Friday, April 9, 2010

Sarfaroshi ki Tamanna...

सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
देखना है ज़ोर कितना बाज़ू-ए-क़ातिल में है

(ऐ वतन,) करता नहीं क्यूँ दूसर कुछ बातचीत,
देखता हूँ मैं जिसे वो चुप तेरी महफ़िल में है
ऐ शहीद-ए-मुल्क-ओ-मिल्लत, मैं तेरे ऊपर निसार,
अब तेरी हिम्मत का चरचा ग़ैर की महफ़िल में है
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

वक़्त आने पर बता देंगे तुझे, ए आसमान,
हम अभी से क्या बताएँ क्या हमारे दिल में है
खेँच कर लाई है सब को क़त्ल होने की उमीद,
आशिकों का आज जमघट कूचा-ए-क़ातिल में है
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

है लिए हथियार दुश्मन ताक में बैठा उधर,
और हम तैयार हैं सीना लिए अपना इधर.
ख़ून से खेलेंगे होली गर वतन मुश्क़िल में है,
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

हाथ, जिन में है जूनून, कटते नही तलवार से,
सर जो उठ जाते हैं वो झुकते नहीं ललकार से.
और भड़केगा जो शोला सा हमारे दिल में है,
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

हम तो घर से ही थे निकले बाँधकर सर पर कफ़न,
जाँ हथेली पर लिए लो बढ चले हैं ये कदम.
ज़िंदगी तो अपनी मॆहमाँ मौत की महफ़िल में है,
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

यूँ खड़ा मक़्तल में क़ातिल कह रहा है बार-बार,
क्या तमन्ना-ए-शहादत भी किसी के दिल में है?
दिल में तूफ़ानों की टोली और नसों में इन्कलाब,
होश दुश्मन के उड़ा देंगे हमें रोको न आज.
दूर रह पाए जो हमसे दम कहाँ मंज़िल में है,
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

वो जिस्म भी क्या जिस्म है जिसमे न हो ख़ून-ए-जुनून
क्या लड़े तूफ़ान से जो कश्ती-ए-साहिल में है
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
देखना है ज़ोर कितना बाज़ू-ए-क़ातिल में

English Translation:
The desire for sacrifice is now in our hearts
We shall now see what strength there is in the boughs of the enemy.

Hey country, Why is no one speaking to each other?
Whoever I see, is gathered quiet in my party...
O martyr of country, of nation, I submit myself to thee
For yet even the enemy speaks of thy courage
The desire for struggle is in our hearts...

When the time comes, we shall show thee, O heaven
For why should we tell thee now, what lurks in our hearts?
We have been dragged to service, by the hope of blood, of vengeance
Yea, by our love for nation divine, we go to the streets of the enemy
The desire for struggle is in our hearts...

Armed does the enemy sit, ready to open fire
Ready too are we, our bosoms thrust out to him
With blood we shall play Holi, if our nation need us
The desire for struggle is in our hearts...

No sword can sever hands that have the heat of battle within,
No threat can bow heads that have risen so...
Yea, for in our insides has risen a flame,
and the desire for struggle is in our hearts...

Set we out from our homes, our heads shrouded with cloth,
Taking our lives in our hands, do we march so...
In our assembly of death, life is now but a guest
The desire for struggle is in our hearts...

Stands the enemy in the gallows thus, asking,
Does anyone wish to be sacrificed?...
With a host of storms in our heart, and with revolution in our breath,
We shall knock the enemy cold, and no one shall stop us...

What good is a body that does not have passionate blood,
How can one conquer a storm while in a shored boat.

The desire for struggle is in our hearts,
We shall now see what strength there is in the boughs of the enemy.

--- बिस्मिल अज़ीमाबादी (Wrongly cited for Ram Prasad Bismil)

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