23 फ़रवरी 2021

पुल बन गया था

 मैं जिन लोगों के लिए

पुल बन गया था 

वे जब मुझ पर से 

गुज़र कर जा रहे थे

मैंने सुना—मेरे बारे में कह रहे थे :

वह कहाँ छूट गया 

चुप-सा आदमी?

शायद पीछे लौट गया है!

हमें पहले ही ख़बर थी

उसमें दम नहीं है।

--- सुरजीत पातर  

पंजाबी से अनुवाद : चमनलाल


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