वो भी क्या दिन थे कि जब इश्क़ लड़ा लेते थे,
प्यार की डोर को चर्ख़ी पे चढ़ा लेते थे,
नौजवानी की पतंगों को उड़ा लेते थे,
धड़क के कंकड़ियाँ संभाल लेते थे,
होंठों पे हंसी, आंखों में आस थी,
हर ग़म को हंसी में उड़ाया करते थे।
--- सागर खय्यामी
वो भी क्या दिन थे कि जब इश्क़ लड़ा लेते थे,
प्यार की डोर को चर्ख़ी पे चढ़ा लेते थे,
नौजवानी की पतंगों को उड़ा लेते थे,
धड़क के कंकड़ियाँ संभाल लेते थे,
होंठों पे हंसी, आंखों में आस थी,
हर ग़म को हंसी में उड़ाया करते थे।
--- सागर खय्यामी
1.नहीं नहीं हमें अब तेरी जुस्तुजू भी नहीं तुझे भी भूल गए हम तिरी ख़ुशी के लिए - ज़ेहरा निगाह
2. मुस्तक़िल जूझना यादों से बहुत मुश्किल है, रफ़्ता रफ़्ता सभी घर-बार में खो जाते हैं। - .मुनव्वर राना
3. रंग ख़ुश्बू और मौसम का बहाना हो गया, अपनी ही तस्वीर में चेहरा पुराना हो गया - खालिद गनी
4.ये दस्तूर-ए-ज़बाँ-बंदी है कैसा तेरी महफ़िल में , यहाँ तो बात करने को तरसती है ज़बाँ मेरी - इक़बाल
5. ज़ाहिद शराब पीने दे मस्जिद में बैठ कर, या वो जगह बता दे जहाँ पर ख़ुदा न हो
6. न ख़ुदा ही मिला न विसाल-ए-सनम न इधर के हुए न उधर के हुए, रहे दिल में हमारे ये रंज-ओ-अलम न इधर के हुए न उधर के हुए
7. अगर फ़िरदौस बर-रू-ए-ज़मीं अस्त, हमीं अस्त ओ हमीं अस्त ओ हमीं अस्त
8. सलीक़े से हवाओं में जो ख़ुशबू घोल सकते हैं, अभी कुछ लोग बाक़ी हैं जो उर्दू बोल सकते हैं
9. आतिशे इश्क़ न बुझी, ज़माने ने इंतेहा लाख लिए, वो मयस्सर नहीं अभी, पर जीने को उसकी आरज़ू ही सही !
10. होश आए भी तो क्यों करें, तेरे दीवाने को, एक जाता है तो दो आते हैं समझाने को - होशियार मेरठी
11.रफ़्ता रफ़्ता वो हमारे दिल के अरमाँ हो गए , पहले जाँ फिर जान-ए-जाँ फिर जान-ए-जानाँ हो गए - क़मर जलालाबादी
12. तुम से सदियों की वफ़ाओ का कोई नाता था, तुम से मिलने की लकीरें थीं मेरे हाथों में - सईद राही
13.इक रात हर चराग़ की लौ काट दी गई, और वो भी चुप रहे जिन्हें प्यारी है रौशनी - नोमान शौक़
14.दूसरा मौक़ा सबको मिलता है ताबिश, पहली बाज़ी सबने हारी होती है -ज़ुबैर ताबिश
15.जो डूबना है तो इतने सुकून से डूबो, कि आस-पास की लहरों को भी पता न लगे - क़ैसर-उल जाफ़री
उम्र जल्वों में बसर हो ये ज़रूरी तो नहीं
हर शब-ए-ग़म की सहर हो ये ज़रूरी तो नहीं
चश्म-ए-साक़ी से पियो या लब-ए-साग़र से पियो
बे-ख़ुदी आठों पहर हो ये ज़रूरी तो नहीं
नींद तो दर्द के बिस्तर पे भी आ सकती है
उन की आग़ोश में सर हो ये ज़रूरी तो नहीं
शैख़ करता तो है मस्जिद में ख़ुदा को सज्दे
उस के सज्दों में असर हो ये ज़रूरी तो नहीं
सब की नज़रों में हो साक़ी ये ज़रूरी है मगर
सब पे साक़ी की नज़र हो ये ज़रूरी तो नहीं
मय-कशी के लिए ख़ामोश भरी महफ़िल में
सिर्फ़ ख़य्याम का घर हो ये ज़रूरी तो नहीं
- ख़ामोश ग़ाज़ीपुरी
अंजानी राहों में तू क्या ढूँढता फिरे
दूर जिसे समझा वो तो पास है तेरे
साँस में हवा, जान में ज़मीन
दिल में खुला आसमान
प्यार है खुदा, प्यार है ख़ुशी
प्यार से है दोनों जहाँ
तेरा यह आशियाना, मेरा भी आशियाना
घूमता रहा दूर तू कहीं, उड़ते बादलों की तरह
कहीं से तुझे आई है सदा, लौट के आ अब ज़रा
तेरा यह आशियाना, मेरा भी आशियाना
वो झिलमिलाती आँखें, वो भोली सी अदा
वो धीरे-धीरे चल के लहराती हवाएँ
हमको ले जाएँ वहाँ, जहाँ हो घर अपना
मेरी यादों में पाया है
आज तो मिलने का दिन है आया, आया...
But whenever I think of myself
you appear by my side in the form of a silence
We swallow the light.
A rose garden, think of it, in the middle of the desert.
You touch that place with your wound,
The desert softens somewhat.
At that moment, right at that moment
Like taking a copper tray, hanging it on the wall
you think of me with fresh new eyes, love me.
You create me anew.
Should we name this thing? You decide.
But whenever an alarm clock goes off
here and there in places that I cannot hear,
you become a ringing thing,
Like a nun thinking of renewing her vows,
you say 'Welcome' to the greatness of living.
You give form to water.
Is this what they call surface tension?
With a strange love you open your mouth,
might regret that some things don't work out.
With these eyes that come from
when you first began to love me -
their depth, the burden of meaning -
With these things I say, 'Love me.
- İlhan Sami Çomak
Translated by Caroline Stockford
क्या ज़रूरी है मोहब्बत में तमाशा होना
जिससे मिलना ही नहीं उससे जुदा क्या होना
ज़िंदा होना तो नहीं हिज्र में ज़िंदा होना
हम इसे कहते हैं होने के अलावा होना
तेरा सूरज के क़बीले से त'अल्लुक़ तो नहीं
ये कहाँ से तुझे आया है सभी का होना
तू ने आने में बहुत देर लगा दी वरना
मैं नहीं चाहता था हिज्र में बूढ़ा होना
क्या तमाशा है कि सब मुझको बुरा कहते हैं
और सब चाहते हैं मेरी तरह का होना
--- अब्बास ताबिश
I am standing for peace and non-violence.
Why world is fighting fighting
Why all people of world
Are not following Mahatma Gandhi,
I am simply not understanding.
Ancient Indian Wisdom is 100% correct.
I should say even 200% correct.
But modern generation is neglecting-
Too much going for fashion and foreign thing.
Other day I’m reading in newspaper
(Every day I’m reading Times of India
To improve my English language)
How one goonda fellow
Throw stone at Indirabehn.
Must be student unrest fellow, I am thinking.
Friends, Romans, countrymen, I am saying
(to myself)
Lend me the ears.
Everything is coming-
Regeneration, Remuneration, Contraception.
Be patiently, brothers and sisters.
You want one glass lassi?
Very good for digestion.
With little salt lovely drink,
Better than wine;
Not that I am ever tasting the wine.
I’m the total teetotaller, completely total.
But I say
Wine is for the drunkards only.
What you think of prospects of world peace?
Pakistan behaving like this,
China behaving like that,
It is making me very sad, I am telling you.
Really, most harassing me.
All men are brothers, no?
In India also
Gujaraties, Maharashtrians, Hindiwallahs
All brothers
Though some are having funny habits.
Still you tolerate me,
I tolerate you,
One day, Ram Rajya is surely coming.
You are going?
But you will visit again
Any time, any day,
I am not believing in ceremony.
Always I am enjoying your company.
--- Nissim Ezekiel
![]() |
| Teenage Soldiers of WW1, Source: BBC |
तीव्र आँधी मृत्युगामी
तीव्र आँधी मृत्युगामी
तीव्र आँधी मृत्युगामी पतालोकम चले
तीव्र आँधी मृत्युगामी पतालोकम चले
धर तिलक की छाप शिखधर तांडव को चले
बाँध घुंगरू मत मगन सुर-ताल अग्नि चढ़े
रक्त रंजित हो धरा रस रूप मंथन करे
रक्त रंजित हो धरा रस रूप मंथन करे
शम की उड़ती धूल शिव का महिमा मंडन करे
मां निषाद प्रतिष्ठां त्वमगमः शाश्वतीः समाः।
यत्क्रौंचमिथुनादेकम् अवधीः काममोहितम्॥
अर्थ: हे निषाद (वनवासी या शिकारी), तुम्हें कभी भी प्रतिष्ठा या सम्मान प्राप्त नहीं होगा, क्योंकि तुमने प्रेम-मोह में क्रौंच पक्षी के जोड़े में से एक को मार डाला है।
यह संस्कृत श्लोक वाल्मीकि रामायण के प्रथम सर्ग (बालकाण्ड, श्लोक 15) का है | यह श्लोक महर्षि वाल्मीकि के मुख से एक प्रकार का श्राप स्वरूप निकला था, जब उन्होंने प्रेमी पक्षियों के बीच खिलवाड़ किया गया देखा था। इस श्लोक को रामायण के प्रथम श्लोक के रूप में मान्यता मिली है।
पाट ना पाया मीठा पानी
पाट ना पाया मीठा पानी
ओर-छोर की दूरी रे
मन कस्तूरी रे, जग दस्तूरी रे
मन कस्तूरी रे, जग दस्तूरी रे
बात हुई ना पूरी रे
खोजे अपनी गंध ना पावे
चादर का पैबंद ना पावे
खोजे अपनी गंध ना पावे
चादर का पैबंद ना पावे
बिखरे बिखरे छंद सा टहले
दो होवें यह बांध ना पावें
नाचे होके फिरकी लट्टू ओह
नाचे होके फिरकी लट्टू
खोजे अपनी रूड़ी रे
मन कस्तूरी रे, जग दस्तूरी रे
मन कस्तूरी रे, जग दस्तूरी रे
बात हुई ना पूरी रे
उम्र की गिनती हाथ ना आई
पुरखों ने यह बात बताई
उल्टा करके देख सके तो
अंबर भी है गहरी खाई
रेखाओं के पार नज़र को
जिसने फेंका अंधे मन से
सतरंगी बेज़ार का खोला
दरवाज़ा बिन ज़ोर जतन के हे
फिर तो झूमा पागल होके
फिर तो झूमा पागल होके
सर पे डाल फितूरी रे
मन कस्तूरी रे, जग दस्तूरी रे
बात हुई ना पूरी रे
मन कस्तूरी रे, जग दस्तूरी रे
बात हुई ना, बात हुई ना
बात हुई ना पूरी रे
मन कस्तूरी रे, जग दस्तूरी रे
नोट: मसान फिल्म समीक्षा
हे, हर-हर-हर महादेव शिवशंकर
सह्यगिरी शिखरावर आले
हे, सळ-सळ-सळ रणकंटक तलवारी
वज्रमूठ सरसावून भाले
तू तेजःपुंज झुंजार, चेतवून अंगार
भेदलास अंधार सारा
तू अर्थ रामराज्याचा, हिंदवी स्वराज्याचा
एकमेव आराध्य झाला
दुष्ट दुर्जनांसी संहारले (हे)
पातशाहीला तू ललकारले (हे)
एक नव्या पर्वाची एकजूट करण्यासी
एक छत्र छाया आधार दे
एक शस्त्र, एक अस्त्र शूरवीर छत्रपती
धैर्यशील, सत्वशील, धर्मनिष्ठ छत्रपती
लाख मराठ्यांची तू आग रे (हे-हे)
माय भवानीचा तू वाघ रे
कीर्तीवंत, पुण्यवंत, नीतीवंत छत्रपती
अद्वितीय क्षत्रियकुलावतंस छत्रपती
लाख मराठ्यांची तू आग रे
माय भवानीचा तू वाघ रे
देव, देश, धर्माची, सर्वश्रेष्ठ कर्माची
आन घेतली रक्त सांडले जरी
अंधकार शतकांचा भस्मसात करण्यासी
एक तप्त ज्वाला ही पेटली उरी
भक्ती रूप संतांचा, साधू अन महंतांचा
हात जोडूनी मान राखलास तू
जर कुणी स्वराज्यावर वाकडी नजर केली
हात-पाय चौरंगी छाटलास तू
मोडून जात-पात रयतेसी देई साथ
त्यांचा सदैव कैवारी झाला
झाले बहुत राजे, जगतात नाव गाजे
लाखात एक शिवराय माझा
हात तुझा पाठीशी, वार झेलू छातीशी
ढाल तुझी होण्याचा मान दे
एक शस्त्र, एक अस्त्र शूरवीर छत्रपती
धैर्यशील, सत्वशील, धर्मनिष्ठ छत्रपती
लाख मराठ्यांची तू आग रे (हे-हे)
माय भवानीचा तू वाघ रे
कीर्तीवंत, पुण्यवंत, नीतीवंत छत्रपती
अद्वितीय क्षत्रियकुलावतंस छत्रपती
लाख मराठ्यांची तू आग रे
माय भवानीचा तू वाघ रे
मावळ-मावळ, पाठीशी बारा मावळ
देवाला शोधाया धावून आलं राऊळ
देवा रं देवा, सारं पावन झालं रं
आरती ओवाळा माझं राजं आलं रं
तोरण बांधून साजरं हे करू औक्षण कुंकुम भाळावर
शिवबांना डोळा पाहीन अन डोळ सारं पाणावलं
साष्टांग दर्शनाचा ह्या देवपूजनाचा
हा दैवयोग भाग्यात यावा
ध्वज उंच-उंच भगवा हा, वंदनीय भगवा हा
आसमंत भगवा कराया
जन्म सार्थ करण्यासी प्रार्थना ही चरणासी
प्राण अर्पण्याचा सन्मान दे
एक शस्त्र, एक अस्त्र शूरवीर छत्रपती
धैर्यशील, सत्वशील, धर्मनिष्ठ छत्रपती
लाख मराठ्यांची तू आग रे (हे-हे)
माय भवानीचा तू वाघ रे
कीर्तीवंत, पुण्यवंत, नीतीवंत छत्रपती
अद्वितीय क्षत्रियकुलावतंस छत्रपती
लाख मराठ्यांची तू आग रे
माय भवानीचा तू वाघ रे
--- अजय-अतुल
Hindi Translation
हे, हर-हर-हर महादेव शिवशंकर
सह्यगिरि की शिखर-भूमि पर आए
हे, सुस्सलाती रणकंटक तलवारें
वज्रमूठ कसकर भाले
तुम तेजस्वी, पराक्रमी, अंगार-सा जोश जगाने वाले
तुमने सारा अंधकार चीर दिया
तुम रामराज्य के अर्थ हो, हिंदवी स्वराज्य के प्रतीक हो
और तुम ही एकमात्र आराध्य बन गए
दुष्टों और दुराचारियों का संहार किया
सत्ता को ललकार दिया
एक नए युग को एकजुट करने के लिए
एक ही छत्र की छाया और सहारा दो
एक ही शस्त्र, एक ही अस्त्र, वीर छत्रपति
धैर्यवान, सत्वशील, धर्मनिष्ठ छत्रपति
लाखों मराठों की तुम ज्वाला हो
माँ भवानी के तुम शेर हो
कीर्तिवान, पुण्यवान, नीतिवान छत्रपति
अद्वितीय क्षत्रिय कुल के आभूषण छत्रपति
लाखों मराठों की तुम ज्वाला हो
माँ भवानी के तुम शेर हो
देव, देश और धर्म के लिए
सर्वश्रेष्ठ कर्म के लिए
यदि रक्त भी बहाना पड़ा, तो भी स्वीकार किया
अंधकार के शतकों को भस्म करने के लिए
एक तपती ज्वाला हृदय में प्रज्वलित हुई
भक्ति-रूप संतों, साधुओं और महंतों का
तुमने हाथ जोड़कर सम्मान रखा
यदि किसी ने स्वराज्य पर टेढ़ी नजर डाली
तो तुमने उसके हाथ-पाँव काट दिए
जात-पात तोड़कर रयत का साथ दिया
और सदा उनका रक्षक बन गया
बहुत से राजा हुए, जिनका नाम दुनिया में गूंजा
मेरे शिवराय तो लाखों में एक हैं
तुम्हारा हाथ मेरी पीठ पर रहे, मैं सीना तानकर वार सह लूँ
तुम्हारी ढाल बनने का मुझे सम्मान दो
एक ही शस्त्र, एक ही अस्त्र, वीर छत्रपति
धैर्यवान, सत्वशील, धर्मनिष्ठ छत्रपति
लाखों मराठों की तुम ज्वाला हो
माँ भवानी के तुम शेर हो
कीर्तिवान, पुण्यवान, नीतिवान छत्रपति
अद्वितीय क्षत्रिय कुल के आभूषण छत्रपति
लाखों मराठों की तुम ज्वाला हो
माँ भवानी के तुम शेर हो
मावळ-मावळ, पीछे बारह मावळ
देव को खोजने दौड़कर रावल आया
हे देव, सब कुछ पावन हो गया
मेरे राजा आए, उनकी आरती उतारो
तोरण बाँधकर इसे उत्सव बनाएं,
माथे पर कुंकुम से औक्षण करें
शिवबाओं को आँखों से देखूँ तो
सब कुछ आँसुओं से भर जाए
इस साष्टांग दर्शन और देवपूजन का
यह सौभाग्य मेरे भाग्य में आए
यह ऊँचा-ऊँचा भगवा ध्वज, यह वंदनीय भगवा
आसमाँ तक भगवा कर दे
जन्म को सार्थक करने के लिए चरणों में प्रार्थना है
प्राण अर्पण करने का सम्मान दो
एक ही शस्त्र, एक ही अस्त्र, वीर छत्रपति
धैर्यवान, सत्वशील, धर्मनिष्ठ छत्रपति
लाखों मराठों की तुम ज्वाला हो
माँ भवानी के तुम शेर हो
कीर्तिवान, पुण्यवान, नीतिवान छत्रपति
अद्वितीय क्षत्रिय कुल के आभूषण छत्रपति
लाखों मराठों की तुम ज्वाला हो
माँ भवानी के तुम शेर हो
L
छिपकली के नाना हैं,
छिपकली के हैं ससुर,
दानासुर दानासुर दानासुर!
छिपकली के नाना हैं,
छिपकली के हैं ससुर,
दानासुर दानासुर दानासुर!
तानपुरे के नीचे दो मंजीरे जैसे पाँव,
ना कुत्ते की भौं भौं, ना बिल्ली की म्याँऊ,
सुर है तराने में, धिन तन न ना,
दानासुर दानासुर दानासुर
दानासुर दानासुर दानासुर!
--- गुलज़ार
As he said that, I was so enraged I was about to lose my faith.
I said to him you have remained ignorant; I was about to punch him in the face.
What is wrong with Kurdish? Is it not God’s creation, the language of truth?
See, Armenian has no eloquence, and Doomsday is not going to be in Armenian,
Yet with their limping language and crooked writing, but with books and journals,
They are counted among the great nations, and about to call themselves a state.
How is Kurdish different from Farsi? Why is Persian the right language and Kurdish wrong?
In fact, if you notice you would realize who has stolen from whom,
Because we are older than they are, according to the history books of all religions.
They had this mentality, the people of Sulaymaniyah and Koye,
That they became the masters of Persian and Arabic, some even reached Fakhre Razi’ status
--- Haji Qadiri Koyi
*Fakhr ad-Din al-Razi was a famous Persian theologian and philosopher in the twelfth century.
Context: In a qaside “Kurdêkî Koyî” he tells the details of his encounter with a person from Koye, his hometown, who complains that Şêx Kake Ehmed translates the Quran and the prophet’s sayings (hadith) into Kurdish. Upon hearing his complaint Hacî Qadir becomes furious and comments.
“अल्लामा इक़बाल जैसे परिपक्व और विशाल हृदय वाले व्यक्ति को अचानक साम्यवाद के दलदल में फँसते देखकर लोग दुख और चिंता से कराह उठे।”
1. सरजमीने-हिंद में अकवामे आलम के फ़िराक़, कारवां आते गए हिंदोस्ताँ बनता गया - फ़िराक़ गोरखपुरी
2. कुछ मेरे बाद और भी आएंगे क़ाफ़िले, कांटे ये रास्ते से हटा लूं तो चैन लूं। -तसव्वुर किरतपुरी
3. इन्हीं ज़र्रों से होंगे कल नये कुछ कारवां पैदा, जो ज़र्रे आज उड़ते हैं ग़ुबारे-कारवां हो कर। - शफ़क टौंकी
4. इस शहर में जीने के अंदाज़ निराले हैं, होठों पे लतीफे हैं आवाज़ में छाले हैं। - जावेद अख़्तर
5. जिनके आँगन में अमीरी का शजर लगता है, उसका हर ऐब ज़माने को हुनर लगता है - अंजुम रहबर
6. ऐ दिल वो आशिक़ी के फ़साने किधर गए, वो उम्र क्या हुई वो ज़माने किधर गए - अख़्तर शीरानी
7. सियाह रात नहीं लेती नाम ढलने का, यही तो वक़्त है सूरज तेरे निकलने का - शहरयार
8. नतीजा एक ही निकला, कि थी क़िस्मत में नाकामी, कभी कुछ कह के पछताये, कभी चुप रह के पछताये। - आरज़ू लखनवी
9. हमारी ज़िन्दगी के सानहे भी क्या अजब गुज़रे, उसी पर मर मिटे जिस से हमें बेज़ार होना था - मनीष शुक्ला
10. अब ज़मीं पर कोई गौतम न मोहम्मद न मसीह, आसमानों से नए लोग उतारे जाएँ - अहमद फ़राज़
11. हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो - जौन एलिया
12. दफ़'अतन घटा की आड़ से चाँदनी कशीद हो गई, ज़ुल्फ़ उस के चेहरे से हटी और मेरी 'ईद हो गई - आलम निज़ामी
13. जुर्रत से हर नतीजे की परवाह किये बगैर, दरबार छोड़ आया हूँ सजदा किये बगैर ! - मुनव्वर राना
14. ये हमसे कौन दिन भर की कमाई छीन लेता है, उतर कर अपनी मसनद से चटाई छीन लेता है - सलाहउद्दीन नैयर
15. अपने बच्चों को मैं बातों में लगा लेता हूं, जब भी आवाज़ लगाता है खिलौने वाला - राशिद राही
As much as I can
I humour the shadows
But when they narrow
They are no longer mine
And when they widen
They're wrapped in the impossible.
Yet, not to get lost
I dip my feet in water
Wet the path
And slide.
--- Michael Iskandar Haddad (1919 - 1996)
शेर 1: ईमान बेचने को तो तैयार हैं हम भी, लेकिन, खरीद हो जो अलीगढ़ के भाव से।
व्याख्या: इस शेर में इलाहाबादी कहते हैं कि लाखों लोगों ने बाहरी रूप (जैसे दाढ़ी बढ़ाना) अपनाया, लेकिन असली असर वही नहीं हुआ जो मालवी मदन या असली दृष्टिकोण वाला व्यक्ति दर्शाता। यह शेर दिखावे और वास्तविकता के बीच अंतर को उजागर करता है।
शेर 3: तालीम–ए दुस्तुराँ से ये उम्मीद है ज़रा, नाचे दुल्हन ख़ुशी से ख़ुद अपनी बरात में।
व्याख्या: यह शेर शिक्षा और सुधार की उम्मीदों पर व्यंग्य करता है। इलाहाबादी कहते हैं कि शिक्षा का लक्ष्य सिर्फ़ दिखावा न बन जाए, बल्कि उसका असर वास्तविक जीवन में महसूस होना चाहिए।
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अकबर इलाहाबादी की शायरी यह दिखाती है कि आलोचना हमेशा विरोध नहीं होती, बल्कि यह सुधार और सुधारकों के दृष्टिकोण को समझने और परखने का माध्यम भी हो सकती है। उनकी शेरों में व्यंग्य, सामाजिक टिप्पणियाँ और गहरी समझ का सुंदर मिश्रण मिलता है।
Why Write Love Poetry in a Burning World
To train myself to find in the midst of hell
what isn’t hell.
The body bald
cancerous but still
beautiful enough to
imagine living the body
washing the body
replacing a loose front
porch step the body chewing
what it takes to keep a body going—
This scene has a tune
a language I can read a door
I cannot close I stand
within its wedge
a shield.
Why write love poetry in a burning world?
To train myself in the midst of a burning world
to offer poems of love to a burning world.
--- Katie Farris
“Standing in the Forest of Being Alive by Katie Farris, Alice James Books, 2023"