Sep 5, 2025

Additional Sessions Judge Amitabh Rawat - Poem

“Babu pleading for his bail;State opposing tooth and nail.
Summers bygone, winters have arrived;
But crime you did, and Rahul cried.
I am not the one, I am not the one;
Too grave the charge, don’t pretend.
Whom did I attack, where is he;
Oh! That we know, in the trial we will see.
You say I have said & I deny from the first blush;
Rahul may be gone yet Satish said.
Didn’t we say; don’t rush;
Let me go, let me go, even Imran is on bail.
Even then, even then; it wouldn’t be a smooth sail.
Stop! Stop! Stop! Stop;
I have heard, heard a lot.
Mind is clear, with claims tall;
Its my time to take a call.
Babu has a sordid past;
proof is scant, which may not last.
His omnipotence can’t be assumed;
Peril to vanished Rahul, is legally fumed.”
Take your freedom from the cage you are in;
Till the trial is over, the state is reigned in.
The State proclaims; to have the cake and eat it too; The Court comes calling ;
before the cake is eaten, bake it too.

--- Judge Amitabh Rawat

Aug 28, 2025

Baje sargam har taraf se goonj bankar...

बजे सरगम हर तरफ से, 
गूँज बनकर देश राग, देश राग। 
ताल कदमों पे जागे जाय, 
लब पे जागे गीत ऐसा, 
गूँजे बनकर देश राग।

इस गीत का मतलब है कि देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की धुन हर तरफ बज रही है, जो सभी को जोड़ती है और आगे बढ़ने की ताकत देती है। इसमें भारत के मशहूर गायक, वादक और नर्तकी देश की मुख्य परंपरागत कलाओं का सुंदर प्रदर्शन करते हैं। राग जो कि शास्त्रीय संगीत की आत्मा है, के साथ तबला, संतूर, सरोद, सितार, कथक, भरतनाट्यम, मणिपुरी और ओड़िसी जैसे कई नृत्य और संगीत शैलियाँ इस वीडियो में एक ही संगति में भारत की एकता और खूबसूरती को दर्शाती हैं।


   

Aug 26, 2025

WEDNESDAY

A man wailing is not a dancing bear —Aimé Césaire

There’s death in the eyes of this newborn.
I heard the baby complain about a treacherous defeat,
called it the same old catastrophe.

A storm in his ear says it’s raging for silence.
Thunder erupts when he’s shushed.
What a worsened scenario. He skipped ahead.

What do you do when your destiny is predetermined?
Life in this hospital laughs at us.
Long is the wait. Wild is the wind.

I ask if there’s a wedding going on.
The nurse complained of the clouds.
If I were a stupid flower, 
I’d wither under the rain.

They asked her, What’s wrong with the flower?
not What’s wrong with the rain?

--- Mohammed El-Kurd

Aug 21, 2025

ऐ उम्र..! कुछ कहा मैंने

ऐ उम्र..!

कुछ कहा मैंने,
पर शायद तूने सुना नहीं..
तू छीन सकती है बचपन मेरा,
पर बचपना नहीं..!!

हर बात का कोई जवाब नहीं होता
हर इश्क का नाम खराब नहीं होता…
यूं तो झूम लेते है नशे में पीनेवाले
मगर हर नशे का नाम शराब नहीं होता…

खामोश चेहरे पर हजारों पहरे होते हैं
हंसती आँखों में भी जख्म गहरे होते हैं
जिनसे अक्सर रूठ जाते हैं हम,
असल में उनसे ही रिश्ते गहरे होते हैं…

किसी ने खुदा से दुआ मांगी
दुआ में अपनी मौत मांगी,
खुदा ने कहा, मौत तो तुझे दे दूँ मगर,
उसे क्या कहूं जिसने तेरी जिंदगी की दुआ मांगी…

हर इन्सान का दिल बुरा नहीं होता
हर एक इन्सान बुरा नहीं होता
बुझ जाते है दीये कभी तेल की कमी से…
हर बार कुसूर हवा का नहीं होता !!!

Aug 15, 2025

ये दाढ़ियाँ ये तिलक धारियाँ नहीं चलतीं

ये दाढ़ियाँ ये तिलक धारियाँ नहीं चलतीं
हमारे अहद में मक्कारियाँ नहीं चलतीं
 
क़बीले वालों के दिल जोड़िए मिरे सरदार
सरों को काट के सरदारियाँ नहीं चलतीं
 
बुरा न मान अगर यार कुछ बुरा कह दे
दिलों के खेल में ख़ुद्दारियाँ नहीं चलतीं
 
छलक छलक पड़ीं आँखों की गागरें अक्सर
सँभल सँभल के ये पनहारियाँ नहीं चलतीं
 
जनाब-ए-'कैफ़' ये दिल्ली है 'मीर' ओ 'ग़ालिब' की
यहाँ किसी की तरफ़-दारियाँ नहीं चलतीं

--- कैफ़ भोपाली

Aug 9, 2025

रक्षाबंधन विशेष: 'मैं अपने हाथ से प्यारे के बाँधूँ प्यार की राखी'

चली आती है अब तो हर कहीं बाज़ार की राखी
सुनहरी सब्ज़ रेशम ज़र्द और गुलनार की राखी
बनी है गो कि नादिर ख़ूब हर सरदार की राखी
सलोनों में अजब रंगीं है उस दिलदार की राखी
न पहुँचे एक गुल को यार जिस गुलज़ार की राखी

अयाँ है अब तो राखी भी चमन भी गुल भी शबनम भी
झमक जाता है मोती और झलक जाता है रेशम भी
तमाशा है अहा हा-हा ग़नीमत है ये आलम भी
उठाना हाथ प्यारे वाह-वा टुक देख लें हम भी
तुम्हारी मोतियों की और ज़री के तार की राखी

मची है हर तरफ़ क्या क्या सलोनों की बहार अब तो
हर इक गुल-रू फिरे है राखी बाँधे हाथ में ख़ुश हो
हवस जो दिल में गुज़रे है कहूँ क्या आह मैं तुम को
यही आता है जी में बन के बाम्हन, आज तो यारो
मैं अपने हाथ से प्यारे के बाँधूँ प्यार की राखी

हुई है ज़ेब-ओ-ज़ीनत और ख़ूबाँ को तो राखी से
व-लेकिन तुम से ऐ जाँ और कुछ राखी के गुल फूले
दिवानी बुलबुलें हों देख गुल चुनने लगीं तिनके
तुम्हारे हाथ ने मेहंदी ने अंगुश्तों ने नाख़ुन ने
गुलिस्ताँ की चमन की बाग़ की गुलज़ार की राखी

अदा से हाथ उठते हैं गुल-ए-राखी जो हिलते हैं
कलेजे देखने वालों के क्या क्या आह छिलते हैं
कहाँ नाज़ुक ये पहुँचे और कहाँ ये रंग मिलते हैं
चमन में शाख़ पर कब इस तरह के फूल खिलते हैं
जो कुछ ख़ूबी में है उस शोख़-ए-गुल-रुख़्सार की राखी

फिरें हैं राखियाँ बाँधे जो हर दम हुस्न के तारे
तो उन की राखियों को देख ऐ जाँ चाव के मारे
पहन ज़ुन्नार और क़श्क़ा लगा माथे उपर बारे
'नज़ीर' आया है बाम्हन बन के राखी बाँधने प्यारे
बँधा लो उस से तुम हँस कर अब इस त्यौहार की राखी

--- नज़ीर अकबराबादी

Aug 4, 2025

उस शहर में मत जाओ

उस शहर में मत जाओ
जहाँ तुम्हारा बचपन गुज़रा
अब वो वैसा नहीं मिलेगा
जिस घर में तुम किराएदार थे
वहाँ कोई और होगा
तुम उजबक की तरह
खपरैल वाले उस घर के दरवाजे पर खड़े होगे और
कोई तुम्हें पहचान नहीं पाएगा !

— विनय सौरभ

Aug 1, 2025

स्थानीयता के संघर्ष

आसान है करना प्रधानमंत्री की आलोचना
मुख्यमंत्री की करना उससे थोड़ा मुश्किल
विधायक की आलोचना में ख़तरा ज़रूर है
लेकिन ग्राम प्रधान के मामले में तो पिटाई होना तय है।

अमेज़न के वर्षा वनों की चिंता करना कूल है
हिमालय के ग्लेशियरों पर बहस खड़ी करना
थोड़ा मेहनत का काम
बड़े पावर प्लांट का विरोध करना
एक्टिविज्म तो है जिसमें पैसे भी बन सकते हैं
लेकिन पास की नदी से रेत-बजरी भरते हुए
ट्रैक्टर की शिकायत जानलेवा है।

स्थानीयता के सारे संघर्ष ख़तरनाक हैं
भले ही वे कविता में हों या जीवन में।

--- प्रदीप सैनी

Jul 25, 2025

15 बेहतरीन शेर - 17 !!!

 1. ये कैसी हवा-ए-तरक्की चली है , दिए तो दिए, दिल बुझे जा रहे हैं  -  ख़ुमार बाराबंकवी

2. ये इनायतें ग़ज़ब की ये बला की मेहरबानी,  मिरी ख़ैरियत भी पूछी किसी और की ज़बानी - नज़ीर बनारसी

3. हवाएँ ज़ोर कितना ही लगाएँ आँधियाँ बन कर, मगर जो घिर के आता है वो बादल छा ही जाता है -  जोश मलीहाबादी

4. खड़ा हूँ आज भी रोटी के चार हर्फ़ लिए, सवाल ये है किताबों ने क्या दिया मुझ को - नज़ीर बाकरी

5. मोहब्बत क्या बला है चैन लेना ही भुला दे है, ज़रा भी आँख झपके है तो बेताबी जगा दे है - कलीम आजिज़

6. सुब्ह हो जाएगी हाथ आ न सकेगा महताब, आप अगर ख़्वाब में चलते हैं तो चलते रहिए - मलिकज़ादा मंज़ूर अहमद

7. मैं तो इस वास्ते चुप हूँ कि तमाशा न बने, तू समझता है मुझे तुझ से गिला कुछ भी नहीं  - अख़्तर शुमार

8. हसरत पे उस मुसाफ़िर-ए-बे-कस की रोइए, जो थक गया हो बैठ के मंज़िल के सामने...!!! - मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी

9. जाने ये कैसा ज़हर दिलों में उतर गया, परछाईं ज़िंदा रह गई, इंसान मर गया...!!!  - उम्मीद फ़ाज़ली

10.  अपने माज़ी से निकलना भी हुनर होता है, घर को छोड़ आइए पीछे, तो सफ़र होता है...!!! - वसीम बरेलवी

11.  किसे अपना बनाएँ कोई इस क़ाबिल नहीं मिलता, यहाँ पत्थर बहुत मिलते हैं लेकिन दिल नहीं मिलता - मख़मूर देहलवी

12.  चारागर यूँ तो बहुत हैं मगर ऐ जान-ए-'फ़राज़', जुज़ तेरे और कोई ज़ख़्म न जाने मेरे - अहमद फ़राज़

13. दिल गया, जान गई, यार के पैमॉं के साथ, घर से घर वाले भी रूख़सत हुए मेहमान के साथ 

14. उफ़ तलक करते नहीं ज़िल्ल-ए-इलाही के ख़िलाफ़, आप को दरबार की आदत है, दरबारी हैं आप - ~ अब्बास क़मर

15. मस्जिद तो बना दी शब भर में, ईमाँ की हरारत वालों ने, मन अपना पुराना पापी है, बरसों में नमाज़ी बन न सका। -अल्लामा इक़बाल

Jul 20, 2025

सेतुम् बन्ध्य सेतुम् बन्ध्य सेतुम् बन्ध्य रे (Ram Setu Construction Song from Ramayana: The Legend of Prince Rama)

जय जय जय जय......
सेतुम् बन्ध्य सेतुम् बन्ध्य सेतुम् बन्ध्य रे
श्री राम सेतुम् बन्ध्य सेतुम् बन्ध्य सेतुम् बन्ध्य रे ।
सागार उरु निर्धरत कृत्व पादैहः ताडय रे
सागार उरु निर्धरत कृत्व पादैहः ताडय रे ।
सेतुम् बन्ध्य सेतुम् बन्ध्य सेतुम् बन्ध्य रे
श्री राम सेतुम् बन्ध्य सेतुम् बन्ध्य सेतुम् बन्ध्य रे ।
शैलम् भञ्जय, शिलानु खण्डय, शैलम् भञ्जय शिलानु खण्डय
विक्षलयति मुलधातु पाटय विक्षलयति मुलधातु पाटय ।
सागर तेजोहरणम् चित्ते सततम् धारय रे
सागर तेजोहरणम् चित्ते सततम् धारय रे ।
रघुपति चरण स्पर्श वरदानम्, भवति काष्ठवत् दृढपाषाणम्
रघुपति चरण स्पर्श वरदानम्, भवति काष्ठवत् दृढपाषाणम् ।
स्पर्श तुनीत शिला खण्डानपि जलधिजले धारयरे
सेतुम् बन्ध्य सेतुम् बन्ध्य सेतुम् बन्ध्य रे
श्री राम सेतुम् बन्ध्य सेतुम् बन्ध्य सेतुम् बन्ध्य रे ।
शिला भवति खलु, सन्तरणीय, शिला भवति खलु सन्तरणीय 
राम कृपा चिर सन्स्मरणीय राम कृपा चिर सन्स्मरणीय ।
जय जय जय श्री राम जयति जय मन्त्रम् पाठय रे
जय जय जय श्री राम जयति जय मन्त्रम् पाठय रे ।
यत्र एकत तत्र सबलता भक्तिः यत्र तत्र सफलता
यत्र एकत तत्र सबलता भक्तिः यत्र तत्र सफलता
रामनाम अङ्किता धरित्रिम् धर्णसा सञ्योजय ।
सेतुम् बन्ध्य सेतुम् बन्ध्य सेतुम् बन्ध्य रे
सागार उरु निर्धारत कृत्व पादैहः ताडय रे
सेतुम् बन्ध्य सेतुम् बन्ध्य सेतुम् बन्ध्य रे
श्री राम सेतुम् बन्ध्य सेतुम् बन्ध्य सेतुम् बन्ध्य रे ॥

Translation (English): Lets make a bridge! 
In the name of Sri Rama lets make a bridge! 
(Lets make a bridge) 
To cross the wide ocean on foot and settle on the other side! 
(Lets make a bridge) 
By smashing mountains and breaking rocks, 
without getting washed away or falling into the ocean. 
Let's keep the intention in mind not to take away the ocean's glory by doing so. 
With the blessings from the feet of Raghupati Sri Rama, 
pieces of wood and stone will stay firm. 
With his touch, rocks and trunks will stay firm in the ocean. 
Lets make a bridge! In the name of Sri 
Rama lets make a bridge! Now the rocks are firm are they not? 
Then lets cross the ocean! With the grace of Sri Rama, 
they will forever be remembered in history. 
Lets recite the mantra - "Victory to Sri Rama". 
Where there is unity there is strength, 
where there is devotion (to work) there is success. 
With the name of Sri Rama marked (on all the rocks), 
they will be supported and remain firm together. 
Lets make a bridge! In the name of Sri Rama 
Lets make a bridge to cross the wide ocean on foot and settle on the other side!