Dec 10, 2025

खेले मसाने में होरी दिगम्बर

खेले मसाने में होरी दिगम्बर
भुत पिसाच बटोरी दिगंबर खेले मसाने में होरी,

लखि सूंदर फागुनी झता के,
मन से रंग गुलाल हटा के,
चिता बसम की झोरी दिगंबर खेले मसाने में होरी,

नाचत गावत डमरू धारी,
छोडत सर पे गर्ल पिचकारी,
बीते प्रेत थपोरी दिगंबर खेले मसाने में होरी,

भुत नाथ की मंगल होरी,
देख सिहाये ब्रिज की छोरी,
धन धन नाथ अगोहरी,
दिगंबर खेले मसाने में होरी,

गोप न गोपी श्याम न राधा,
ना कोई रोक न कोहनू वाधा
न साजन न गोरी, दिगंबर खेले मसाने में होरी |

"खेले मसाने में होरी दिगम्बर" एक प्रसिद्ध भजन और लोकगीत है जो खासकर काशी (वाराणसी) के मणिकर्णिका घाट पर होली के त्योहार के दौरान गाया जाता है। इस गीत में भगवान शिव की महिमा का वर्णन होता है, जो श्मशान (मसाना) की पवित्रता और शक्ति को दर्शाता है।

Dec 6, 2025

हिंदू मुस्लिम करने वाले देश के दुश्मन

उजले कपड़े, मन के काले देश के दुश्मन
हिंदू मुस्लिम करने वाले देश के दुश्मन

दूर दूर तक देख न पाने की मजबूरी
हिलते से आंखों के जाले देश के दुश्मन

बंद पड़े दरवाज़े, आख़िर कैसे खोलें
ज़हनों पर लटके से ताले देश के दुश्मन

ज़हर भरा सा राग लिये अपने होठों पर
बहुत बेसुरे, ये बेताले देश के दुश्मन

एक बार फिर चिता पे रोटी सेंक रहे हैं
बहते से नफ़रत के नाले देश के दुश्मन

दो पग चलना मुश्किल, बोलें तो क्या बोलें
पैरों और ज़बान के छाले देश के दुश्मन

देखो जमकर करें सियासत संकट में भी
तरह तरह के गड़बड़झाले देश के दुश्मन

फ़सल वोट की, रक्त सनी धरती की छाती
खादी पहने ये परकाले देश के दुश्मन

मां का आंचल तार तार करने में आगे
भारत मां के ये रखवाले देश के दुश्मन

धज्जी धज्जी उड़ा रहे हैं मर्यादा की
राम नाम के ये मतवाले देश के दुश्मन

बड़ी आपदा इनकी ख़ातिर अवसर जैसी
बड़े अनोखे बड़े निराले देश के दुश्मन

--- यश मालवीय

Dec 2, 2025

Ame ni mo Makezu

Ame ni mo makezu

Kaze ni mo makezu
Yuki ni mo natsu no atsusa ni mo makenu
Joubu na karada wo mochi
Yoku wa naku
Kesshite ikarazu
Itsumo shizuka ni waratte iru

Ichinichi ni genmai yon gou to
Miso to sukoshi no yasai wo tabe
Arayuru koto wo
Jibun wo kanjou ni irezuni
Yoku miki kishi wakari
Soshite wasurezu

Nohara no matsu no hayashi no kage no
Chiisana kayabuki no koya ni ite
Higashi ni byouki no kodomo areba
Itte kanbyou shite yari
Nishi ni tsukareta haha areba
Itte sono ine no taba wo oi

Minami ni shinisou na hito areba
Itte kowagaranakute mo ii to ii
Kita ni kenka ya soshou areba
Tsumaranai kara yamero to ii

Hideri no toki wa namida wo nagashi
Samusa no natsu wa orooro aruki

Minna ni dekunobou to yobare
Homerare mo sezu
Kuni mo sarezu

Sou iu mono ni
Watashi wa naritai

***
Be not defeated by the rain,
Nor let the wind prove your better.
Succumb not to the snows of winter,
Nor be bested by the heat of summer.
Be strong in body,
Unfettered by desire,
Not enticed to anger.
Cultivate a quiet joy.

Count yourself last in everything,
Put others before you.
Watch well and listen closely.
Hold the learned lessons dear.

A thatch-roof house, in a meadow,
Nestled in a pine grove’s shade.

If, to the East, a child lies sick:
Go forth and nurse him to health.
If, to the West, an old lady stands exhausted:
Go forth, and relieve her of burden.

If, to the South, a man lies dying:
Go forth with words of courage to dispel his fear.
If, to the North, an argument or fight ensues:
Go forth and beg them stop such a waste of effort and of spirit.

In times of drought, shed tears of sympathy.
In summer’s cold, walk in concern and empathy.

Stand aloof of the unknowing masses:
Better dismissed as useless than flattered as a “Great Man”.

This is my goal, the person I strive to become.

--- Kenji Miyazawa in original Japanese text, with a popular English translation by David Sulz

This poem, written in 1931 is one of the most beloved works of Japanese literature. It has become a beloved symbol of perseverance and empathy in Japanese culture. Notably, it inspired the 2013 animated film "Rain Won't" (雨ニモマケズ), which beautifully illustrates the poem's message of resilience and compassion.

Nov 26, 2025

इश्क़ जलाकर - Ishq Jalakar | Karvaan - Hindi Lyrics– Dhurandhar Movie

धूप टूट के
कांच की तरह
चुभ गई तो क्या
अब देखा जाएगा आंधियां कई
दिल में है मेरे
चुभ गई तो क्या
अब देखा जाएगा दिल है टूटा
मेरा मैं इश्क जला कर आ गया...

दिल है टूटा
मेरा मैं इश्क जला कर आ गया
आंधी बन के आया हूं
मेरा हौसला भी अय्याश है...
ना तो कारवां की तलाश है
ना तो कारवां की तलाश है
ना तो हमसफर की तलाश है
ना तो कारवां की तलाश है

आधी बातें आँखें बोले
आधी बातें आँखें बोले
बाकी आधी खामोशी कह दे...
हमजुबान की तलाश है
ना तो कारवां की तलाश है
ना तो कारवां की तलाश है
ना तो हमसफर की तलाश है
मेरा शौक तेरा दीदार है
यही उम्र भर की तलाश है

- इरशाद कामिल और साहिर लुधियानवी



Nov 24, 2025

ये एक मेला है वादा किसी से क्या लेगा

मैं इस उम्मीद पे डूबा के तू बचा लेगा
अब इसके बाद मेरा इम्तेहान क्या लेगा

ये एक मेला है वादा किसी से क्या लेगा
ढलेगा दिन तो हर एक अपना रास्ता लेगा

मैं बुझ गया तो हमेशा को बुझ ही जाऊंगा
कोई चराग़ नहीं हूं जो फिर जला लेगा

कलेजा चाहिए दुश्मन से दुश्मनी के लिए
जो बे-अमल है वो बदला किसी से क्या लेगा

मैं उसका हो नहीं सकता बता न देना उसे
सुनेगा तो लकीरें हाथ की अपनी जला लेगा

हज़ार तोड़ के आ जाऊं उस से रिश्ता वसीम
मैं जानता हूं वो जब चाहेगा बुला लेगा

--- वसीम बरेलवी

Nov 20, 2025

सुभाषितानि - 4 (Subhashitani -4)

 1. सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद् दुःखभाग् भवेत्॥

हिन्दी अर्थ: सब लोग सुखी हों, सब लोग स्वस्थ एवं निरोगी रहें। सबको शुभ फल प्राप्त हों, कोई भी दुःखी न हो।

2. अलस्यस्य कुतो विद्या? अविद्यस्य कुतो धनम्? अधनस्य कुतो मित्रम्? अमित्रस्य कुतः सुखम्॥

हिन्दी अर्थ: आलसी व्यक्ति को विद्या कहाँ? अनपढ़ को धन कहाँ? गरीब को मित्र कहाँ? और जिसका मित्र नहीं है, उसे सुख कहाँ?

3. विद्या ददाति विनयम्, विनयाद् याति पात्रता। पात्रत्वात् धनमाप्नोति, धनात् धर्मः ततः सुखम्॥

हिन्दी अर्थ: विद्या से विनय मिलता है, विनय से योग्य बनने की शक्ति मिलती है। पात्रता से धन मिलता है, धन से धर्म, और धर्म से सुख की प्राप्ति होती है।

4. पुस्तकस्था तु या विद्या, परहस्तगतं धनम्। कार्यकाले समुपस्थिते, न सा विद्या न तत् धनम्॥

हिन्दी अर्थ: जो विद्या केवल पुस्तकों में है, जैसा धन जो केवल दूसरों के पास है, वह दोनों आवश्यकता के समय काम नहीं आते।

5. परोपकाराय फलन्ति वृक्षाः, परोपकाराय वहन्ति नद्यः। परोपकाराय दुहन्ति गावः, परोपकारार्थमिदं शरीरम्॥

हिन्दी अर्थ: वृक्ष फल दूसरों के लिए देते हैं, नदियाँ दूसरों के लिए अपना जल बहाती हैं, गायें दूसरों के लिए दूध देती हैं, मनुष्य का शरीर भी दूसरों की भलाई के लिए होना चाहिए।

6. अहिंसा परमो धर्मः धर्म हिंसा तथैव च। धर्मेणैव जीवितं हि लोकः सुखमास्थितः।

हिन्दी अर्थ:  अहिंसा ही परम धर्म है, परंतु यदि धर्म की रक्षा के लिए हिंसा आवश्यक हो तो वह भी धर्म के अन्तर्गत आती है। इससे जीवन का सही अर्थ और संसार का संतुलन समझ आता है।

7. अर्थस्य निश्चयो दृष्टो विचारेण हितोक्तितः । न स्नानेन न दानेन प्राणायाम शतेन वा ॥

हिंदी अर्थ: विवेकपूर्ण विचार-मनन और हितकारी उपदेशों के द्वारा ही तत्त्वज्ञान की निश्चयात्मक प्राप्ति होती है। केवल स्नान करने से, दान देने से अथवा सैकड़ों प्राणायाम करने से आत्मज्ञान प्राप्त नहीं होता. 

Nov 18, 2025

सुभाषितानि - 3 (Subhashitani -3)

 1. क्षणशः कणशश्चैव विद्यामर्थं च साधयेत्। क्षणत्यागे कुतो विद्या कणत्यागे कुतो धनम्॥

अर्थ : हर क्षण और हर छोटे से छोटे कण का ध्यान रखकर विद्या और धन का अर्जन करना चाहिए। अगर समय या संसाधन व्यर्थ जाते हैं तो विद्या या धन कैसे प्राप्त होंगे?

2.  शरणागतः कर्णाक्षैव विद्यामर्थं च चिन्तयेत्। शरण्यागः कुलो विद्या कुलन्यागः कुलो धनम॥

अर्थ : जो व्यक्ति शरण में आता है, उसे विद्या और धन के बारे में चिन्ता करनी चाहिए। कुल (वंश) की प्रतिष्ठा विद्या और धन से होती है।

3. प्रथमे नार्जिता विद्या द्वितीये नार्जितं धनम्। तृतीयं नार्जितं पुण्यं चतुर्थं किं करिष्यति॥

अर्थ : पहले विद्या, फिर धन और फिर पुण्य अर्जित करो। यदि पहले तीनों नहीं, तो चौथे में क्या होगा?

4. सर्वदीव्यमभी माता सर्वदीव्यम पिता। मातरं पितरं तस्मात् सर्वदेव्यं पूजयेत्॥

अर्थ : सब देवताओं में माता और पिता सर्वोच्च हैं, इसलिए उनका सम्मान करना चाहिए।

5. प्रियवाच्पवादेन सर्वं दुर्व्ययं जनतः। तस्मात्तव वचस्य कच्चति च दरिद्रता॥

अर्थ : प्रिय वार्ता से भी अपकार होता है। इसलिए जरूरी है कि अपने शब्दों का सावधानी से प्रयोग करें।

6. "सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात् न ब्रूयात् सत्यमप्रियम्। प्रियं च नानृतं ब्रूयात् एष धर्मः सनातनः॥"

अर्थ : हमेशा सच बोलो, परंतु ऐसा सच जो प्रिय हो। जो सत्य अप्रिय हो, उसे न कहो। साथ ही प्रिय बातें बोलो, पर झूठ नहीं।

Nov 16, 2025

सुभाषितानि -2 (Subhashitani -2)

1. अक्रोधेन जयेत्त्क्रोधम् असाधुं साधुना जयेत्।  जयेत्त्कदर्यं दानेन जयेत्स्तेनं चातुतम्॥  

अर्थ : गुस्से से क्रोध को हराया जा सकता है। बुरे मनुष्य को अच्छे मनुष्य से जीता जा सकता है। दान से लालच को हराया जा सकता है और सत्य बोलने से झूठ पर जीत होती है।  

2. गच्छन् पिपीलिको याति योजनानां शतान्यपि।  अगच्छन् वैनतेयोऽपि पदमेकं न गच्छति॥  

अर्थ : चलती हुई चींटी सैकड़ों योजन की दूरी तय कर जाती है, परंतु न चलने वाला गरुड़ पक्षी भी एक कदम नहीं बढ़ा सकता। इससे यह सीख मिलती है कि निरंतर प्रयास से ही सफलता मिलती है, चाहे गति धीमी हो।  

3. दिनान्ते च पिबेद् दुग्धं निशान्ते च पिबेत् पयः।  भोजनान्ते च पिबेत् तक्रं किम् वैध्यस्य प्रयोजनम्॥  

अर्थ : दिन के अंत में दूध पिए और रात के अंत में जल पिए। भोजन के अंत में दही पिए। ऐसे आहार से शरीर स्वस्थ रहता है, अन्यथा चिकित्सक (वैद्य) का कोई लाभ नहीं।  

4. षड्दोषाः पुरुषेणेः हाथव्याः भूतमता।  निद्रा तन्द्रा भयं क्रोधः आलस्यं दीर्घसूत्रता॥  

अर्थ : मनुष्य को छह दोषों से बचना चाहिए, जो उसके विनाश के कारण हैं – नींद, सुस्ती, भय, क्रोध, आलस्य और बहुत लंबे समय तक निरंतर विचार करना।  

5. निन्दन्तु नीतिनिपुणा यदि वा स्तुवन्तु लक्ष्मीः समाविशतु गच्छतु वा यथेष्टम्।  

अधेव वा मरणमस्तु युगान्तरे वा न्याय्यात् पथः प्रविचलन्ति पदं न धीरा:॥  

अर्थ : जो लोग नीति में पारंगत हैं, चाहे उनका कोई भी निंदा करें या स्तुति, लक्ष्मी (श्री, समृद्धि) उनका साथ देती है या नहीं, चलो, मर जाना बेहतर है। क्योंकि जो धीर पुरुष सत्य और न्याय के मार्ग पर चलते हैं, उनका कभी पद भी नहीं हिलता। 

Nov 14, 2025

सुभाषितानि - 1 (Subhashitani -1)

 १. अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्। उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्॥

हिन्दी अर्थ: यह मेरा है, वह पराया है - यह सोच संकीर्ण चित्त वाले लोगों की है। उदार हृदय वाले लोगों के लिए तो पूरा विश्व ही एक परिवार है।

२. सर्वं परवशं दुःखं सर्वमात्मवशं सुखम्। एतद् विद्यात् समासेन लक्षणं सुखदुःखयोः॥

हिन्दी अर्थ: दूसरों पर निर्भर रहना दुख का कारण है; अपने अधिकार में रहना ही सुख है। सुख-दुख की यही पहचान है।

३. वृथा वृद्धि: समुद्रेऽपि वृथा तृप्तस्य भोजनम्। वृथा दानं समर्थस्य वृथा दीपो दिवापि च॥

हिन्दी अर्थ: समुद्र में अनावश्यक वृद्धि (पानी डालना) व्यर्थ है, संतुष्ट व्यक्ति को भोजन देना भी व्यर्थ है; सम्पन्न व्यक्ति को दान देना और दिन के उजाले में दीप जलाना भी व्यर्थ है।

४. काव्यशास्त्रविनोदेन् काले गच्छति धीमताम्। व्यसनेन तु मूर्खाणां निद्रया कलहेन वा॥

हिन्दी अर्थ: समझदार लोग अपना समय काव्य, शास्त्र और विद्या में लगाते हैं। मूर्ख लोग अपना समय व्यसनों, नींद और झगड़ों में गँवा देते हैं।

५. महान्तं प्रायः सद्बुद्धेः संयोजनं लघुजनम्। यत्रास्ति सूचिकार्पः कृपाण: किं करिष्यति॥

हिन्दी अर्थ: जहां बुद्धि, सद्बुद्धि (विवेक) और महापुरुषों का संग होता है, वहीं महानता आती है। सुई में अगर तलवार की धार लगा दी जाए, तो भी वह तलवार का काम नहीं कर सकती।

६. किं कुलेन विशालेन विद्याहीनस्य देहिनः। विद्यावान् पूज्यते लोके नाविध्य: परिपूज्यते॥

हिन्दी अर्थ: बड़े कुल (परिवार) में जन्म लेने का क्या लाभ, अगर मनुष्य में विद्या नहीं है। संसार में विद्वान् की ही पूजा होती है, अविद्वान् की नहीं।

७. वेशेन वपुषा वाचा विद्यया विनयेन च। वकारैः पञ्चाभिजुक्तो नरो भवति पूजितः॥

हिन्दी अर्थ: वेश (वस्त्र), शरीर, वाणी, विद्या और विनय - ये पांच 'व' गुण जिस मनुष्य में होते हैं, वही समाज में सम्मान पाता है।

Nov 9, 2025

Comrade poets!

 Comrade poets!

 We're in a new world

 What's past is dead, who writes a poem

 In the age of wind and the atom

 Creates prophets!

 Our verses

 Have no colour

 No taste

 No sound

 If they do not carry the lantern

 From house to house!

 And if the "simple" cannot understand our poems

 Better for us to shed them

 And resort to silence

 If only these words were

 A plough in the hands of a peasant

 A shirt, a door, a key

 If only these words were!

 A poet says

 If my poems please my friends

 And anger my enemies

 Then I'm a poet.

 And I shall speak!

---Mahmoud Darwish   

Nov 6, 2025

बुद्ध भगवान

बुद्ध भगवान,

अमीरों के ड्राइंगरूम,

रईसों के मकान

तुम्हारे चित्र, तुम्हारी मूर्ति से शोभायमान।

पर वे हैं तुम्हारे दर्शन से अनभिज्ञ,

तुम्हारे विचारों से अनजान,

सपने में भी उन्हें इसका नहीं आता ध्यान।

--- हरिवंश राय 'बच्चन'

Nov 3, 2025

The Physics of Love

사랑의 물리학

질량의 크기는 부피와 비례하지 않는다

제비꽃같이 조그마한 그 계집애가

꽃잎같이 하늘거리는 그 계집애가

지구보다 더 큰 질량으로 나를 끌어당긴다.


순간, 나는

뉴턴의 사과처럼

사정없이 그녀에게로 굴러 떨어졌다

쿵 소리를 내며, 쿵쿵 소리를 내며

심장이

하늘에서땅까지

아찔한 진자운동을 계속하였다

첫사랑이었다.

The Physics of Love

Mass is not proportional to volume.
That girl as small as a violet,
that girl who floats like a petal
pulls me toward her with a force
greater than the Earth’s mass.

In an instant,
like Newton’s apple,
I dropped with a thump
and rolled to her
without stopping.

Thump. Thump.
My dizzy heart kept swinging
between Heaven and Earth—
it was my first love.

--- Kim In-yook  with English translation by David Bowles.

This poem became very popular after it was featured in the Korean drama "Goblin" (Guardian: The Great and Lonely God). It describes love using simple physics ideas.

Oct 31, 2025

15 बेहतरीन शेर - 18 !!!

1. चला था ज़िक्र मेरी खामियों का महफ़िल में, जो लोग बहरे थे उनको सुनाई देने लगे - सलीम सिद्दीक़ी

2. रहता है सिर्फ एक ही कमरे में आदमी उसका गुरूर रहता है बाकी मकान में। - महशर अफरीदी

3. उसके फ़रोग़-ए-हुस्न से झमके है सब में नूर, शमा-ए-हरम हो या कि दिया सोमनाथ का - मीर

4. अब्र था कि ख़ुशबू था, कुछ ज़रूर था एक शख़्स, हाथ भी नहीं आया, पास भी रहा एक शख़्स - ज़फ़र गोरखपुरी

5. ज़िक्र जब होगा मोहब्बत में तबाही का कहीं, याद हम आएँगे दुनिया को हवालों की तरह - सुदर्शन फ़ाक़िर

6. जिन की यादें हैं अभी दिल में निशानी की तरह, वो हमें भूल गए एक कहानी की तरह -वाली आसी

7. काबिल तो हैं कामयाब़ भी हो जाएंगे, ये ज़ुगनू ही एक दिन, आफ़ताब हो ज़ाएंगे। - ~प्रह्लाद पाठक

8. हमने तमाम उम्र अकेले सफ़र किया, हमपर किसी खुदा की इनायत नहीं रही। - दुष्यंत कुमार

9. कम हैं सिपाही फ़ौज में सरदार बहुत हैं, यह जंग हार जाने के आसार बहुत हैं  - अज्ञात

10. इस सफ़र में नींद ऐसी खो गई,  हम न सोए रात थक कर सो गई - -राही मासूम रज़ा

11. तुम्हें नींद नहीं आती तो कोई और वजह होगी, अब हर ऐब के लिए कसूरवार इश्क़ तो नहीं..! - अज्ञात

12. बच्चों की फ़ीस उन की किताबें क़लम दवात, मेरी ग़रीब आँखों में स्कूल चुभ गया - मुनव्वर राना

13. अपने बच्चों को मैं बातों में लगा लेता हूं,  जब भी आवाज़ लगाता है खिलौने वाला -राशिद राही

14. आने वाले जाने वाले हर ज़माने के लिए आदमी मज़दूर है राहें बनाने के लिए -हफ़ीज़ जालंधरी

15. कुचल कुचल के न फ़ुटपाथ को चलो इतना, यहाँ पे रात को मज़दूर ख़्वाब देखते हैं - अहमद सलमान

Oct 27, 2025

आनेवाला ख़तरा

इस लज्जित और पराजित युग में
कहीं से ले आओ वह दिमाग़
जो ख़ुशामद आदतन नहीं करता

कहीं से ले आओ निर्धनता
जो अपने बदले में कुछ नहीं माँगती

और उसे एक बार आँख से आँख मिलाने दो
जल्दी कर डालो कि फलते-फूलनेवाले हैं लोग

औरतें पिएँगी आदमी खाएँगे—रमेश
एक दिन इसी तरह आएगा—रमेश
कि किसी की कोई राय न रह जाएगी—रमेश
क्रोध होगा पर विरोध न होगा
अर्ज़ियों के सिवाय—रमेश

ख़तरा होगा ख़तरे की घंटी होगी
और उसे बादशाह बजाएगा—रमेश

--- रघुवीर सहाय 
पुस्तक : प्रतिनिधि कविताएँ 

Oct 24, 2025

ENOUGH FOR ME

Enough for me to die on her earth

be buried in her

to melt and vanish into her soil

then sprout forth as a flower

played with by a child from my country.

Enough for me to remain

in my country’s embrace

to be in her close as a handful of dust

a sprig of grass

a flower.

--- Fadwa Tuqan

Oct 21, 2025

IF I MUST DIE

If I must die, 

you must live 

to tell my story 

to sell my things 

to buy a piece of cloth 

and some strings, 

(make it white with a long tail) 

so that a child, somewhere in Gaza 

while looking heaven in the eye 

awaiting his dad who left in a blaze— 

and bid no one farewell 

not even to his flesh 

not even to himself— 

sees the kite, my kite you made, flying up above 

and thinks for a moment an angel is there 

bringing back love 

If I must die 

let it bring hope 

let it be a tale.

--- Refaat Alareer

Oct 17, 2025

Krvava Bajka (A Bloody Fairytale)

Bilo je to u zemlji seljaka,
Na brdovitom Balkanu dalekome,
Mučeničkom smrću, tihog jeka,
Četa đaka umrla jednoga.

Iste godine svi su rođeni,
Školski dani im isti teku,
Na svečanosti svi vođeni,
Od istih bolesti pelcovani.

Pedeset i pet minuta pre,
Smrtnog časa, tih i malić,
Sedeli su u đačkoj klupi,
Rešavali zadatke složeni.

Koliko može putnik pješice,
Misli pune brojeva svima,
Sveske pune dvojki, petica,
I snova što stiskaju dno džepa.

Misli su pune istih tajni,
Rodoljubivih, ljubavnih sneva,
Svrha, nada i života san,
Mislili su da dugo će trčati.

Ceo red dečaka za ruke se drži,
Sa poslednjeg časa polako kreću,
Na streljanje mirno kao senke,
Smrt im ništa nije značila.

Drugovi jednog časa svi,
Uzneseni u večno boravište,
Tihim putem bez straha,
Njihova priča večno traje.


English Translation (by Sarah O’Keeffe)

It was a land of peasants' toil,
Amid the Balkans' hills and soil,
A troop of schoolchildren brave and small,
Died as martyrs, one and all.

Born the same year, with days aligned,
Their school hours closely intertwined,
Together marched to festivals bright,
Vaccinated, shared each plight.

Fifty-five minutes before fate's hand,
At desks they sat, a quiet band,
Solving tasks with youthful zest:
“How far can one walk on foot, the test...”

Their minds were full of numbers clear,
Notebooks held grades, some severe—
Countless A’s, and F's as well,
Dreams and secrets none could tell.

Patriotic hopes, loves held tight,
Hidden deep within pockets’ light,
They thought their race would long extend,
Beneath the blue sky without end.

Hand in hand, the boys did go,
From last school bell to death’s shadow,
Calmly, as if death were naught,
To eternal rest their souls were brought.

In one day, their lives did cease,
Yet in our hearts, their memories increase,
A tale of youth and courage true,
In a land where mountains view.


# About the Poem This powerful and heartbreaking poem by Desanka Maksimović commemorates the tragic massacre of schoolchildren and civilians perpetrated by Nazi forces in Kragujevac, Serbia, during World War II (October 1941).

Oct 14, 2025

Discover the Ancient Christian Prayer "Kandisa" in Aramaic

Kandisa Song Lyrics (Aramaic)

Kandisa Alahaye, Kandisa Esana

Aalam Balam Aalam, Aamenu Aamen

Sliha Mar Yose, Almaduba Kudisa

Aangen Dhanusa, Nehave Dukharana

Kandisa Alaha, Kandisa Esana,

Kandisa La Ma Yosa Isaraha Malem

Aalam Balam Aalam, Aamenu Aamen

Sliha Mar Yose, Almaduba Kudisa

Aangen Dhanusa, Nehave Dukharana

English Translation

Holy God, Holy Mighty One

Forever and ever, Amen Amen

Apostle St. Joseph, on your Holy Altar

Have mercy, remember us

Holy God, Holy Mighty One

Holy Immortal One, have mercy on us

Forever and ever, Amen Amen

Apostle St. Joseph, on your Holy Altar

Have mercy, remember us.

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Kandisa is an ancient prayer sung in Aramaic, the language closely related to what Jesus and his disciples spoke. The word "Kandisa" means "Holy," "Holy Praise," or "Divine Praise." It is still chanted today in the Syriac Orthodox Church and the Syro-Malabar Catholic Church, particularly by the Syrian Malabar Nasrani Christians of Kerala, India. These Christians trace their origins to Jewish Christian converts in the earliest days of Christianity and have preserved some of the ancient traditions and prayers like Kandisa.

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Indian Ocean band from India with their song "Kandisa," brought an ancient Aramaic prayer into a contemporary music setting, blending traditional spiritual chant with modern fusion music.

Oct 13, 2025

Sayat-Nova’s poetry featured in "The Color of Pomegranates,


Original Armenian

"Indzi sirun ashkharh, im gair, indzi dzyuner, im dushman,

Indzi mtatsel indzi gzavor, indzi yev voch indz uzum."

English translation:

"My tears are blood because of thee, my reason is o’erthrown.  

A young vine in the garden fresh thou art to me, my fair,  

Enshrined in greenness, and set round with roses everywhere.  

I, like the love-lorn nightingale, would hover over thee.  

A landscape of delight and love, my queen, thou art to me!"

--- The Color of Pomegranates" (Armenia) is inspired by Sayat-Nova’s verses, in the original text and translation in English.

Oct 8, 2025

गाज़ा का कुत्ता

वह जो कुर्सी पर बैठा
अख़बार पढ़ने का ढोंग कर रहा है
जासूस की तरह
वह दरअसल मृत्यु का फ़रिश्ता है ।

क्या शानदार डॉक्टरों जैसी बेदाग़ सफ़ेद पोशाक है उसकी
दवाओं की स्वच्छ गंध से भरी
मगर अभी जब उबासी लेकर अख़बार फड़फड़ाएगा,
जो दरअसल उसके पंख हैं
तो भयानक बदबू से भर जायेगा यह कमरा
और ताजा खून के गर्म छींटे
तुम्हारे चेहरे और बालों को भी लथपथ कर देंगे
हालांकि बैठा है वह समुद्रों के पार
और तुम जो उसे देख प् रहे हो

वह सिर्फ तकनीक है
ताकि तुम उसकी सतत उपस्तिथि को विस्मृत न कर सको

बालू पर चलते हैं अविश्वसनीय रफ़्तार से सरसराते हुए भारी-भरकम टैंक
घरों पर बुलडोजर
बस्तियों पर बम बरसते हैं
बच्चों पर गोलियां

एक कुत्ता भागा जा रहा है
धमाकों की आवाज़ के बीच
मुंह में किसी बच्चे की उखड़ी बची हुई भुजा दबाये
कान पूँछ हलके से दबे हुए
उसे किसी परिकल्पित
सुरक्षित ठिकाने की तलाश है
जहाँ वह इत्मीनान से
खा सके अपना शानदार भोज
वह ठिकाना उसे कभी मिलेगा नहीं ।

--- वीरेन डंगवाल

Oct 5, 2025

किसान की आवाज़ | The Voice of the Farmer - Poem in Jolly LLB 3 Movie

छप्पर टपकता रहा मेरा फिर भी

मैंने बारिश की दुआ की

मेरे दादा को परदादा से

पिता को दादा से

और मुझे पिता से जो विरासत मिली

वही सौंपना चाहता था मैं अपने बेटे को

देना चाहता था थोड़ी-सी ज़मीन

और एक मुट्ठी बीज कि

सबकी भूख मिटाई जा सके

इसलिए मैंने यकीन किया

उनकी हर एक बात पर

भाषण में कहे जज्बात पर

मैं मुग्ध होकर देखता रहा

आसमान की तरफ उठे उनके सर

और उन्होंने मेरे पैरों के नीचे से जमीन खींच ली

मुझे अन्नदाता होने का अभिमान था

यही अपराध था मेरा कि

मैं एक किसान था।

संदर्भ:कविता हिंदी के यथार्थवादी कवि गजानन माधव मुक्तिबोध से प्रेरित है। फिल्म "जॉली एलएलबी 3" में किसान की आत्मकथा की तरह सुनाई गई वह कविता हिंदी साहित्य के महान कवि गजानन माधव मुक्तिबोध की प्रेरणा से बनायी गई है। यह कविता किसान की भावनाओं और संघर्ष को गहरे और मार्मिक ढंग से प्रस्तुत करती है।

प्रश्नोत्तर तरह के जोगीरा (Jogira sa ra ra )

1. कय हाथ के धोती पेन्हा,  कय हाथ लपेटा?

कय पान का बीरा खाया,  कय बाप के बेटा?

सात हाथ का धोती पेन्हा, पाँच हाथ लपेटा ।

चार पान का बीड़ा खाया,  एक बाप का बेटा ।

जोगीरा सा रा रा रा।

2. कोन समय में धरती फाटल, कोन समय असमान,

कोन समय में सिया हरण भेल खोजै छथि भगवान

सतयुग में धरती फाटल, द्वापर में असमान

त्रेता युग में  सिया हरण भेल, खोजै छथि भगवान!
 
जोगीरा सा रा रा रा।

फगुआ रंग, तरंग आ उमंग आनय।

3.  कौन काठ के बनी खड़ौआ, कौन यार बनाया है?

कौन गुरु की सेवा कीन्हो, कौन खड़ौआ पाया?

चनन काठ के बनी खड़ौआ, बढ़यी यार बनाया हो।

हम गुरु की सेवा कीन्हा, हम खड़ौआ पाया है।

जोगी जी वाह वाह, जोगी जी सारा रा रा।


4.  किसके बेटा राजा रावण किसके बेटा बाली?

किसके बेटा हनुमान जी जे लंका जारी?

विसेश्रवा के राजा रावण बाणासुर का बाली।

पवन के बेटा हनुमान जी, ओहि लंका के जारी।

जोगी जी वाह वाह, जोगी जी सारा रा रा।


5. किसके मारे अर्जुन मर गए किसके मारे भीम?

किसके मारे बालि मर गये, कहाँ रहा सुग्रीव?

कृष्ण मारे आर्जुन मर गए कृष्ण के मारे भीम।

राम के मारे बालि मर गए लड़ता था सुग्रीव।

जोगी जी वाह वाह, जोगी जी सारा रा रा।

Oct 1, 2025

बनारस की गली / नज़ीर बनारसी

हर गाम पे हुशियार बनारस की गली में
फ़ितने भी हैं बेदार बनारस की गली में

ऐसा भी है बाज़ार बनारस की गली में
बिक जायें ख़रीदार बनारस की गली में

हुशियारी से रहना नहीं आता जिन्हें इस पार
हो जाते हैं उस पार बनारस की गली में

सड़कों पे दिखाओगे अगर अपनी रईसी
लुट जाओगे सरकार, बनारस की गली में

दूकान पे रूकिएगा तो फिर आपके पीछे
लग जायेंगे दो-चार बनारस की गली में

हैरत का यह आलम है कि हर देखने वाला
है ऩक्श ब दीवार बनारस की गली में

मिलता है निगाहों को सुकूँ हृदय को आराम
क्या प्रेम है क्या प्यार बनारस की गली में

हर सन्त के, साधू के, ऋषि और मुनि के
सपने हुए साकार बनारस की गली में

शंकर की जटाओं की तरह साया फ़िगन
साया करने वाला, सरपरस्ती छाँह देने वाला है

हर साया-ए-दीवार बनारस की गली में
गर स्वर्ग में जाना हो तो जी खोल के ख़रचो
मुक्ति का है व्योपार बनारस की गली में

Sep 29, 2025

निराला की कविता में संगीत

ताक कमसिनवारि,
ताक कम सिनवारि,
ताक कम सिन वारि,
सिनवारि सिनवारि।
ता ककमसि नवारि,
ताक कमसि नवारि,
ताक कमसिन वारि,
कमसिन कमसिनवारि।

इरावनि समक कात्,
इरावनि सम ककात्,
इराव निसम ककात्,
सम ककात् सिनवारि।


यह पोस्ट निराला के जीवन के अंतिम वर्षों में लिखा गया एक अनोखा और ध्वन्यात्मक गीत प्रस्तुत करता है, जो उनकी मृत्यु के बाद "सान्ध्य काकली" में संकलित हुआ। यह गीत पारंपरिक ध्रुपद गायन की शैली के समान शब्दों के उलटफेर और पुनरावृत्ति से भरा है, जिसे रामविलास शर्मा ने निराला की "क्लासिकी" संगीत रचना बताया है।

Sep 26, 2025

प्यार की गंगा बहे (Pyar Kee Ganga Bahe)

सुन सुन सुन मेरे नन्हे सुन,
सुन सुन सुन मेरे मुन्ने सुन,
प्यार की गंगा बहे, देश में एकता रहे।

सुन सुन सुन मेरी नन्ही सुन,
सुन सुन सुन मेरी मुन्नी सुन,
प्यार की गंगा बहे, देश में एकता रहे।

ख़त्म काली रात हो, रोशनी की बात हो,
दोस्ती की बात हो, ज़िन्दगी की बात हो।
बात हो इंसान की, बात हो हिन्दुस्तान की,
सारा भारत ये कहे –
प्यार की गंगा बहे, प्यार की गंगा बहे,
देश में एकता रहे।

अब ना दुश्मनी पाले, अब ना कोई घर जले,
अब नहीं उजड़े सुहाग, अब नहीं फैले ये आग।
अब ना हों बच्चे अनाथ, अब ना हो नफ़रत की घाट,
सारा भारत ये कहे –
प्यार की गंगा बहे, प्यार की गंगा बहे,
देश में एकता रहे।

सारे बच्चे बच्चियाँ, सारे बूढ़े और जवाँ,
यानि सब हिन्दुस्तान।
एक मंज़िल पर मिलें, एक साथ फिर चलें,
एक साथ फिर रहें, एक साथ फिर कहें।
एक साथ फिर कहें, फिर कहें –
प्यार की गंगा बहे, प्यार की गंगा बहे,
देश में एकता रहे,
देश में एकता रहे, सारा भारत ये कहे,
सारा भारत ये कहे –
देश में एकता रहे।  

गीत “प्यार की गंगा बहे” 1993 में निर्देशक सुभाष घई ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के आग्रह पर बनाया, जब बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद देश में साम्प्रदायिक तनाव था। गीतकार जावेद अख्तर और संगीतकार लक्ष्मीकांत–प्यारेलाल ने इसे रचा। इसमें बॉलीवुड सितारे सलमान खान, आमिर खान, अनिल कपूर, गोविंदा, जैकी श्रॉफ, ऋषि कपूर, नसीरुद्दीन शाह तथा दक्षिण और क्षेत्रीय सितारे रजनीकांत, मम्मूटी, चिरंजीवी, प्रसेंजीत, सचिन पिलगांवकर आदि शामिल हुए। सभी कलाकारों ने बिना पारिश्रमिक भाग लेकर अपने बच्चों को भी इसमें शामिल किया। गीत का उद्देश्य था देश में प्रेम, भाईचारा और एकता का संदेश फैलाना।

Sep 23, 2025

We, Made of Bone

These days, I refuse to let you see me
the way I see myself.

I wake up in the morning not knowing
whether I will make it through the day;

reminding myself of the small, small things
I’ve forgotten to marvel in;

these trees, blood-free and bone-dry
have come to rescue me more than once,

but my saving often requires hiding
yet they stand so tall, so slim and gluttonous

refusing to contain me; even baobab trees
will split open at my command, and

carve out fleshless wombs to welcome me.
I must fall out of love of the world

without me in it, but my loves have
long gone, and left me in a foreign land

where once I was made of bone,
now water, now nothing.

--- Mahtem Shiferraw

Sep 17, 2025

I am not done yet

I am not done yet
as possible as yeast
as imminent as bread
a collection of safe habits
a collection of cares
less certain than i seem
more certain than i was
a changed changer
i continue to continue
what i have been
most of my lives is
where i’m going

--- Lucille Clifton

Sep 7, 2025

Alif Laila - Title Song Lyrics - Doordarshan

अलिफ लैला ओ ओ…

अलिफ लैला, अलिफ लैला, अलिफ लैला ओ ओ

अलिफ लैला, अलिफ लैला, अलिफ लैला

हर शब नई कहानी

दिलचस्प है बयानी

सदियाँ गुज़र गयी है

लेकिन न हो पुरानी

परियों को जीत लाये

जीनो को भी हराए

इंसान में वो ताकत

सब पे करे हुकूमत

अलिफ लैला ओ ओ ओ….

Sep 5, 2025

Additional Sessions Judge Amitabh Rawat - Poem

“Babu pleading for his bail;State opposing tooth and nail.
Summers bygone, winters have arrived;
But crime you did, and Rahul cried.
I am not the one, I am not the one;
Too grave the charge, don’t pretend.
Whom did I attack, where is he;
Oh! That we know, in the trial we will see.
You say I have said & I deny from the first blush;
Rahul may be gone yet Satish said.
Didn’t we say; don’t rush;
Let me go, let me go, even Imran is on bail.
Even then, even then; it wouldn’t be a smooth sail.
Stop! Stop! Stop! Stop;
I have heard, heard a lot.
Mind is clear, with claims tall;
Its my time to take a call.
Babu has a sordid past;
proof is scant, which may not last.
His omnipotence can’t be assumed;
Peril to vanished Rahul, is legally fumed.”
Take your freedom from the cage you are in;
Till the trial is over, the state is reigned in.
The State proclaims; to have the cake and eat it too; The Court comes calling ;
before the cake is eaten, bake it too.

--- Judge Amitabh Rawat

Aug 28, 2025

Baje sargam har taraf se goonj bankar...

बजे सरगम हर तरफ से, 
गूँज बनकर देश राग, देश राग। 
ताल कदमों पे जागे जाय, 
लब पे जागे गीत ऐसा, 
गूँजे बनकर देश राग।

इस गीत का मतलब है कि देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की धुन हर तरफ बज रही है, जो सभी को जोड़ती है और आगे बढ़ने की ताकत देती है। इसमें भारत के मशहूर गायक, वादक और नर्तकी देश की मुख्य परंपरागत कलाओं का सुंदर प्रदर्शन करते हैं। राग जो कि शास्त्रीय संगीत की आत्मा है, के साथ तबला, संतूर, सरोद, सितार, कथक, भरतनाट्यम, मणिपुरी और ओड़िसी जैसे कई नृत्य और संगीत शैलियाँ इस वीडियो में एक ही संगति में भारत की एकता और खूबसूरती को दर्शाती हैं।


   

Aug 26, 2025

WEDNESDAY

A man wailing is not a dancing bear —Aimé Césaire

There’s death in the eyes of this newborn.
I heard the baby complain about a treacherous defeat,
called it the same old catastrophe.

A storm in his ear says it’s raging for silence.
Thunder erupts when he’s shushed.
What a worsened scenario. He skipped ahead.

What do you do when your destiny is predetermined?
Life in this hospital laughs at us.
Long is the wait. Wild is the wind.

I ask if there’s a wedding going on.
The nurse complained of the clouds.
If I were a stupid flower, 
I’d wither under the rain.

They asked her, What’s wrong with the flower?
not What’s wrong with the rain?

--- Mohammed El-Kurd

Aug 21, 2025

ऐ उम्र..! कुछ कहा मैंने

ऐ उम्र..!

कुछ कहा मैंने,
पर शायद तूने सुना नहीं..
तू छीन सकती है बचपन मेरा,
पर बचपना नहीं..!!

हर बात का कोई जवाब नहीं होता
हर इश्क का नाम खराब नहीं होता…
यूं तो झूम लेते है नशे में पीनेवाले
मगर हर नशे का नाम शराब नहीं होता…

खामोश चेहरे पर हजारों पहरे होते हैं
हंसती आँखों में भी जख्म गहरे होते हैं
जिनसे अक्सर रूठ जाते हैं हम,
असल में उनसे ही रिश्ते गहरे होते हैं…

किसी ने खुदा से दुआ मांगी
दुआ में अपनी मौत मांगी,
खुदा ने कहा, मौत तो तुझे दे दूँ मगर,
उसे क्या कहूं जिसने तेरी जिंदगी की दुआ मांगी…

हर इन्सान का दिल बुरा नहीं होता
हर एक इन्सान बुरा नहीं होता
बुझ जाते है दीये कभी तेल की कमी से…
हर बार कुसूर हवा का नहीं होता !!!

Aug 15, 2025

ये दाढ़ियाँ ये तिलक धारियाँ नहीं चलतीं

ये दाढ़ियाँ ये तिलक धारियाँ नहीं चलतीं
हमारे अहद में मक्कारियाँ नहीं चलतीं
 
क़बीले वालों के दिल जोड़िए मिरे सरदार
सरों को काट के सरदारियाँ नहीं चलतीं
 
बुरा न मान अगर यार कुछ बुरा कह दे
दिलों के खेल में ख़ुद्दारियाँ नहीं चलतीं
 
छलक छलक पड़ीं आँखों की गागरें अक्सर
सँभल सँभल के ये पनहारियाँ नहीं चलतीं
 
जनाब-ए-'कैफ़' ये दिल्ली है 'मीर' ओ 'ग़ालिब' की
यहाँ किसी की तरफ़-दारियाँ नहीं चलतीं

--- कैफ़ भोपाली

Aug 9, 2025

रक्षाबंधन विशेष: 'मैं अपने हाथ से प्यारे के बाँधूँ प्यार की राखी'

चली आती है अब तो हर कहीं बाज़ार की राखी
सुनहरी सब्ज़ रेशम ज़र्द और गुलनार की राखी
बनी है गो कि नादिर ख़ूब हर सरदार की राखी
सलोनों में अजब रंगीं है उस दिलदार की राखी
न पहुँचे एक गुल को यार जिस गुलज़ार की राखी

अयाँ है अब तो राखी भी चमन भी गुल भी शबनम भी
झमक जाता है मोती और झलक जाता है रेशम भी
तमाशा है अहा हा-हा ग़नीमत है ये आलम भी
उठाना हाथ प्यारे वाह-वा टुक देख लें हम भी
तुम्हारी मोतियों की और ज़री के तार की राखी

मची है हर तरफ़ क्या क्या सलोनों की बहार अब तो
हर इक गुल-रू फिरे है राखी बाँधे हाथ में ख़ुश हो
हवस जो दिल में गुज़रे है कहूँ क्या आह मैं तुम को
यही आता है जी में बन के बाम्हन, आज तो यारो
मैं अपने हाथ से प्यारे के बाँधूँ प्यार की राखी

हुई है ज़ेब-ओ-ज़ीनत और ख़ूबाँ को तो राखी से
व-लेकिन तुम से ऐ जाँ और कुछ राखी के गुल फूले
दिवानी बुलबुलें हों देख गुल चुनने लगीं तिनके
तुम्हारे हाथ ने मेहंदी ने अंगुश्तों ने नाख़ुन ने
गुलिस्ताँ की चमन की बाग़ की गुलज़ार की राखी

अदा से हाथ उठते हैं गुल-ए-राखी जो हिलते हैं
कलेजे देखने वालों के क्या क्या आह छिलते हैं
कहाँ नाज़ुक ये पहुँचे और कहाँ ये रंग मिलते हैं
चमन में शाख़ पर कब इस तरह के फूल खिलते हैं
जो कुछ ख़ूबी में है उस शोख़-ए-गुल-रुख़्सार की राखी

फिरें हैं राखियाँ बाँधे जो हर दम हुस्न के तारे
तो उन की राखियों को देख ऐ जाँ चाव के मारे
पहन ज़ुन्नार और क़श्क़ा लगा माथे उपर बारे
'नज़ीर' आया है बाम्हन बन के राखी बाँधने प्यारे
बँधा लो उस से तुम हँस कर अब इस त्यौहार की राखी

--- नज़ीर अकबराबादी

Aug 4, 2025

उस शहर में मत जाओ

उस शहर में मत जाओ
जहाँ तुम्हारा बचपन गुज़रा
अब वो वैसा नहीं मिलेगा
जिस घर में तुम किराएदार थे
वहाँ कोई और होगा
तुम उजबक की तरह
खपरैल वाले उस घर के दरवाजे पर खड़े होगे और
कोई तुम्हें पहचान नहीं पाएगा !

— विनय सौरभ

Aug 1, 2025

स्थानीयता के संघर्ष

आसान है करना प्रधानमंत्री की आलोचना
मुख्यमंत्री की करना उससे थोड़ा मुश्किल
विधायक की आलोचना में ख़तरा ज़रूर है
लेकिन ग्राम प्रधान के मामले में तो पिटाई होना तय है।

अमेज़न के वर्षा वनों की चिंता करना कूल है
हिमालय के ग्लेशियरों पर बहस खड़ी करना
थोड़ा मेहनत का काम
बड़े पावर प्लांट का विरोध करना
एक्टिविज्म तो है जिसमें पैसे भी बन सकते हैं
लेकिन पास की नदी से रेत-बजरी भरते हुए
ट्रैक्टर की शिकायत जानलेवा है।

स्थानीयता के सारे संघर्ष ख़तरनाक हैं
भले ही वे कविता में हों या जीवन में।

--- प्रदीप सैनी

Jul 25, 2025

15 बेहतरीन शेर - 17 !!!

 1. ये कैसी हवा-ए-तरक्की चली है , दिए तो दिए, दिल बुझे जा रहे हैं  -  ख़ुमार बाराबंकवी

2. ये इनायतें ग़ज़ब की ये बला की मेहरबानी,  मिरी ख़ैरियत भी पूछी किसी और की ज़बानी - नज़ीर बनारसी

3. हवाएँ ज़ोर कितना ही लगाएँ आँधियाँ बन कर, मगर जो घिर के आता है वो बादल छा ही जाता है -  जोश मलीहाबादी

4. खड़ा हूँ आज भी रोटी के चार हर्फ़ लिए, सवाल ये है किताबों ने क्या दिया मुझ को - नज़ीर बाकरी

5. मोहब्बत क्या बला है चैन लेना ही भुला दे है, ज़रा भी आँख झपके है तो बेताबी जगा दे है - कलीम आजिज़

6. सुब्ह हो जाएगी हाथ आ न सकेगा महताब, आप अगर ख़्वाब में चलते हैं तो चलते रहिए - मलिकज़ादा मंज़ूर अहमद

7. मैं तो इस वास्ते चुप हूँ कि तमाशा न बने, तू समझता है मुझे तुझ से गिला कुछ भी नहीं  - अख़्तर शुमार

8. हसरत पे उस मुसाफ़िर-ए-बे-कस की रोइए, जो थक गया हो बैठ के मंज़िल के सामने...!!! - मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी

9. जाने ये कैसा ज़हर दिलों में उतर गया, परछाईं ज़िंदा रह गई, इंसान मर गया...!!!  - उम्मीद फ़ाज़ली

10.  अपने माज़ी से निकलना भी हुनर होता है, घर को छोड़ आइए पीछे, तो सफ़र होता है...!!! - वसीम बरेलवी

11.  किसे अपना बनाएँ कोई इस क़ाबिल नहीं मिलता, यहाँ पत्थर बहुत मिलते हैं लेकिन दिल नहीं मिलता - मख़मूर देहलवी

12.  चारागर यूँ तो बहुत हैं मगर ऐ जान-ए-'फ़राज़', जुज़ तेरे और कोई ज़ख़्म न जाने मेरे - अहमद फ़राज़

13. दिल गया, जान गई, यार के पैमॉं के साथ, घर से घर वाले भी रूख़सत हुए मेहमान के साथ 

14. उफ़ तलक करते नहीं ज़िल्ल-ए-इलाही के ख़िलाफ़, आप को दरबार की आदत है, दरबारी हैं आप - ~ अब्बास क़मर

15. मस्जिद तो बना दी शब भर में, ईमाँ की हरारत वालों ने, मन अपना पुराना पापी है, बरसों में नमाज़ी बन न सका। -अल्लामा इक़बाल

Jul 20, 2025

सेतुम् बन्ध्य सेतुम् बन्ध्य सेतुम् बन्ध्य रे (Ram Setu Construction Song from Ramayana: The Legend of Prince Rama)

जय जय जय जय......
सेतुम् बन्ध्य सेतुम् बन्ध्य सेतुम् बन्ध्य रे
श्री राम सेतुम् बन्ध्य सेतुम् बन्ध्य सेतुम् बन्ध्य रे ।
सागार उरु निर्धरत कृत्व पादैहः ताडय रे
सागार उरु निर्धरत कृत्व पादैहः ताडय रे ।
सेतुम् बन्ध्य सेतुम् बन्ध्य सेतुम् बन्ध्य रे
श्री राम सेतुम् बन्ध्य सेतुम् बन्ध्य सेतुम् बन्ध्य रे ।
शैलम् भञ्जय, शिलानु खण्डय, शैलम् भञ्जय शिलानु खण्डय
विक्षलयति मुलधातु पाटय विक्षलयति मुलधातु पाटय ।
सागर तेजोहरणम् चित्ते सततम् धारय रे
सागर तेजोहरणम् चित्ते सततम् धारय रे ।
रघुपति चरण स्पर्श वरदानम्, भवति काष्ठवत् दृढपाषाणम्
रघुपति चरण स्पर्श वरदानम्, भवति काष्ठवत् दृढपाषाणम् ।
स्पर्श तुनीत शिला खण्डानपि जलधिजले धारयरे
सेतुम् बन्ध्य सेतुम् बन्ध्य सेतुम् बन्ध्य रे
श्री राम सेतुम् बन्ध्य सेतुम् बन्ध्य सेतुम् बन्ध्य रे ।
शिला भवति खलु, सन्तरणीय, शिला भवति खलु सन्तरणीय 
राम कृपा चिर सन्स्मरणीय राम कृपा चिर सन्स्मरणीय ।
जय जय जय श्री राम जयति जय मन्त्रम् पाठय रे
जय जय जय श्री राम जयति जय मन्त्रम् पाठय रे ।
यत्र एकत तत्र सबलता भक्तिः यत्र तत्र सफलता
यत्र एकत तत्र सबलता भक्तिः यत्र तत्र सफलता
रामनाम अङ्किता धरित्रिम् धर्णसा सञ्योजय ।
सेतुम् बन्ध्य सेतुम् बन्ध्य सेतुम् बन्ध्य रे
सागार उरु निर्धारत कृत्व पादैहः ताडय रे
सेतुम् बन्ध्य सेतुम् बन्ध्य सेतुम् बन्ध्य रे
श्री राम सेतुम् बन्ध्य सेतुम् बन्ध्य सेतुम् बन्ध्य रे ॥

Translation (English): Lets make a bridge! 
In the name of Sri Rama lets make a bridge! 
(Lets make a bridge) 
To cross the wide ocean on foot and settle on the other side! 
(Lets make a bridge) 
By smashing mountains and breaking rocks, 
without getting washed away or falling into the ocean. 
Let's keep the intention in mind not to take away the ocean's glory by doing so. 
With the blessings from the feet of Raghupati Sri Rama, 
pieces of wood and stone will stay firm. 
With his touch, rocks and trunks will stay firm in the ocean. 
Lets make a bridge! In the name of Sri 
Rama lets make a bridge! Now the rocks are firm are they not? 
Then lets cross the ocean! With the grace of Sri Rama, 
they will forever be remembered in history. 
Lets recite the mantra - "Victory to Sri Rama". 
Where there is unity there is strength, 
where there is devotion (to work) there is success. 
With the name of Sri Rama marked (on all the rocks), 
they will be supported and remain firm together. 
Lets make a bridge! In the name of Sri Rama 
Lets make a bridge to cross the wide ocean on foot and settle on the other side!

 

Jul 15, 2025

Listen! Faiz,

Listen! Faiz,
Do you know?
The difference
between your and my wait
Is only
A fixed time
Just a few more days
You knew that
Like the gust of breeze
Speechless cloud does not tell
When I ask—
“How many more seasons like this?”
Who knows how many more seasons?

The walls around me,
These four walls,
Have been standing quietly,
Raising their heads high,
Bearing winds and storms, and the scorching sun.
Why do they not speak?
No! Maybe, they do speak.
When sand and plaster fall,
They surely say something.
But! The owner repairs them off
silencing their words
One day,
Finally, the weary wall collapses,
And at the same place,
Another silent wall is built.

On the pitch-black night yesterday,
There was a knock on the doors of prison
Of the innocent breezes
Of cries of our dear ones
Even the lightning
Was screaming for help
Asking for our freedom
Even the well-shaped branches
Openly joined in the grief
After failed attempts
And losing control
The delicate tears of rain
Started to pour
Struck against the earth’s crust,
And the rhythm of the drops
Turned it into
A commotion of pleas.
But—
The deaf snakes
Kept dancing
With their poisonous hoods
Laying their web of traps.
And—
The oppressed
Stood with their hands raised
On that pitch-black night…

--- Gulfisha Fatima

Jul 9, 2025

शासन सचमुच बंदरों के हाथ में है!

एक दिन बंदरों ने हथिया ली सत्ता
उंगलियों में सोने की अंगूठी ठूंस ली
सफ़ेद कलफ़दार क़मीज़ें पहनीं
सुगंधित हवाना सिगार का कश लगाया
अपने पांव में डाले चमाचम काले जूते!

हमें पता ही न चला, क्योंकि हम दूसरे कामों में व्यस्त थे
कोई अरस्तू पढ़ता रहा, तो कोई आकंठ प्यार में डूबा हुआ था
शासकों के भाषण ऊटपटांग होने लगे
गपड़-सपड़, लेकिन हमने कभी इन्हें ध्यान से सुना ही नहीं
हमें संगीत ज़्यादा पसंद था
युद्ध अधिक वहशी होने लगे
जेलख़ाने पहले से और गंदे हो गये
तब जाकर लगा कि शासन सचमुच बंदरों के हाथ में है!

- आदम ज़गायेव्स्की 

Jul 3, 2025

पत्थर के ख़ुदा पत्थर के सनम पत्थर के ही इंसाँ पाए हैं

पत्थर के ख़ुदा पत्थर के सनम पत्थर के ही इंसाँ पाए हैं
तुम शहर-ए-मोहब्बत कहते हो हम जान बचा कर आए हैं

बुत-ख़ाना समझते हो जिस को पूछो न वहाँ क्या हालत है
हम लोग वहीं से लौटे हैं बस शुक्र करो लौट आए हैं

हम सोच रहे हैं मुद्दत से अब उम्र गुज़ारें भी तो कहाँ
सहरा में ख़ुशी के फूल नहीं शहरों में ग़मों के साए हैं

होंटों पे तबस्सुम हल्का सा आँखों में नमी सी है 'फ़ाकिर'
हम अहल-ए-मोहब्बत पर अक्सर ऐसे भी ज़माने आए हैं

--- सुदर्शन फ़ाकिर