Aug 23, 2026

वो ज़माना गुज़र गया कब का

वो ज़माना गुज़र गया कब का
था जो दीवाना मर गया कब का

ढूंढ़ता था जो इक नई दुनिया
लूट के अपने घर गया कब का

वो जो लाया था हम को दरिया तक
पार अकेले उतर गया कब का

उस का जो हाल है वही जाने
अपना तो ज़ख़्म भर गया कब का

ख़्वाब-दर-ख़्वाब था जो शीराज़ा
अब कहां है बिखर गया कब का

--- जावेद अख़्तर

No comments: