May 9, 2026
Snowdrops
what despair is; then
winter should have meaning for you.
I did not expect to survive,
earth suppressing me. I didn't expect
to waken again, to feel
in damp earth my body
able to respond again, remembering
after so long how to open again
in the cold light
of earliest spring--
afraid, yes, but among you again
crying yes risk joy
in the raw wind of the new world.
--- Louise Glück
May 5, 2026
15 बेहतरीन शेर - 22 !!!
2. हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है, बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा - अल्लामा इक़बाल
3. उस पे पत्थर खाके क्या बीती ज़फ़र देखेगा कौन, फल तो सब ले जाएँगे ज़ख़्मे-शजर देखेगा कौन - ज़फ़र गोरखपुरी
4. देख ज़िंदाँ से परे रंग-ए-चमन, रक़्स करना है तो फिर पाँव की ज़ंजीर न देख। - मजरूह सुल्तानपुरी
5. कलकत्ते का जो ज़िक्र किया तू ने हम-नशीं, इक तीर मेरे सीने में मारा कि हाए हाए - मिर्ज़ा ग़ालिब
6. फूल तो दो दिन बहारे-जा-फ़िज़ा दिखला गए, हसरत उन गुंचों पे हैं जो बिन खिले मुरझा गए - ज़ौक़
7. वो ज़हर देता तो सब की निगह में आ जाता, सो ये किया कि मुझे वक़्त पे दवाएं न दीं - अख़्तर नाज़मी
9. एक से एक जुनूँ का मारा इस बस्ती में रहता है, एक हमीं हुशियार थे यारो एक हमीं बद-नाम हुए - इब्न-ए-इंशा
10. किस तरह जमा कीजिए अब अपने आप को, काग़ज़ बिखर रहे हैं पुरानी किताब के - -आदिल मंसूरी
11. वो दुश्मनी से देखते हैं, देखते तो हैं, मैं शाद हूँ की हूँ तो किसी की निगाह में - अमीर मीनाई
12. बाद मुद्दत के ये ऐ 'दाग़' समझ में आया, वही दाना है कहा जिसने न माना दिल का - दाग़ देहलवी
13. गो बहुत कुछ रंज यारान ए वतन से था हमेंआँख में आंसू मगर वक़्त ए सफ़र आ ही गया - अकबर इलाहाबादी,
15. मिरा ज़मीर बहुत है मुझे सज़ा के लिए, तू दोस्त है तो नसीहत न कर ख़ुदा के लिए - शाज़ तमकनत
May 2, 2026
अथ नेता उवाच
देश को बाईसवीं सदी में पहुंचाया जाएगा.
अपना देश महान है, आप गर्व करेंगे सुन कर,
अभी आंकड़ों का गणित, समझाया जाएगा.
दुखदर्द, गरीबी सब हवा हो जाएंगी,
आप को आश्वासनों का जाम पिलाया जाएगा.
सुखे, बाढ़ की समस्या से चितित हैं हम,
अभी हवाई सर्वेक्षण करवाया जाएगा.
कुंआ खोदने की आप नाहक जिद न करें,
आग लगने तो दीजिए, फिर देखा जाएगा.
देशद्रोहियों को राह पर लाने की कोशिश करेंगे,
उन्हें देशभक्ति का रिकार्ड सुनवाया जाएगा.
कोई और परेशानी है तो पी. ए. को लिखवा दें,
आप के क्षेत्र में दोबारा पांच वर्ष बाद आया जाएगा.
- प्रदीप शर्मा
Apr 29, 2026
Title Song Lyrics of Daanasur (Denver the last Dinosaur)
छिपकली के नाना हैं,
छिपकली के हैं ससुर,
दानासुर दानासुर दानासुर!
छिपकली के नाना हैं,
छिपकली के हैं ससुर,
दानासुर दानासुर दानासुर!
तानपुरे के नीचे दो मंजीरे जैसे पाँव,
ना कुत्ते की भौं भौं, ना बिल्ली की म्याँऊ,
सुर है तराने में, धिन तन न ना,
दानासुर दानासुर दानासुर
दानासुर दानासुर दानासुर!
--- गुलज़ार
Apr 25, 2026
Qasida - Kurdêkî Koyî - Kurdish Poem
As he said that, I was so enraged I was about to lose my faith.
I said to him you have remained ignorant; I was about to punch him in the face.
What is wrong with Kurdish? Is it not God’s creation, the language of truth?
See, Armenian has no eloquence, and Doomsday is not going to be in Armenian,
Yet with their limping language and crooked writing, but with books and journals,
They are counted among the great nations, and about to call themselves a state.
How is Kurdish different from Farsi? Why is Persian the right language and Kurdish wrong?
In fact, if you notice you would realize who has stolen from whom,
Because we are older than they are, according to the history books of all religions.
They had this mentality, the people of Sulaymaniyah and Koye,
That they became the masters of Persian and Arabic, some even reached Fakhre Razi’ status
--- Haji Qadiri Koyi
*Fakhr ad-Din al-Razi was a famous Persian theologian and philosopher in the twelfth century.
Context: In a qaside “Kurdêkî Koyî” he tells the details of his encounter with a person from Koye, his hometown, who complains that Şêx Kake Ehmed translates the Quran and the prophet’s sayings (hadith) into Kurdish. Upon hearing his complaint Hacî Qadir becomes furious and comments.
Apr 20, 2026
Qasida: “Odeba Cake” - Kurdish Poem
Except for teaching laziness and collecting properties and wealth.
---
Haji Qadiri Koyi
Apr 17, 2026
15 बेहतरीन शेर - 21 !!!
2. हमारे बस में था ही क्या हवा पे हम सवार थे, वहाँ वहाँ गए जहाँ हवा उड़ा के ले गई -अज़्म शाकिरी
3. क्या क्या हुआ है हम से जुनूँ में न पूछिए , उलझे कभी ज़मीं से कभी आसमाँ से हम - असरार-उल-हक़ मजाज़
4. अब तुमसे रुख़सत होता हूँ आओ सम्भालो साज़े-गज़ल नये तराने छेड़ो, मेरे नग्मों को नींद आती है - रघुपति सहाय 'फ़िराक़'
5. तुझे किस बात का ग़म है वो इतना पूछ लें मुझ से वो इतना पूछ लें मुझ से तो फिर किस बात का ग़म है मुझ से - मुशताक़ हुसैन ख़ान हाशमी मुश्ताक़
6. मुझको तो होश नहीं, तुमको ख़बर हो शायद, लोग कहते हैं कि तुमने मुझे बर्बाद किया - जोश मलीहाबादी
7. मैं तो ग़ज़ल सुना के अकेला खड़ा रहा, सब अपने अपने चाहने वालों में खो गए - कृष्ण बिहारी नूर
9. दाग़ दुनिया ने दिए ज़ख़्म ज़माने से मिले, हम को तोहफ़े ये तुम्हें दोस्त बनाने से मिले - कैफ़ भोपाली
10. ख़ुशियाँ देते देते अक्सर खुद ग़म में मर जाते हैं, रेशम बुनने वाले कीड़े रेशम में मर जाते हैं - ख़ुशबीर सिंह शाद
11. कुछ तो तेरे मौसम ही मुझे रास कम आये और कुछ मेरी मिट्टी में बग़ावत भी बहुत थी - परवीन शाकिर
12. रातें परदेस की डरता था कटेंगी कैसे, मगर आँगन में सितारे थे वही घर वाले - राही मासूम रजा़
13. हम को नीचे उतार लेंगे लोग, इश्क़ लटका रहेगा पंखे से - ज़िया मज़कूर
14. मैखाने के क़रीब थी मस्जिद भले को, दाग़ हर एक पूछता था कि “ हज़रत इधर कहाँ? - दाग़
Apr 13, 2026
Ice People
Ice people
They're just made of ice
They don't treat
Their fellow man very nice
You wear your hair long
As Jesus did
They'll crucify you
You're not part of the establishment
You stand up for your rights
They'll call you a fool
If you don't go to war
You're not living by the golden rule
Ice people
They're just made of ice
They don't treat
Their fellow man very nice
The red man lives and dies on the reservation
And the black man just lives anywhere he can
And the poor white man he doesn't live any better
He can't say I'm red, I'm black, I'm yellow, I'm tanned
We're all caught up together
Like the buffalo on the plains
We're just shooting sport for ice people
We're just a game
Ice people
They're just made of ice
They don't treat
Their fellow man very nice
Ice people
They're just made of ice
No, they don't treat
Their fellow man very nice
Ice people
They're just made of ice
They don't treat
Their fellow man very nice
Apr 8, 2026
सुभाषितानि - 5 (Subhashitani -5)
अर्थ: संकट या कठिनाइयों के समय व्यक्ति का असली स्वभाव सामने आ जाता है जो उसके सभी गुणों से बढ़कर होता है।
2. विद्या विवादाय धनं मदाय, शक्तिः परेषाम् परिपीडनाय | खलस्य, साधोः विपरीतं एतत्; ज्ञानाय दानाय च रक्षणाय ||
अर्थ: विद्या (ज्ञान) दुष्ट लोगों के लिए विवाद के लिए होती है, धन (धन संपत्ति) घमंड के लिए होता है, और शक्ति दूसरों को पीड़ित करने के लिए होती है। परंतु सज्जन लोगों के लिए विद्या ज्ञान प्राप्ति के लिए, धन दान करने के लिए, और शक्ति दूसरों की रक्षा करने के लिए होती है।
3. न तेन वृद्धो भवति येनास्य पलितं शिरः |
अर्थ: यह है कि केवल उम्र बढ़ने से या बाल सफेद होने से कोई व्यक्ति बड़ा या बुद्धिमान नहीं माना जाता। असली बढ़ेपन का पैमाना ज्ञान और बुद्धिमत्ता है। जो युवा होते हुए भी सीखते हैं, ज्ञान अर्जित करते हैं, वही सच्चे वृद्ध और सम्मानित माने जाते हैं।
4. काक: कृष्ण: पिक: अपि कृष्ण: को भेद: काकपिकयो: | वसंत काले सम्प्राप्ते काक: काक: पिक: पिक: ||
अर्थ: कौआ और कोयल दोनों काले रंग के होते हैं और देखने में समान लगते हैं, लेकिन जब वसंत ऋतु आ जाती है तो उनकी असली पहचान उनके स्वर से हो जाती है। कौआ अपनी कर्कश आवाज करता है जबकि कोयल मधुर गीत गाती है।
5. शैले शैले न माणिक्यम् मौक्तिकम् न गजे गजे।
अर्थ: हर पर्वत पर हीरा (माणिक्य) नहीं मिलता, हर हाथी के मस्तक में मोती (मौक्तिक) नहीं होता। सभी जगह सज्जन लोग (साधु) नहीं मिलते और हर वन में चंदन वृक्ष भी नहीं होते। ये चीजें दुर्लभ और मूल्यवान होती हैं।
6. मूर्खो अपि शोभते तावत् सभायां वस्त्रवेष्टित: ।
अर्थ: मूर्ख व्यक्ति भी अच्छे वस्त्र पहनकर सभा में तब तक शोभित होता है (अच्छा लगता है), जब तक वह कुछ नहीं बोलता। मूर्ख उसी समय तक शोभा पाता है, जब तक वह चुप रहता है.
7. यत्तदग्रे विषमिव परिणामे अमृतोपमम्,
अर्थ: जिस सुख का प्रारंभ विष (जहर) जैसा कष्टदायक होता है, पर परिणाम अमृत के समान सुखद होता है, वही सात्त्विक सुख कहलाता है। यह सुख आत्मबुद्धि के प्रसाद से उत्पन्न होता है। जो सुख विषय (इंद्रिय) के संयोजन से उत्पन्न होता है, उसका प्रारंभ तो अमृत के समान सुखद होता है, लेकिन परिणाम विष (जहर) के समान कष्टदायक होता है, उसे राजसिक सुख कहा गया है।
Apr 4, 2026
अभी साज़-ए-दिल में तराने बहुत हैं
अभी ज़िंदगी के बहाने बहुत हैं
ये दुनिया हक़ीक़त की क़ाइल नहीं है
फ़साने सुनाओ फ़साने बहुत हैं
तिरे दर के बाहर भी दुनिया पड़ी है
कहीं जा रहेंगे ठिकाने बहुत हैं
मिरा इक नशेमन जला भी तो क्या है
चमन में अभी आशियाने बहुत हैं
नए गीत पैदा हुए हैं उन्हीं से
जो पुर-सोज़ नग़्मे पुराने बहुत हैं
दर-ए-ग़ैर पर भीक माँगो न फ़न की
जब अपने ही घर में ख़ज़ाने बहुत हैं
हैं दिन बद-मज़ाक़ी के 'नौशाद' लेकिन
अभी तेरे फ़न के दिवाने बहुत हैं
Mar 31, 2026
हिंदी होने पर नाज़ जिसे कल तक था
अपनी महफ़िल का रिंद पुराना आज नमाज़ी बन बैठा।
महफ़िल में छुपा है कैसे—हज़्रत! दीवाना कोई सहरा में नहीं,
पैग़ाम-ए-जुनूँ जो लाता था, इक़बाल वो अब दुनिया में नहीं।
ऐ मुतरिब! तेरे तरानों में अगली-सी अब वो बात नहीं,
वो ताज़गी-ए-तख़य्युल नहीं, बेसाख़्तगी-ए-जज़्बात नहीं।
— आनंद नारायण ‘मुल्ला’ (शेर-ओ-शायरी से)
“अल्लामा इक़बाल जैसे परिपक्व और विशाल हृदय वाले व्यक्ति को अचानक साम्यवाद के दलदल में फँसते देखकर लोग दुख और चिंता से कराह उठे।”
Mar 27, 2026
बहादुर शाह ज़फ़र और हिंदुस्तान की तलवार: ऐतिहासिक शायरी की कहानी
कहा जाता है कि विद्रोह के बाद, जब अंग्रेज़ अधिकारी ज़फ़र को पकड़ने आए, उन्होंने उन्हें तंज़ के साथ कहा:
“दमदमे में दम नहीं है ख़ैर मांगो जान की.. ऐ ज़फ़र ठंडी हुई अब तेग हिंदुस्तान की।”
(अब तुम्हारे पास कोई ताक़त नहीं, ज़फ़र। हिंदुस्तान की तलवार भी अब नुकीली नहीं रही।)
लेकिन बहादुर शाह ज़फ़र की शायरी में छिपी जज़्बात और आत्मसम्मान ने जवाब में इतिहास रच दिया। उन्होंने शेर कहा:
“ग़ाज़ियों में बू रहेगी जब तलक ईमान की, तख़्त ऐ लंदन तक चलेगी तेग हिंदुस्तान की।”
(भारत की तलवार और उसका साहस कभी कम नहीं होगा, और ईमान की शक्ति के साथ यह London तक अपनी गूँज पहुंचाएगी।)
इस जवाब से साफ़ झलकता है कि ज़फ़र का मनोबल और उनका देशभक्ति का जज़्बा अंग्रेज़ों की धमकियों से कम नहीं हुआ। यह सिर्फ़ एक शेर नहीं, बल्कि उस युग की एक प्रेरणादायक कहानी है, जो यह बताती है कि कठिन परिस्थितियों में भी आत्मसम्मान और विश्वास कभी नहीं मरते।
Mar 23, 2026
15 बेहतरीन शेर - 20 !!!
1. सरजमीने-हिंद में अकवामे आलम के फ़िराक़, कारवां आते गए हिंदोस्ताँ बनता गया - फ़िराक़ गोरखपुरी
2. कुछ मेरे बाद और भी आएंगे क़ाफ़िले, कांटे ये रास्ते से हटा लूं तो चैन लूं। -तसव्वुर किरतपुरी
3. इन्हीं ज़र्रों से होंगे कल नये कुछ कारवां पैदा, जो ज़र्रे आज उड़ते हैं ग़ुबारे-कारवां हो कर। - शफ़क टौंकी
4. इस शहर में जीने के अंदाज़ निराले हैं, होठों पे लतीफे हैं आवाज़ में छाले हैं। - जावेद अख़्तर
5. जिनके आँगन में अमीरी का शजर लगता है, उसका हर ऐब ज़माने को हुनर लगता है - अंजुम रहबर
6. ऐ दिल वो आशिक़ी के फ़साने किधर गए, वो उम्र क्या हुई वो ज़माने किधर गए - अख़्तर शीरानी
7. सियाह रात नहीं लेती नाम ढलने का, यही तो वक़्त है सूरज तेरे निकलने का - शहरयार
8. नतीजा एक ही निकला, कि थी क़िस्मत में नाकामी, कभी कुछ कह के पछताये, कभी चुप रह के पछताये। - आरज़ू लखनवी
9. हमारी ज़िन्दगी के सानहे भी क्या अजब गुज़रे, उसी पर मर मिटे जिस से हमें बेज़ार होना था - मनीष शुक्ला
10. अब ज़मीं पर कोई गौतम न मोहम्मद न मसीह, आसमानों से नए लोग उतारे जाएँ - अहमद फ़राज़
11. हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो - जौन एलिया
12. दफ़'अतन घटा की आड़ से चाँदनी कशीद हो गई, ज़ुल्फ़ उस के चेहरे से हटी और मेरी 'ईद हो गई - आलम निज़ामी
13. जुर्रत से हर नतीजे की परवाह किये बगैर, दरबार छोड़ आया हूँ सजदा किये बगैर ! - मुनव्वर राना
14. ये हमसे कौन दिन भर की कमाई छीन लेता है, उतर कर अपनी मसनद से चटाई छीन लेता है - सलाहउद्दीन नैयर
15. अपने बच्चों को मैं बातों में लगा लेता हूं, जब भी आवाज़ लगाता है खिलौने वाला - राशिद राही
Mar 20, 2026
तुलसीदास के 14 कालजयी दोहे
1. विनय न मानत जलधि जड़, गए तीनि दिन बीति।
बोले राम सकोप तब, भय बिनु होइ न प्रीति॥
भावार्थ: जब तीन दिन तक विनम्रता से कहने पर भी समुद्र नहीं माना, तब राम को क्रोध आया। तुलसीदास कहते हैं कि बिना भय के प्रेम और अनुशासन नहीं बनता।
2. तुलसी साथी विपत्ति के, विद्या विनय विवेक।
साहस सुकृति सुसत्यव्रत, राम भरोसे एक॥
भावार्थ: विपत्ति के समय विद्या, नम्रता, विवेक, साहस, अच्छे कर्म, सत्य और राम पर भरोसा—यही सच्चे साथी होते हैं।
3.परहित सरिस धरम नहि भाई, पर पीड़ा सम नहि अधमाई।
भावार्थ: दूसरों का भला करने जैसा कोई धर्म नहीं, और दूसरों को कष्ट देना सबसे बड़ा पाप है।
4. धीरज धरम मित्र अरु नारी, आपद काल परखिए चारी।
5. समरथ को नहिं दोष गोसाईं, रवि पावक सुरसरि की नाईं।
भावार्थ: जो समर्थ और महान होता है, उस पर दोष नहीं लगता—जैसे सूर्य, अग्नि और गंगा सबको शुद्ध करते हैं।
6. जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी।
भावार्थ: मनुष्य की भावना जैसी होती है, उसे भगवान भी वैसे ही दिखाई देते हैं।
7. हरि अनंत हरि कथा अनंता, कहहिं सुनहिं बहुविधि सब संता॥
8. होइहि सोइ जो राम रचि राखा, को करि तर्क बढ़ावै साखा॥
भावार्थ: जो राम ने रच दिया है, वही होकर रहता है। तर्क-वितर्क करके कोई भी सत्य को बदल नहीं सकता।
Mar 16, 2026
IT WAS AFTERNOON¹
It was afternoon
the sky dressed as spring.
One moment more
and it would have conducted
the dance of death in the city.
It was afternoon.
In no hurry the children
went down the street.
Like gazelles
they came and went
in twos
in threes.
They part
they mix
happily.
It was afternoon.
Oppressive clouds of death
descend on the city
18 minutes
earthquake
fear, silence.
Bodies red with blood
reshape flowerbeds.
Mar 14, 2026
MOUNTAINS
A prisoner condemned to life.
Chains round his ankles, handcuffs,
in a narrow jail cell.
He dreams like horsemen, the horses and the wind.
He dreams like babies, the stars and the grass.
I, too, like the prisoner,
dream every night of a strength
I bring to the mountains
and they to me.
Mar 11, 2026
शेर-ओ-शायरी - गीताप्रेस की किताब "एक लोटा पानी"
1. आईना! मुँह पर ही कहता है—साफ-साफ। सच यह है-जो साफ होता है, सफा कहता है।।
2. सँभल कर बैठना, जलवा मुहब्बत देखने वाले। तमाशा खुद न बन जाना तमाशा देखने वाले॥
3. खुदाने हुस्न नादानोंको, बख्सा जर रजीलों को। अक्लमंदों को रोटी खुश्क, औ हलुवा वखीलों को ॥
4. एक बुतको चूमनेको शेखजी काबा गये। गरचे-हर बुत काबिले बोसा है इस बुतखानेमें॥
5. नजर से सर कलम कर दे, उसे शमशीर कहते हैं। निशाने में जो लग जाये, उसीको तीर कहते हैं॥
6. न कह गया, न सुन गया और न नाम बता गया। मैं क्या कहूँ कि मेरे दिल, किसने चुरा लिया
7. है इबादत की इबादत है, मुहब्बत की मुहब्बत है। मेरे माशूक की सूरत खुदा से मिलती जुलती है॥
8. शेखजीसे मैंने पूछी, मंजिल जब यार की। बुतकदे की और चुपकेसे, इशारा कर दिया॥
9. बहुत मुश्किल निभाना है मुहब्बत अपने दिलवर से। उधर मूरत अमीराना इधर हालत फकीराना॥
10. चाँद बदली में छिपा है मुझे मालूम न था। सकल इनसान में खुदा है, मुझे मालूम न था॥
11. बुतपरस्ती मेरे हकमें हकपरस्ती हो गयी। दे दिया तेरा पता कुछ, यारकी तसबीरने॥
12. मुहब्बत करो और निभा लो तब पूछना, कि दुश्चारियाँ हैं कि आसानियाँ हैं?
13. समझकर अपना दीवाना, वह मुझसे मुँह छिपाते हैं। हकीकत यों है, दरपरदा, मुहब्बत आजमाते हैं॥
14. शिकाइत किस जबाँसे मैं करूँ उनके न आनेकी। यही अहसान क्या कम है कि मेरे दिलमें रहते हैं॥
15. दुनियाँ इक इफसाना कहने को थे मगर सोचा। दुनियाँ है खुद इफसाना, इफसाने से क्या कहना?
16. रहमान के फिरश्ते' गो हैं बहुत मुकद्दस? शैतानही की जानिब, लेकिन मिजोरटी है॥
Mar 7, 2026
Agirê Evîndarî (The Fire of Love)
I cannot sleep—when will I sleep without you?
The home has turned into a prison where I suffer,
Until dawn, darkness and sorrow surround me.
Your presence—once a single heartbeat in mine—
Oh heart, does no one compare to that one?
Why constantly does my heart return to the yearning for them?
At times I felt their hands upon my head—
So many dreams and visions came with that closeness.
And I stayed awake, oh heart—why did the night vanish?
Did I kill them, oh heart—why did the night vanish?
Get up quickly, oh heart, bring them back,
We embraced—oh heart, why did the night vanish?
Mar 3, 2026
अल्लामा इक़बाल की शायरी: इस्लाम, जम्हूरियत और आत्मबल का दर्शन
अल्लामा मुहम्मद इक़बाल केवल शायर नहीं थे, वे एक विचारक, दार्शनिक और आत्मचेतना के कवि थे। उनकी शायरी व्यक्ति, समाज और सत्ता—तीनों से सवाल करती है। बाल-ए-जिब्रील में इक़बाल की आवाज़ सबसे अधिक बेबाक और वैचारिक रूप में सामने आती है।
Feb 28, 2026
Answer
I wrote a long complaint to God
Before everyone,
I read it to a tree.
The tree cried.
Said, “All right, who will deliver it?
If you are expecting me to take it,
I won’t reach Gods throne.
Late that night,
My angelic poem, dressed for mourning,
Said, “Don’t worry.
I will take it to the heights
Of the atmosphere.
But I won’t promise
He will take the letter Himself.
You know, the Great God
Who can see Him?
I said, “Thank you. Fly.”
My angelic inspiration flew
With my complaint.
The next day, it was returned.
God’s fourth secretary down,
A man by the name of Obaid,
At the bottom
Of the very same complaint,
Wrote to me in Arabic:
“Idiot, make it Arabic.
People here don’t know Kurdish.
They won’t take it to God.”
--- Sherko Bekas
translated by Alana Marie Levinson-LaBrosse & Halo Fariq
*Translator’s note: On March 16, 1988, as part of Anfal, Saddam Hussein’s military campaign against the Kurds of Iraq, Halabja withstood a chemical-weapons attack. The largest directed against a civilian population in history, it has been recognized as an act of genocide by the Iraqi High Criminal Court.





