Jan 24, 2026

Part of the sorrows and suffering of Kurdish girls (1941)

The sorrow and suffering of Kurdish girls
cannot be told in a hundred stories

From the ranks of humanity, they have been driven away
lower than animals, weak and incurable

Until the age of fifteen, just like a servant 
They are forced to toil on the plains and the outdoors

Then when it is time for the demands of marriage
Quickly she is betrothed according to the terms of Sharia

Either she is conquered in exchange for much property 
Or she is captured, exchanged, woman for woman

she is given away to a filthy or old man
without opportunity, she is forced and hastily given away

her nineteenth century is pitiful 
Though in Sharia law she is said to be free

Those who so disobey 
in heart's sorrow they become mad and filled with fury

As long as they are girls, they are flawless and blameless
When married, they become subhuman

For every girl who suffers wrongdoing 
Let the responsibility lie with father and brother

Whoever marries her, again
persecutes her until the day of judgement

Mufti Penjweni

Jan 21, 2026

वो मिट्टी के बेटे - (Mitti Ke Bete Lyrics in Hindi) - INS Vikrant


क्या मन मौजी बेफ़िक्रे थे..ए..

क्या मन मौजी बेफ़िक्रे थे

मौत पे अपने हँसते थे

दिल में वतन को रखने वाले

सर पे कफ़न भी रखते थे


हम जो तिरंगा लहराएँगे

हिचकी बनके याद आएँगे


वो मिट्टी के बेटे, जो वापस ना लौटे

जो वापस ना लौटे, वो मिट्टी के बेटे


वो माँ के अलबेले, जो वापस ना लौटे

जो वापस ना लौटे, वो मिट्टी के बेटे

इस मिट्टी के बेटे


ओ..ओ..ओ..ओ. वो मिट्टी के बेटे

ओ..ओ..ओ..ओ. वो मिट्टी के बेटे

इस मिट्टी के बेटे


जिसके लिए सरदार हमारा

झूल गया था फंदे पर

धूल नहीं लगने दी हमने

उस बेदाग तिरंगे पर

उस बेदाग तिरंगे पर..

उस बेदाग तिरंगे पर


तेरा दर्द तू जाने बाबा

तेरा दर्द तू जाने बाबा

मैं तो खुशी से पागल हूँ

जिसकी गोदी में खेला मैं

चला उसी के कंधे पर


लाडले जब सरहद जाएँगे

हिचकी बनके याद आएँगे

वो मिट्टी के बेटे, जो वापस ना लौटे

जो वापस ना लौटे, वो मिट्टी के बेटे

वो माँ के अलबेले, जो वापस ना लौटे

जो वापस ना लौटे, वो मिट्टी के बेटे

इस मिट्टी के बेटे


ओ छलिये कहाँ पता था?

तू यारों को छल जाएगा

जो चढ़ता सूरज था अपना

वो ऐसे ढल जाएगा,

वो ऐसे ढल जाएगा

वो ऐसे ढल जाएगा


तेरे बिन सरहद से हम भी

तेरे बिन सरहद से हम भी

आधे-अधूरे लौटेंगे

तेरी चिता में धीरे से

कुछ अपना भी जल जाएगा


यार गले जब लग जाएँगे

हिचकी बनके याद आएँगे

वो मिट्टी के बेटे, जो वापस ना लौटे

जो वापस ना लौटे, वो मिट्टी के बेटे

वो माँ के अलबेले, जो वापस ना लौटे

जो वापस ना लौटे, वो मिट्टी के बेटे


इस मिट्टी के बेटे

कुछ दर्द कभी सोते ही नहीं

वनवास ख़तम होते ही नहीं

चौखट पे दीये जलते ही रहे

कुछ राम कभी लौटे ही नहीं

कुछ राम कभी लौटे ही नहीं

कुछ राम कभी लौटे ही नहीं


मेरे नाम का प्याला भर के, हो..ओ..

मेरे नाम का प्याला भर के

बरसातों में पी लेना

बाबा मैं तो रहा नहीं

तू मेरी जवानी जी लेना


हम जब जन गण मन गाएँगे

हिचकी बनके याद आएँगे

वो मिट्टी के बेटे, जो वापस ना लौटे

जो वापस ना लौटे, वो मिट्टी के बेटे

वो माँ के अलबेले, जो वापस ना लौटे

जो वापस ना लौटे, वो मिट्टी के बेटे

इस मिट्टी के बेटे


ओ..ओ..ओ..ओ. वो मिट्टी के बेटे

ओ..ओ..ओ..ओ. वो मिट्टी के बेटे

इस मिट्टी के बेटे...!

--- मनोज मुन्तशिर

गीत का संदर्भ : "वो मिट्टी के बेटे" एक देशभक्ति गीत की पंक्ति है जो हाल ही में रिलीज़ हुई फिल्म बॉर्डर 2 से ली गई है। यह उन शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि है जो मातृभूमि की रक्षा में लौटकर नहीं आए।यह गीत सोनू निगम द्वारा गाया गया है, संगीत मिथून का है, और बोल मनोज मुंतशिर ने लिखे हैं। गीत सैनिकों के बलिदान, माँ के लालों की बेफिक्री और तिरंगे की रक्षा पर केंद्रित है।

Sweet memories (1974)

The happy day of Kurdish youth is still hidden by a heavy black cloud
until the face of the city´s daughter is hidden from the eyes

Your veil does not let your beautiful eyebrows be seen 
Alas for the filthy cloud, preventing a gaze at the moon

How can a people be free, when its girl is shackled
Is that not enough of slavery-girls and shackled to their

Your father has closed the door for you, but has no door himself
To close the door for you, is to close the door of hope

Scandalous, it's death, how will they tell you
"You may not go out”, where is the right to life? Woman

Remove your black veil, let your shining cheek be seen
For in this, the 20th century, this veiling is filled with shame

Other people's girls build atomic bombs, but you 
Only know the words like (barbecue tongs), (potholder) and
(breadboard).

Thanks to her education, she learnt science and art
You (knit yarn) for us, such sweet memories

She flew across the sky, travelled the world, dived under the sea
My grief, and your only chore is to sit inside

Boy is successful, learning, working, making art
But your art is knitting socks, I rejoice for you

your grandmother never saw the veil, the shawl and the shroud
Those meaningless rags are the enemy's gift

Let us have a thousand clear sea like (Ze), (Gader), (Lawen) 
Until the woman is free, for the fountain of life is muddy

Slavery is not common anymore, beloved Kurdish girl
Go to battle, wake up, now is not a time for sleeping

Smash the door, tear the veil, run to school
The cure for Kurdish pain is education, only education

It is the educated mother who sends a strong son to the fight
I said it, you must understand: (the water never reaches the sea)

Your gold earrings are of no use, hear my words
Worthy of your ears, my love, is (Hemn's) simple poem

--- Hemin Mukriani

Jan 18, 2026

घर लौट के रोएँगे माँ बाप अकेले में

घर लौट के रोएँगे माँ बाप अकेले में
मिट्टी के खिलौने भी सस्ते न थे मेले में
 
काँटों पे चले लेकिन होने न दिया ज़ाहिर
तलवों का लहू धोया छुप छुप के अकेले में

ऐ दावर-ए-महशर ले देख आए तिरी दुनिया
हम ख़ुद को भी खो बैठे वो भीड़ थी मेले में
 
ख़ुशबू की तिजारत ने दीवार खड़ी कर दी
आँगन की चमेली में बाज़ार के बेले में

--- क़ैसर उल जाफ़री

Jan 15, 2026

Fuck Your Lecture on Craft, My People Are Dying

Colonizers write about flowers.

I tell you about children throwing rocks at Israeli tanks 
seconds before becoming daisies.
I want to be like those poets
who care about the moon. 

Palestinians don't see the moon 
from jail cells and prisons.
It's so beautiful, the moon.
They're so beautiful, the flowers.

I pick flowers for my dead father when I'm sad.
He watches Al Jazeera all day.
I wish Jessica would stop texting me Happy Ramadan.
I know I'm American because when I walk into a room something dies.

Metaphors about death are for poets who think ghosts care about sound.
When I die, I promise to haunt you forever.
One day, I'll write about the flowers like we own them.

--- Noor Hindi

Jan 12, 2026

पाँच साल

पाँच सालों में
उग आता है
बाप की आँखों में मोतियाबिंद
जम जाती हैं
माँ के चेहरे पर झुर्रियाँ
चल बसता है दादा
बिस्तर पकड़ लेती है दादी
रिश्तेदार बदल लेते हैं घर

पाँच सालों में गुज़र जाते हैं
सैकड़ों हंगामे अख़बार सीखा देते हैं
लोगों को नुकीली ज़बान
लाशों के नज़ारे बढ़ा देते हैं
खून की प्यास
घरों के मलबों पर नाचने लगते हैं तमाशबीन

ज़हरीली चरस खींच कर 
समाज हो जाता है सुन्न 
अंदर और बाहर से 
देश हो जाता हैं ठूंठ

पाँच सालों में हो जाता है 
बहुत कहने को 
सब कुछ ही हो जाता है 
हंगामों की अफ़रा-तफ़री में बस... 

नहीं होता अदालत में
एक ख़ास मुक़दमा
या किसी हाक़िम की हिम्मत
कि वो दे सके ज़मानत

पाँच सालों में 
सिर्फ़ ये ही नहीं हो पाता
हमेशा बस होते-होते रह जाता है

- हुसैन हैदरी

Jan 8, 2026

WHAT TO SAY TO THOSE WHO THINK YOU’RE A FOOL FOR CHOOSING POETRY

Tell them yes.
Tell them poetry is what chose you.
Tell them
you had a night, once,
just as they did,
when you knelt alone on the cold tiles
and asked the night
to give you a reason for being.
Tell them the answer was your life.
Tell them we are nothing, nothing
without passion,
the wild dark flock
that fills our rooms with joy.
Tell them
you will give the rest of your blazing days
to try to give another life
that moment,
that moment when you opened
to the coldness
and found that the music of your ruin
was too beautiful to ever be destroyed.

--- Joseph Fasano

Jan 4, 2026

रहीम के 25 अमर दोहे: सरल भाषा में विस्तृत अर्थ


1. अब रहीम मुश्किल पड़ी, गाढ़े दोऊ काम।
सांचे से तो जग नहीं, झूठे मिलें न राम॥

विस्तृत अर्थ: जब मनुष्य पर कठिन समय आता है, तब सच्चाई का साथ देने वाला समाज नहीं मिलता और झूठ का सहारा लेने पर ईश्वर भी प्राप्त नहीं होते। अर्थात विपत्ति में मनुष्य अकेला पड़ जाता है।

2. वे रहीम नर धन्य हैं, पर उपकारी अंग।
बाटनवारे को लगे, ज्यों मेंहदी को रंग॥

विस्तृत अर्थ: उपकारी व्यक्ति चाहे कितना ही बाँट दिया जाए, उसका गुण और प्रभाव कभी कम नहीं होता, जैसे मेहंदी बाँटने पर भी अपना रंग छोड़ती है।

3. रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून।
पानी गए न ऊबरै, मोती, मानुष, चून॥

विस्तृत अर्थ:: यहाँ ‘पानी’ का अर्थ मर्यादा, लज्जा और आत्मसम्मान से है। इनके बिना मनुष्य, मोती और चूना—सबका मूल्य नष्ट हो जाता है।

4. रहिमन निज मन की व्यथा, मन ही राखो गोय।
सुनि अठलैहैं लोग सब, बाँटि न लेहैं कोय॥

विस्तृत अर्थ: अपनी पीड़ा सबको बताने से लोग मज़ाक तो उड़ाते हैं, पर दुख बाँटने या सहायता करने कोई आगे नहीं आता।

5. जो बड़ेन को लघु कहे, नहिं रहीम घट जाय।
गिरधर मुरलीधर कहे, कछु दुख मानत नाह॥

विस्तृत अर्थ: महान व्यक्ति छोटे नाम या साधारण संबोधन से छोटा नहीं हो जाता, जैसे कृष्ण को कोई भी नाम कहे, उनकी महत्ता कम नहीं होती।

6. समय लाभ सम लाभ नहिं, समय चूक सम चूक।
चतुरन चित रहीम लगी, समय चूक कछु चूक॥

विस्तृत अर्थ: समय का सदुपयोग सबसे बड़ा लाभ है और समय चूक जाना सबसे बड़ा नुकसान, क्योंकि समय हाथ से निकल जाए तो अवसर लौटकर नहीं आते।

7. ए रहीम दर दर फिरहिं, माँगि मधुकरी खाहिं।
यारो यारी छोड़िये, वे रहीम अब नाहिं॥

विस्तृत अर्थ: जो व्यक्ति स्वाभिमान छोड़कर दर-दर भीख माँगता फिरता है, उससे मित्रता छोड़ देनी चाहिए, क्योंकि वह अपना आत्मसम्मान खो चुका होता है।

8. रहिमन वे नर मर चुके, जे कहुँ माँगन जाहिं।
उनते पहिले वे मुए, जिन मुख निकसत नाहिं॥

विस्तृत अर्थ:: माँगकर जीना आत्मसम्मान की मृत्यु है; पर उससे भी पहले वे मर चुके हैं जिनके मुख से ‘न’ शब्द नहीं निकलता।

9. जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करि सकत कुसंग।
चन्दन विष व्यापत नहीं, लिपटे रहत भुजंग॥

विस्तृत अर्थ: अच्छे स्वभाव वाला व्यक्ति बुरी संगति में रहकर भी अपना गुण नहीं खोता, जैसे चंदन पर लिपटा साँप भी उसे विषैला नहीं बना पाता।

10. रहिमन प्रीति न कीजिए, जस खीरा ने कीन।
ऊपर से तो दिल मिला, भीतर फांकें तीन॥

विस्तृत अर्थ:: जो प्रेम केवल दिखावे का हो, उसमें भीतर से टूटन होती है; ऐसा प्रेम अंत में धोखा ही देता है।

11. तरुवर फल नहिं खात है, सरवर पियहि न पान।
कहि रहीम पर काज हित, संपति संचहि सुजान॥

विस्तृत अर्थ:: जैसे पेड़ अपने फल नहीं खाते और तालाब अपना पानी नहीं पीते, वैसे ही सज्जन व्यक्ति अपनी संपत्ति दूसरों के कल्याण के लिए संचित करता है।

12. रूठे सुजन मनाइए, जो रूठे सौ बार।
रहीमन फिरि फिरि पोइए, टूटे मुक्ता हार॥

विस्तृत अर्थ: अच्छे और सज्जन लोगों से संबंध टूटने न दें, क्योंकि वे टूटे मोती के हार जैसे होते हैं जिन्हें फिर से पिरोना चाहिए।

13. क्षमा बड़न को चाहिए, छोटन को उत्पात।
कह रहीम हरि का घट्यौ, जो भृगु मारी लात॥

विस्तृत अर्थ: क्षमा केवल महान लोगों का गुण है; क्रोध करना छोटे मन का लक्षण है | उदाहरण के रूप में वे कहते हैं कि जब महर्षि भृगु ने भगवान विष्णु को पैर मारा, तब भी भगवान ने क्रोध नहीं किया, बल्कि उनके पैर दबाने लगे। 

14. रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय।
टूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गाँठ पड़ जाय॥

विस्तृत अर्थ: प्रेम का संबंध बहुत नाज़ुक होता है; एक बार टूट जाए तो दोबारा जुड़ने पर भी उसमें गाँठ रह जाती है।

15. एकही साधे सब सधै, सब साधे सब जाय।
रहिमन मूल सींच बोये, फूल लहि अघाय॥

विस्तृत अर्थ: यदि मूल कारण पर ध्यान दिया जाए तो सभी कार्य सफल हो जाते हैं; इधर-उधर भटकने से सब कुछ नष्ट हो जाता है।

16. रहिमन ओछे नरन सो, बैर भली न कीत।
काटे चाटे स्वान के, दोऊ भाँति ती प्रतीत॥

विस्तृत अर्थ: नीच व्यक्ति से शत्रुता दोनों ही स्थितियों में नुकसानदायक होती है, चाहे वह नुकसान करे या दिखावटी प्रेम दिखाए।

17. जो रहीम गति दीप की, कुल कपूत गति सोय।
बारे उजियारो करे, बढ़े अँधेरो होय॥

विस्तृत अर्थ: कुपुत्र परिवार का नाम रोशन करने के बजाय बदनामी लाता है, जैसे दीपक बुझने पर अंधकार बढ़ जाता है।

18.  रहिमन चुप हो बैठिए, देखि दिनन को फेर।
जब नीके दिन आइहैं, बनत न लागै बेर॥

विस्तृत अर्थ: बुरे समय में धैर्य और मौन रखना चाहिए, क्योंकि अच्छे दिन आने पर परिस्थितियाँ स्वयं सुधर जाती हैं।

19. रहिमन प्रेम न छाँड़िए, लघु जन जानि।
कूँजा पथिक न छोड़ई, देखि बावड़ी पानी॥

विस्तृत अर्थ: छोटे व्यक्ति या छोटे साधन को तुच्छ न समझें, क्योंकि संकट में वही सहारा बन सकता है।

20. रहिमन मीत बनाइए, कठिन समय के काम।
आपत्ति काज न आवहीं, संपत्ति साँचि सुजान॥

विस्तृत अर्थ: सच्चे मित्र वही होते हैं जो संकट में साथ दें; धन केवल सुरक्षित रखा जा सकता है, मदद नहीं कर सकता।

21. रहिमन गति अगम्य है, प्रेम की रीति अपार।
दादुर डूबे पंक में, मीन न उबरै पार॥

विस्तृत अर्थ: प्रेम की शक्ति और उसकी गति को समझना कठिन है; इसमें अयोग्य डूब जाते हैं और योग्य भी पार नहीं पा पाते।

22. रहिमन जिह्वा बावरी, कह गई सरग पाताल।
आप तो कह भीतर रही, जूता खात कपाल॥

विस्तृत अर्थ: असंयमित वाणी मनुष्य को अपमान और संकट में डाल देती है, जबकि बोलने वाली जिह्वा स्वयं सुरक्षित रहती है।

23. रहिमन हानि लाभ जीवन मरण, यश अपयश विधि हाथ।
जेति बने तित होइये, एहि विधि रहीम रीत॥

विस्तृत अर्थ: लाभ-हानि, जीवन-मरण और मान-अपमान सब विधि के हाथ में हैं; इसलिए जो मिले उसे स्वीकार करना चाहिए।

24. 
ओछो काम बड़े करैं तौ न बड़ाई होय।
ज्‍यों रहीम हनुमंत को, गिरधर कहै न कोय॥

विस्तृत अर्थ: यदि कोई छोटा या सामान्य व्यक्ति कोई बड़ा काम करता है, तो भी उसकी बड़ाई नहीं होती, जैसे हनुमान को कोई कृष्ण (गिरधर) नहीं कहता।

25. रहिमन यह तन विष की बेलरी, गुरु अमृत की खान।
सीस दिए जो गुरु मिले, तो भी सस्ता जान॥

विस्तृत अर्थ: यह शरीर नश्वर और विष के समान है, जबकि गुरु का ज्ञान अमृत तुल्य है; गुरु के लिए जीवन भी न्योछावर करना सस्ता सौदा है।


“बचपन में पिता जी ने ये दोहे सिखाए थे—आज समझ आता है कि ये सिर्फ़ कविता नहीं, जीवन के सबसे गहरे पाठ थे।”