Sep 30, 2026
15 बेहतरीन शेर - 25 !!!
Jul 23, 2026
15 बेहतरीन शेर - 24 !!!
1.नहीं नहीं हमें अब तेरी जुस्तुजू भी नहीं तुझे भी भूल गए हम तिरी ख़ुशी के लिए - ज़ेहरा निगाह
2. मुस्तक़िल जूझना यादों से बहुत मुश्किल है, रफ़्ता रफ़्ता सभी घर-बार में खो जाते हैं। - .मुनव्वर राना
3. रंग ख़ुश्बू और मौसम का बहाना हो गया, अपनी ही तस्वीर में चेहरा पुराना हो गया - खालिद गनी
4.ये दस्तूर-ए-ज़बाँ-बंदी है कैसा तेरी महफ़िल में , यहाँ तो बात करने को तरसती है ज़बाँ मेरी - इक़बाल
5. ज़ाहिद शराब पीने दे मस्जिद में बैठ कर, या वो जगह बता दे जहाँ पर ख़ुदा न हो
6. न ख़ुदा ही मिला न विसाल-ए-सनम न इधर के हुए न उधर के हुए, रहे दिल में हमारे ये रंज-ओ-अलम न इधर के हुए न उधर के हुए
7. अगर फ़िरदौस बर-रू-ए-ज़मीं अस्त, हमीं अस्त ओ हमीं अस्त ओ हमीं अस्त
8. सलीक़े से हवाओं में जो ख़ुशबू घोल सकते हैं, अभी कुछ लोग बाक़ी हैं जो उर्दू बोल सकते हैं
9. आतिशे इश्क़ न बुझी, ज़माने ने इंतेहा लाख लिए, वो मयस्सर नहीं अभी, पर जीने को उसकी आरज़ू ही सही !
10. होश आए भी तो क्यों करें, तेरे दीवाने को, एक जाता है तो दो आते हैं समझाने को - होशियार मेरठी
11.रफ़्ता रफ़्ता वो हमारे दिल के अरमाँ हो गए , पहले जाँ फिर जान-ए-जाँ फिर जान-ए-जानाँ हो गए - क़मर जलालाबादी
12. तुम से सदियों की वफ़ाओ का कोई नाता था, तुम से मिलने की लकीरें थीं मेरे हाथों में - सईद राही
13.इक रात हर चराग़ की लौ काट दी गई, और वो भी चुप रहे जिन्हें प्यारी है रौशनी - नोमान शौक़
14.दूसरा मौक़ा सबको मिलता है ताबिश, पहली बाज़ी सबने हारी होती है -ज़ुबैर ताबिश
15.जो डूबना है तो इतने सुकून से डूबो, कि आस-पास की लहरों को भी पता न लगे - क़ैसर-उल जाफ़री
Jun 18, 2026
15 बेहतरीन शेर - 23 !!!
2. ख़मोशी से मुसीबत और भी संगीन होती है, तड़प ऐ दिल तड़पने से ज़रा तस्कीन होती है - -शाद अज़ीमाबादी
5. 'हफ़ीज़' अपनी बोली मोहब्बत की बोलीन उर्दू, न हिंदी, न हिन्दोस्तानी - हफ़ीज़ जालंधरी
6. क़रार दिल को सदा जिसके नाम से आया, वो आया भी तो किसी और काम से आया - जमाल एहसानी
7 हयात ले के चलो, कायनात ले के चलो, चलो तो सारे ज़माने को साथ ले के चलो - मख़दूम मोहिउद्दीन
8. सब मिरे चाहने वाले हैं मिरा कोई नहीं, मैं भी इस मुल्क में उर्दू की तरह रहता हूँ - हसन काज़मी
May 5, 2026
15 बेहतरीन शेर - 22 !!!
2. हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है, बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा - अल्लामा इक़बाल
3. उस पे पत्थर खाके क्या बीती ज़फ़र देखेगा कौन, फल तो सब ले जाएँगे ज़ख़्मे-शजर देखेगा कौन - ज़फ़र गोरखपुरी
4. देख ज़िंदाँ से परे रंग-ए-चमन, रक़्स करना है तो फिर पाँव की ज़ंजीर न देख। - मजरूह सुल्तानपुरी
5. कलकत्ते का जो ज़िक्र किया तू ने हम-नशीं, इक तीर मेरे सीने में मारा कि हाए हाए - मिर्ज़ा ग़ालिब
6. फूल तो दो दिन बहारे-जा-फ़िज़ा दिखला गए, हसरत उन गुंचों पे हैं जो बिन खिले मुरझा गए - ज़ौक़
7. वो ज़हर देता तो सब की निगह में आ जाता, सो ये किया कि मुझे वक़्त पे दवाएं न दीं - अख़्तर नाज़मी
9. एक से एक जुनूँ का मारा इस बस्ती में रहता है, एक हमीं हुशियार थे यारो एक हमीं बद-नाम हुए - इब्न-ए-इंशा
10. किस तरह जमा कीजिए अब अपने आप को, काग़ज़ बिखर रहे हैं पुरानी किताब के - -आदिल मंसूरी
11. वो दुश्मनी से देखते हैं, देखते तो हैं, मैं शाद हूँ की हूँ तो किसी की निगाह में - अमीर मीनाई
12. बाद मुद्दत के ये ऐ 'दाग़' समझ में आया, वही दाना है कहा जिसने न माना दिल का - दाग़ देहलवी
13. गो बहुत कुछ रंज यारान ए वतन से था हमेंआँख में आंसू मगर वक़्त ए सफ़र आ ही गया - अकबर इलाहाबादी,
15. मिरा ज़मीर बहुत है मुझे सज़ा के लिए, तू दोस्त है तो नसीहत न कर ख़ुदा के लिए - शाज़ तमकनत
Apr 17, 2026
15 बेहतरीन शेर - 21 !!!
2. हमारे बस में था ही क्या हवा पे हम सवार थे, वहाँ वहाँ गए जहाँ हवा उड़ा के ले गई -अज़्म शाकिरी
3. क्या क्या हुआ है हम से जुनूँ में न पूछिए , उलझे कभी ज़मीं से कभी आसमाँ से हम - असरार-उल-हक़ मजाज़
4. अब तुमसे रुख़सत होता हूँ आओ सम्भालो साज़े-गज़ल नये तराने छेड़ो, मेरे नग्मों को नींद आती है - रघुपति सहाय 'फ़िराक़'
5. तुझे किस बात का ग़म है वो इतना पूछ लें मुझ से वो इतना पूछ लें मुझ से तो फिर किस बात का ग़म है मुझ से - मुशताक़ हुसैन ख़ान हाशमी मुश्ताक़
6. मुझको तो होश नहीं, तुमको ख़बर हो शायद, लोग कहते हैं कि तुमने मुझे बर्बाद किया - जोश मलीहाबादी
7. मैं तो ग़ज़ल सुना के अकेला खड़ा रहा, सब अपने अपने चाहने वालों में खो गए - कृष्ण बिहारी नूर
9. दाग़ दुनिया ने दिए ज़ख़्म ज़माने से मिले, हम को तोहफ़े ये तुम्हें दोस्त बनाने से मिले - कैफ़ भोपाली
10. ख़ुशियाँ देते देते अक्सर खुद ग़म में मर जाते हैं, रेशम बुनने वाले कीड़े रेशम में मर जाते हैं - ख़ुशबीर सिंह शाद
11. कुछ तो तेरे मौसम ही मुझे रास कम आये और कुछ मेरी मिट्टी में बग़ावत भी बहुत थी - परवीन शाकिर
12. रातें परदेस की डरता था कटेंगी कैसे, मगर आँगन में सितारे थे वही घर वाले - राही मासूम रजा़
13. हम को नीचे उतार लेंगे लोग, इश्क़ लटका रहेगा पंखे से - ज़िया मज़कूर
14. मैखाने के क़रीब थी मस्जिद भले को, दाग़ हर एक पूछता था कि “ हज़रत इधर कहाँ? - दाग़
Mar 27, 2026
बहादुर शाह ज़फ़र और हिंदुस्तान की तलवार: ऐतिहासिक शायरी की कहानी
कहा जाता है कि विद्रोह के बाद, जब अंग्रेज़ अधिकारी ज़फ़र को पकड़ने आए, उन्होंने उन्हें तंज़ के साथ कहा:
“दमदमे में दम नहीं है ख़ैर मांगो जान की.. ऐ ज़फ़र ठंडी हुई अब तेग हिंदुस्तान की।”
(अब तुम्हारे पास कोई ताक़त नहीं, ज़फ़र। हिंदुस्तान की तलवार भी अब नुकीली नहीं रही।)
लेकिन बहादुर शाह ज़फ़र की शायरी में छिपी जज़्बात और आत्मसम्मान ने जवाब में इतिहास रच दिया। उन्होंने शेर कहा:
“ग़ाज़ियों में बू रहेगी जब तलक ईमान की, तख़्त ऐ लंदन तक चलेगी तेग हिंदुस्तान की।”
(भारत की तलवार और उसका साहस कभी कम नहीं होगा, और ईमान की शक्ति के साथ यह London तक अपनी गूँज पहुंचाएगी।)
इस जवाब से साफ़ झलकता है कि ज़फ़र का मनोबल और उनका देशभक्ति का जज़्बा अंग्रेज़ों की धमकियों से कम नहीं हुआ। यह सिर्फ़ एक शेर नहीं, बल्कि उस युग की एक प्रेरणादायक कहानी है, जो यह बताती है कि कठिन परिस्थितियों में भी आत्मसम्मान और विश्वास कभी नहीं मरते।
Mar 23, 2026
15 बेहतरीन शेर - 20 !!!
1. सरजमीने-हिंद में अकवामे आलम के फ़िराक़, कारवां आते गए हिंदोस्ताँ बनता गया - फ़िराक़ गोरखपुरी
2. कुछ मेरे बाद और भी आएंगे क़ाफ़िले, कांटे ये रास्ते से हटा लूं तो चैन लूं। -तसव्वुर किरतपुरी
3. इन्हीं ज़र्रों से होंगे कल नये कुछ कारवां पैदा, जो ज़र्रे आज उड़ते हैं ग़ुबारे-कारवां हो कर। - शफ़क टौंकी
4. इस शहर में जीने के अंदाज़ निराले हैं, होठों पे लतीफे हैं आवाज़ में छाले हैं। - जावेद अख़्तर
5. जिनके आँगन में अमीरी का शजर लगता है, उसका हर ऐब ज़माने को हुनर लगता है - अंजुम रहबर
6. ऐ दिल वो आशिक़ी के फ़साने किधर गए, वो उम्र क्या हुई वो ज़माने किधर गए - अख़्तर शीरानी
7. सियाह रात नहीं लेती नाम ढलने का, यही तो वक़्त है सूरज तेरे निकलने का - शहरयार
8. नतीजा एक ही निकला, कि थी क़िस्मत में नाकामी, कभी कुछ कह के पछताये, कभी चुप रह के पछताये। - आरज़ू लखनवी
9. हमारी ज़िन्दगी के सानहे भी क्या अजब गुज़रे, उसी पर मर मिटे जिस से हमें बेज़ार होना था - मनीष शुक्ला
10. अब ज़मीं पर कोई गौतम न मोहम्मद न मसीह, आसमानों से नए लोग उतारे जाएँ - अहमद फ़राज़
11. हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो - जौन एलिया
12. दफ़'अतन घटा की आड़ से चाँदनी कशीद हो गई, ज़ुल्फ़ उस के चेहरे से हटी और मेरी 'ईद हो गई - आलम निज़ामी
13. जुर्रत से हर नतीजे की परवाह किये बगैर, दरबार छोड़ आया हूँ सजदा किये बगैर ! - मुनव्वर राना
14. ये हमसे कौन दिन भर की कमाई छीन लेता है, उतर कर अपनी मसनद से चटाई छीन लेता है - सलाहउद्दीन नैयर
15. अपने बच्चों को मैं बातों में लगा लेता हूं, जब भी आवाज़ लगाता है खिलौने वाला - राशिद राही
Feb 9, 2026
15 बेहतरीन शेर - 19 !!!
2. मिरे लहू से वज़ू और फिर वज़ू पे वज़ू, डरा हुआ हूँ ज़माने तिरी नमाज़ से मैं - रफ़ी रज़ा
3. चेहरों के समुन्दर से गुज़रते रहे लेकिन, इक अक्स को आइना तरसता रहा हमारा - शहरयार
4. हमारे दिल में भी झांको अगर मिले फुर्सत, हम अपने चेहरे से उतने नजर नहीं आते..!! ~ वसीम बरेलवी
5. अब छोड़ साथ मेरा ऐ याद-ए-नौजवानी, इस उम्र का मुसाफ़िर तन्हाई चाहता है - क़तील शिफ़ाई
6. बुरा न मान अगर यार कुछ बुरा कह दे, दिलों के खेल में ख़ुद्दारियाँ नहीं चलतीं - कैफ़ भोपाली
7. मोहब्बत क्या बला है चैन लेना ही भुला दे है, ज़रा भी आँख झपके है तो बेताबी जगा दे है -कलीम आजिज़
8. मैं तो इस वास्ते चुप हूँ कि तमाशा न बने, तू समझता है मुझे तुझ से गिला कुछ भी नहीं - अख़्तर शुमार
9.सुब्ह हो जाएगी हाथ आ न सकेगा महताब, आप अगर ख़्वाब में चलते हैं तो चलते रहिए - मलिकज़ादा मंज़ूर अहमद
10. मैं मुद्दतों जिया हूँ किसी दोस्त के बग़ैर अब तुम भी साथ छोड़ने को कह रहे हो ख़ैर ~ फ़िराक़ गोरखपुरी
11. तुम पूछो और मैं न बताऊँ ऐसे तो हालात नहीं, एक ज़रा सा दिल टूटा है और तो कोई बात नहीं - क़तील शिफ़ाई
12. जाने ये कैसा ज़हर दिलों में उतर गया, परछाईं ज़िंदा रह गई, इंसान मर गया...!!! - उम्मीद फ़ाज़ली
13. लाई हयात आए क़ज़ा ले चली चले, अपनी ख़ुशी न आए न अपनी ख़ुशी चले - शेख़ इब्राहीम ज़ौक़
14. वो आए घर में हमारे ख़ुदा की क़ुदरत है, कभी हम उन को कभी अपने घर को देखते हैं - मिर्ज़ा ग़ालिब
15. देखिए पाते हैं उश्शाक़ बुतों से क्या फ़ैज़ इक बरहमन ने कहा है कि ये साल अच्छा है - मिर्ज़ा ग़ालिब
Oct 31, 2025
15 बेहतरीन शेर - 18 !!!
2. रहता है सिर्फ एक ही कमरे में आदमी उसका गुरूर रहता है बाकी मकान में। - महशर अफरीदी
3. उसके फ़रोग़-ए-हुस्न से झमके है सब में नूर, शमा-ए-हरम हो या कि दिया सोमनाथ का - मीर
4. अब्र था कि ख़ुशबू था, कुछ ज़रूर था एक शख़्स, हाथ भी नहीं आया, पास भी रहा एक शख़्स - ज़फ़र गोरखपुरी
5. ज़िक्र जब होगा मोहब्बत में तबाही का कहीं, याद हम आएँगे दुनिया को हवालों की तरह - सुदर्शन फ़ाक़िर
6. जिन की यादें हैं अभी दिल में निशानी की तरह, वो हमें भूल गए एक कहानी की तरह -वाली आसी
7. काबिल तो हैं कामयाब़ भी हो जाएंगे, ये ज़ुगनू ही एक दिन, आफ़ताब हो ज़ाएंगे। - ~प्रह्लाद पाठक
8. हमने तमाम उम्र अकेले सफ़र किया, हमपर किसी खुदा की इनायत नहीं रही। - दुष्यंत कुमार
9. कम हैं सिपाही फ़ौज में सरदार बहुत हैं, यह जंग हार जाने के आसार बहुत हैं - अज्ञात
10. इस सफ़र में नींद ऐसी खो गई, हम न सोए रात थक कर सो गई - -राही मासूम रज़ा
11. तुम्हें नींद नहीं आती तो कोई और वजह होगी, अब हर ऐब के लिए कसूरवार इश्क़ तो नहीं..! - अज्ञात
12. बच्चों की फ़ीस उन की किताबें क़लम दवात, मेरी ग़रीब आँखों में स्कूल चुभ गया - मुनव्वर राना
13. अपने बच्चों को मैं बातों में लगा लेता हूं, जब भी आवाज़ लगाता है खिलौने वाला -राशिद राही
14. आने वाले जाने वाले हर ज़माने के लिए आदमी मज़दूर है राहें बनाने के लिए -हफ़ीज़ जालंधरी
15. कुचल कुचल के न फ़ुटपाथ को चलो इतना, यहाँ पे रात को मज़दूर ख़्वाब देखते हैं - अहमद सलमान
Jul 25, 2025
15 बेहतरीन शेर - 17 !!!
1. ये कैसी हवा-ए-तरक्की चली है , दिए तो दिए, दिल बुझे जा रहे हैं - ख़ुमार बाराबंकवी
Jun 16, 2025
15 बेहतरीन शेर - 16 !!!
2. ये अलग बात है कि ख़ामोश खड़े रहते हैं, फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं ~राहत इंदौरी
3. पत्थर मुझे कहता है मिरा चाहने वाला, मैं मोम हूँ उस ने मुझे छू कर नहीं देखा -बशीर बद्र
4. और क्या था बेचने के लिए, अपनी आँखों के ख़्वाब बेचे हैं। -जौन एलिया
5. फ़क़ीराना आए सदा कर चले, मियाँ ख़ुश रहो दुआ कर चले - मीर तकि मीर
6. बाग़बाँ दिल से वतन को ये दुआ देता है, मैं रहूँ या न रहूँ ये चमन आबाद रहे। - बृजनारायण चकबस्त
7. उठाओ हाथ कि दस्त-ए-दुआ बुलंद करें, हमारी उम्र का एक और दिन तमाम हुआ - अख़्तरुल ईमान
8. हैं और भी दुनिया में सुखन्वर बहुत अच्छे, कहते हैं कि गालिब का है अन्दाज-ए-बयां और - मिर्ज़ा ग़ालिब
9. मैं इन दिनों हूँ ख़ुद से इतना बेख़बर, मैं बुझ चुका हूँ और मुझे पता नहीं -तहज़ीब हाफ़ी
10. वादा-ए-यार की बात न छेड़ो, ये धोखा भी खा रक्खा है. - नासिर काज़मी
11. कह दिया तू ने जो मा'सूम तो हम हैं मा'सूम, कह दिया तू ने गुनहगार गुनहगार हैं हम - फ़िराक़ गोरखपुरी
12. ये सर्द रात ये आवारगी ये नींद का बोझ, हम अपने शहर में होते तो घर चले जाते - उम्मीद फ़ाज़ली
13. कौन सीखा है सिर्फ बातों से सबको एक हादसा ज़रूरी है - जौन एलिया
14. रात ही रात में तमाम तय हुए उम्र के मक़ाम, हो गई ज़िंदगी की शाम अब मैं सहर को क्या करूं - हफ़ीज़ जालंधरी
15. फ़ारेहा क्या बहुत जरूरी है हर किसी शेरसाज़ को पढ़ना, मेरे ग़ुस्से के बाद भी तुमने नहीं छोड़ा मजाज़ को पढ़ना -जौन एलिया
Apr 20, 2025
15 बेहतरीन शेर - 15 !!!
2. किस सलीक़े से मता-ए-होश हम खोते रहे, गर्द चेहरे पर जमी थी आइना धोते रहे - असर फ़ैज़ाबादी
3. वो इंतिक़ाम की आतिश थी मेरे सीने में, मिला न कोई तो ख़ुद को पछाड़ आया हूँ - जमाल एहसानी
4. तितलियाँ यूँ ही नहीं बैठ रही हैं तुम पर, बारहा तुमको भी फूलों में गिना जाता है - नासिर खान नासिर
5. जो देखता हूँ वही बोलने का आदी हूँ, मैं अपने शहर का सब से बड़ा फ़सादी हूँ - अज्ञात
6. सेंक देता था जो जाड़े में ग़रीबों के बदन, आज उस सूरज को इक दीवार उठ कर खा गई - नज़ीर बनारसी
7. उस शहर में कितने चेहरे थे कुछ याद नहीं सब भूल गए, इक शख़्स किताबों जैसा था वो शख़्स ज़बानी याद हुआ - नोशी गिलानी
8. हमारी बेबसी शहरों की दीवारों पे चिपकी है, हमें ढूँडेगी कल दुनिया पुराने इश्तिहारों में ~ अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा
9. मैं दोस्ती में हर एक बढ़ता हाथ चूमता हूँ, बस शर्त ये हैं कि बन्दा नमक हराम न हो - राकिब मुख़्तार
10. अब नहीं कोई बात ख़तरे की, अब सभी को सभी से ख़तरा है। - जौन एलिया
11. नुक्स निकालते हैं लोग कुछ इस कदर हम में , जैसे उन्हें खुदा चाहिए था और हम इंसान मिल गए। - अज्ञात
12. उम्मीदें इंसान से लगा कर शिकवा खुदा से करते हो, तुम भी ग़ालिब कमाल करते हो... - अज्ञात
13. रियाज़ मौत है इस शर्त से हमें मंज़ूर, ज़मीं सताये ना मरने पे आसमान की तरह - रियाज़ ख़ैराबादी
14. ऐ दिल! न अक़ीदा है दवा पर, न दुआ पर कम-बख़्त तुझे छोड़ दिया हम ने ख़ुदा पर...!!! - सफ़ी औरंगाबादी
15. ज़ाहिद का दिल न ख़ातिर-ए-मय-ख़्वार तोड़िए, सौ बार तौबा कीजिए, सौ बार तोड़िए...!!! - जिगर मुरादाबादी
Mar 25, 2025
15 बेहतरीन शेर - 14 !!!
2- पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है, जाने न जाने गुल ही न जाने बाग़ तो सारा जाने है - मीर तक़ी मीर
4-जो लोग मौत को ज़ालिम क़रार देते हैं, ख़ुदा मिलाए उन्हें ज़िंदगी के मारों से - नज़ीर सिद्दीक़ी
5- चमन में इख़्तिलात-ए-रंग-ओ-बू से बात बनती है, हम ही हम हैं तो क्या हम हैं तुम ही तुम हो तो क्या तुम - सरशार सैलानी
6- ये कोई क़त्ल थोड़ी है कि बात आई-गई हो, मैं और अपना नज़र-अंदाज़ होना भूल जाऊँ? - जव्वाद शेख़
7- अपना ज़माना आप बनाते हैं अहल-ए-दिल, हम वो नहीं कि जिन को ज़माना बना गया - जिगर मुरादाबादी
8- मैंने गिनती सिखाई थी जिसको, वो पहाड़ा पढ़ा रहा है मुझे। ~ फ़हमी बदायूँनी
9- मिले खाक में नौजवां कैसे कैसे, ज़मीं खा गई आसमां कैसे कैसे - प्रेम धवन
10- उस की बेटी ने उठा रक्खी है दुनिया सिर पर , ख़ैरियत गुज़री कि अंगूर के बेटा न हुआ...!!! - अकबर इलाहाबादी
Jan 1, 2025
15 बेहतरीन शेर - 13 !!!
2. जलाने वाले जलाते ही हैं चराग़ आख़िर, ये क्या कहा कि हवा तेज़ है ज़माने की - जमील मज़हरी
3. 'हफ़ीज़' अपनी बोली मोहब्बत की बोली, न उर्दू न हिन्दी न हिन्दोस्तानी - हफ़ीज़ जालंधरी
Aug 27, 2024
15 बेहतरीन शेर - 12 !!!
2. अपनी सोई हुई दुनिया को जगा लूं तो चलूं, अपने ग़मख़ाने में एक धूम मचा लूं तो चलूं
और एक जाम-ए-मए तल्ख़ चढ़ा लूं तो चलूं, अभी चलता हूं ज़रा ख़ुद को संभालूं तो चलूं
- मुईन अह्सन जज़्बी
4. शब-ए-फ़ुर्क़त का जागा हूं , फ़रिश्तों अब तो सोने दो,
5. वही कारवाँ,वही रास्ते, वही ज़िंदगी, वही मरहले,
6. जहाँ हर सिंगार फ़ुज़ूल हों जहाँ उगते सिर्फ़ बबूल हों,
7. वो तुझ को भूलें हैं तो तुझ पे भी लाज़िम है मीर,
8. गुलशन-ए-फ़िरदौस पर क्या नाज़ है रिज़वां तुझे,
9. इस दर्जा होशियार तो पहले कभी न थे,
10. 'रातों को दिन कह रहा, दिन को कहता रात,
11. बेगुनाही जुर्म था अपना, सो इस कोशिश में हूं,
12- इलेक्शन तक गरीबों का वो हुजरा देखते हैं,
Aug 3, 2024
15 बेहतरीन शेर - 11 !!!
3- शाम तक सुब्ह की नज़रों से उतर जाते हैं, इतने समझौतों पे जीते हैं कि मर जाते हैं - वसीम बरेलवी
4- किया तबाह तो दिल्ली ने भी बहुत 'बिस्मिल', मगर ख़ुदा की क़सम लखनऊ ने लूट लिया - बिस्मिल सईदी
6- ज़िंदगी दी है तो जीने का हुनर भी देना, पाँव बख़्शें हैं तो तौफ़ीक़-ए-सफ़र भी देना - मेराज फ़ैज़ाबादी
7- मय-ख़ाने में क्यूँ याद-ए-ख़ुदा होती है अक्सर, मस्जिद में तो ज़िक्र-ए-मय-ओ-मीना नहीं होता - रियाज़ ख़ैराबादी
8- कुछ उसूलों का नशा था कुछ मुक़द्दस ख़्वाब थे, हर ज़माने में शहादत के यही अस्बाब थे - हसन नईम
9- इंक़िलाबों की घड़ी है, हर नहीं हाँ से बड़ी है - जाँ निसार अख़्तर
11- साया है कम खजूर के ऊँचे दरख़्त का, उम्मीद बाँधिए न बड़े आदमी के साथ - कैफ़ भोपाली
12 - शाख़ें रहीं तो फूल भी पत्ते भी आएँगे, ये दिन अगर बुरे हैं तो अच्छे भी आएँगे - अज्ञात
13- सामने है जो उसे लोग बुरा कहते हैं, जिस को देखा ही नहीं उस को ख़ुदा कहते हैं - सुदर्शन फ़ाकिर
14- छोड़ा नहीं ख़ुदी को दौड़े ख़ुदा के पीछे, आसाँ को छोड़ बंदे मुश्किल को ढूँडते हैं - अब्दुल हमीद अदम
15- इस तरह ज़िंदगी ने दिया है हमारा साथ, जैसे कोई निबाह रहा हो रक़ीब से - साहिर लुधियानवी
Jun 5, 2024
15 बेहतरीन शेर - 10 !!!
2. मेहरबानी को मोहब्बत नहीं कहते ऐ दोस्त, आह! अब मुझसे तेरी रंजिश-ए-बेजा भी नहीं - फ़िराक़ गोरखपुरी
3. शिकवा समुनदरों का कोई किस तरह करे, साहिल भी ख़ुद नहीं थे सफ़ीनों के ख़ैर-ख़्वाह
4. निगाह पड़ने न पाए यतीम बच्चों की, ज़रा छुपा के खिलौने दुकान में रखना - महबूब ज़फ़र
5. दिल दे तो इस मिज़ाज का परवरदिगार दे, जो रंज की घड़ी भी ख़ुशी से गुज़ार दे - दाग़ देहलवी
6. कभी चराग़, कभी तीरगी से हार गये, जो बे-शऊर थे वे हर किसी से हार गये...!!! - अनवर जलालपुरी
7- फ़ितूर होता है हर उम्र में जुदा-जुदा, खिलौना, माशूक़ा, रूतबा, ख़ुदा...!!!
8- तिरी मौजूदगी में तेरी दुनिया कौन देखेगा, तुझे मेले में सब देखेंगे मेला कौन देखेगा -नज़ीर बनारसी
9- एक आँसू भी हुकूमत के लिए ख़तरा है, तुम ने देखा नहीं आँखों का समुंदर होना. - मुनव्वर राणा
10 - तमाम उम्र हम इक दूसरे से लड़ते रहे, मगर मरे तो बराबर में जा के लेट गए ~ मुनव्वर राना
Feb 14, 2024
15 बेहतरीन शेर - 9 !!!
2. जो अक़्ल के मारे थे, अपने भी काम ना आये , दीवानों ने दुनिया की तक़दीर बदल डाली.
3. मरीज़े इश्क़ पर रहमत ख़ुदा की, दर्द बढ़ता गया यूँ यूँ दवा की - मीर तक़ी मीर
4. कोई नयी ज़मीं हो, नया आसमाँ भी हो, ए दिल अब उसके पास चले, वो जहाँ भी हो! - फ़िराक़ गोरखपुरी
5. मदहोश ही रहा मैं जहाने ख़राब में, गूँथी गई थी क्या मेरी मिट्टी शराब में - मुज़तर ख़ैराबादी
6. गिरज़ा में, मन्दिरों में, अज़ानों में बँट गया, एक ही मूल का इन्सान, कई नामों में बँट गया । - निदा फ़ाज़ली
7. उग रहा है दर-ओ-दीवार से सब्ज़ा 'ग़ालिब', हम बयाबाँ में हैं और घर में बहार आई है - मिर्ज़ा ग़ालिब
8. तिरी मौजूदगी में तेरी दुनिया कौन देखेगा, तुझे मेले में सब देखेंगे मेला कौन देखेगा -नज़ीर बनारसी
9. गुल खिलेंगे नए फूलों की नुमाइश होगी, उस सितमगर की मुहब्बत में भी साज़िश होगी -ज़हीर रहमती
10. बच्चों के छोटे हाथों को चांद सितारे छूने दोचार किताबें पढ़ कर यह भी हम जैसे हो जाएंगे ~ निदा फ़ाज़ली
11- उनका जो फ़र्ज़ है वो अहल-ए-सियासत जानें, मेरा पैग़ाम मोहब्बत है जहाँ तक पहुँचे - जिगर मुरादाबादी
12- मिरे जुनूँ का नतीजा ज़रूर निकलेगा, इसी सियाह समुंदर से नूर निकलेगा - अमीर क़ज़लबाश
13- इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना, दर्द का हद से गुज़रना है दवा हो जाना - ग़ालिब
14- जब भी मिलती है मुझे अजनबी लगती क्यूँ है, ज़िंदगी रोज़ नए रंग बदलती क्यूँ है - शहरयार
15- दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है, मिल जाए तो मिट्टी है खो जाए तो सोना है -निदा फ़ाज़ली
Sep 27, 2023
15 बेहतरीन शेर - 8 !!!
2. दिल था एक शोला मगर बीत गए वो दिन "क़तील", अब कुरेदो न इसे, राख में रखा क्या है ! -क़तील शिफ़ाई
3. हद से बढ़े जो इल्म, तो है ज़हर दोस्तों, सब कुछ जो जानते हैं, वो कुछ जानते नहीं...! खुमार बाराबंकवी
4. इस सिरे से उस सिरे तक सब शरीके-जुर्म हैं, आदमी या तो ज़मानत पर रिहा है, या फ़रार...!!! - दुष्यंत कुमार
5. लहरा रही है बर्फ़ की चादर हटा के घास, सूरज की शह पे तिनके भी बेबाक हो गए...! - परवीन शाकिर
7. बाल अपने बढ़ाते हैं किस वास्ते दीवाने, क्या शहर-ए-मुहब्बत में हज्जाम नहीं होता... - ग़ुलाम हमदानी 'मुसहफ़ी'
8. गुलशन-ए-फ़िरदौस पर क्या नाज़ है रिज़वां तुझे , पूछ उस के दिल से जो है रुत्बा-दान-ए-लखनऊ ...! - नज़्म तबातबाई
9. ज़ुल्म की टहनी कभी फलती नहीं, नाव काग़ज़ की सदा चलती नहीं - इस्माईल मेरठी
10. ख़याल ए ज़ुल्फ़ में हर दम नसीर पीटा कर, गया है साँप निकल अब लकीर पीटा कर - शाह नसीर
11. 'जुस्तुजू जिसकी थी उसको तो न पाया हमने, इस बहाने से मगर देख ली दुनिया हमने' ~ शहरयार
12. वो मेरे घर नहीं आता, मैं उसके घर नहीं जाता, मगर इन एहतियातों से ताल्लुक़ मर नहीं जाता...!!! - वसीम बरेलवी
13. रात ही रात में तमाम तय हुए उम्र के मक़ाम, हो गई ज़िंदगी की शाम अब मैं सहर को क्या करूं... - हफ़ीज़ जालंधरी
14. 'ख़ुद से मिल जाते तो चाहत का भरम रह जाता क्या मिले आप जो लोगों के मिलाने से मिले' ~ कैफ़ भोपाली
15. हमको मिटा सके ये ज़माने में दम नहीं हम से ज़माना ख़ुद है, ज़माने से हम नहीं - जिगर मुरादाबादी
Jun 13, 2023
15 बेहतरीन शेर - 7 !!!
2. दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे. जब कभी हम दोस्त हो जाएँ तो शर्मिंदा न हों ... बशीर बद्र
3. देख रफ़्तार-ए-इंक़लाब 'फ़िराक़', कितनी आहिस्ता और कितनी तेज़ - फ़िराक़ गोरखपुरी
4. "पलकों पे कच्ची नींदों का रस फैलता हो जब, ऐसे में आँख धूप के रुख़ कैसे खोलिए" -परवीन शाकिर
5. इल्म में झिंगुर से बढ़ कर कामरां कोई नहीं, चाट जाता है किताबें, इम्तिहां कोई नहीं...!!! - ज़रीफ़ लखनवी
6. वक़्त करता है परवरिश बरसों, हादिसा एक दम नहीं होता - क़ाबिल अजमेरी
7. हम ने माना कि तग़ाफ़ुल न करोगे लेकिन , ख़ाक हो जाएँगे हम तुम को ख़बर होते तक --- मिर्ज़ा ग़ालिब
8. जनाज़ा रोक कर मेरा वो इस अंदाज़ से बोले, गली हम ने कही थी तुम तो दुनिया छोड़े जाते हो ~ सफ़ी लखनवी
9. क़सम जनाज़े पे आने की मेरे खाते हैं ग़ालिब, हमेशा खाते थे जो मेरी जान की क़सम आगे - ग़ालिब
10. वो गलियाँ याद आती हैं जवानी जिन में खोई बड़ी हसरत से लब पर ज़िक्र ए गोरखपुर आता है - रियाज़ ख़ैराबादी
11. बस कि दुश्वार है हर काम का आसां होना. आदमी को भी मय्यसर नहीं इंसां होना - ग़ालिब.
12. पेट के तक़ाज़ों ने कर दिया है नाबीना, दाना याद रहता है, दाम भूल जाता हूं ...!!! - क़तील शिफ़ाई
13. कोई जन्नत का तालिब है, कोई ग़म से परेशां है, ज़रूरत करवाती है सजदे, वर्ना इबादत यहां कौन करता है - महशर आबिदी
14. तैयार थे नमाज़ पे, हम सुन के ज़िक्र-ए-हूर, जलवा बुतों का देख के नीयत बदल गई ! - अकबर इलाहाबादी
15. “मैं भी बहुत अजीब हूँ इतना अजीब हूँ कि बस, ख़ुद को तबाह कर लिया और मलाल भी नहीं” - जौन एलिया