
hours hung on the trees and the walls,
people wounded by the stabs
of bad luck.
Here, time is a machine
and the police control it.
--- FERHAD SHAKELY
¹Kamishli is a city of Kurdistan in Syria. Because of its closeness to Iraqi Kurdistan, the politically persecuted Iraqi Kurds found refuge there.
Jul 15, 2026
उम्र जल्वों में बसर हो
उम्र जल्वों में बसर हो ये ज़रूरी तो नहीं
हर शब-ए-ग़म की सहर हो ये ज़रूरी तो नहीं
चश्म-ए-साक़ी से पियो या लब-ए-साग़र से पियो
बे-ख़ुदी आठों पहर हो ये ज़रूरी तो नहीं
नींद तो दर्द के बिस्तर पे भी आ सकती है
उन की आग़ोश में सर हो ये ज़रूरी तो नहीं
शैख़ करता तो है मस्जिद में ख़ुदा को सज्दे
उस के सज्दों में असर हो ये ज़रूरी तो नहीं
सब की नज़रों में हो साक़ी ये ज़रूरी है मगर
सब पे साक़ी की नज़र हो ये ज़रूरी तो नहीं
मय-कशी के लिए ख़ामोश भरी महफ़िल में
सिर्फ़ ख़य्याम का घर हो ये ज़रूरी तो नहीं
- ख़ामोश ग़ाज़ीपुरी
Jul 11, 2026
"अंजानी राहों में" — मेरी जान हिन्दुस्तान एलबम से।
अंजानी राहों में तू क्या ढूँढता फिरे
दूर जिसे समझा वो तो पास है तेरे
साँस में हवा, जान में ज़मीन
दिल में खुला आसमान
प्यार है खुदा, प्यार है ख़ुशी
प्यार से है दोनों जहाँ
तेरा यह आशियाना, मेरा भी आशियाना
घूमता रहा दूर तू कहीं, उड़ते बादलों की तरह
कहीं से तुझे आई है सदा, लौट के आ अब ज़रा
तेरा यह आशियाना, मेरा भी आशियाना
वो झिलमिलाती आँखें, वो भोली सी अदा
वो धीरे-धीरे चल के लहराती हवाएँ
हमको ले जाएँ वहाँ, जहाँ हो घर अपना
मेरी यादों में पाया है
आज तो मिलने का दिन है आया, आया...
Jul 7, 2026
You decide
But whenever I think of myself
you appear by my side in the form of a silence
We swallow the light.
A rose garden, think of it, in the middle of the desert.
You touch that place with your wound,
The desert softens somewhat.
At that moment, right at that moment
Like taking a copper tray, hanging it on the wall
you think of me with fresh new eyes, love me.
You create me anew.
Should we name this thing? You decide.
But whenever an alarm clock goes off
here and there in places that I cannot hear,
you become a ringing thing,
Like a nun thinking of renewing her vows,
you say 'Welcome' to the greatness of living.
You give form to water.
Is this what they call surface tension?
With a strange love you open your mouth,
might regret that some things don't work out.
With these eyes that come from
when you first began to love me -
their depth, the burden of meaning -
With these things I say, 'Love me.
- İlhan Sami Çomak
Translated by Caroline Stockford
Jul 2, 2026
क्या ज़रूरी है मोहब्बत में तमाशा होना
क्या ज़रूरी है मोहब्बत में तमाशा होना
जिससे मिलना ही नहीं उससे जुदा क्या होना
ज़िंदा होना तो नहीं हिज्र में ज़िंदा होना
हम इसे कहते हैं होने के अलावा होना
तेरा सूरज के क़बीले से त'अल्लुक़ तो नहीं
ये कहाँ से तुझे आया है सभी का होना
तू ने आने में बहुत देर लगा दी वरना
मैं नहीं चाहता था हिज्र में बूढ़ा होना
क्या तमाशा है कि सब मुझको बुरा कहते हैं
और सब चाहते हैं मेरी तरह का होना
--- अब्बास ताबिश
Jun 28, 2026
It's Also Fine
on a clean pillow
and among our friends.
It’s fine to die, once,
our hands crossed on our chests,
empty and pale,
with no scratches, no chains, no banners,
and no petitions.
It’s fine to have a clean death,
with no holes in our shirts,
and no evidence in our ribs.
It’s fine to die
with a white pillow, not the pavement, under our cheek,
with our hands resting in those of our loved ones,
surrounded by desperate doctors and nurses,
with nothing left but a graceful farewell,
paying no attention to history,
leaving this world as it is,
hoping that, someday, someone else
will change it.
- Mourid Barghouti (Translated by Radwa Ashour)
Publisher: Arc Publications, Todmorden, Lancashire, 2009
Jun 23, 2026
Very Indian Poem in Indian English
I am standing for peace and non-violence.
Why world is fighting fighting
Why all people of world
Are not following Mahatma Gandhi,
I am simply not understanding.
Ancient Indian Wisdom is 100% correct.
I should say even 200% correct.
But modern generation is neglecting-
Too much going for fashion and foreign thing.
Other day I’m reading in newspaper
(Every day I’m reading Times of India
To improve my English language)
How one goonda fellow
Throw stone at Indirabehn.
Must be student unrest fellow, I am thinking.
Friends, Romans, countrymen, I am saying
(to myself)
Lend me the ears.
Everything is coming-
Regeneration, Remuneration, Contraception.
Be patiently, brothers and sisters.
You want one glass lassi?
Very good for digestion.
With little salt lovely drink,
Better than wine;
Not that I am ever tasting the wine.
I’m the total teetotaller, completely total.
But I say
Wine is for the drunkards only.
What you think of prospects of world peace?
Pakistan behaving like this,
China behaving like that,
It is making me very sad, I am telling you.
Really, most harassing me.
All men are brothers, no?
In India also
Gujaraties, Maharashtrians, Hindiwallahs
All brothers
Though some are having funny habits.
Still you tolerate me,
I tolerate you,
One day, Ram Rajya is surely coming.
You are going?
But you will visit again
Any time, any day,
I am not believing in ceremony.
Always I am enjoying your company.
--- Nissim Ezekiel
Jun 18, 2026
15 बेहतरीन शेर - 23 !!!
2. ख़मोशी से मुसीबत और भी संगीन होती है, तड़प ऐ दिल तड़पने से ज़रा तस्कीन होती है - -शाद अज़ीमाबादी
5. 'हफ़ीज़' अपनी बोली मोहब्बत की बोलीन उर्दू, न हिंदी, न हिन्दोस्तानी - हफ़ीज़ जालंधरी
6. क़रार दिल को सदा जिसके नाम से आया, वो आया भी तो किसी और काम से आया - जमाल एहसानी
7 हयात ले के चलो, कायनात ले के चलो, चलो तो सारे ज़माने को साथ ले के चलो - मख़दूम मोहिउद्दीन
8. सब मिरे चाहने वाले हैं मिरा कोई नहीं, मैं भी इस मुल्क में उर्दू की तरह रहता हूँ - हसन काज़मी
Jun 13, 2026
Anthem for Doomed Youth
![]() |
| Teenage Soldiers of WW1, Source: BBC |
What passing-bells for these who die as cattle?
— Only the monstrous anger of the guns.
Only the stuttering rifles' rapid rattle
Can patter out their hasty orisons.
No mockeries now for them; no prayers nor bells;
Nor any voice of mourning save the choirs,—
The shrill, demented choirs of wailing shells;
And bugles calling for them from sad shires.
What candles may be held to speed them all?
Not in the hands of boys, but in their eyes
Shall shine the holy glimmers of goodbyes.
The pallor of girls' brows shall be their pall;
Their flowers the tenderness of patient minds,
And each slow dusk a drawing-down of blinds.
--- Wilfred Owen
Jun 10, 2026
Kya Maloom (Indian Ocean Band)
तीव्र आँधी मृत्युगामी
तीव्र आँधी मृत्युगामी
तीव्र आँधी मृत्युगामी पतालोकम चले
तीव्र आँधी मृत्युगामी पतालोकम चले
धर तिलक की छाप शिखधर तांडव को चले
बाँध घुंगरू मत मगन सुर-ताल अग्नि चढ़े
रक्त रंजित हो धरा रस रूप मंथन करे
रक्त रंजित हो धरा रस रूप मंथन करे
शम की उड़ती धूल शिव का महिमा मंडन करे
Jun 5, 2026
सुभाषितानि - 6 (Subhashitani - 6)
हिंदी अर्थ: श्लोक में चातक पक्षी से संबोधित करते हुए कहा गया है कि वह सावधान रहे क्योंकि आसमान में कई प्रकार के बादल होते हैं। कुछ बादल जीवनदायक वर्षा करते हैं, पर कुछ केवल गर्जते हैं और कुछ भी नहीं देते। इसलिए जो भी तुम्हें मदद या सहारा देगा, उसकी खोज समझदारी से करो और किसी के सामने कमजोर वाणी से याचना न करो।
2. साहित्यसङ्गीतकलाविहीनः साक्षात्पशुः पुच्छविषाणहीनः।
हिंदी अर्थ: जो मनुष्य साहित्य, संगीत और कला से वंचित होता है, वह बिना पूंछ और बिना सींगों वाला साक्षात् पशु के समान होता है। वह घास नहीं खाता हुआ भी जीवित रहता है, यानि यह पशुओं के लिए बड़ी सौभाग्य की बात है।
यह श्लोक भर्तृहरि के नीतिशतकम् से लिया गया है।
3. अश्वं नैव गजं नैव व्याघ्रं नैव च नैव च ।
हिंदी अर्थ: अश्वं (घोड़ा) नहीं, गजं (हाथी) नहीं, व्याघ्रं (बाघ) नहीं, न ही कोई और बड़ा जानवर, बलिदान (बलि) देवता केवल अजापुत्र (बकरी के बच्चे) को देते हैं। अर्थात् देव भी दुर्बलों को हानि पहुँचाते हैं। समाज में या सत्ता व्यवस्था में अकसर ताकतवरों को शक्तिशाली माना जाता है और वे सुरक्षित रहते हैं, जबकि कमजोरों को ही नुकसान और कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
4. सर्वं ज्ञेयं परं सा विद्या यया तु सुखं न विद्यते।
हिंदी अर्थ: काक चेष्टा - कौवे की तरह प्रयासशील और धैर्यवान होना।
बको ध्यानं - बगुले की तरह एकाग्र और ध्यान केंद्रित रखें।
श्वान निद्रा - कुत्ते जैसी नींद लेना अर्थात सतर्क और कम नींद लेना।
अल्पहारी - कम मात्रा में भोजन करना ताकि शरीर हल्का और सक्रिय रहे।
गृहत्यागी - घर की सुविधाओं और आराम की मोह छोड़कर, पढ़ाई पर ध्यान लगाना।
यह पांच गुण एक आदर्श विद्यार्थी के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इनमें मेहनत, एकाग्रता, सतर्कता, संयम, और त्याग शामिल हैं।
Jun 1, 2026
Definitions
were taught them by their
ancestors, Genghis Khan
and Tamerlane.
In 1895 the word
Holocaust was used by missionary
Corwin Shattuck to label the 1895
burning of Armenians in the Urfa cathedral.
These fires leveling
churches with Armenians locked
inside, spread to schools and barns.
Then to neighbors.
Assyrians named it Seifo.
The Greeks, the burning of Smyrna.
The Arabs, Nakba for catastrophe, calamity, disaster.
The Kurds used the words The Anfal.
Africans, apartheid, gypsies, annihilation,
the Syrians, intrafada.
The Jews named the crime by the Nazis, Shoah.
Then the Balkans called it ethnic cleansing.
But the present day Turkish label
for two and a half million lost
Armenians: unavoidable wartime casualties.
May 28, 2026
Samandar Serial Title Song Lyrics (समंदर सीरियल टाइटल सॉन्ग)
के कामिल हुक्मराँ हैं हम
समंदर की हसीन लहरों
के कामिल हुक्मराँ हैं हम
वतन के ज़र्रे ज़र्रे से मोहब्बत
हमको है ऐ दोस्त
वतन के ज़र्रे ज़र्रे से मोहब्बत
हमको है ऐ दोस्त
है मंज़िल जिनकी ठोकर में
वो मीलें कारवाँ हैं हम
है मंज़िल जिनकी ठोकर में
वो मीलें कारवाँ हैं हम
नज़र है जिनकी बाने अर्श पर वो
पासबान हैं हम
समंदर की हसीन लहरों
के कामिल हुक्मराँ हैं हम
समंदर की हसीन लहरों
के कामिल हुक्मराँ हैं हम
May 24, 2026
वाल्मीकि रामायण का प्रथम श्लोक
मां निषाद प्रतिष्ठां त्वमगमः शाश्वतीः समाः।
यत्क्रौंचमिथुनादेकम् अवधीः काममोहितम्॥
अर्थ: हे निषाद (वनवासी या शिकारी), तुम्हें कभी भी प्रतिष्ठा या सम्मान प्राप्त नहीं होगा, क्योंकि तुमने प्रेम-मोह में क्रौंच पक्षी के जोड़े में से एक को मार डाला है।
यह संस्कृत श्लोक वाल्मीकि रामायण के प्रथम सर्ग (बालकाण्ड, श्लोक 15) का है | यह श्लोक महर्षि वाल्मीकि के मुख से एक प्रकार का श्राप स्वरूप निकला था, जब उन्होंने प्रेमी पक्षियों के बीच खिलवाड़ किया गया देखा था। इस श्लोक को रामायण के प्रथम श्लोक के रूप में मान्यता मिली है।
May 21, 2026
मन कस्तूरी रे (Mann Kasturi Re)
पाट ना पाया मीठा पानी
पाट ना पाया मीठा पानी
ओर-छोर की दूरी रे
मन कस्तूरी रे, जग दस्तूरी रे
मन कस्तूरी रे, जग दस्तूरी रे
बात हुई ना पूरी रे
खोजे अपनी गंध ना पावे
चादर का पैबंद ना पावे
खोजे अपनी गंध ना पावे
चादर का पैबंद ना पावे
बिखरे बिखरे छंद सा टहले
दो होवें यह बांध ना पावें
नाचे होके फिरकी लट्टू ओह
नाचे होके फिरकी लट्टू
खोजे अपनी रूड़ी रे
मन कस्तूरी रे, जग दस्तूरी रे
मन कस्तूरी रे, जग दस्तूरी रे
बात हुई ना पूरी रे
उम्र की गिनती हाथ ना आई
पुरखों ने यह बात बताई
उल्टा करके देख सके तो
अंबर भी है गहरी खाई
रेखाओं के पार नज़र को
जिसने फेंका अंधे मन से
सतरंगी बेज़ार का खोला
दरवाज़ा बिन ज़ोर जतन के हे
फिर तो झूमा पागल होके
फिर तो झूमा पागल होके
सर पे डाल फितूरी रे
मन कस्तूरी रे, जग दस्तूरी रे
बात हुई ना पूरी रे
मन कस्तूरी रे, जग दस्तूरी रे
बात हुई ना, बात हुई ना
बात हुई ना पूरी रे
मन कस्तूरी रे, जग दस्तूरी रे
नोट: मसान फिल्म समीक्षा
May 19, 2026
Lyrics Raja Shivaji Anthem 'Chhatrapati'
हे, हर-हर-हर महादेव शिवशंकर
सह्यगिरी शिखरावर आले
हे, सळ-सळ-सळ रणकंटक तलवारी
वज्रमूठ सरसावून भाले
तू तेजःपुंज झुंजार, चेतवून अंगार
भेदलास अंधार सारा
तू अर्थ रामराज्याचा, हिंदवी स्वराज्याचा
एकमेव आराध्य झाला
दुष्ट दुर्जनांसी संहारले (हे)
पातशाहीला तू ललकारले (हे)
एक नव्या पर्वाची एकजूट करण्यासी
एक छत्र छाया आधार दे
एक शस्त्र, एक अस्त्र शूरवीर छत्रपती
धैर्यशील, सत्वशील, धर्मनिष्ठ छत्रपती
लाख मराठ्यांची तू आग रे (हे-हे)
माय भवानीचा तू वाघ रे
कीर्तीवंत, पुण्यवंत, नीतीवंत छत्रपती
अद्वितीय क्षत्रियकुलावतंस छत्रपती
लाख मराठ्यांची तू आग रे
माय भवानीचा तू वाघ रे
देव, देश, धर्माची, सर्वश्रेष्ठ कर्माची
आन घेतली रक्त सांडले जरी
अंधकार शतकांचा भस्मसात करण्यासी
एक तप्त ज्वाला ही पेटली उरी
भक्ती रूप संतांचा, साधू अन महंतांचा
हात जोडूनी मान राखलास तू
जर कुणी स्वराज्यावर वाकडी नजर केली
हात-पाय चौरंगी छाटलास तू
मोडून जात-पात रयतेसी देई साथ
त्यांचा सदैव कैवारी झाला
झाले बहुत राजे, जगतात नाव गाजे
लाखात एक शिवराय माझा
हात तुझा पाठीशी, वार झेलू छातीशी
ढाल तुझी होण्याचा मान दे
एक शस्त्र, एक अस्त्र शूरवीर छत्रपती
धैर्यशील, सत्वशील, धर्मनिष्ठ छत्रपती
लाख मराठ्यांची तू आग रे (हे-हे)
माय भवानीचा तू वाघ रे
कीर्तीवंत, पुण्यवंत, नीतीवंत छत्रपती
अद्वितीय क्षत्रियकुलावतंस छत्रपती
लाख मराठ्यांची तू आग रे
माय भवानीचा तू वाघ रे
मावळ-मावळ, पाठीशी बारा मावळ
देवाला शोधाया धावून आलं राऊळ
देवा रं देवा, सारं पावन झालं रं
आरती ओवाळा माझं राजं आलं रं
तोरण बांधून साजरं हे करू औक्षण कुंकुम भाळावर
शिवबांना डोळा पाहीन अन डोळ सारं पाणावलं
साष्टांग दर्शनाचा ह्या देवपूजनाचा
हा दैवयोग भाग्यात यावा
ध्वज उंच-उंच भगवा हा, वंदनीय भगवा हा
आसमंत भगवा कराया
जन्म सार्थ करण्यासी प्रार्थना ही चरणासी
प्राण अर्पण्याचा सन्मान दे
एक शस्त्र, एक अस्त्र शूरवीर छत्रपती
धैर्यशील, सत्वशील, धर्मनिष्ठ छत्रपती
लाख मराठ्यांची तू आग रे (हे-हे)
माय भवानीचा तू वाघ रे
कीर्तीवंत, पुण्यवंत, नीतीवंत छत्रपती
अद्वितीय क्षत्रियकुलावतंस छत्रपती
लाख मराठ्यांची तू आग रे
माय भवानीचा तू वाघ रे
--- अजय-अतुल
Hindi Translation
हे, हर-हर-हर महादेव शिवशंकर
सह्यगिरि की शिखर-भूमि पर आए
हे, सुस्सलाती रणकंटक तलवारें
वज्रमूठ कसकर भाले
तुम तेजस्वी, पराक्रमी, अंगार-सा जोश जगाने वाले
तुमने सारा अंधकार चीर दिया
तुम रामराज्य के अर्थ हो, हिंदवी स्वराज्य के प्रतीक हो
और तुम ही एकमात्र आराध्य बन गए
दुष्टों और दुराचारियों का संहार किया
सत्ता को ललकार दिया
एक नए युग को एकजुट करने के लिए
एक ही छत्र की छाया और सहारा दो
एक ही शस्त्र, एक ही अस्त्र, वीर छत्रपति
धैर्यवान, सत्वशील, धर्मनिष्ठ छत्रपति
लाखों मराठों की तुम ज्वाला हो
माँ भवानी के तुम शेर हो
कीर्तिवान, पुण्यवान, नीतिवान छत्रपति
अद्वितीय क्षत्रिय कुल के आभूषण छत्रपति
लाखों मराठों की तुम ज्वाला हो
माँ भवानी के तुम शेर हो
देव, देश और धर्म के लिए
सर्वश्रेष्ठ कर्म के लिए
यदि रक्त भी बहाना पड़ा, तो भी स्वीकार किया
अंधकार के शतकों को भस्म करने के लिए
एक तपती ज्वाला हृदय में प्रज्वलित हुई
भक्ति-रूप संतों, साधुओं और महंतों का
तुमने हाथ जोड़कर सम्मान रखा
यदि किसी ने स्वराज्य पर टेढ़ी नजर डाली
तो तुमने उसके हाथ-पाँव काट दिए
जात-पात तोड़कर रयत का साथ दिया
और सदा उनका रक्षक बन गया
बहुत से राजा हुए, जिनका नाम दुनिया में गूंजा
मेरे शिवराय तो लाखों में एक हैं
तुम्हारा हाथ मेरी पीठ पर रहे, मैं सीना तानकर वार सह लूँ
तुम्हारी ढाल बनने का मुझे सम्मान दो
एक ही शस्त्र, एक ही अस्त्र, वीर छत्रपति
धैर्यवान, सत्वशील, धर्मनिष्ठ छत्रपति
लाखों मराठों की तुम ज्वाला हो
माँ भवानी के तुम शेर हो
कीर्तिवान, पुण्यवान, नीतिवान छत्रपति
अद्वितीय क्षत्रिय कुल के आभूषण छत्रपति
लाखों मराठों की तुम ज्वाला हो
माँ भवानी के तुम शेर हो
मावळ-मावळ, पीछे बारह मावळ
देव को खोजने दौड़कर रावल आया
हे देव, सब कुछ पावन हो गया
मेरे राजा आए, उनकी आरती उतारो
तोरण बाँधकर इसे उत्सव बनाएं,
माथे पर कुंकुम से औक्षण करें
शिवबाओं को आँखों से देखूँ तो
सब कुछ आँसुओं से भर जाए
इस साष्टांग दर्शन और देवपूजन का
यह सौभाग्य मेरे भाग्य में आए
यह ऊँचा-ऊँचा भगवा ध्वज, यह वंदनीय भगवा
आसमाँ तक भगवा कर दे
जन्म को सार्थक करने के लिए चरणों में प्रार्थना है
प्राण अर्पण करने का सम्मान दो
एक ही शस्त्र, एक ही अस्त्र, वीर छत्रपति
धैर्यवान, सत्वशील, धर्मनिष्ठ छत्रपति
लाखों मराठों की तुम ज्वाला हो
माँ भवानी के तुम शेर हो
कीर्तिवान, पुण्यवान, नीतिवान छत्रपति
अद्वितीय क्षत्रिय कुल के आभूषण छत्रपति
लाखों मराठों की तुम ज्वाला हो
माँ भवानी के तुम शेर हो
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May 17, 2026
क्यों खोये खोये चांद की (Kyon khoye khoye chand ki)
आज शब जो चांद ने है रूठने की थान ली
गर्दिशो में है सितारे बात हमने मान ली
अंधेरी शाम जिंदगी को समझ थी नहीं कहीं
कि एक आज हाथ थमलो की एक हाथ की कमी खाली
क्यों खोए खोए चांद की फिराक में तलाश में उदास है दिल
क्यों अपने आप से खफा खफा जरा ज़रा सा नाराज़ है दिल
ये मंज़िलें भी खुद ही तय करें,
ये फ़सलें भी खुद ही तय करें,
क्यूं तो रस्तों पे फिर सहम सहम
संभल संभल ले चलता है ये दिल
क्यों खोये चाँद की फिराक में तलाश में उदास है दिल
जिंदगी सवालो के जवाब ढूंढने चली
जवाब में सवालों की एक लंबी सी लड़ी मिली
सवाल ही सवाल है सूझती नहीं गली
कि आज हाथ थाम लो एक हाथ की कमी खाली
जी में आता है
मुर्दा सितारा नोच लो
इधर भी नोच लो
उधर भी नोचलो
एक दो का जिक्र क्या
में सारे नोच लो
उधर भी नोच लो
सितारे नोच लो
में सारे नोच लो]2
क्यों तू आज
इतना वैसा है मिजाज में मजा है ऐ गम-ए-दिल
क्यों अपने आप से खफा खफा जरा जरा सा नाराज है दिल
ये मंजिलें भी खुद ही ताई करें,
ये फ़सलें भी खुद ही ताई करें,
क्यूं तो रस्तों पे फिर सहम सहम
संभल ले चलता है ये दिल
दिल को समझना है तो क्या आसान है
दिल तो फितरत से सुन लो ना बेईमान है
ये खुश नहीं है जो मिला
बस मांगता ही है चला
जानता है हर लगी का
दर्द ही है बस एक सिला
[जब कभी ये दिल लगा
दर्द ही हमें मिला
दिल की हर लगी का
सुनलो दर्द ही एक सिला]2
क्यों नए नए से दर्द की फिराक में तलाश उदास है दिल
क्यों अपने ऐप से खफा खफा जरा जरा सा नाराज है दिल
ये मंजिल भी खुद ही ताई करें
ये फासले भी खुद ही ताई करें
क्यों तो रस्तों पे फिर सहम सहम
संभल ले चलता है ये दिल
क्यों खोए खोए चांद की फिराक में तलाश में उदास है दिल
क्यों अपने आप से खफा खफा जरा जरा सा नाराज है दिल
ये मंजिलें भी खुद ही ताई करें, ये फासले भी खुद ही तय करें,
ये फासले भी खुद ही तय करें
क्यों तो रस्तों पे फिर सहम सहम
संभल ले चलता है ये दिल
--- स्वादानंद किरकिरे
May 13, 2026
भारत की वीर‑परंपरा: राजस्थानी, मराठी और बुंदेली लोक‑दोहों का अद्भुत संग्रह
May 9, 2026
Snowdrops
what despair is; then
winter should have meaning for you.
I did not expect to survive,
earth suppressing me. I didn't expect
to waken again, to feel
in damp earth my body
able to respond again, remembering
after so long how to open again
in the cold light
of earliest spring--
afraid, yes, but among you again
crying yes risk joy
in the raw wind of the new world.
--- Louise Glück
May 5, 2026
15 बेहतरीन शेर - 22 !!!
2. हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है, बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा - अल्लामा इक़बाल
3. उस पे पत्थर खाके क्या बीती ज़फ़र देखेगा कौन, फल तो सब ले जाएँगे ज़ख़्मे-शजर देखेगा कौन - ज़फ़र गोरखपुरी
4. देख ज़िंदाँ से परे रंग-ए-चमन, रक़्स करना है तो फिर पाँव की ज़ंजीर न देख। - मजरूह सुल्तानपुरी
5. कलकत्ते का जो ज़िक्र किया तू ने हम-नशीं, इक तीर मेरे सीने में मारा कि हाए हाए - मिर्ज़ा ग़ालिब
6. फूल तो दो दिन बहारे-जा-फ़िज़ा दिखला गए, हसरत उन गुंचों पे हैं जो बिन खिले मुरझा गए - ज़ौक़
7. वो ज़हर देता तो सब की निगह में आ जाता, सो ये किया कि मुझे वक़्त पे दवाएं न दीं - अख़्तर नाज़मी
9. एक से एक जुनूँ का मारा इस बस्ती में रहता है, एक हमीं हुशियार थे यारो एक हमीं बद-नाम हुए - इब्न-ए-इंशा
10. किस तरह जमा कीजिए अब अपने आप को, काग़ज़ बिखर रहे हैं पुरानी किताब के - -आदिल मंसूरी
11. वो दुश्मनी से देखते हैं, देखते तो हैं, मैं शाद हूँ की हूँ तो किसी की निगाह में - अमीर मीनाई
12. बाद मुद्दत के ये ऐ 'दाग़' समझ में आया, वही दाना है कहा जिसने न माना दिल का - दाग़ देहलवी
13. गो बहुत कुछ रंज यारान ए वतन से था हमेंआँख में आंसू मगर वक़्त ए सफ़र आ ही गया - अकबर इलाहाबादी,
15. मिरा ज़मीर बहुत है मुझे सज़ा के लिए, तू दोस्त है तो नसीहत न कर ख़ुदा के लिए - शाज़ तमकनत
May 2, 2026
अथ नेता उवाच
देश को बाईसवीं सदी में पहुंचाया जाएगा.
अपना देश महान है, आप गर्व करेंगे सुन कर,
अभी आंकड़ों का गणित, समझाया जाएगा.
दुखदर्द, गरीबी सब हवा हो जाएंगी,
आप को आश्वासनों का जाम पिलाया जाएगा.
सुखे, बाढ़ की समस्या से चितित हैं हम,
अभी हवाई सर्वेक्षण करवाया जाएगा.
कुंआ खोदने की आप नाहक जिद न करें,
आग लगने तो दीजिए, फिर देखा जाएगा.
देशद्रोहियों को राह पर लाने की कोशिश करेंगे,
उन्हें देशभक्ति का रिकार्ड सुनवाया जाएगा.
कोई और परेशानी है तो पी. ए. को लिखवा दें,
आप के क्षेत्र में दोबारा पांच वर्ष बाद आया जाएगा.
- प्रदीप शर्मा
Apr 29, 2026
Title Song Lyrics of Daanasur (Denver the last Dinosaur)
छिपकली के नाना हैं,
छिपकली के हैं ससुर,
दानासुर दानासुर दानासुर!
छिपकली के नाना हैं,
छिपकली के हैं ससुर,
दानासुर दानासुर दानासुर!
तानपुरे के नीचे दो मंजीरे जैसे पाँव,
ना कुत्ते की भौं भौं, ना बिल्ली की म्याँऊ,
सुर है तराने में, धिन तन न ना,
दानासुर दानासुर दानासुर
दानासुर दानासुर दानासुर!
--- गुलज़ार
Apr 25, 2026
Qasida - Kurdêkî Koyî - Kurdish Poem
As he said that, I was so enraged I was about to lose my faith.
I said to him you have remained ignorant; I was about to punch him in the face.
What is wrong with Kurdish? Is it not God’s creation, the language of truth?
See, Armenian has no eloquence, and Doomsday is not going to be in Armenian,
Yet with their limping language and crooked writing, but with books and journals,
They are counted among the great nations, and about to call themselves a state.
How is Kurdish different from Farsi? Why is Persian the right language and Kurdish wrong?
In fact, if you notice you would realize who has stolen from whom,
Because we are older than they are, according to the history books of all religions.
They had this mentality, the people of Sulaymaniyah and Koye,
That they became the masters of Persian and Arabic, some even reached Fakhre Razi’ status
--- Haji Qadiri Koyi
*Fakhr ad-Din al-Razi was a famous Persian theologian and philosopher in the twelfth century.
Context: In a qaside “Kurdêkî Koyî” he tells the details of his encounter with a person from Koye, his hometown, who complains that Şêx Kake Ehmed translates the Quran and the prophet’s sayings (hadith) into Kurdish. Upon hearing his complaint Hacî Qadir becomes furious and comments.
Apr 20, 2026
Qasida: “Odeba Cake” - Kurdish Poem
Except for teaching laziness and collecting properties and wealth.
---
Haji Qadiri Koyi
Apr 17, 2026
15 बेहतरीन शेर - 21 !!!
2. हमारे बस में था ही क्या हवा पे हम सवार थे, वहाँ वहाँ गए जहाँ हवा उड़ा के ले गई -अज़्म शाकिरी
3. क्या क्या हुआ है हम से जुनूँ में न पूछिए , उलझे कभी ज़मीं से कभी आसमाँ से हम - असरार-उल-हक़ मजाज़
4. अब तुमसे रुख़सत होता हूँ आओ सम्भालो साज़े-गज़ल नये तराने छेड़ो, मेरे नग्मों को नींद आती है - रघुपति सहाय 'फ़िराक़'
5. तुझे किस बात का ग़म है वो इतना पूछ लें मुझ से वो इतना पूछ लें मुझ से तो फिर किस बात का ग़म है मुझ से - मुशताक़ हुसैन ख़ान हाशमी मुश्ताक़
6. मुझको तो होश नहीं, तुमको ख़बर हो शायद, लोग कहते हैं कि तुमने मुझे बर्बाद किया - जोश मलीहाबादी
7. मैं तो ग़ज़ल सुना के अकेला खड़ा रहा, सब अपने अपने चाहने वालों में खो गए - कृष्ण बिहारी नूर
9. दाग़ दुनिया ने दिए ज़ख़्म ज़माने से मिले, हम को तोहफ़े ये तुम्हें दोस्त बनाने से मिले - कैफ़ भोपाली
10. ख़ुशियाँ देते देते अक्सर खुद ग़म में मर जाते हैं, रेशम बुनने वाले कीड़े रेशम में मर जाते हैं - ख़ुशबीर सिंह शाद
11. कुछ तो तेरे मौसम ही मुझे रास कम आये और कुछ मेरी मिट्टी में बग़ावत भी बहुत थी - परवीन शाकिर
12. रातें परदेस की डरता था कटेंगी कैसे, मगर आँगन में सितारे थे वही घर वाले - राही मासूम रजा़
13. हम को नीचे उतार लेंगे लोग, इश्क़ लटका रहेगा पंखे से - ज़िया मज़कूर
14. मैखाने के क़रीब थी मस्जिद भले को, दाग़ हर एक पूछता था कि “ हज़रत इधर कहाँ? - दाग़
Apr 13, 2026
Ice People
Ice people
They're just made of ice
They don't treat
Their fellow man very nice
You wear your hair long
As Jesus did
They'll crucify you
You're not part of the establishment
You stand up for your rights
They'll call you a fool
If you don't go to war
You're not living by the golden rule
Ice people
They're just made of ice
They don't treat
Their fellow man very nice
The red man lives and dies on the reservation
And the black man just lives anywhere he can
And the poor white man he doesn't live any better
He can't say I'm red, I'm black, I'm yellow, I'm tanned
We're all caught up together
Like the buffalo on the plains
We're just shooting sport for ice people
We're just a game
Ice people
They're just made of ice
They don't treat
Their fellow man very nice
Ice people
They're just made of ice
No, they don't treat
Their fellow man very nice
Ice people
They're just made of ice
They don't treat
Their fellow man very nice
Apr 8, 2026
सुभाषितानि - 5 (Subhashitani -5)
अर्थ: संकट या कठिनाइयों के समय व्यक्ति का असली स्वभाव सामने आ जाता है जो उसके सभी गुणों से बढ़कर होता है।
2. विद्या विवादाय धनं मदाय, शक्तिः परेषाम् परिपीडनाय | खलस्य, साधोः विपरीतं एतत्; ज्ञानाय दानाय च रक्षणाय ||
अर्थ: विद्या (ज्ञान) दुष्ट लोगों के लिए विवाद के लिए होती है, धन (धन संपत्ति) घमंड के लिए होता है, और शक्ति दूसरों को पीड़ित करने के लिए होती है। परंतु सज्जन लोगों के लिए विद्या ज्ञान प्राप्ति के लिए, धन दान करने के लिए, और शक्ति दूसरों की रक्षा करने के लिए होती है।
3. न तेन वृद्धो भवति येनास्य पलितं शिरः |
अर्थ: यह है कि केवल उम्र बढ़ने से या बाल सफेद होने से कोई व्यक्ति बड़ा या बुद्धिमान नहीं माना जाता। असली बढ़ेपन का पैमाना ज्ञान और बुद्धिमत्ता है। जो युवा होते हुए भी सीखते हैं, ज्ञान अर्जित करते हैं, वही सच्चे वृद्ध और सम्मानित माने जाते हैं।
4. काक: कृष्ण: पिक: अपि कृष्ण: को भेद: काकपिकयो: | वसंत काले सम्प्राप्ते काक: काक: पिक: पिक: ||
अर्थ: कौआ और कोयल दोनों काले रंग के होते हैं और देखने में समान लगते हैं, लेकिन जब वसंत ऋतु आ जाती है तो उनकी असली पहचान उनके स्वर से हो जाती है। कौआ अपनी कर्कश आवाज करता है जबकि कोयल मधुर गीत गाती है।
5. शैले शैले न माणिक्यम् मौक्तिकम् न गजे गजे।
अर्थ: हर पर्वत पर हीरा (माणिक्य) नहीं मिलता, हर हाथी के मस्तक में मोती (मौक्तिक) नहीं होता। सभी जगह सज्जन लोग (साधु) नहीं मिलते और हर वन में चंदन वृक्ष भी नहीं होते। ये चीजें दुर्लभ और मूल्यवान होती हैं।
6. मूर्खो अपि शोभते तावत् सभायां वस्त्रवेष्टित: ।
अर्थ: मूर्ख व्यक्ति भी अच्छे वस्त्र पहनकर सभा में तब तक शोभित होता है (अच्छा लगता है), जब तक वह कुछ नहीं बोलता। मूर्ख उसी समय तक शोभा पाता है, जब तक वह चुप रहता है.
7. यत्तदग्रे विषमिव परिणामे अमृतोपमम्,
अर्थ: जिस सुख का प्रारंभ विष (जहर) जैसा कष्टदायक होता है, पर परिणाम अमृत के समान सुखद होता है, वही सात्त्विक सुख कहलाता है। यह सुख आत्मबुद्धि के प्रसाद से उत्पन्न होता है। जो सुख विषय (इंद्रिय) के संयोजन से उत्पन्न होता है, उसका प्रारंभ तो अमृत के समान सुखद होता है, लेकिन परिणाम विष (जहर) के समान कष्टदायक होता है, उसे राजसिक सुख कहा गया है।
Apr 4, 2026
अभी साज़-ए-दिल में तराने बहुत हैं
अभी ज़िंदगी के बहाने बहुत हैं
ये दुनिया हक़ीक़त की क़ाइल नहीं है
फ़साने सुनाओ फ़साने बहुत हैं
तिरे दर के बाहर भी दुनिया पड़ी है
कहीं जा रहेंगे ठिकाने बहुत हैं
मिरा इक नशेमन जला भी तो क्या है
चमन में अभी आशियाने बहुत हैं
नए गीत पैदा हुए हैं उन्हीं से
जो पुर-सोज़ नग़्मे पुराने बहुत हैं
दर-ए-ग़ैर पर भीक माँगो न फ़न की
जब अपने ही घर में ख़ज़ाने बहुत हैं
हैं दिन बद-मज़ाक़ी के 'नौशाद' लेकिन
अभी तेरे फ़न के दिवाने बहुत हैं
Mar 31, 2026
हिंदी होने पर नाज़ जिसे कल तक था
अपनी महफ़िल का रिंद पुराना आज नमाज़ी बन बैठा।
महफ़िल में छुपा है कैसे—हज़्रत! दीवाना कोई सहरा में नहीं,
पैग़ाम-ए-जुनूँ जो लाता था, इक़बाल वो अब दुनिया में नहीं।
ऐ मुतरिब! तेरे तरानों में अगली-सी अब वो बात नहीं,
वो ताज़गी-ए-तख़य्युल नहीं, बेसाख़्तगी-ए-जज़्बात नहीं।
— आनंद नारायण ‘मुल्ला’ (शेर-ओ-शायरी से)
“अल्लामा इक़बाल जैसे परिपक्व और विशाल हृदय वाले व्यक्ति को अचानक साम्यवाद के दलदल में फँसते देखकर लोग दुख और चिंता से कराह उठे।”
Mar 27, 2026
बहादुर शाह ज़फ़र और हिंदुस्तान की तलवार: ऐतिहासिक शायरी की कहानी
कहा जाता है कि विद्रोह के बाद, जब अंग्रेज़ अधिकारी ज़फ़र को पकड़ने आए, उन्होंने उन्हें तंज़ के साथ कहा:
“दमदमे में दम नहीं है ख़ैर मांगो जान की.. ऐ ज़फ़र ठंडी हुई अब तेग हिंदुस्तान की।”
(अब तुम्हारे पास कोई ताक़त नहीं, ज़फ़र। हिंदुस्तान की तलवार भी अब नुकीली नहीं रही।)
लेकिन बहादुर शाह ज़फ़र की शायरी में छिपी जज़्बात और आत्मसम्मान ने जवाब में इतिहास रच दिया। उन्होंने शेर कहा:
“ग़ाज़ियों में बू रहेगी जब तलक ईमान की, तख़्त ऐ लंदन तक चलेगी तेग हिंदुस्तान की।”
(भारत की तलवार और उसका साहस कभी कम नहीं होगा, और ईमान की शक्ति के साथ यह London तक अपनी गूँज पहुंचाएगी।)
इस जवाब से साफ़ झलकता है कि ज़फ़र का मनोबल और उनका देशभक्ति का जज़्बा अंग्रेज़ों की धमकियों से कम नहीं हुआ। यह सिर्फ़ एक शेर नहीं, बल्कि उस युग की एक प्रेरणादायक कहानी है, जो यह बताती है कि कठिन परिस्थितियों में भी आत्मसम्मान और विश्वास कभी नहीं मरते।
Mar 23, 2026
15 बेहतरीन शेर - 20 !!!
1. सरजमीने-हिंद में अकवामे आलम के फ़िराक़, कारवां आते गए हिंदोस्ताँ बनता गया - फ़िराक़ गोरखपुरी
2. कुछ मेरे बाद और भी आएंगे क़ाफ़िले, कांटे ये रास्ते से हटा लूं तो चैन लूं। -तसव्वुर किरतपुरी
3. इन्हीं ज़र्रों से होंगे कल नये कुछ कारवां पैदा, जो ज़र्रे आज उड़ते हैं ग़ुबारे-कारवां हो कर। - शफ़क टौंकी
4. इस शहर में जीने के अंदाज़ निराले हैं, होठों पे लतीफे हैं आवाज़ में छाले हैं। - जावेद अख़्तर
5. जिनके आँगन में अमीरी का शजर लगता है, उसका हर ऐब ज़माने को हुनर लगता है - अंजुम रहबर
6. ऐ दिल वो आशिक़ी के फ़साने किधर गए, वो उम्र क्या हुई वो ज़माने किधर गए - अख़्तर शीरानी
7. सियाह रात नहीं लेती नाम ढलने का, यही तो वक़्त है सूरज तेरे निकलने का - शहरयार
8. नतीजा एक ही निकला, कि थी क़िस्मत में नाकामी, कभी कुछ कह के पछताये, कभी चुप रह के पछताये। - आरज़ू लखनवी
9. हमारी ज़िन्दगी के सानहे भी क्या अजब गुज़रे, उसी पर मर मिटे जिस से हमें बेज़ार होना था - मनीष शुक्ला
10. अब ज़मीं पर कोई गौतम न मोहम्मद न मसीह, आसमानों से नए लोग उतारे जाएँ - अहमद फ़राज़
11. हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो - जौन एलिया
12. दफ़'अतन घटा की आड़ से चाँदनी कशीद हो गई, ज़ुल्फ़ उस के चेहरे से हटी और मेरी 'ईद हो गई - आलम निज़ामी
13. जुर्रत से हर नतीजे की परवाह किये बगैर, दरबार छोड़ आया हूँ सजदा किये बगैर ! - मुनव्वर राना
14. ये हमसे कौन दिन भर की कमाई छीन लेता है, उतर कर अपनी मसनद से चटाई छीन लेता है - सलाहउद्दीन नैयर
15. अपने बच्चों को मैं बातों में लगा लेता हूं, जब भी आवाज़ लगाता है खिलौने वाला - राशिद राही
Mar 20, 2026
तुलसीदास के 14 कालजयी दोहे
1. विनय न मानत जलधि जड़, गए तीनि दिन बीति।
बोले राम सकोप तब, भय बिनु होइ न प्रीति॥
भावार्थ: जब तीन दिन तक विनम्रता से कहने पर भी समुद्र नहीं माना, तब राम को क्रोध आया। तुलसीदास कहते हैं कि बिना भय के प्रेम और अनुशासन नहीं बनता।
2. तुलसी साथी विपत्ति के, विद्या विनय विवेक।
साहस सुकृति सुसत्यव्रत, राम भरोसे एक॥
भावार्थ: विपत्ति के समय विद्या, नम्रता, विवेक, साहस, अच्छे कर्म, सत्य और राम पर भरोसा—यही सच्चे साथी होते हैं।
3.परहित सरिस धरम नहि भाई, पर पीड़ा सम नहि अधमाई।
भावार्थ: दूसरों का भला करने जैसा कोई धर्म नहीं, और दूसरों को कष्ट देना सबसे बड़ा पाप है।
4. धीरज धरम मित्र अरु नारी, आपद काल परखिए चारी।
5. समरथ को नहिं दोष गोसाईं, रवि पावक सुरसरि की नाईं।
भावार्थ: जो समर्थ और महान होता है, उस पर दोष नहीं लगता—जैसे सूर्य, अग्नि और गंगा सबको शुद्ध करते हैं।
6. जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी।
भावार्थ: मनुष्य की भावना जैसी होती है, उसे भगवान भी वैसे ही दिखाई देते हैं।
7. हरि अनंत हरि कथा अनंता, कहहिं सुनहिं बहुविधि सब संता॥
8. होइहि सोइ जो राम रचि राखा, को करि तर्क बढ़ावै साखा॥
भावार्थ: जो राम ने रच दिया है, वही होकर रहता है। तर्क-वितर्क करके कोई भी सत्य को बदल नहीं सकता।
Mar 16, 2026
IT WAS AFTERNOON¹
It was afternoon
the sky dressed as spring.
One moment more
and it would have conducted
the dance of death in the city.
It was afternoon.
In no hurry the children
went down the street.
Like gazelles
they came and went
in twos
in threes.
They part
they mix
happily.
It was afternoon.
Oppressive clouds of death
descend on the city
18 minutes
earthquake
fear, silence.
Bodies red with blood
reshape flowerbeds.
Mar 14, 2026
MOUNTAINS
A prisoner condemned to life.
Chains round his ankles, handcuffs,
in a narrow jail cell.
He dreams like horsemen, the horses and the wind.
He dreams like babies, the stars and the grass.
I, too, like the prisoner,
dream every night of a strength
I bring to the mountains
and they to me.
Mar 11, 2026
शेर-ओ-शायरी - गीताप्रेस की किताब "एक लोटा पानी"
1. आईना! मुँह पर ही कहता है—साफ-साफ। सच यह है-जो साफ होता है, सफा कहता है।।
2. सँभल कर बैठना, जलवा मुहब्बत देखने वाले। तमाशा खुद न बन जाना तमाशा देखने वाले॥
3. खुदाने हुस्न नादानोंको, बख्सा जर रजीलों को। अक्लमंदों को रोटी खुश्क, औ हलुवा वखीलों को ॥
4. एक बुतको चूमनेको शेखजी काबा गये। गरचे-हर बुत काबिले बोसा है इस बुतखानेमें॥
5. नजर से सर कलम कर दे, उसे शमशीर कहते हैं। निशाने में जो लग जाये, उसीको तीर कहते हैं॥
6. न कह गया, न सुन गया और न नाम बता गया। मैं क्या कहूँ कि मेरे दिल, किसने चुरा लिया
7. है इबादत की इबादत है, मुहब्बत की मुहब्बत है। मेरे माशूक की सूरत खुदा से मिलती जुलती है॥
8. शेखजीसे मैंने पूछी, मंजिल जब यार की। बुतकदे की और चुपकेसे, इशारा कर दिया॥
9. बहुत मुश्किल निभाना है मुहब्बत अपने दिलवर से। उधर मूरत अमीराना इधर हालत फकीराना॥
10. चाँद बदली में छिपा है मुझे मालूम न था। सकल इनसान में खुदा है, मुझे मालूम न था॥
11. बुतपरस्ती मेरे हकमें हकपरस्ती हो गयी। दे दिया तेरा पता कुछ, यारकी तसबीरने॥
12. मुहब्बत करो और निभा लो तब पूछना, कि दुश्चारियाँ हैं कि आसानियाँ हैं?
13. समझकर अपना दीवाना, वह मुझसे मुँह छिपाते हैं। हकीकत यों है, दरपरदा, मुहब्बत आजमाते हैं॥
14. शिकाइत किस जबाँसे मैं करूँ उनके न आनेकी। यही अहसान क्या कम है कि मेरे दिलमें रहते हैं॥
15. दुनियाँ इक इफसाना कहने को थे मगर सोचा। दुनियाँ है खुद इफसाना, इफसाने से क्या कहना?
16. रहमान के फिरश्ते' गो हैं बहुत मुकद्दस? शैतानही की जानिब, लेकिन मिजोरटी है॥
Mar 7, 2026
Agirê Evîndarî (The Fire of Love)
I cannot sleep—when will I sleep without you?
The home has turned into a prison where I suffer,
Until dawn, darkness and sorrow surround me.
Your presence—once a single heartbeat in mine—
Oh heart, does no one compare to that one?
Why constantly does my heart return to the yearning for them?
At times I felt their hands upon my head—
So many dreams and visions came with that closeness.
And I stayed awake, oh heart—why did the night vanish?
Did I kill them, oh heart—why did the night vanish?
Get up quickly, oh heart, bring them back,
We embraced—oh heart, why did the night vanish?
Mar 3, 2026
अल्लामा इक़बाल की शायरी: इस्लाम, जम्हूरियत और आत्मबल का दर्शन
अल्लामा मुहम्मद इक़बाल केवल शायर नहीं थे, वे एक विचारक, दार्शनिक और आत्मचेतना के कवि थे। उनकी शायरी व्यक्ति, समाज और सत्ता—तीनों से सवाल करती है। बाल-ए-जिब्रील में इक़बाल की आवाज़ सबसे अधिक बेबाक और वैचारिक रूप में सामने आती है।
Feb 28, 2026
Answer
I wrote a long complaint to God
Before everyone,
I read it to a tree.
The tree cried.
Said, “All right, who will deliver it?
If you are expecting me to take it,
I won’t reach Gods throne.
Late that night,
My angelic poem, dressed for mourning,
Said, “Don’t worry.
I will take it to the heights
Of the atmosphere.
But I won’t promise
He will take the letter Himself.
You know, the Great God
Who can see Him?
I said, “Thank you. Fly.”
My angelic inspiration flew
With my complaint.
The next day, it was returned.
God’s fourth secretary down,
A man by the name of Obaid,
At the bottom
Of the very same complaint,
Wrote to me in Arabic:
“Idiot, make it Arabic.
People here don’t know Kurdish.
They won’t take it to God.”
--- Sherko Bekas
translated by Alana Marie Levinson-LaBrosse & Halo Fariq
*Translator’s note: On March 16, 1988, as part of Anfal, Saddam Hussein’s military campaign against the Kurds of Iraq, Halabja withstood a chemical-weapons attack. The largest directed against a civilian population in history, it has been recognized as an act of genocide by the Iraqi High Criminal Court.
Feb 25, 2026
Veil (1941)
Like a prisoner and so passionate, it melted the heart
Such voice and shape no one has heard or seen before
she tore at the depths of the heart's old scab
She said: This veil has not only covered our face,
Against us, no rights, forgotten names
Never have we had a day when we freely demanded our right
for our own fate, gone to the battlefield
From beginning to end, this black veil was wrong
It became our obstacle, disabled us from entering the community of men
Pull it off, please tear it away, throw it into the furnace of fire
It's a pity that at the light of day, you drag yourselves down into the darkness of night
The oppression of these traitors, it left no just judgement
They put our sex under the spell of men's pleas
Why did our lot become a shroud, both in life and in judgement?
Here black, there white, it’s sewn unto our bodies
Want to know, ask your elders, those who came before you
Who ever saw veil over Kurdistan's woman’s face
When did the veil become a symbol of the virtue of the tender body?
the heart is the arrow of the denier of God, who take no responsibility over faith
Tare it off, put it among you and surround it
I hope to see it with my own eyes, with my wandering soul
Take it away please, throw it away, throw it into the furnace of fire
It is a pity that at the light of day, you drag yourselves down into the darkness of night
Let a circle gather round it, say farewell to it
Let its name go with this April flood
Put it in a coffin, let it be carried over the shoulders of longing
Put it in a grave, on top of the ‘Saywan’ hill
Forgive us, O God - to bury it is not right
Put it in a deep hole, over the hill of ‘Gawran’
Arrange a sad memorial, where each of you
come to his ceremony, with joy and smiling lips
Don't believe that this lament is "Nuri's" idea, nor his poem
It belongs to the girl with a beautiful voice, who said it with tears in her eyes
Take it away please, throw it away, throw it in the furnace of fire
It's a pity that the light of day, you drag yourselves into the darkness of night
Feb 21, 2026
You know that you are a human
You know that, or do you not?
That smile of yours is unique to you,
That torment of yours is unique to you,
Your eyes no other person has got.
Tomorrow you won't be here present.
Today all the world is for you:
Feb 17, 2026
The Shadows of the Walk
As much as I can
I humour the shadows
But when they narrow
They are no longer mine
And when they widen
They're wrapped in the impossible.
Yet, not to get lost
I dip my feet in water
Wet the path
And slide.
--- Michael Iskandar Haddad (1919 - 1996)








