Jan 24, 2026
Part of the sorrows and suffering of Kurdish girls (1941)
cannot be told in a hundred stories
From the ranks of humanity, they have been driven away
lower than animals, weak and incurable
Until the age of fifteen, just like a servant
They are forced to toil on the plains and the outdoors
Then when it is time for the demands of marriage
Quickly she is betrothed according to the terms of Sharia
Either she is conquered in exchange for much property
Or she is captured, exchanged, woman for woman
she is given away to a filthy or old man
without opportunity, she is forced and hastily given away
her nineteenth century is pitiful
Though in Sharia law she is said to be free
Those who so disobey
in heart's sorrow they become mad and filled with fury
As long as they are girls, they are flawless and blameless
When married, they become subhuman
For every girl who suffers wrongdoing
Let the responsibility lie with father and brother
Whoever marries her, again
persecutes her until the day of judgement
Jan 21, 2026
वो मिट्टी के बेटे - (Mitti Ke Bete Lyrics in Hindi) - INS Vikrant
क्या मन मौजी बेफ़िक्रे थे..ए..
क्या मन मौजी बेफ़िक्रे थे
मौत पे अपने हँसते थे
दिल में वतन को रखने वाले
सर पे कफ़न भी रखते थे
हम जो तिरंगा लहराएँगे
हिचकी बनके याद आएँगे
वो मिट्टी के बेटे, जो वापस ना लौटे
जो वापस ना लौटे, वो मिट्टी के बेटे
वो माँ के अलबेले, जो वापस ना लौटे
जो वापस ना लौटे, वो मिट्टी के बेटे
इस मिट्टी के बेटे
ओ..ओ..ओ..ओ. वो मिट्टी के बेटे
ओ..ओ..ओ..ओ. वो मिट्टी के बेटे
इस मिट्टी के बेटे
जिसके लिए सरदार हमारा
झूल गया था फंदे पर
धूल नहीं लगने दी हमने
उस बेदाग तिरंगे पर
उस बेदाग तिरंगे पर..
उस बेदाग तिरंगे पर
तेरा दर्द तू जाने बाबा
तेरा दर्द तू जाने बाबा
मैं तो खुशी से पागल हूँ
जिसकी गोदी में खेला मैं
चला उसी के कंधे पर
लाडले जब सरहद जाएँगे
हिचकी बनके याद आएँगे
वो मिट्टी के बेटे, जो वापस ना लौटे
जो वापस ना लौटे, वो मिट्टी के बेटे
वो माँ के अलबेले, जो वापस ना लौटे
जो वापस ना लौटे, वो मिट्टी के बेटे
इस मिट्टी के बेटे
ओ छलिये कहाँ पता था?
तू यारों को छल जाएगा
जो चढ़ता सूरज था अपना
वो ऐसे ढल जाएगा,
वो ऐसे ढल जाएगा
वो ऐसे ढल जाएगा
तेरे बिन सरहद से हम भी
तेरे बिन सरहद से हम भी
आधे-अधूरे लौटेंगे
तेरी चिता में धीरे से
कुछ अपना भी जल जाएगा
यार गले जब लग जाएँगे
हिचकी बनके याद आएँगे
वो मिट्टी के बेटे, जो वापस ना लौटे
जो वापस ना लौटे, वो मिट्टी के बेटे
वो माँ के अलबेले, जो वापस ना लौटे
जो वापस ना लौटे, वो मिट्टी के बेटे
इस मिट्टी के बेटे
कुछ दर्द कभी सोते ही नहीं
वनवास ख़तम होते ही नहीं
चौखट पे दीये जलते ही रहे
कुछ राम कभी लौटे ही नहीं
कुछ राम कभी लौटे ही नहीं
कुछ राम कभी लौटे ही नहीं
मेरे नाम का प्याला भर के, हो..ओ..
मेरे नाम का प्याला भर के
बरसातों में पी लेना
बाबा मैं तो रहा नहीं
तू मेरी जवानी जी लेना
हम जब जन गण मन गाएँगे
हिचकी बनके याद आएँगे
वो मिट्टी के बेटे, जो वापस ना लौटे
जो वापस ना लौटे, वो मिट्टी के बेटे
वो माँ के अलबेले, जो वापस ना लौटे
जो वापस ना लौटे, वो मिट्टी के बेटे
इस मिट्टी के बेटे
ओ..ओ..ओ..ओ. वो मिट्टी के बेटे
ओ..ओ..ओ..ओ. वो मिट्टी के बेटे
इस मिट्टी के बेटे...!
--- मनोज मुन्तशिर
गीत का संदर्भ : "वो मिट्टी के बेटे" एक देशभक्ति गीत की पंक्ति है जो हाल ही में रिलीज़ हुई फिल्म बॉर्डर 2 से ली गई है। यह उन शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि है जो मातृभूमि की रक्षा में लौटकर नहीं आए।यह गीत सोनू निगम द्वारा गाया गया है, संगीत मिथून का है, और बोल मनोज मुंतशिर ने लिखे हैं। गीत सैनिकों के बलिदान, माँ के लालों की बेफिक्री और तिरंगे की रक्षा पर केंद्रित है।
Sweet memories (1974)
until the face of the city´s daughter is hidden from the eyes
Your veil does not let your beautiful eyebrows be seen
Alas for the filthy cloud, preventing a gaze at the moon
How can a people be free, when its girl is shackled
Is that not enough of slavery-girls and shackled to their
Your father has closed the door for you, but has no door himself
To close the door for you, is to close the door of hope
Scandalous, it's death, how will they tell you
"You may not go out”, where is the right to life? Woman
Remove your black veil, let your shining cheek be seen
For in this, the 20th century, this veiling is filled with shame
Other people's girls build atomic bombs, but you
Only know the words like (barbecue tongs), (potholder) and
(breadboard).
Thanks to her education, she learnt science and art
You (knit yarn) for us, such sweet memories
She flew across the sky, travelled the world, dived under the sea
My grief, and your only chore is to sit inside
Boy is successful, learning, working, making art
But your art is knitting socks, I rejoice for you
your grandmother never saw the veil, the shawl and the shroud
Those meaningless rags are the enemy's gift
Let us have a thousand clear sea like (Ze), (Gader), (Lawen)
Until the woman is free, for the fountain of life is muddy
Slavery is not common anymore, beloved Kurdish girl
Go to battle, wake up, now is not a time for sleeping
Smash the door, tear the veil, run to school
The cure for Kurdish pain is education, only education
It is the educated mother who sends a strong son to the fight
I said it, you must understand: (the water never reaches the sea)
Your gold earrings are of no use, hear my words
Worthy of your ears, my love, is (Hemn's) simple poem
--- Hemin Mukriani
Jan 18, 2026
घर लौट के रोएँगे माँ बाप अकेले में
मिट्टी के खिलौने भी सस्ते न थे मेले में
काँटों पे चले लेकिन होने न दिया ज़ाहिर
तलवों का लहू धोया छुप छुप के अकेले में
ऐ दावर-ए-महशर ले देख आए तिरी दुनिया
हम ख़ुद को भी खो बैठे वो भीड़ थी मेले में
Jan 15, 2026
Fuck Your Lecture on Craft, My People Are Dying
I tell you about children throwing rocks at Israeli tanks
I want to be like those poets
It's so beautiful, the moon.
They're so beautiful, the flowers.
I pick flowers for my dead father when I'm sad.
He watches Al Jazeera all day.
I wish Jessica would stop texting me Happy Ramadan.
I know I'm American because when I walk into a room something dies.
When I die, I promise to haunt you forever.
One day, I'll write about the flowers like we own them.
--- Noor Hindi
Jan 12, 2026
पाँच साल
उग आता है
बाप की आँखों में मोतियाबिंद
जम जाती हैं
माँ के चेहरे पर झुर्रियाँ
चल बसता है दादा
बिस्तर पकड़ लेती है दादी
रिश्तेदार बदल लेते हैं घर
पाँच सालों में गुज़र जाते हैं
सैकड़ों हंगामे अख़बार सीखा देते हैं
लोगों को नुकीली ज़बान
लाशों के नज़ारे बढ़ा देते हैं
खून की प्यास
घरों के मलबों पर नाचने लगते हैं तमाशबीन
ज़हरीली चरस खींच कर
पाँच सालों में हो जाता है
पाँच सालों में
- हुसैन हैदरी
Jan 8, 2026
WHAT TO SAY TO THOSE WHO THINK YOU’RE A FOOL FOR CHOOSING POETRY
Tell them poetry is what chose you.
Tell them
you had a night, once,
just as they did,
when you knelt alone on the cold tiles
and asked the night
to give you a reason for being.
Tell them the answer was your life.
Tell them we are nothing, nothing
without passion,
the wild dark flock
that fills our rooms with joy.
Tell them
you will give the rest of your blazing days
to try to give another life
that moment,
that moment when you opened
to the coldness
and found that the music of your ruin
was too beautiful to ever be destroyed.
--- Joseph Fasano
Jan 4, 2026
रहीम के 25 अमर दोहे: सरल भाषा में विस्तृत अर्थ
1. अब रहीम मुश्किल पड़ी, गाढ़े दोऊ काम।
सांचे से तो जग नहीं, झूठे मिलें न राम॥
विस्तृत अर्थ: जब मनुष्य पर कठिन समय आता है, तब सच्चाई का साथ देने वाला समाज नहीं मिलता और झूठ का सहारा लेने पर ईश्वर भी प्राप्त नहीं होते। अर्थात विपत्ति में मनुष्य अकेला पड़ जाता है।
2. वे रहीम नर धन्य हैं, पर उपकारी अंग।
बाटनवारे को लगे, ज्यों मेंहदी को रंग॥
विस्तृत अर्थ: उपकारी व्यक्ति चाहे कितना ही बाँट दिया जाए, उसका गुण और प्रभाव कभी कम नहीं होता, जैसे मेहंदी बाँटने पर भी अपना रंग छोड़ती है।
3. रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून।
पानी गए न ऊबरै, मोती, मानुष, चून॥
4. रहिमन निज मन की व्यथा, मन ही राखो गोय।
सुनि अठलैहैं लोग सब, बाँटि न लेहैं कोय॥
गिरधर मुरलीधर कहे, कछु दुख मानत नाह॥
विस्तृत अर्थ: महान व्यक्ति छोटे नाम या साधारण संबोधन से छोटा नहीं हो जाता, जैसे कृष्ण को कोई भी नाम कहे, उनकी महत्ता कम नहीं होती।
6. समय लाभ सम लाभ नहिं, समय चूक सम चूक।
चतुरन चित रहीम लगी, समय चूक कछु चूक॥
विस्तृत अर्थ: समय का सदुपयोग सबसे बड़ा लाभ है और समय चूक जाना सबसे बड़ा नुकसान, क्योंकि समय हाथ से निकल जाए तो अवसर लौटकर नहीं आते।
7. ए रहीम दर दर फिरहिं, माँगि मधुकरी खाहिं।
यारो यारी छोड़िये, वे रहीम अब नाहिं॥
विस्तृत अर्थ: जो व्यक्ति स्वाभिमान छोड़कर दर-दर भीख माँगता फिरता है, उससे मित्रता छोड़ देनी चाहिए, क्योंकि वह अपना आत्मसम्मान खो चुका होता है।
8. रहिमन वे नर मर चुके, जे कहुँ माँगन जाहिं।
उनते पहिले वे मुए, जिन मुख निकसत नाहिं॥
विस्तृत अर्थ:: माँगकर जीना आत्मसम्मान की मृत्यु है; पर उससे भी पहले वे मर चुके हैं जिनके मुख से ‘न’ शब्द नहीं निकलता।
9. जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करि सकत कुसंग।
चन्दन विष व्यापत नहीं, लिपटे रहत भुजंग॥
विस्तृत अर्थ: अच्छे स्वभाव वाला व्यक्ति बुरी संगति में रहकर भी अपना गुण नहीं खोता, जैसे चंदन पर लिपटा साँप भी उसे विषैला नहीं बना पाता।
10. रहिमन प्रीति न कीजिए, जस खीरा ने कीन।
ऊपर से तो दिल मिला, भीतर फांकें तीन॥
विस्तृत अर्थ:: जो प्रेम केवल दिखावे का हो, उसमें भीतर से टूटन होती है; ऐसा प्रेम अंत में धोखा ही देता है।
11. तरुवर फल नहिं खात है, सरवर पियहि न पान।
कहि रहीम पर काज हित, संपति संचहि सुजान॥
विस्तृत अर्थ:: जैसे पेड़ अपने फल नहीं खाते और तालाब अपना पानी नहीं पीते, वैसे ही सज्जन व्यक्ति अपनी संपत्ति दूसरों के कल्याण के लिए संचित करता है।
12. रूठे सुजन मनाइए, जो रूठे सौ बार।
रहीमन फिरि फिरि पोइए, टूटे मुक्ता हार॥
विस्तृत अर्थ: अच्छे और सज्जन लोगों से संबंध टूटने न दें, क्योंकि वे टूटे मोती के हार जैसे होते हैं जिन्हें फिर से पिरोना चाहिए।
13. क्षमा बड़न को चाहिए, छोटन को उत्पात।
कह रहीम हरि का घट्यौ, जो भृगु मारी लात॥
विस्तृत अर्थ: क्षमा केवल महान लोगों का गुण है; क्रोध करना छोटे मन का लक्षण है | उदाहरण के रूप में वे कहते हैं कि जब महर्षि भृगु ने भगवान विष्णु को पैर मारा, तब भी भगवान ने क्रोध नहीं किया, बल्कि उनके पैर दबाने लगे।
14. रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय।
टूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गाँठ पड़ जाय॥
विस्तृत अर्थ: प्रेम का संबंध बहुत नाज़ुक होता है; एक बार टूट जाए तो दोबारा जुड़ने पर भी उसमें गाँठ रह जाती है।
15. एकही साधे सब सधै, सब साधे सब जाय।
रहिमन मूल सींच बोये, फूल लहि अघाय॥
विस्तृत अर्थ: यदि मूल कारण पर ध्यान दिया जाए तो सभी कार्य सफल हो जाते हैं; इधर-उधर भटकने से सब कुछ नष्ट हो जाता है।
16. रहिमन ओछे नरन सो, बैर भली न कीत।
काटे चाटे स्वान के, दोऊ भाँति ती प्रतीत॥
विस्तृत अर्थ: नीच व्यक्ति से शत्रुता दोनों ही स्थितियों में नुकसानदायक होती है, चाहे वह नुकसान करे या दिखावटी प्रेम दिखाए।
17. जो रहीम गति दीप की, कुल कपूत गति सोय।
बारे उजियारो करे, बढ़े अँधेरो होय॥
विस्तृत अर्थ: कुपुत्र परिवार का नाम रोशन करने के बजाय बदनामी लाता है, जैसे दीपक बुझने पर अंधकार बढ़ जाता है।
18. रहिमन चुप हो बैठिए, देखि दिनन को फेर।
जब नीके दिन आइहैं, बनत न लागै बेर॥
विस्तृत अर्थ: बुरे समय में धैर्य और मौन रखना चाहिए, क्योंकि अच्छे दिन आने पर परिस्थितियाँ स्वयं सुधर जाती हैं।
19. रहिमन प्रेम न छाँड़िए, लघु जन जानि।
कूँजा पथिक न छोड़ई, देखि बावड़ी पानी॥
विस्तृत अर्थ: छोटे व्यक्ति या छोटे साधन को तुच्छ न समझें, क्योंकि संकट में वही सहारा बन सकता है।
20. रहिमन मीत बनाइए, कठिन समय के काम।
आपत्ति काज न आवहीं, संपत्ति साँचि सुजान॥
विस्तृत अर्थ: सच्चे मित्र वही होते हैं जो संकट में साथ दें; धन केवल सुरक्षित रखा जा सकता है, मदद नहीं कर सकता।
21. रहिमन गति अगम्य है, प्रेम की रीति अपार।
दादुर डूबे पंक में, मीन न उबरै पार॥
विस्तृत अर्थ: प्रेम की शक्ति और उसकी गति को समझना कठिन है; इसमें अयोग्य डूब जाते हैं और योग्य भी पार नहीं पा पाते।
22. रहिमन जिह्वा बावरी, कह गई सरग पाताल।
आप तो कह भीतर रही, जूता खात कपाल॥
विस्तृत अर्थ: असंयमित वाणी मनुष्य को अपमान और संकट में डाल देती है, जबकि बोलने वाली जिह्वा स्वयं सुरक्षित रहती है।
23. रहिमन हानि लाभ जीवन मरण, यश अपयश विधि हाथ।
जेति बने तित होइये, एहि विधि रहीम रीत॥
विस्तृत अर्थ: लाभ-हानि, जीवन-मरण और मान-अपमान सब विधि के हाथ में हैं; इसलिए जो मिले उसे स्वीकार करना चाहिए।
24. ओछो काम बड़े करैं तौ न बड़ाई होय।
विस्तृत अर्थ: यदि कोई छोटा या सामान्य व्यक्ति कोई बड़ा काम करता है, तो भी उसकी बड़ाई नहीं होती, जैसे हनुमान को कोई कृष्ण (गिरधर) नहीं कहता।
25. रहिमन यह तन विष की बेलरी, गुरु अमृत की खान।
सीस दिए जो गुरु मिले, तो भी सस्ता जान॥
विस्तृत अर्थ: यह शरीर नश्वर और विष के समान है, जबकि गुरु का ज्ञान अमृत तुल्य है; गुरु के लिए जीवन भी न्योछावर करना सस्ता सौदा है।
Dec 31, 2025
UP Board Hindi Book "महान व्यक्तित्व" (पूर्व नाम – हमारे पूर्वज) के प्रेरक दोहे
Dec 29, 2025
Picture - Kurdish Poem
Four children
a Turk, a Persian
an Arab and a Kurd were collectively drawing the picture of a man.
The first drew his head
The second drew his hands and upper limbs
The third drew his legs and torso
The fourth drew a gun on his shoulder
--- Sherko Bekas [1979]
Dec 27, 2025
Pind Apne Nu Jaanwa - Lyrics - Dharmendra Poem from Ikkis Movie
Dec 24, 2025
अरावली के आख़िरी दिन
एक मधुमक्खी परागकणों के साथ
उड़ते-उड़ते थक जाएगी।
सभी बहेलिए जाल को देखकर
उलझन में पड़ जाएँगे।
एक नन्हा ख़रगोश लू की बौछार में
हाँफते-हाँफते थक जाएगा।
चेतना आकुलित बघेरे कहीं नहीं दिखेंगे
इस निरीह-निर्वसन धरती पर।
अरावली के आख़िरी दिन
युवतियाँ छाता लेकर सैर करने जाएँगी
और लॉन में टहलकर लौट आएँगी।
एक शराबी चंद्रमा की रोशनी में
बहेलिए बस्तियों की ओर लौटते नज़र आएँगे।
कुछ पीले चेहरे सब्ज़ियों के ठेले लेकर
मुहल्लों में रेंगते हुए आवाज़ें देंगे।
बिना तारों वाली सघन अँधेरी रात में
रावण-हत्थे की आवाज़ के साथ तैरेगी
बच रह गए एक गीदड़ की टीस।
और जिन्हें नीले नभ में बिजलियाँ चमकने,
बादल गरजने और वर्षा की बूँदों का इंतिज़ार है,
सूखे काले अँधेरे में आँख मिचमिचाते और
कानों में कनिष्ठिकाएँ हिलाते थक जाएँगे।
और जिन्हें किताबें पढ़ने का शौक होगा,
शब्दकोश में साँप का अर्थ ढूँढ़कर
अपने बच्चों को कालबेलिया जोगियों की कथा सुनाएँगे
और सुनहरे केंचुल ओढ़े कोई देवता
सितारों की ओट में धरती को भरी आँख से निर्निमेष निहारेगा।
हालाँकि बात ऐसी है
अरावली की कोई एक तस्वीर देखकर
सूरज और चाँद के नीचे सुन नहीं पाता कोई
कभी ख़त्म न होने वाली बिलख, जो हर
इमारत की नींव तले दबी फूटती रहती है।
बड़ी आलीशान इमारतों में खिलते रहते हैं
ख़ूबसूरत गुलाबों जैसे नन्हे शिशु
और इसीलिए किसी को विश्वास नहीं होता कि
अरावली के आख़िरी दिन अरावली ऐसी होगी?
अरावली के आख़िरी दिन ऐसा ज़रूर होगा
एक अवतारी पुरुष आएँगे
एक नबी पुकारेगा
लेकिन बात ऐसी है कि वे दोनों आईफ़ोन पर व्यस्त होंगे
उन्हें न धनिए, न हरी मिर्च, न मेथी, न आलू,
न टमाटर, न ज़ीरे और न हरे चने की ज़रूरत होगी,
क्योंकि उनके बैग में
मैक्डॉनल्ड के बर्गर, मैकपफ़ और सालसा रैप होंगे।
अरावली का इसके अलावा यहाँ और क्या अंत होगा?
अरावली का इसके अलावा वहाँ और क्या अंत होगा?
स्रोत :रचनाकार : त्रिभुवन
प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित
संदर्भ : सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में अरावली पहाड़ियों की नई परिभाषा को मंजूरी दी, जिसमें 100 मीटर ऊंचाई से कम की पहाड़ियों को बाहर रखा गया, जिससे राजस्थान के 91% से अधिक क्षेत्र असुरक्षित हो गए। यह फैसला पर्यावरण मंत्रालय की सिफारिश पर आधारित था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की ही समिति (सीईसी) और भारतीय वन सर्वेक्षण (एफएसआई) ने इसका विरोध किया, क्योंकि इससे अवैध खनन को बढ़ावा मिलेगा।अरावली, जो दुनिया की सबसे प्राचीन पर्वतमाला है, दिल्ली-एनसीआर को रेगिस्तान से बचाती है, भूजल रिचार्ज करती है और जैव विविधता का केंद्र है, लेकिन पिछले दो दशक में 25-35% हिस्सा खनन से नष्ट हो चुका।ग्रामीणों, पर्यावरणविदों और आदिवासी समुदायों ने जयपुर, अलवर, उदयपुर जैसे क्षेत्रों में बड़े प्रदर्शन शुरू कर दिए, जहाँ गुर्जर-मेव किसान उपवास, जनसभाएँ और हस्ताक्षर अभियान चला रहे हैं।"अरावली विरासत जन अभियान" के तहत चार राज्यों के प्रतिनिधि खनन माफियाओं के खिलाफ एकजुट हुए, मांग की कि पूरी 692 किमी रेंज को पारिस्थितिक क्षेत्र घोषित कर नई खदानों पर पूर्ण रोक लगे।कार्यकर्ता राजेंद्र सिंह और नीलम अहुवालिया जैसे नेता चेतावनी दे रहे हैं कि यह फैसला मरुस्थलीकरण, जल संकट और प्रदूषण को बढ़ेगा, जबकि कोर्ट ने सस्टेनेबल माइनिंग प्लान तक नई लीज पर रोक का निर्देश दिया है।यह संघर्ष पर्यावरण रक्षा से आगे लोकतांत्रिक अधिकारों की लड़ाई बन गया है।
Dec 22, 2025
I am Kurdish ( أنا كردي )
I have courage.
I do not love angel eyes, skin white as marble.
I love the rocks, the hills, the peaks lost among the clouds.
I challenge misfortune, misery, solitude
With all my strength
Dec 19, 2025
यह वह बनारस नहीं गिंसबर्ग
परवर्ती पीढ़ी हमारी
नहीं मालूम जिसे क्यों कब
किसने लिखा कुछ पढ़कर सो कुछ लिखकर सो
देख रही बिकती बोटियाँ जिगर कीं
छह दो सात पाँच बोली न्यूयॉर्क-टोक्यो की
हाँ ऐलेन क्यों आए थे बनारस
यहाँ तो छूटा फॉर्टी सेकंड स्ट्रीट बहुत पीछे
कुत्तों ने किया हमेशा सड़कों पर संभोग यहाँ
रंग-बिरंगी नंगी रंभाएँ बेच रहा ईश्वर ख़ुराक आज़ादी के मसीहे की
चीत्कार इस पीढ़ी की नहीं बनेगी लंबी कविता नहीं बजेंगे ढोल
यह वह बनारस नहीं बीटनिक बहुत बड़ा गड्ढा है
रेंग रहा कीड़ा जिसमें
नहीं किसी और ग्रह का, मेरा ही दिमाग़ है लिंग है
हे भगवान चली गोलियाँ छत्तीसगढ़
भाई मेरा भूमिगत मैं क्यों गड्ढे में फिर
पाखंडी पीढ़ी मेरी
जाँघियों में खटमल-सी
भूखी बहुत भूखी
बनारस ले गए कहाँ तुम
जाएँ कहाँ हम छिपकर इन ख़ाली-ख़ाली तक़दीरों से
इन नंगे राजाओं से
कहाँ वह औरत वह मोक्षदात्री
बहुत प्यार है उससे
चाहा मैंने भी विवस्त्र उसे हे सिद्धार्थ
भूखे मरते मजूर वह क्यों फैलाती जाँघें
कहते कोई डर नहीं उसे एड्स का
बहुत दुखी इस पीढ़ी का पीछे छूटा यह बीमार
कई शीशों के बीच खड़ा ढोता लाशें अनगिनत
उठो औरतों प्यार करो हमसे
बना दो दीवार बाँध की हमें
कहो गिंसबर्ग कहो हमें गाने को यह गीत
बनारस नहीं आवाज़ हमारी अंतिम कविता
कहो।
--- लाल्टू
Dec 15, 2025
BORDERS
Dec 10, 2025
खेले मसाने में होरी दिगम्बर
भुत पिसाच बटोरी दिगंबर खेले मसाने में होरी,
लखि सूंदर फागुनी झता के,
मन से रंग गुलाल हटा के,
चिता बसम की झोरी दिगंबर खेले मसाने में होरी,
नाचत गावत डमरू धारी,
छोडत सर पे गर्ल पिचकारी,
बीते प्रेत थपोरी दिगंबर खेले मसाने में होरी,
भुत नाथ की मंगल होरी,
देख सिहाये ब्रिज की छोरी,
धन धन नाथ अगोहरी,
दिगंबर खेले मसाने में होरी,
गोप न गोपी श्याम न राधा,
ना कोई रोक न कोहनू वाधा
न साजन न गोरी, दिगंबर खेले मसाने में होरी |
Dec 6, 2025
हिंदू मुस्लिम करने वाले देश के दुश्मन
हिंदू मुस्लिम करने वाले देश के दुश्मन
दूर दूर तक देख न पाने की मजबूरी
हिलते से आंखों के जाले देश के दुश्मन
बंद पड़े दरवाज़े, आख़िर कैसे खोलें
ज़हनों पर लटके से ताले देश के दुश्मन
ज़हर भरा सा राग लिये अपने होठों पर
बहुत बेसुरे, ये बेताले देश के दुश्मन
एक बार फिर चिता पे रोटी सेंक रहे हैं
बहते से नफ़रत के नाले देश के दुश्मन
दो पग चलना मुश्किल, बोलें तो क्या बोलें
पैरों और ज़बान के छाले देश के दुश्मन
तरह तरह के गड़बड़झाले देश के दुश्मन
फ़सल वोट की, रक्त सनी धरती की छाती
खादी पहने ये परकाले देश के दुश्मन
मां का आंचल तार तार करने में आगे
भारत मां के ये रखवाले देश के दुश्मन
राम नाम के ये मतवाले देश के दुश्मन
बड़ी आपदा इनकी ख़ातिर अवसर जैसी
बड़े अनोखे बड़े निराले देश के दुश्मन
--- यश मालवीय
Dec 2, 2025
Ame ni mo Makezu
Kaze ni mo makezu
Yuki ni mo natsu no atsusa ni mo makenu
Joubu na karada wo mochi
Yoku wa naku
Kesshite ikarazu
Itsumo shizuka ni waratte iru
Ichinichi ni genmai yon gou to
Miso to sukoshi no yasai wo tabe
Arayuru koto wo
Jibun wo kanjou ni irezuni
Yoku miki kishi wakari
Soshite wasurezu
Nohara no matsu no hayashi no kage no
Chiisana kayabuki no koya ni ite
Higashi ni byouki no kodomo areba
Itte kanbyou shite yari
Nishi ni tsukareta haha areba
Itte sono ine no taba wo oi
Minami ni shinisou na hito areba
Itte kowagaranakute mo ii to ii
Kita ni kenka ya soshou areba
Tsumaranai kara yamero to ii
Hideri no toki wa namida wo nagashi
Samusa no natsu wa orooro aruki
Minna ni dekunobou to yobare
Homerare mo sezu
Kuni mo sarezu
Sou iu mono ni
Watashi wa naritai
***
Be not defeated by the rain,
Nor let the wind prove your better.
Succumb not to the snows of winter,
Nor be bested by the heat of summer.
Be strong in body,
Unfettered by desire,
Not enticed to anger.
Cultivate a quiet joy.
Count yourself last in everything,
Put others before you.
Watch well and listen closely.
Hold the learned lessons dear.
A thatch-roof house, in a meadow,
Nestled in a pine grove’s shade.
If, to the East, a child lies sick:
Go forth and nurse him to health.
If, to the West, an old lady stands exhausted:
Go forth, and relieve her of burden.
If, to the South, a man lies dying:
Go forth with words of courage to dispel his fear.
If, to the North, an argument or fight ensues:
Go forth and beg them stop such a waste of effort and of spirit.
In times of drought, shed tears of sympathy.
In summer’s cold, walk in concern and empathy.
Stand aloof of the unknowing masses:
Better dismissed as useless than flattered as a “Great Man”.
This is my goal, the person I strive to become.
--- Kenji Miyazawa in original Japanese text, with a popular English translation by David Sulz
Nov 26, 2025
इश्क़ जलाकर - Ishq Jalakar | Karvaan - Hindi Lyrics– Dhurandhar Movie
Nov 24, 2025
ये एक मेला है वादा किसी से क्या लेगा
अब इसके बाद मेरा इम्तेहान क्या लेगा
ये एक मेला है वादा किसी से क्या लेगा
ढलेगा दिन तो हर एक अपना रास्ता लेगा
मैं बुझ गया तो हमेशा को बुझ ही जाऊंगा
कोई चराग़ नहीं हूं जो फिर जला लेगा
कलेजा चाहिए दुश्मन से दुश्मनी के लिए
जो बे-अमल है वो बदला किसी से क्या लेगा
मैं उसका हो नहीं सकता बता न देना उसे
सुनेगा तो लकीरें हाथ की अपनी जला लेगा
हज़ार तोड़ के आ जाऊं उस से रिश्ता वसीम
मैं जानता हूं वो जब चाहेगा बुला लेगा
--- वसीम बरेलवी


