क्या मन मौजी बेफ़िक्रे थे..ए..
क्या मन मौजी बेफ़िक्रे थे
मौत पे अपने हँसते थे
दिल में वतन को रखने वाले
सर पे कफ़न भी रखते थे
हम जो तिरंगा लहराएँगे
हिचकी बनके याद आएँगे
वो मिट्टी के बेटे, जो वापस ना लौटे
जो वापस ना लौटे, वो मिट्टी के बेटे
वो माँ के अलबेले, जो वापस ना लौटे
जो वापस ना लौटे, वो मिट्टी के बेटे
इस मिट्टी के बेटे
ओ..ओ..ओ..ओ. वो मिट्टी के बेटे
ओ..ओ..ओ..ओ. वो मिट्टी के बेटे
इस मिट्टी के बेटे
जिसके लिए सरदार हमारा
झूल गया था फंदे पर
धूल नहीं लगने दी हमने
उस बेदाग तिरंगे पर
उस बेदाग तिरंगे पर..
उस बेदाग तिरंगे पर
तेरा दर्द तू जाने बाबा
तेरा दर्द तू जाने बाबा
मैं तो खुशी से पागल हूँ
जिसकी गोदी में खेला मैं
चला उसी के कंधे पर
लाडले जब सरहद जाएँगे
हिचकी बनके याद आएँगे
वो मिट्टी के बेटे, जो वापस ना लौटे
जो वापस ना लौटे, वो मिट्टी के बेटे
वो माँ के अलबेले, जो वापस ना लौटे
जो वापस ना लौटे, वो मिट्टी के बेटे
इस मिट्टी के बेटे
ओ छलिये कहाँ पता था?
तू यारों को छल जाएगा
जो चढ़ता सूरज था अपना
वो ऐसे ढल जाएगा,
वो ऐसे ढल जाएगा
वो ऐसे ढल जाएगा
तेरे बिन सरहद से हम भी
तेरे बिन सरहद से हम भी
आधे-अधूरे लौटेंगे
तेरी चिता में धीरे से
कुछ अपना भी जल जाएगा
यार गले जब लग जाएँगे
हिचकी बनके याद आएँगे
वो मिट्टी के बेटे, जो वापस ना लौटे
जो वापस ना लौटे, वो मिट्टी के बेटे
वो माँ के अलबेले, जो वापस ना लौटे
जो वापस ना लौटे, वो मिट्टी के बेटे
इस मिट्टी के बेटे
कुछ दर्द कभी सोते ही नहीं
वनवास ख़तम होते ही नहीं
चौखट पे दीये जलते ही रहे
कुछ राम कभी लौटे ही नहीं
कुछ राम कभी लौटे ही नहीं
कुछ राम कभी लौटे ही नहीं
मेरे नाम का प्याला भर के, हो..ओ..
मेरे नाम का प्याला भर के
बरसातों में पी लेना
बाबा मैं तो रहा नहीं
तू मेरी जवानी जी लेना
हम जब जन गण मन गाएँगे
हिचकी बनके याद आएँगे
वो मिट्टी के बेटे, जो वापस ना लौटे
जो वापस ना लौटे, वो मिट्टी के बेटे
वो माँ के अलबेले, जो वापस ना लौटे
जो वापस ना लौटे, वो मिट्टी के बेटे
इस मिट्टी के बेटे
ओ..ओ..ओ..ओ. वो मिट्टी के बेटे
ओ..ओ..ओ..ओ. वो मिट्टी के बेटे
इस मिट्टी के बेटे...!
--- मनोज मुन्तशिर
गीत का संदर्भ : "वो मिट्टी के बेटे" एक देशभक्ति गीत की पंक्ति है जो हाल ही में रिलीज़ हुई फिल्म बॉर्डर 2 से ली गई है। यह उन शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि है जो मातृभूमि की रक्षा में लौटकर नहीं आए।यह गीत सोनू निगम द्वारा गाया गया है, संगीत मिथून का है, और बोल मनोज मुंतशिर ने लिखे हैं। गीत सैनिकों के बलिदान, माँ के लालों की बेफिक्री और तिरंगे की रक्षा पर केंद्रित है।
No comments:
Post a Comment