Sep 4, 2026
मैं जिसे ओढ़ता-बिछाता हूँ
वो ग़ज़ल आपको सुनाता हूँ
एक जंगल है तेरी आँखों में
मैं जहाँ राह भूल जाता हूँ
तू किसी रेल-सी गुज़रती है
मैं किसी पुल-सा थरथराता हूँ
हर तरफ़ ऐतराज़ होता है
मैं अगर रौशनी में आता हूँ
एक बाज़ू उखड़ गया जबसे
और ज़्यादा वज़न उठाता हूँ
मैं तुझे भूलने की कोशिश में
आज कितने क़रीब पाता हूँ
कौन ये फ़ासला निभाएगा
मैं फ़रिश्ता हूँ सच बताता हूँ
--- दुष्यंत कुमार
Aug 31, 2026
माँ
कभी छोड़कर
जाती नहीं
जाती है तो
आँसुओं में
रह जाती है
जब तक दुख
बचा है मुझमें
कविता बची है
माँ है
--- पंकज चतुर्वेदी
Aug 11, 2026
समय ने जब भी अंधेरो से दोस्ती की है
जला के अपना ही घर हमने रोशनी की है
सबूत है मेरे घर में धुएं के ये धब्बे
कभी यहाँ पे उजालों ने ख़ुदकुशी की है
ना लड़खडायाँ कभी और कभी ना बहका हूँ
मुझे पिलाने में फिर तुमने क्यूँ कमी की है
कभी भी वक़्त ने उनको नहीं मुआफ़ किया
जिन्होंने दुखियों के अश्कों से दिल्लगी की है
किसी के ज़ख़्म को मरहम दिया है गर तूने
समझ ले तूने ख़ुदा की ही बंदगी की है
--- गोपालदास नीरज
Aug 7, 2026
चुंबन
मैंने चाची से मिन्नतें की
वो जानती थीं, तुम मेरे होने वाले शौहर हो
तो मान गयीं
मैंने पर्स उठाया, ठीक-ठाक कपड़े पहने, ऑटो बुक किया और पार्क के गेट पर पहुंच गयी
तुम गेट पर ही खड़े थे...
तुम्हारे बगल में एक मूंगफली बेचने वाला दस-बारह साल का लड़का खड़ा था
जो तुमसे बार-बार मूंगफली ख़रीदने का निवेदन कर रहा था
मेरे कहने पर तुमने 10 ₹ की मूंगफली तुलवा ली
हम पार्क मैं बैठे रहे
बैठे-बैठे मूंगफली छीलते रहे
मैं मुस्कराती रही, तुम हंसते रहे
मैं क़िस्से सुनाती रही, तुम क़िस्से सुनते रहे
फिर अचानक से तुमने मुझे चूम लिया
मैं अंगुली से मिट्टी खोदने लगी...
फिर न जाने किस उम्मीद में, मैं उठकर ओट में आ गयी
फिर हम दोनों एक-दूसरे को आलिंगन में भरकर चूमने लगे
तभी एक लड़का आया
उसके चेहरे पर घृणा का भाव था —
'ये सब यहां नहीं चलेगा'
तुम सकपका गये
मैं डर गयी...
तुमने लड़के से कहा — 'सॉरी'
पांच मिनट पहले मुझे पता चला था — 'चुंबन किसे कहते हैं'
पांच मिनट बाद मुझे पता चला — 'चुंबन लेना ज़ुर्म है'
मैं मुंडी नीचे झुकाये पार्क से बाहर आ गयी...
मेरे बदन पर कपड़े थे पर यूं लगा जैसे मैं बिलकुल नंगी हूं
मेरे कानों में तुम्हारी कोई आवाज़ नहीं आयी...
महीनों तक कैसेट की तरह कानों में बस यही बजता रहा —
ये सब यहां नहीं चलेगा...
तुम फ़ोन पर फ़ोन करते रहे
मैं फ़ोन काटती रही...
तुमने मैसेज किया —
'सॉरी ! हम जल्दी शादी कर लेंगे'
फिर हमारी शादी हो गयी
हमारे हिस्से में एक बिस्तर और एक छोटा-सा कमरा आ गया
काम से थके-ऊबे हम कमरे में आते तो मैं रोशनी बुझा देती
आहिस्ता-आहिस्ता तुम्हारे होंठ मेरे होंठो की तरफ़ बढ़ते
तभी वह लड़का मेरे कानों में जोर से चीख़ता,
“ये सब यहां नहीं चलेगा!”
उस अनजान लड़के ने सिर्फ़ एक वाक्य बोलकर
उस एहसास को कुचल दिया
जिससे मैं ज़िन्दगीभर चुम्बन लेती और देती...
-नेहा नरुका
Jul 26, 2026
वो भी क्या दिन थे
वो भी क्या दिन थे कि जब इश्क़ लड़ा लेते थे,
प्यार की डोर को चर्ख़ी पे चढ़ा लेते थे,
नौजवानी की पतंगों को उड़ा लेते थे,
धड़क के कंकड़ियाँ संभाल लेते थे,
होंठों पे हंसी, आंखों में आस थी,
हर ग़म को हंसी में उड़ाया करते थे।
--- सागर खय्यामी
Jul 11, 2026
"अंजानी राहों में" — मेरी जान हिन्दुस्तान एलबम से।
अंजानी राहों में तू क्या ढूँढता फिरे
दूर जिसे समझा वो तो पास है तेरे
साँस में हवा, जान में ज़मीन
दिल में खुला आसमान
प्यार है खुदा, प्यार है ख़ुशी
प्यार से है दोनों जहाँ
तेरा यह आशियाना, मेरा भी आशियाना
घूमता रहा दूर तू कहीं, उड़ते बादलों की तरह
कहीं से तुझे आई है सदा, लौट के आ अब ज़रा
तेरा यह आशियाना, मेरा भी आशियाना
वो झिलमिलाती आँखें, वो भोली सी अदा
वो धीरे-धीरे चल के लहराती हवाएँ
हमको ले जाएँ वहाँ, जहाँ हो घर अपना
मेरी यादों में पाया है
आज तो मिलने का दिन है आया, आया...
Jun 10, 2026
Kya Maloom (Indian Ocean Band)
तीव्र आँधी मृत्युगामी
तीव्र आँधी मृत्युगामी
तीव्र आँधी मृत्युगामी पतालोकम चले
तीव्र आँधी मृत्युगामी पतालोकम चले
धर तिलक की छाप शिखधर तांडव को चले
बाँध घुंगरू मत मगन सुर-ताल अग्नि चढ़े
रक्त रंजित हो धरा रस रूप मंथन करे
रक्त रंजित हो धरा रस रूप मंथन करे
शम की उड़ती धूल शिव का महिमा मंडन करे
May 21, 2026
मन कस्तूरी रे (Mann Kasturi Re)
पाट ना पाया मीठा पानी
पाट ना पाया मीठा पानी
ओर-छोर की दूरी रे
मन कस्तूरी रे, जग दस्तूरी रे
मन कस्तूरी रे, जग दस्तूरी रे
बात हुई ना पूरी रे
खोजे अपनी गंध ना पावे
चादर का पैबंद ना पावे
खोजे अपनी गंध ना पावे
चादर का पैबंद ना पावे
बिखरे बिखरे छंद सा टहले
दो होवें यह बांध ना पावें
नाचे होके फिरकी लट्टू ओह
नाचे होके फिरकी लट्टू
खोजे अपनी रूड़ी रे
मन कस्तूरी रे, जग दस्तूरी रे
मन कस्तूरी रे, जग दस्तूरी रे
बात हुई ना पूरी रे
उम्र की गिनती हाथ ना आई
पुरखों ने यह बात बताई
उल्टा करके देख सके तो
अंबर भी है गहरी खाई
रेखाओं के पार नज़र को
जिसने फेंका अंधे मन से
सतरंगी बेज़ार का खोला
दरवाज़ा बिन ज़ोर जतन के हे
फिर तो झूमा पागल होके
फिर तो झूमा पागल होके
सर पे डाल फितूरी रे
मन कस्तूरी रे, जग दस्तूरी रे
बात हुई ना पूरी रे
मन कस्तूरी रे, जग दस्तूरी रे
बात हुई ना, बात हुई ना
बात हुई ना पूरी रे
मन कस्तूरी रे, जग दस्तूरी रे
नोट: मसान फिल्म समीक्षा
May 13, 2026
भारत की वीर‑परंपरा: राजस्थानी, मराठी और बुंदेली लोक‑दोहों का अद्भुत संग्रह
May 2, 2026
अथ नेता उवाच
देश को बाईसवीं सदी में पहुंचाया जाएगा.
अपना देश महान है, आप गर्व करेंगे सुन कर,
अभी आंकड़ों का गणित, समझाया जाएगा.
दुखदर्द, गरीबी सब हवा हो जाएंगी,
आप को आश्वासनों का जाम पिलाया जाएगा.
सुखे, बाढ़ की समस्या से चितित हैं हम,
अभी हवाई सर्वेक्षण करवाया जाएगा.
कुंआ खोदने की आप नाहक जिद न करें,
आग लगने तो दीजिए, फिर देखा जाएगा.
देशद्रोहियों को राह पर लाने की कोशिश करेंगे,
उन्हें देशभक्ति का रिकार्ड सुनवाया जाएगा.
कोई और परेशानी है तो पी. ए. को लिखवा दें,
आप के क्षेत्र में दोबारा पांच वर्ष बाद आया जाएगा.
- प्रदीप शर्मा
Apr 29, 2026
Title Song Lyrics of Daanasur (Denver the last Dinosaur)
छिपकली के नाना हैं,
छिपकली के हैं ससुर,
दानासुर दानासुर दानासुर!
छिपकली के नाना हैं,
छिपकली के हैं ससुर,
दानासुर दानासुर दानासुर!
तानपुरे के नीचे दो मंजीरे जैसे पाँव,
ना कुत्ते की भौं भौं, ना बिल्ली की म्याँऊ,
सुर है तराने में, धिन तन न ना,
दानासुर दानासुर दानासुर
दानासुर दानासुर दानासुर!
--- गुलज़ार
Apr 17, 2026
15 बेहतरीन शेर - 21 !!!
2. हमारे बस में था ही क्या हवा पे हम सवार थे, वहाँ वहाँ गए जहाँ हवा उड़ा के ले गई -अज़्म शाकिरी
3. क्या क्या हुआ है हम से जुनूँ में न पूछिए , उलझे कभी ज़मीं से कभी आसमाँ से हम - असरार-उल-हक़ मजाज़
4. अब तुमसे रुख़सत होता हूँ आओ सम्भालो साज़े-गज़ल नये तराने छेड़ो, मेरे नग्मों को नींद आती है - रघुपति सहाय 'फ़िराक़'
5. तुझे किस बात का ग़म है वो इतना पूछ लें मुझ से वो इतना पूछ लें मुझ से तो फिर किस बात का ग़म है मुझ से - मुशताक़ हुसैन ख़ान हाशमी मुश्ताक़
6. मुझको तो होश नहीं, तुमको ख़बर हो शायद, लोग कहते हैं कि तुमने मुझे बर्बाद किया - जोश मलीहाबादी
7. मैं तो ग़ज़ल सुना के अकेला खड़ा रहा, सब अपने अपने चाहने वालों में खो गए - कृष्ण बिहारी नूर
9. दाग़ दुनिया ने दिए ज़ख़्म ज़माने से मिले, हम को तोहफ़े ये तुम्हें दोस्त बनाने से मिले - कैफ़ भोपाली
10. ख़ुशियाँ देते देते अक्सर खुद ग़म में मर जाते हैं, रेशम बुनने वाले कीड़े रेशम में मर जाते हैं - ख़ुशबीर सिंह शाद
11. कुछ तो तेरे मौसम ही मुझे रास कम आये और कुछ मेरी मिट्टी में बग़ावत भी बहुत थी - परवीन शाकिर
12. रातें परदेस की डरता था कटेंगी कैसे, मगर आँगन में सितारे थे वही घर वाले - राही मासूम रजा़
13. हम को नीचे उतार लेंगे लोग, इश्क़ लटका रहेगा पंखे से - ज़िया मज़कूर
14. मैखाने के क़रीब थी मस्जिद भले को, दाग़ हर एक पूछता था कि “ हज़रत इधर कहाँ? - दाग़
Mar 20, 2026
तुलसीदास के 14 कालजयी दोहे
1. विनय न मानत जलधि जड़, गए तीनि दिन बीति।
बोले राम सकोप तब, भय बिनु होइ न प्रीति॥
भावार्थ: जब तीन दिन तक विनम्रता से कहने पर भी समुद्र नहीं माना, तब राम को क्रोध आया। तुलसीदास कहते हैं कि बिना भय के प्रेम और अनुशासन नहीं बनता।
2. तुलसी साथी विपत्ति के, विद्या विनय विवेक।
साहस सुकृति सुसत्यव्रत, राम भरोसे एक॥
भावार्थ: विपत्ति के समय विद्या, नम्रता, विवेक, साहस, अच्छे कर्म, सत्य और राम पर भरोसा—यही सच्चे साथी होते हैं।
3.परहित सरिस धरम नहि भाई, पर पीड़ा सम नहि अधमाई।
भावार्थ: दूसरों का भला करने जैसा कोई धर्म नहीं, और दूसरों को कष्ट देना सबसे बड़ा पाप है।
4. धीरज धरम मित्र अरु नारी, आपद काल परखिए चारी।
5. समरथ को नहिं दोष गोसाईं, रवि पावक सुरसरि की नाईं।
भावार्थ: जो समर्थ और महान होता है, उस पर दोष नहीं लगता—जैसे सूर्य, अग्नि और गंगा सबको शुद्ध करते हैं।
6. जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी।
भावार्थ: मनुष्य की भावना जैसी होती है, उसे भगवान भी वैसे ही दिखाई देते हैं।
7. हरि अनंत हरि कथा अनंता, कहहिं सुनहिं बहुविधि सब संता॥
8. होइहि सोइ जो राम रचि राखा, को करि तर्क बढ़ावै साखा॥
भावार्थ: जो राम ने रच दिया है, वही होकर रहता है। तर्क-वितर्क करके कोई भी सत्य को बदल नहीं सकता।
Feb 13, 2026
अकबर इलाहाबादी और सर सैयद: व्यंग्य और सामाजिक सुधार की शायरी
शेर 1: ईमान बेचने को तो तैयार हैं हम भी, लेकिन, खरीद हो जो अलीगढ़ के भाव से।
व्याख्या: इस शेर में इलाहाबादी कहते हैं कि लाखों लोगों ने बाहरी रूप (जैसे दाढ़ी बढ़ाना) अपनाया, लेकिन असली असर वही नहीं हुआ जो मालवी मदन या असली दृष्टिकोण वाला व्यक्ति दर्शाता। यह शेर दिखावे और वास्तविकता के बीच अंतर को उजागर करता है।
शेर 3: तालीम–ए दुस्तुराँ से ये उम्मीद है ज़रा, नाचे दुल्हन ख़ुशी से ख़ुद अपनी बरात में।
व्याख्या: यह शेर शिक्षा और सुधार की उम्मीदों पर व्यंग्य करता है। इलाहाबादी कहते हैं कि शिक्षा का लक्ष्य सिर्फ़ दिखावा न बन जाए, बल्कि उसका असर वास्तविक जीवन में महसूस होना चाहिए।
-------------------------------------------------
अकबर इलाहाबादी की शायरी यह दिखाती है कि आलोचना हमेशा विरोध नहीं होती, बल्कि यह सुधार और सुधारकों के दृष्टिकोण को समझने और परखने का माध्यम भी हो सकती है। उनकी शेरों में व्यंग्य, सामाजिक टिप्पणियाँ और गहरी समझ का सुंदर मिश्रण मिलता है।
Jan 27, 2026
कबीरदास के दोहे: सरल हिंदी में अर्थ
1. दुर्बल को न सताइए, जाकी मोटी हाय।
मरी खाल की साँस से, लोहा भस्म हो जाय॥
मधुर वचन जो बोलिए, कटुक वचन मत तीर॥
जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय॥
सार-सार को गहि रहे, थोथा देई उड़ाय॥
माली सींचे सौ घड़ा, ऋतु आए फल होय॥
पीछे-पीछे हरि फिरै , कहत कबीर कबीर
राजा मरि हैं, परजा मरि हैं, मरि हैं बैद और रोगी।
साधो ये मुरदों का गाँव !
8. बिरहा बुरहा जिनि कहौ, बिरहा है सुलतान।
जा घट बिरह न संचरै, सो घट सदा मसान॥
जो सुख साधू संग में, सो बैकुंठ न होय॥
10. मन मैला तन ऊजरा, बगुला कपटी अंग
तासों तो कौआ भला, तन मन एकही रंग
मीन सदा जल में रहे, धोए बास ना जाये।
मोल करो तरवार का, पड़ा रहन दो म्यान॥
ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय॥
पंछी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर॥
दो पाटन के बीच में, सबूत बचा न कोए॥
पल में प्रलय भएगी, बहुरि करेगा कब॥
एक दिन ऐसा आएगा, मैं रौंंदूँ तोहे॥
बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय॥
ता चढ़ि मुल्ला बांग दे, क्या बहरा हुआ खुदाय॥
कर का मनका डार दे, मन का मनका फेर॥
मैं भी भूखा न रहूँ, साधु भी भूखा न जाय॥
Jan 21, 2026
वो मिट्टी के बेटे - (Mitti Ke Bete Lyrics in Hindi) - INS Vikrant
क्या मन मौजी बेफ़िक्रे थे..ए..
क्या मन मौजी बेफ़िक्रे थे
मौत पे अपने हँसते थे
दिल में वतन को रखने वाले
सर पे कफ़न भी रखते थे
हम जो तिरंगा लहराएँगे
हिचकी बनके याद आएँगे
वो मिट्टी के बेटे, जो वापस ना लौटे
जो वापस ना लौटे, वो मिट्टी के बेटे
वो माँ के अलबेले, जो वापस ना लौटे
जो वापस ना लौटे, वो मिट्टी के बेटे
इस मिट्टी के बेटे
ओ..ओ..ओ..ओ. वो मिट्टी के बेटे
ओ..ओ..ओ..ओ. वो मिट्टी के बेटे
इस मिट्टी के बेटे
जिसके लिए सरदार हमारा
झूल गया था फंदे पर
धूल नहीं लगने दी हमने
उस बेदाग तिरंगे पर
उस बेदाग तिरंगे पर..
उस बेदाग तिरंगे पर
तेरा दर्द तू जाने बाबा
तेरा दर्द तू जाने बाबा
मैं तो खुशी से पागल हूँ
जिसकी गोदी में खेला मैं
चला उसी के कंधे पर
लाडले जब सरहद जाएँगे
हिचकी बनके याद आएँगे
वो मिट्टी के बेटे, जो वापस ना लौटे
जो वापस ना लौटे, वो मिट्टी के बेटे
वो माँ के अलबेले, जो वापस ना लौटे
जो वापस ना लौटे, वो मिट्टी के बेटे
इस मिट्टी के बेटे
ओ छलिये कहाँ पता था?
तू यारों को छल जाएगा
जो चढ़ता सूरज था अपना
वो ऐसे ढल जाएगा,
वो ऐसे ढल जाएगा
वो ऐसे ढल जाएगा
तेरे बिन सरहद से हम भी
तेरे बिन सरहद से हम भी
आधे-अधूरे लौटेंगे
तेरी चिता में धीरे से
कुछ अपना भी जल जाएगा
यार गले जब लग जाएँगे
हिचकी बनके याद आएँगे
वो मिट्टी के बेटे, जो वापस ना लौटे
जो वापस ना लौटे, वो मिट्टी के बेटे
वो माँ के अलबेले, जो वापस ना लौटे
जो वापस ना लौटे, वो मिट्टी के बेटे
इस मिट्टी के बेटे
कुछ दर्द कभी सोते ही नहीं
वनवास ख़तम होते ही नहीं
चौखट पे दीये जलते ही रहे
कुछ राम कभी लौटे ही नहीं
कुछ राम कभी लौटे ही नहीं
कुछ राम कभी लौटे ही नहीं
मेरे नाम का प्याला भर के, हो..ओ..
मेरे नाम का प्याला भर के
बरसातों में पी लेना
बाबा मैं तो रहा नहीं
तू मेरी जवानी जी लेना
हम जब जन गण मन गाएँगे
हिचकी बनके याद आएँगे
वो मिट्टी के बेटे, जो वापस ना लौटे
जो वापस ना लौटे, वो मिट्टी के बेटे
वो माँ के अलबेले, जो वापस ना लौटे
जो वापस ना लौटे, वो मिट्टी के बेटे
इस मिट्टी के बेटे
ओ..ओ..ओ..ओ. वो मिट्टी के बेटे
ओ..ओ..ओ..ओ. वो मिट्टी के बेटे
इस मिट्टी के बेटे...!
--- मनोज मुन्तशिर
गीत का संदर्भ : "वो मिट्टी के बेटे" एक देशभक्ति गीत की पंक्ति है जो हाल ही में रिलीज़ हुई फिल्म बॉर्डर 2 से ली गई है। यह उन शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि है जो मातृभूमि की रक्षा में लौटकर नहीं आए।यह गीत सोनू निगम द्वारा गाया गया है, संगीत मिथून का है, और बोल मनोज मुंतशिर ने लिखे हैं। गीत सैनिकों के बलिदान, माँ के लालों की बेफिक्री और तिरंगे की रक्षा पर केंद्रित है।
Jan 12, 2026
पाँच साल
उग आता है
बाप की आँखों में मोतियाबिंद
जम जाती हैं
माँ के चेहरे पर झुर्रियाँ
चल बसता है दादा
बिस्तर पकड़ लेती है दादी
रिश्तेदार बदल लेते हैं घर
पाँच सालों में गुज़र जाते हैं
सैकड़ों हंगामे अख़बार सीखा देते हैं
लोगों को नुकीली ज़बान
लाशों के नज़ारे बढ़ा देते हैं
खून की प्यास
घरों के मलबों पर नाचने लगते हैं तमाशबीन
ज़हरीली चरस खींच कर
पाँच सालों में हो जाता है
पाँच सालों में
- हुसैन हैदरी
Jan 4, 2026
रहीम के 25 अमर दोहे: सरल भाषा में विस्तृत अर्थ
1. अब रहीम मुश्किल पड़ी, गाढ़े दोऊ काम।
सांचे से तो जग नहीं, झूठे मिलें न राम॥
विस्तृत अर्थ: जब मनुष्य पर कठिन समय आता है, तब सच्चाई का साथ देने वाला समाज नहीं मिलता और झूठ का सहारा लेने पर ईश्वर भी प्राप्त नहीं होते। अर्थात विपत्ति में मनुष्य अकेला पड़ जाता है।
2. वे रहीम नर धन्य हैं, पर उपकारी अंग।
बाटनवारे को लगे, ज्यों मेंहदी को रंग॥
विस्तृत अर्थ: उपकारी व्यक्ति चाहे कितना ही बाँट दिया जाए, उसका गुण और प्रभाव कभी कम नहीं होता, जैसे मेहंदी बाँटने पर भी अपना रंग छोड़ती है।
3. रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून।
पानी गए न ऊबरै, मोती, मानुष, चून॥
4. रहिमन निज मन की व्यथा, मन ही राखो गोय।
सुनि अठलैहैं लोग सब, बाँटि न लेहैं कोय॥
गिरधर मुरलीधर कहे, कछु दुख मानत नाह॥
विस्तृत अर्थ: महान व्यक्ति छोटे नाम या साधारण संबोधन से छोटा नहीं हो जाता, जैसे कृष्ण को कोई भी नाम कहे, उनकी महत्ता कम नहीं होती।
6. समय लाभ सम लाभ नहिं, समय चूक सम चूक।
चतुरन चित रहीम लगी, समय चूक कछु चूक॥
विस्तृत अर्थ: समय का सदुपयोग सबसे बड़ा लाभ है और समय चूक जाना सबसे बड़ा नुकसान, क्योंकि समय हाथ से निकल जाए तो अवसर लौटकर नहीं आते।
7. ए रहीम दर दर फिरहिं, माँगि मधुकरी खाहिं।
यारो यारी छोड़िये, वे रहीम अब नाहिं॥
विस्तृत अर्थ: जो व्यक्ति स्वाभिमान छोड़कर दर-दर भीख माँगता फिरता है, उससे मित्रता छोड़ देनी चाहिए, क्योंकि वह अपना आत्मसम्मान खो चुका होता है।
8. रहिमन वे नर मर चुके, जे कहुँ माँगन जाहिं।
उनते पहिले वे मुए, जिन मुख निकसत नाहिं॥
विस्तृत अर्थ:: माँगकर जीना आत्मसम्मान की मृत्यु है; पर उससे भी पहले वे मर चुके हैं जिनके मुख से ‘न’ शब्द नहीं निकलता।
9. जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करि सकत कुसंग।
चन्दन विष व्यापत नहीं, लिपटे रहत भुजंग॥
विस्तृत अर्थ: अच्छे स्वभाव वाला व्यक्ति बुरी संगति में रहकर भी अपना गुण नहीं खोता, जैसे चंदन पर लिपटा साँप भी उसे विषैला नहीं बना पाता।
10. रहिमन प्रीति न कीजिए, जस खीरा ने कीन।
ऊपर से तो दिल मिला, भीतर फांकें तीन॥
विस्तृत अर्थ:: जो प्रेम केवल दिखावे का हो, उसमें भीतर से टूटन होती है; ऐसा प्रेम अंत में धोखा ही देता है।
11. तरुवर फल नहिं खात है, सरवर पियहि न पान।
कहि रहीम पर काज हित, संपति संचहि सुजान॥
विस्तृत अर्थ:: जैसे पेड़ अपने फल नहीं खाते और तालाब अपना पानी नहीं पीते, वैसे ही सज्जन व्यक्ति अपनी संपत्ति दूसरों के कल्याण के लिए संचित करता है।
12. रूठे सुजन मनाइए, जो रूठे सौ बार।
रहीमन फिरि फिरि पोइए, टूटे मुक्ता हार॥
विस्तृत अर्थ: अच्छे और सज्जन लोगों से संबंध टूटने न दें, क्योंकि वे टूटे मोती के हार जैसे होते हैं जिन्हें फिर से पिरोना चाहिए।
13. क्षमा बड़न को चाहिए, छोटन को उत्पात।
कह रहीम हरि का घट्यौ, जो भृगु मारी लात॥
विस्तृत अर्थ: क्षमा केवल महान लोगों का गुण है; क्रोध करना छोटे मन का लक्षण है | उदाहरण के रूप में वे कहते हैं कि जब महर्षि भृगु ने भगवान विष्णु को पैर मारा, तब भी भगवान ने क्रोध नहीं किया, बल्कि उनके पैर दबाने लगे।
14. रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय।
टूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गाँठ पड़ जाय॥
विस्तृत अर्थ: प्रेम का संबंध बहुत नाज़ुक होता है; एक बार टूट जाए तो दोबारा जुड़ने पर भी उसमें गाँठ रह जाती है।
15. एकही साधे सब सधै, सब साधे सब जाय।
रहिमन मूल सींच बोये, फूल लहि अघाय॥
विस्तृत अर्थ: यदि मूल कारण पर ध्यान दिया जाए तो सभी कार्य सफल हो जाते हैं; इधर-उधर भटकने से सब कुछ नष्ट हो जाता है।
16. रहिमन ओछे नरन सो, बैर भली न कीत।
काटे चाटे स्वान के, दोऊ भाँति ती प्रतीत॥
विस्तृत अर्थ: नीच व्यक्ति से शत्रुता दोनों ही स्थितियों में नुकसानदायक होती है, चाहे वह नुकसान करे या दिखावटी प्रेम दिखाए।
17. जो रहीम गति दीप की, कुल कपूत गति सोय।
बारे उजियारो करे, बढ़े अँधेरो होय॥
विस्तृत अर्थ: कुपुत्र परिवार का नाम रोशन करने के बजाय बदनामी लाता है, जैसे दीपक बुझने पर अंधकार बढ़ जाता है।
18. रहिमन चुप हो बैठिए, देखि दिनन को फेर।
जब नीके दिन आइहैं, बनत न लागै बेर॥
विस्तृत अर्थ: बुरे समय में धैर्य और मौन रखना चाहिए, क्योंकि अच्छे दिन आने पर परिस्थितियाँ स्वयं सुधर जाती हैं।
19. रहिमन प्रेम न छाँड़िए, लघु जन जानि।
कूँजा पथिक न छोड़ई, देखि बावड़ी पानी॥
विस्तृत अर्थ: छोटे व्यक्ति या छोटे साधन को तुच्छ न समझें, क्योंकि संकट में वही सहारा बन सकता है।
20. रहिमन मीत बनाइए, कठिन समय के काम।
आपत्ति काज न आवहीं, संपत्ति साँचि सुजान॥
विस्तृत अर्थ: सच्चे मित्र वही होते हैं जो संकट में साथ दें; धन केवल सुरक्षित रखा जा सकता है, मदद नहीं कर सकता।
21. रहिमन गति अगम्य है, प्रेम की रीति अपार।
दादुर डूबे पंक में, मीन न उबरै पार॥
विस्तृत अर्थ: प्रेम की शक्ति और उसकी गति को समझना कठिन है; इसमें अयोग्य डूब जाते हैं और योग्य भी पार नहीं पा पाते।
22. रहिमन जिह्वा बावरी, कह गई सरग पाताल।
आप तो कह भीतर रही, जूता खात कपाल॥
विस्तृत अर्थ: असंयमित वाणी मनुष्य को अपमान और संकट में डाल देती है, जबकि बोलने वाली जिह्वा स्वयं सुरक्षित रहती है।
23. रहिमन हानि लाभ जीवन मरण, यश अपयश विधि हाथ।
जेति बने तित होइये, एहि विधि रहीम रीत॥
विस्तृत अर्थ: लाभ-हानि, जीवन-मरण और मान-अपमान सब विधि के हाथ में हैं; इसलिए जो मिले उसे स्वीकार करना चाहिए।
24. ओछो काम बड़े करैं तौ न बड़ाई होय।
विस्तृत अर्थ: यदि कोई छोटा या सामान्य व्यक्ति कोई बड़ा काम करता है, तो भी उसकी बड़ाई नहीं होती, जैसे हनुमान को कोई कृष्ण (गिरधर) नहीं कहता।
25. रहिमन यह तन विष की बेलरी, गुरु अमृत की खान।
सीस दिए जो गुरु मिले, तो भी सस्ता जान॥
विस्तृत अर्थ: यह शरीर नश्वर और विष के समान है, जबकि गुरु का ज्ञान अमृत तुल्य है; गुरु के लिए जीवन भी न्योछावर करना सस्ता सौदा है।
Dec 31, 2025
UP Board Hindi Book "महान व्यक्तित्व" (पूर्व नाम – हमारे पूर्वज) के प्रेरक दोहे
Dec 24, 2025
अरावली के आख़िरी दिन
एक मधुमक्खी परागकणों के साथ
उड़ते-उड़ते थक जाएगी।
सभी बहेलिए जाल को देखकर
उलझन में पड़ जाएँगे।
एक नन्हा ख़रगोश लू की बौछार में
हाँफते-हाँफते थक जाएगा।
चेतना आकुलित बघेरे कहीं नहीं दिखेंगे
इस निरीह-निर्वसन धरती पर।
अरावली के आख़िरी दिन
युवतियाँ छाता लेकर सैर करने जाएँगी
और लॉन में टहलकर लौट आएँगी।
एक शराबी चंद्रमा की रोशनी में
बहेलिए बस्तियों की ओर लौटते नज़र आएँगे।
कुछ पीले चेहरे सब्ज़ियों के ठेले लेकर
मुहल्लों में रेंगते हुए आवाज़ें देंगे।
बिना तारों वाली सघन अँधेरी रात में
रावण-हत्थे की आवाज़ के साथ तैरेगी
बच रह गए एक गीदड़ की टीस।
और जिन्हें नीले नभ में बिजलियाँ चमकने,
बादल गरजने और वर्षा की बूँदों का इंतिज़ार है,
सूखे काले अँधेरे में आँख मिचमिचाते और
कानों में कनिष्ठिकाएँ हिलाते थक जाएँगे।
और जिन्हें किताबें पढ़ने का शौक होगा,
शब्दकोश में साँप का अर्थ ढूँढ़कर
अपने बच्चों को कालबेलिया जोगियों की कथा सुनाएँगे
और सुनहरे केंचुल ओढ़े कोई देवता
सितारों की ओट में धरती को भरी आँख से निर्निमेष निहारेगा।
हालाँकि बात ऐसी है
अरावली की कोई एक तस्वीर देखकर
सूरज और चाँद के नीचे सुन नहीं पाता कोई
कभी ख़त्म न होने वाली बिलख, जो हर
इमारत की नींव तले दबी फूटती रहती है।
बड़ी आलीशान इमारतों में खिलते रहते हैं
ख़ूबसूरत गुलाबों जैसे नन्हे शिशु
और इसीलिए किसी को विश्वास नहीं होता कि
अरावली के आख़िरी दिन अरावली ऐसी होगी?
अरावली के आख़िरी दिन ऐसा ज़रूर होगा
एक अवतारी पुरुष आएँगे
एक नबी पुकारेगा
लेकिन बात ऐसी है कि वे दोनों आईफ़ोन पर व्यस्त होंगे
उन्हें न धनिए, न हरी मिर्च, न मेथी, न आलू,
न टमाटर, न ज़ीरे और न हरे चने की ज़रूरत होगी,
क्योंकि उनके बैग में
मैक्डॉनल्ड के बर्गर, मैकपफ़ और सालसा रैप होंगे।
अरावली का इसके अलावा यहाँ और क्या अंत होगा?
अरावली का इसके अलावा वहाँ और क्या अंत होगा?
स्रोत :रचनाकार : त्रिभुवन
प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित
संदर्भ : सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में अरावली पहाड़ियों की नई परिभाषा को मंजूरी दी, जिसमें 100 मीटर ऊंचाई से कम की पहाड़ियों को बाहर रखा गया, जिससे राजस्थान के 91% से अधिक क्षेत्र असुरक्षित हो गए। यह फैसला पर्यावरण मंत्रालय की सिफारिश पर आधारित था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की ही समिति (सीईसी) और भारतीय वन सर्वेक्षण (एफएसआई) ने इसका विरोध किया, क्योंकि इससे अवैध खनन को बढ़ावा मिलेगा।अरावली, जो दुनिया की सबसे प्राचीन पर्वतमाला है, दिल्ली-एनसीआर को रेगिस्तान से बचाती है, भूजल रिचार्ज करती है और जैव विविधता का केंद्र है, लेकिन पिछले दो दशक में 25-35% हिस्सा खनन से नष्ट हो चुका।ग्रामीणों, पर्यावरणविदों और आदिवासी समुदायों ने जयपुर, अलवर, उदयपुर जैसे क्षेत्रों में बड़े प्रदर्शन शुरू कर दिए, जहाँ गुर्जर-मेव किसान उपवास, जनसभाएँ और हस्ताक्षर अभियान चला रहे हैं।"अरावली विरासत जन अभियान" के तहत चार राज्यों के प्रतिनिधि खनन माफियाओं के खिलाफ एकजुट हुए, मांग की कि पूरी 692 किमी रेंज को पारिस्थितिक क्षेत्र घोषित कर नई खदानों पर पूर्ण रोक लगे।कार्यकर्ता राजेंद्र सिंह और नीलम अहुवालिया जैसे नेता चेतावनी दे रहे हैं कि यह फैसला मरुस्थलीकरण, जल संकट और प्रदूषण को बढ़ेगा, जबकि कोर्ट ने सस्टेनेबल माइनिंग प्लान तक नई लीज पर रोक का निर्देश दिया है।यह संघर्ष पर्यावरण रक्षा से आगे लोकतांत्रिक अधिकारों की लड़ाई बन गया है।



