दोस्त बनकर भी नहीं साथ निभाने वाला
वो ही अंदाज़ है ज़ालिम का ज़माने वाला।
क्या कहें कितने मरासिम थे हमारे उससे
वो जो इक शख़्स है मुँह फेर के जाने वाला।
क्या ख़बर थी जो मेरी जाँ में घुला रहता है
है वही मुझको सर-ए-दार भी लाने वाला।
मैंने देखा है बहारों में चमन को जलते
है कोई ख़्वाब की ताबीर बताने वाला।
तुम तक़ल्लुफ़ को भी इख़लास समझते हो ‘फ़राज़’
दोस्त होता नहीं हर हाथ मिलाने वाला।
–
मरासिम = Relations, Agreements
सर-ए-दार = At the Tomb
ताबीर = Interpretation
तक़ल्लुफ़ = Formality
इख़लास = Sincerity, Love, Selfless Worship
---अहमद फ़राज़
About Me
- Himanshu Rai
- दो लम्हे का जीवन है, एक क्षण उन्माद का, एक क्षण आह्लाद का, बस इतना ही जियूँगा!
Tuesday, September 20, 2011
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
Popular Posts
-
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है देखना है ज़ोर कितना बाज़ू-ए-क़ातिल में है (ऐ वतन,) करता नहीं क्यूँ दूसर कुछ बातचीत, देखता हूँ मैं जि...
-
दुनिया मैं बादशाह है सो है वोह भी आदमी और मुफलिस ओ गदा है सो है वोह भी आदमी जार दर बे नवा है सो है वोह भी आदमी नेमत जो खा रहा है सो है वोह भ...
-
देखो इस सारी दुनिया को एक दृष्टि से सिंचित करो धरा, समता की भाव वृष्टि से जाति भेद की, धर्म-वेश की काले गोरे रंग-द्वेष की ज्वालाओं से जल...
-
I call on you I clasp your hands I kiss the ground under your feet And I say: I offer my life for yours I give you the light of my eyes ...
-
हर तरफ हुस्न है, जवानी है, आज की रात क्या सुहानी है रेशमी जिस्म तरथराते है, मरमरी ख्वाब गुनगुनाते है धड़कानों में सुरूर फैला है, रंग नज़द...
-
जीवन में एक सितारा था माना वह बेहद प्यारा था वह डूब गया तो डूब गया अंबर के आंगन को देखो कितने इसके तारे टूटे कितने इसके प्यारे छूटे जो...
-
ज़िहाल-ए मिस्कीं मकुन तगाफ़ुल, दुराये नैना बनाये बतियां कि ताब-ए-हिजरां नदारम ऎ जान, न लेहो काहे लगाये छतियां शबां-ए-हिजरां दरज़ चूं ज़ुल्फ...
-
कुँवर महेंद्र सिंह बेदी 'सहर' की शायरी से: 1--- आए हैं समझाने लोग हैं कितने दीवाने लोग दैर-ओ-हरम1 में चैन जो मिलता क्यूं जात...
-
किताबें करती हैं बातें बीते जमानों की, दुनिया की, इंसानों की, आज की, कल की, एक-एक पल की, गमों की, फूलों की, बमों की, गनों की, जीत की,...
-
If none heeds your cry to march together, just walk alone, no if or whether. If they answer not to thy call walk alone, If they are afraid ...

No comments:
Post a Comment