Jul 30, 2026

Palestine

As Arab men fall like
grapes from a vine
under late afternoon

summer's shine women
watch their bridal beds
crumble under bombs.

Separated on earth by
different pressures they
will meet again only in
a promised paradise.

They will not be the same.
Shadows will meet shadows.
The new Jerusalem will be
of no consolation for
the one they lost.

Jul 26, 2026

वो भी क्या दिन थे

 वो भी क्या दिन थे कि जब इश्क़ लड़ा लेते थे,

प्यार की डोर को चर्ख़ी पे चढ़ा लेते थे,

नौजवानी की पतंगों को उड़ा लेते थे,

धड़क के कंकड़ियाँ संभाल लेते थे,

होंठों पे हंसी, आंखों में आस थी,

हर ग़म को हंसी में उड़ाया करते थे।

--- सागर खय्यामी

Jul 23, 2026

15 बेहतरीन शेर - 24 !!!

 1.नहीं नहीं हमें अब तेरी जुस्तुजू भी नहीं तुझे भी भूल गए हम तिरी ख़ुशी के लिए - ज़ेहरा निगाह

2.  मुस्तक़िल जूझना यादों से बहुत मुश्किल है, रफ़्ता रफ़्ता सभी घर-बार में खो जाते हैं। - .मुनव्वर राना

3. रंग ख़ुश्बू और मौसम का बहाना हो गया, अपनी ही तस्वीर में चेहरा पुराना हो गया - खालिद गनी 

4.ये दस्तूर-ए-ज़बाँ-बंदी है कैसा तेरी महफ़िल में , यहाँ तो बात करने को तरसती है ज़बाँ मेरी  - इक़बाल

5. ज़ाहिद शराब पीने दे मस्जिद में बैठ कर, या वो जगह बता दे जहाँ पर ख़ुदा न हो

6. न ख़ुदा ही मिला न विसाल-ए-सनम न इधर के हुए न उधर के हुए, रहे दिल में हमारे ये रंज-ओ-अलम न इधर के हुए न उधर के हुए

7. अगर फ़िरदौस बर-रू-ए-ज़मीं अस्त, हमीं अस्त ओ हमीं अस्त ओ हमीं अस्त

8. सलीक़े से हवाओं में जो ख़ुशबू घोल सकते हैं, अभी कुछ लोग बाक़ी हैं जो उर्दू बोल सकते हैं

9. आतिशे इश्क़ न बुझी, ज़माने ने इंतेहा लाख लिए, वो मयस्सर नहीं अभी, पर जीने को उसकी आरज़ू ही सही !

10. होश आए भी तो क्यों करें, तेरे दीवाने को, एक जाता है तो दो आते हैं समझाने को - होशियार मेरठी 

11.रफ़्ता रफ़्ता वो हमारे दिल के अरमाँ हो गए , पहले जाँ फिर जान-ए-जाँ फिर जान-ए-जानाँ हो गए  - क़मर जलालाबादी

12. तुम से सदियों की वफ़ाओ का कोई नाता था, तुम से मिलने की लकीरें थीं मेरे हाथों में - सईद राही

13.इक रात हर चराग़ की लौ काट दी गई, और वो भी चुप रहे जिन्हें प्यारी है रौशनी - नोमान शौक़

14.दूसरा मौक़ा सबको मिलता है ताबिश, पहली बाज़ी सबने हारी होती है -ज़ुबैर ताबिश

15.जो डूबना है तो इतने सुकून से डूबो, कि आस-पास की लहरों को भी पता न लगे - क़ैसर-उल जाफ़री

The Grand Quilt

I don’t believe we can stitch together
only scraps of beauty, squares of light.
I don’t believe in a quilt that doesn’t also
have patches of sorrow, blocks of ache.
Such pieces are, of course, much harder
to want to stitch in. But it matters
that we do not exclude them.
It matters right now that we don’t pretend
they do not exist.
It matters that we sew every piece
into the grand cloth.
It matters, too,
how we sew these pieces in,
perhaps using our finest silk thread,
perhaps with an elaborate stitch
our grandmother taught us,
or perhaps we must use
a stitch we make up
because no one ever taught us
how to do this most difficult task—
to meet what at first seems unwanted, wrong,
and to incorporate it into the whole
and to do this for as long as we can stitch,
that’s how long.

- Rosemerry Wahtola Trommer

Jul 19, 2026

KAMISHLI¹

Writing to you from here, my friend,
what else can I tell you about
other than pain, sadness?
I would have to paint for you
a picture of us here in this city,
have to show you the face
of who is a stranger, driven out
from his very own land,
I would have to draw a country
of frontiers – spikes and guns
between mouth and mouth
between hand and hand –
borders.

Slowly the hours meander
in the darkness of streets, lanes, markets
dragging sorrow, sadness;
hours hung on the trees and the walls,
people wounded by the stabs
of bad luck.
Here, time is a machine
and the police control it.

--- FERHAD SHAKELY

¹Kamishli is a city of Kurdistan in Syria. Because of its closeness to Iraqi Kurdistan, the politically persecuted Iraqi Kurds found refuge there.

Jul 15, 2026

उम्र जल्वों में बसर हो

 उम्र जल्वों में बसर हो ये ज़रूरी तो नहीं 

हर शब-ए-ग़म की सहर हो ये ज़रूरी तो नहीं 

चश्म-ए-साक़ी से पियो या लब-ए-साग़र से पियो 

बे-ख़ुदी आठों पहर हो ये ज़रूरी तो नहीं 

नींद तो दर्द के बिस्तर पे भी आ सकती है 

उन की आग़ोश में सर हो ये ज़रूरी तो नहीं 

शैख़ करता तो है मस्जिद में ख़ुदा को सज्दे 

उस के सज्दों में असर हो ये ज़रूरी तो नहीं 

सब की नज़रों में हो साक़ी ये ज़रूरी है मगर 

सब पे साक़ी की नज़र हो ये ज़रूरी तो नहीं 

मय-कशी के लिए ख़ामोश भरी महफ़िल में 

सिर्फ़ ख़य्याम का घर हो ये ज़रूरी तो नहीं 

- ख़ामोश ग़ाज़ीपुरी

Jul 11, 2026

"अंजानी राहों में" — मेरी जान हिन्दुस्तान एलबम से।

अंजानी राहों में तू क्या ढूँढता फिरे

दूर जिसे समझा वो तो पास है तेरे

साँस में हवा, जान में ज़मीन

दिल में खुला आसमान

प्यार है खुदा, प्यार है ख़ुशी

प्यार से है दोनों जहाँ

तेरा यह आशियाना, मेरा भी आशियाना


घूमता रहा दूर तू कहीं, उड़ते बादलों की तरह

कहीं से तुझे आई है सदा, लौट के आ अब ज़रा

तेरा यह आशियाना, मेरा भी आशियाना


वो झिलमिलाती आँखें, वो भोली सी अदा

वो धीरे-धीरे चल के लहराती हवाएँ

हमको ले जाएँ वहाँ, जहाँ हो घर अपना

मेरी यादों में पाया है

आज तो मिलने का दिन है आया, आया...

- पी. के. मिश्रा 

Jul 7, 2026

You decide

But whenever I think of myself 

you appear by my side in the form of a silence 

We swallow the light.

A rose garden, think of it, in the middle of the desert. 

You touch that place with your wound, 

The desert softens somewhat.

At that moment, right at that moment 

Like taking a copper tray, hanging it on the wall 

you think of me with fresh new eyes, love me.

 You create me anew.


Should we name this thing? You decide. 

But whenever an alarm clock goes off 

here and there in places that I cannot hear,

you become a ringing thing, 

Like a nun thinking of renewing her vows,

 you say 'Welcome' to the greatness of living.

You give form to water. 

Is this what they call surface tension? 

With a strange love you open your mouth,

might regret that some things don't work out. 

With these eyes that come from

when you first began to love me -

their depth, the burden of meaning -

With these things I say, 'Love me.


İlhan Sami Çomak
Translated by Caroline Stockford

Jul 2, 2026

क्या ज़रूरी है मोहब्बत में तमाशा होना

क्या ज़रूरी है मोहब्बत में तमाशा होना

जिससे मिलना ही नहीं उससे जुदा क्या होना

ज़िंदा होना तो नहीं हिज्र में ज़िंदा होना

हम इसे कहते हैं होने के अलावा होना

तेरा सूरज के क़बीले से त'अल्लुक़ तो नहीं

ये कहाँ से तुझे आया है सभी का होना

तू ने आने में बहुत देर लगा दी वरना

मैं नहीं चाहता था हिज्र में बूढ़ा होना

क्या तमाशा है कि सब मुझको बुरा कहते हैं

और सब चाहते हैं मेरी तरह का होना

--- अब्बास ताबिश

Jun 28, 2026

It's Also Fine

Source: Reuters

It’s also fine to die in our beds
on a clean pillow
and among our friends.
It’s fine to die, once,
our hands crossed on our chests,
empty and pale,
with no scratches, no chains, no banners,
and no petitions.
It’s fine to have a clean death,
with no holes in our shirts,
and no evidence in our ribs.
It’s fine to die
with a white pillow, not the pavement, under our cheek,
with our hands resting in those of our loved ones,
surrounded by desperate doctors and nurses,
with nothing left but a graceful farewell,
paying no attention to history,
leaving this world as it is,
hoping that, someday, someone else
will change it.

Mourid Barghouti (Translated by Radwa Ashour)
From: Midnight and Other Poems
Publisher: Arc Publications, Todmorden, Lancashire, 2009

Jun 23, 2026

Very Indian Poem in Indian English

 I am standing for peace and non-violence. 

Why world is fighting fighting 

Why all people of world 

Are not following Mahatma Gandhi, 

I am simply not understanding. 

Ancient Indian Wisdom is 100% correct. 

I should say even 200% correct. 

But modern generation is neglecting- 

Too much going for fashion and foreign thing. 

Other day I’m reading in newspaper 

(Every day I’m reading Times of India 

To improve my English language) 

How one goonda fellow 

Throw stone at Indirabehn. 

Must be student unrest fellow, I am thinking. 

Friends, Romans, countrymen, I am saying 

(to myself) 

Lend me the ears. 

Everything is coming- 

Regeneration, Remuneration, Contraception. 

Be patiently, brothers and sisters. 

You want one glass lassi? 

Very good for digestion. 

With little salt lovely drink, 

Better than wine; 

Not that I am ever tasting the wine. 

I’m the total teetotaller, completely total. 

But I say 

Wine is for the drunkards only. 

What you think of prospects of world peace? 

Pakistan behaving like this, 

China behaving like that, 

It is making me very sad, I am telling you. 

Really, most harassing me. 

All men are brothers, no? 

In India also 

Gujaraties, Maharashtrians, Hindiwallahs 

All brothers 

Though some are having funny habits. 

Still you tolerate me, 

I tolerate you, 

One day, Ram Rajya is surely coming. 

You are going? 

But you will visit again 

Any time, any day, 

I am not believing in ceremony. 

Always I am enjoying your company.

--- Nissim Ezekiel

Jun 18, 2026

15 बेहतरीन शेर - 23 !!!

1. उम्र-भर जी के भी जीने का न अन्दाज आया। जिन्दगी छोड़ दे पीछा मेरा मैं बाज आया ॥- मोहम्मद अली 'ताज'  

2.  ख़मोशी से मुसीबत और भी संगीन होती है,  तड़प ऐ दिल तड़पने से ज़रा तस्कीन होती है  - -शाद अज़ीमाबादी

3. जिसको ख़बर नहीं, उसे जोशो-ख़रोश है, जो पा गया है राज़, वो गुम है ख़मोश है  - पंडित ब्रजमोहन दत्तात्रेय 'कैफ़ी'

4.  इश्क़ नाज़ुक मिज़ाज है बेहद, अक़्ल का बोझ उठा नहीं सकता  - अकबर इलाहाबादी

5. 'हफ़ीज़' अपनी बोली मोहब्बत की बोलीन उर्दू, न हिंदी, न हिन्दोस्तानी - हफ़ीज़ जालंधरी

6. क़रार दिल को सदा जिसके नाम से आया, वो आया भी तो किसी और काम से आया - जमाल एहसानी

7 हयात ले के चलो, कायनात ले के चलो, चलो तो सारे ज़माने को साथ ले के चलो - मख़दूम मोहिउद्दीन
 
8. सब मिरे चाहने वाले हैं मिरा कोई नहीं, मैं भी इस मुल्क में उर्दू की तरह रहता हूँ  - हसन काज़मी

9. हम ऐसे ख़ुदपरस्त हैं कि खुदा को भी न मानें, और फिर भी उम्मीद रखते हैं कि लोग हमें खुदा माने। -अकबर इलाहाबादी

10. वहाँ जलेगा दिया कब तक आदमियत का, खुद आदमी हो जहाँ सर फिरि हवा की तरह - महशर बदायूनी 

11. ज़िंदगी ज़िंदा-दिली को जान ऐ रोशन, वरना कितने ही यहाँ रोज़ फ़ना होते हैं। -  ठाकुर रोशन सिंह 

12. बहाने और भी होते जो ज़िंदगी के लिए, हम एक बार तेरी आरज़ू भी खो देते  - ~ मजरूह सुल्तानपुरी

13. छत पे कमरा है मेरा कमरा भी कोने वाला, काम आसानी से हो जाता है रोने वाला - उमैर नजमी

14. लखनऊ तेरी गलियों में अभी भी महकती है वो शायरी, हर मोड़ पे बसता है एक पुराना इश्क़ का सिलसिला। - जोश मलीहाबादी 

15. ज़बाँ हमारी न समझा यहाँ कोई मजरूह, हम अजनबी की तरह अपने ही वतन में रहे - - मजरूह सुल्तानपुरी

Jun 13, 2026

Anthem for Doomed Youth

Teenage Soldiers of WW1, Source: BBC

What passing-bells for these who die as cattle?
— Only the monstrous anger of the guns.
Only the stuttering rifles' rapid rattle
Can patter out their hasty orisons.

No mockeries now for them; no prayers nor bells;
Nor any voice of mourning save the choirs,—
The shrill, demented choirs of wailing shells;
And bugles calling for them from sad shires.

What candles may be held to speed them all?
Not in the hands of boys, but in their eyes
Shall shine the holy glimmers of goodbyes.
The pallor of girls' brows shall be their pall;
Their flowers the tenderness of patient minds,
And each slow dusk a drawing-down of blinds.

--- Wilfred Owen

Jun 10, 2026

Kya Maloom (Indian Ocean Band)


तीव्र आँधी मृत्युगामी 

तीव्र आँधी मृत्युगामी

तीव्र आँधी मृत्युगामी पतालोकम चले

तीव्र आँधी मृत्युगामी पतालोकम चले

धर तिलक की छाप शिखधर तांडव को चले

बाँध घुंगरू मत मगन सुर-ताल अग्नि चढ़े

रक्त रंजित हो धरा रस रूप मंथन करे

रक्त रंजित हो धरा रस रूप मंथन करे

शम की उड़ती धूल शिव का महिमा मंडन करे

Jun 5, 2026

सुभाषितानि - 6 (Subhashitani - 6)

1. रे रे चातक! सावधानमनसा मित्र क्षणं श्रूयतां, अंभोदा बहवो हि सन्ति गगने सर्वेऽपि नैतादृशाः ।                
केचिद्वृष्टिभिरार्द्रयन्ति वसुधां गर्जन्ति केचित् वृथा, यं यं पश्यसि तस्य तस्य पुरतो मा ब्रूहि दीनं वच: ॥

हिंदी अर्थ: श्लोक में चातक पक्षी से संबोधित करते हुए कहा गया है कि वह सावधान रहे क्योंकि आसमान में कई प्रकार के बादल होते हैं। कुछ बादल जीवनदायक वर्षा करते हैं, पर कुछ केवल गर्जते हैं और कुछ भी नहीं देते। इसलिए जो भी तुम्हें मदद या सहारा देगा, उसकी खोज समझदारी से करो और किसी के सामने कमजोर वाणी से याचना न करो।

2. साहित्यसङ्गीतकलाविहीनः साक्षात्पशुः पुच्छविषाणहीनः।  
तृणं न खादन्नपि जीवमानः तद्भागधेयं परमं पशूनाम्॥

हिंदी अर्थ: जो मनुष्य साहित्य, संगीत और कला से वंचित होता है, वह बिना पूंछ और बिना सींगों वाला साक्षात् पशु के समान होता है। वह घास नहीं खाता हुआ भी जीवित रहता है, यानि यह पशुओं के लिए बड़ी सौभाग्य की बात है।
यह श्लोक भर्तृहरि के नीतिशतकम् से लिया गया है।

3. अश्वं नैव गजं नैव व्याघ्रं नैव च नैव च ।
अजापुत्रं बलिं दद्यात् देवो दुर्बलघातकः

हिंदी अर्थअश्वं (घोड़ा) नहीं, गजं (हाथी) नहीं, व्याघ्रं (बाघ) नहीं, न ही कोई और बड़ा जानवर, बलिदान (बलि) देवता केवल अजापुत्र (बकरी के बच्चे) को देते हैं। अर्थात् देव भी दुर्बलों को हानि पहुँचाते हैं। समाज में या सत्ता व्यवस्था में अकसर ताकतवरों को शक्तिशाली माना जाता है और वे सुरक्षित रहते हैं, जबकि कमजोरों को ही नुकसान और कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

4. सर्वं ज्ञेयं परं सा विद्या यया तु सुखं न विद्यते।
 यस्मिन्नपि नास्ति सुखं तस्य विद्या किं फलति॥

हिंदी अर्थ:  संपूर्ण ज्ञान वह विद्या है जिससे सुख की अनुभूति होती है। जिसके अंतःस्थ सुख की अनुभूति नहीं है, उसकी विद्या का क्या महत्त्व?

5. काक चेष्टा, बको ध्यानं, श्वान निद्रा तथैव च। अल्पहारी गृहत्यागी, विद्यार्थी पंच लक्षणम्॥

हिंदी अर्थ:  काक चेष्टा - कौवे की तरह प्रयासशील और धैर्यवान होना। 
बको ध्यानं - बगुले की तरह एकाग्र और ध्यान केंद्रित रखें।
श्वान निद्रा - कुत्ते जैसी नींद लेना अर्थात सतर्क और कम नींद लेना।
अल्पहारी - कम मात्रा में भोजन करना ताकि शरीर हल्का और सक्रिय रहे।
गृहत्यागी - घर की सुविधाओं और आराम की मोह छोड़कर, पढ़ाई पर ध्यान लगाना।

यह पांच गुण एक आदर्श विद्यार्थी के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इनमें मेहनत, एकाग्रता, सतर्कता, संयम, और त्याग शामिल हैं।

5. शनैः पन्थाः शनैः कन्था शनैः पर्वतलङ्घनम्। शनैर्विद्या शनैर्वित्तं पञ्चैतानि शनैः शनैः ॥

हिंदी अर्थ: राह धीरे धीरे कटती है, कपड़ा धीरे धीरे बुनता है, पर्वत धीरे धीरे चढा जाता है, विद्या और धन भी धीरे-धीरे प्राप्त होते हैं, ये पाँचों धीरे धीरे ही होते हैं।

6. न ही लक्ष्मी कुलक्रमज्जता, न ही भूषणों उल्लेखितोपि वा।
खड्गेन आक्रम्य भुंजीतः, वीर भोग्या वसुंधरा ।।

हिंदी अर्थ: न तो लक्ष्मी (धन-समृद्धि) जन्म से कुलीन होती है, न ही आभूषणों (भूषणों) का कोई उल्लेख ही है। खड़ग (तलवार) से आक्रमण करके ही भोगी जाती है—वीरों द्वारा ही धरती (वसुंधरा) भोग्य है।

7. गुणैरुत्तमतां याति नोच्चैरासनसंस्थितः। प्रासादशिखरस्थोऽपि काकः किं गरुडायते।।

हिंदी अर्थ: गुणों से ही उत्तमता प्राप्त होती है, ऊँचे आसन पर बैठने से नहीं। प्रासाद के शिखर पर स्थित कौआ गरुड़ थोड़े ही बन जाता है।

Jun 1, 2026

Definitions

Trying to warn about Hitler’s plans for the Jews, Raphael Lemkin, linguist and jurist, invented the word genocide in 1943 describing the annihilation of the Armenians in 1915,“a systematic destruction of a population segment, or race, by a ruling government.”

Wholesale massacres by Turks

were taught them by their

ancestors, Genghis Khan

and Tamerlane.

In 1895 the word

Holocaust was used by missionary

Corwin Shattuck to label the 1895

burning of Armenians in the Urfa cathedral.

These fires leveling

churches with Armenians locked

inside, spread to schools and barns.

Then to neighbors.

Assyrians named it Seifo.

The Greeks, the burning of Smyrna.

The Arabs, Nakba for catastrophe, calamity, disaster.

The Kurds used the words The Anfal.

Africans, apartheid, gypsies, annihilation,

the Syrians, intrafada.

The Jews named the crime by the Nazis, Shoah.

Then the Balkans called it ethnic cleansing.

But the present day Turkish label

for two and a half million lost

Armenians: unavoidable wartime casualties.

--- Diana Der-Hovanessian

May 28, 2026

Samandar Serial Title Song Lyrics (समंदर सीरियल टाइटल सॉन्ग)


समंदर की हसीन लहरों
के कामिल हुक्मराँ हैं हम
समंदर की हसीन लहरों
के कामिल हुक्मराँ हैं हम
नज़र है जिनकी बाने अर्श पर वो
पासबान हैं हम

समंदर की हसीन लहरों
के कामिल हुक्मराँ हैं हम
समंदर की हसीन लहरों
के कामिल हुक्मराँ हैं हम

वतन के ज़र्रे ज़र्रे से मोहब्बत
हमको है ऐ दोस्त
वतन के ज़र्रे ज़र्रे से मोहब्बत
हमको है ऐ दोस्त

है मंज़िल जिनकी ठोकर में
वो मीलें कारवाँ हैं हम
है मंज़िल जिनकी ठोकर में
वो मीलें कारवाँ हैं हम
नज़र है जिनकी बाने अर्श पर वो
पासबान हैं हम

समंदर की हसीन लहरों
के कामिल हुक्मराँ हैं हम
समंदर की हसीन लहरों
के कामिल हुक्मराँ हैं हम

---बाय कर्नल सुल्तान सिंह मलिक

दूरदर्शन पर भारतीय नौसेना पर आधारित सीरियल बहुत दुर्लभ थे, और समंदर (१९९५–१९९६) उसके लिए सबसे प्रसिद्ध और अद्वितीय उदाहरण है। यह २५ एपिसोड वाला हिंदी सीरियल १९९५ से १९९६ तक दूरदर्शन (DD Metro) पर प्रसारित हुआ था, जो भारतीय नौसेना के अधिकारियों के जीवन, उनकी समर्पण भावना, युद्ध में संघर्ष और साथियों के साथ मिलजुलकर रहने की भावना को दर्शाता था। इसका निर्माण सेवानिवृत्त विंग कमांडर अनुप सिंह बेदी वीएसएम ने किया था, जिनकी मदद सेना के सेवानिवृत्त कर्नल (डॉ.) सुल्तान सिंह मलिक (जिन्हें संगीतकार/गायक के रूप में भी जाना जाता है) ने की थी। सीरियल में समीर सोनी, अमन वर्मा, वीनाता मलिक, और गिरिश मलिक जैसे प्रसिद्ध अभिनेताओं ने मुख्य भूमिकाएँ निभाई थीं, साथ ही असली भारतीय नौसेना के अधिकारियों ने भी विशेष अभिनय किया था। इसमें भारतीय नौसेना के बेड़े के वास्तविक मैन्युवर और तस्वीरें भी दिखाई गई थीं। सीरियल का गीत "समंदर की हसीन लेहरों के कामील हुकूमरान हैं हम" से शुरू होता था, जिसकी रचना और गायन कर्नल एसएस मलिक ने किया था, और यह गीत बहुत लोकप्रिय हुआ था। इस सीरियल ने १९९५-९६ में बहुत उच्च TRP प्राप्त किया और ९० के दशक के नॉस्टल्जिक सीरियल के रूप में आज भी प्रेम किया जाता है।

May 24, 2026

वाल्मीकि रामायण का प्रथम श्लोक

मां निषाद प्रतिष्ठां त्वमगमः शाश्वतीः समाः।

 यत्क्रौंचमिथुनादेकम् अवधीः काममोहितम्॥

अर्थ:  हे निषाद (वनवासी या शिकारी), तुम्हें कभी भी प्रतिष्ठा या सम्मान प्राप्त नहीं होगा, क्योंकि तुमने प्रेम-मोह में क्रौंच पक्षी के जोड़े में से एक को मार डाला है।

यह संस्कृत श्लोक वाल्मीकि रामायण के प्रथम सर्ग (बालकाण्ड, श्लोक 15) का है | यह श्लोक महर्षि वाल्मीकि के मुख से एक प्रकार का श्राप स्वरूप निकला था, जब उन्होंने प्रेमी पक्षियों के बीच खिलवाड़ किया गया देखा था। इस श्लोक को रामायण के प्रथम श्लोक के रूप में मान्यता मिली है। 

May 21, 2026

मन कस्तूरी रे (Mann Kasturi Re)


पाट ना पाया मीठा पानी

पाट ना पाया मीठा पानी

ओर-छोर की दूरी रे


मन कस्तूरी रे, जग दस्तूरी रे


मन कस्तूरी रे, जग दस्तूरी रे

बात हुई ना पूरी रे


खोजे अपनी गंध ना पावे

चादर का पैबंद ना पावे


खोजे अपनी गंध ना पावे

चादर का पैबंद ना पावे

बिखरे बिखरे छंद सा टहले

दो होवें यह बांध ना पावें


नाचे होके फिरकी लट्टू ओह


नाचे होके फिरकी लट्टू

खोजे अपनी रूड़ी रे


मन कस्तूरी रे, जग दस्तूरी रे


मन कस्तूरी रे, जग दस्तूरी रे

बात हुई ना पूरी रे


उम्र की गिनती हाथ ना आई

पुरखों ने यह बात बताई


उल्टा करके देख सके तो

अंबर भी है गहरी खाई

रेखाओं के पार नज़र को

जिसने फेंका अंधे मन से

सतरंगी बेज़ार का खोला

दरवाज़ा बिन ज़ोर जतन के हे


फिर तो झूमा पागल होके

फिर तो झूमा पागल होके

सर पे डाल फितूरी रे


मन कस्तूरी रे, जग दस्तूरी रे

बात हुई ना पूरी रे


मन कस्तूरी रे, जग दस्तूरी रे

बात हुई ना, बात हुई ना

बात हुई ना पूरी रे

मन कस्तूरी रे, जग दस्तूरी रे

- वरूण ग्रोवर 

नोट:  मसान फिल्म समीक्षा 

May 19, 2026

Lyrics Raja Shivaji Anthem 'Chhatrapati'

हे, हर-हर-हर महादेव शिवशंकर

सह्यगिरी शिखरावर आले

हे, सळ-सळ-सळ रणकंटक तलवारी

वज्रमूठ सरसावून भाले

तू तेजःपुंज झुंजार, चेतवून अंगार

भेदलास अंधार सारा

तू अर्थ रामराज्याचा, हिंदवी स्वराज्याचा

एकमेव आराध्य झाला

दुष्ट दुर्जनांसी संहारले (हे)

पातशाहीला तू ललकारले (हे)

एक नव्या पर्वाची एकजूट करण्यासी

एक छत्र छाया आधार दे

एक शस्त्र, एक अस्त्र शूरवीर छत्रपती

धैर्यशील, सत्वशील, धर्मनिष्ठ छत्रपती

लाख मराठ्यांची तू आग रे (हे-हे)

माय भवानीचा तू वाघ रे

कीर्तीवंत, पुण्यवंत, नीतीवंत छत्रपती

अद्वितीय क्षत्रियकुलावतंस छत्रपती

लाख मराठ्यांची तू आग रे

माय भवानीचा तू वाघ रे

देव, देश, धर्माची, सर्वश्रेष्ठ कर्माची

आन घेतली रक्त सांडले जरी

अंधकार शतकांचा भस्मसात करण्यासी

एक तप्त ज्वाला ही पेटली उरी

भक्ती रूप संतांचा, साधू अन महंतांचा

हात जोडूनी मान राखलास तू

जर कुणी स्वराज्यावर वाकडी नजर केली

हात-पाय चौरंगी छाटलास तू

मोडून जात-पात रयतेसी देई साथ

त्यांचा सदैव कैवारी झाला

झाले बहुत राजे, जगतात नाव गाजे

लाखात एक शिवराय माझा

हात तुझा पाठीशी, वार झेलू छातीशी

ढाल तुझी होण्याचा मान दे

एक शस्त्र, एक अस्त्र शूरवीर छत्रपती

धैर्यशील, सत्वशील, धर्मनिष्ठ छत्रपती

लाख मराठ्यांची तू आग रे (हे-हे)

माय भवानीचा तू वाघ रे

कीर्तीवंत, पुण्यवंत, नीतीवंत छत्रपती

अद्वितीय क्षत्रियकुलावतंस छत्रपती

लाख मराठ्यांची तू आग रे

माय भवानीचा तू वाघ रे

मावळ-मावळ, पाठीशी बारा मावळ

देवाला शोधाया धावून आलं राऊळ

देवा रं देवा, सारं पावन झालं रं

आरती ओवाळा माझं राजं आलं रं

तोरण बांधून साजरं हे करू औक्षण कुंकुम भाळावर

शिवबांना डोळा पाहीन अन डोळ सारं पाणावलं

साष्टांग दर्शनाचा ह्या देवपूजनाचा

हा दैवयोग भाग्यात यावा

ध्वज उंच-उंच भगवा हा, वंदनीय भगवा हा

आसमंत भगवा कराया

जन्म सार्थ करण्यासी प्रार्थना ही चरणासी

प्राण अर्पण्याचा सन्मान दे

एक शस्त्र, एक अस्त्र शूरवीर छत्रपती

धैर्यशील, सत्वशील, धर्मनिष्ठ छत्रपती

लाख मराठ्यांची तू आग रे (हे-हे)

माय भवानीचा तू वाघ रे

कीर्तीवंत, पुण्यवंत, नीतीवंत छत्रपती

अद्वितीय क्षत्रियकुलावतंस छत्रपती

लाख मराठ्यांची तू आग रे

माय भवानीचा तू वाघ रे

--- अजय-अतुल 

Hindi Translation 

हे, हर-हर-हर महादेव शिवशंकर  

सह्यगिरि की शिखर-भूमि पर आए  


हे, सुस्सलाती रणकंटक तलवारें  

वज्रमूठ कसकर भाले  


तुम तेजस्वी, पराक्रमी, अंगार-सा जोश जगाने वाले  

तुमने सारा अंधकार चीर दिया  


तुम रामराज्य के अर्थ हो, हिंदवी स्वराज्य के प्रतीक हो  

और तुम ही एकमात्र आराध्य बन गए  


दुष्टों और दुराचारियों का संहार किया  

सत्ता को ललकार दिया  


एक नए युग को एकजुट करने के लिए  

एक ही छत्र की छाया और सहारा दो  


एक ही शस्त्र, एक ही अस्त्र, वीर छत्रपति  

धैर्यवान, सत्वशील, धर्मनिष्ठ छत्रपति  


लाखों मराठों की तुम ज्वाला हो  

माँ भवानी के तुम शेर हो  


कीर्तिवान, पुण्यवान, नीतिवान छत्रपति  

अद्वितीय क्षत्रिय कुल के आभूषण छत्रपति  


लाखों मराठों की तुम ज्वाला हो  

माँ भवानी के तुम शेर हो  


देव, देश और धर्म के लिए  

सर्वश्रेष्ठ कर्म के लिए  


यदि रक्त भी बहाना पड़ा, तो भी स्वीकार किया  

अंधकार के शतकों को भस्म करने के लिए  


एक तपती ज्वाला हृदय में प्रज्वलित हुई  

भक्ति-रूप संतों, साधुओं और महंतों का  


तुमने हाथ जोड़कर सम्मान रखा  

यदि किसी ने स्वराज्य पर टेढ़ी नजर डाली  


तो तुमने उसके हाथ-पाँव काट दिए  

जात-पात तोड़कर रयत का साथ दिया  


और सदा उनका रक्षक बन गया  

बहुत से राजा हुए, जिनका नाम दुनिया में गूंजा  


मेरे शिवराय तो लाखों में एक हैं  

तुम्हारा हाथ मेरी पीठ पर रहे, मैं सीना तानकर वार सह लूँ  


तुम्हारी ढाल बनने का मुझे सम्मान दो  

एक ही शस्त्र, एक ही अस्त्र, वीर छत्रपति  


धैर्यवान, सत्वशील, धर्मनिष्ठ छत्रपति  

लाखों मराठों की तुम ज्वाला हो  


माँ भवानी के तुम शेर हो  

कीर्तिवान, पुण्यवान, नीतिवान छत्रपति  


अद्वितीय क्षत्रिय कुल के आभूषण छत्रपति  

लाखों मराठों की तुम ज्वाला हो  


माँ भवानी के तुम शेर हो  


मावळ-मावळ, पीछे बारह मावळ  

देव को खोजने दौड़कर रावल आया  


हे देव, सब कुछ पावन हो गया  

मेरे राजा आए, उनकी आरती उतारो  


तोरण बाँधकर इसे उत्सव बनाएं, 

माथे पर कुंकुम से औक्षण करें  

शिवबाओं को आँखों से देखूँ तो

सब कुछ आँसुओं से भर जाए  


इस साष्टांग दर्शन और देवपूजन का  

यह सौभाग्य मेरे भाग्य में आए  


यह ऊँचा-ऊँचा भगवा ध्वज, यह वंदनीय भगवा  

आसमाँ तक भगवा कर दे  


जन्म को सार्थक करने के लिए चरणों में प्रार्थना है  

प्राण अर्पण करने का सम्मान दो  


एक ही शस्त्र, एक ही अस्त्र, वीर छत्रपति  

धैर्यवान, सत्वशील, धर्मनिष्ठ छत्रपति  


लाखों मराठों की तुम ज्वाला हो  

माँ भवानी के तुम शेर हो  


कीर्तिवान, पुण्यवान, नीतिवान छत्रपति  

अद्वितीय क्षत्रिय कुल के आभूषण छत्रपति  


लाखों मराठों की तुम ज्वाला हो  

माँ भवानी के तुम शेर हो  

L